एक एक चीज का गिन गिन कर हिसाब लेने वाली वो लड़ाकी बन जाती है ढाल अपने भाई की। मां और पापा ने भाई को किस बात पर बिना वजह डांटा यह बताने वाली भी […]
एक एक चीज का गिन गिन कर हिसाब लेने वाली वो लड़ाकी बन जाती है ढाल अपने भाई की। मां और पापा ने भाई को किस बात पर बिना वजह डांटा यह बताने वाली भी […]
जो मिला जीवन के सफ़र में उसे मेरी जरूरत ना थी जिन्हें जरुरत है मेरी उनकी तलाश में है दिल
बिना धागे की सुई है ज़िन्दगी कोई कहता है अच्छी है ज़िन्दगी किसी को सिखाती है किसी को बस चुभती जाती है ।
पेश है आपकी खिदमत में:- गज़ल आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा तुझे भूलूँ या कैद दिल में करूँ ———————— दिल लगा लूँ या जान छुड़ा लूँ तुमसे आज कल सोंचता बहुत है […]
चलो सब मिलकर जीत दिलाएं कोरोना को हरायें पाँच अप्रैल को सब देशवासी घर में दीप जलाएं दीप की ज्योति से अपना घर सँसार सजाएं चलो सब मिलकर जीत दिलाएँ थू है उनपर जो जमाती […]
वाह भाई मजहब के ठेकेदारों क्या खूबी फर्ज निभाया है दुश्मन लगी है मानव जाति और काल को मित्र बनाया है कभी उनकी फिक्र भी कर लेता जिसे तेरी फिक्र सताती है कहीं कोई खड़ा […]
कर ले अखंड प्रतिज्ञा तू कर खंड खंड उस दहशत को जिससे यह विश्व है कांप रहा हौसलो से कर तू परस्त उसको तू दूर भ्रम का भूत भगा दहशत की नहीं जरूरत है असंयम […]
एक फूल खिला है प्यार का देखो आज काँटों के बीच। मुश्किल लगता है पाना देख रहा हूँ अँखियाँ मीच।। घूर घूर के देख रही है आखिर क्यों दुनिया सारी। ‘विनयचंद ‘परवाह करे क्यों जो […]
आस्था के कमल ——————– प्रेम और विश्वास के दरिया में ही खिलते हैं आस्था के कमल। तुम खरे उतरना इस विश्वास पर ना मुरझा पाए यह कमल स्मरण रहे। जीवन, यौवन सौंप दिया है तुम्हे […]
चैत्र नव रात्र के अवसर पर रामनवमी मे श्रीराम भजन हिन्दी राम भजन 9 – श्रीराम कहाते है | श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है | प्रभु आप मर्यादा पुर्षोतम श्रीराम कहाते है […]
चैत्र नव रात्र के अवसर पर देवी भजन हिन्दी देबी गीत 8 – शरण तुम्हारे | लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे | भक्त पड़ा है आज माता चरन तुम्हारे | निर्मल भाव माता […]
यह प्रकृति तू रोष दिखाती है पर क्या करेगी उस ममता का जो तुझसे खुद लड़ जाती है तूने सोचा दुख दूं उन सबको जो दिन-प्रतिदिन तेरा नाश करें पर हे ममता की मूरत तू […]
रोज-रोज के झंझट में पिस्ता था तो क्या खुश था तू दो घड़ी अपनों का साथ मिला अब कर अनुभव सुख किसने है यह रोज कि भागा दौड़ी में या कुछ पल की उस जोड़ी […]
पुत्र मोह में लिपटे प्राण-पखेरू भी उड़ चले आज बलि वेदी पर राजा दशरथ भी चढ़ गए आज कैसी विपदा आन पड़ी अवध नगरी पर जो फली- फूली थी उपवन सी अकस्मात ही उजड़ गई […]
अल्फ़ाज यूँ ही गज़ल नहीं बना करते, दिल के छाले भी लफ्जों में बयां करने पड़ते हैं।
थोड़ा ठहर जा ज़िन्दगी थक गई हूँ बहुत ज़्यादा रफ़्तार अच्छी नहीं होती
बेहया रात से गले मिल कर आई है सुबह मेरी कि धूप छांव का आलम लाई है सुबह मेरी मेरी गज़ल भी थी जो लिखी थी एक दिन मैने उसकी इबादत में उस गज़ल के […]
कुछ तो खेल है हाथ की लकीरों का हाथ ना आया लगाया हाथ जिसमें न पाने की तमन्ना थी मिला हरदम वही मुझको जुस्तजू जिसकी थी हमने उसी से हाथ धो बैठे जिंदगी बन गई […]
बेबस होकर वो लौटे हैं श्रमवीर कहलाने वाले हैं जिस घर में आराम से लेटे हो उसकी नींव बनाने वाले हैं😢 घर मंदिर और कुआं पोखर निज श्रम से उसने सींचे हैं उसकी मेहनत का […]
ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे मौसम के बदलते मिजाज़ से फसलें जैसे क्या बोया और क्या पाया सपनों और हक़ीकत में कोई वास्ता न हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे कल तक जो हरी […]
मेरे जाने के बाद ——————– बिखेर दिया है खुद को इस कदर मैंने ….. कि …. मैं ना मिल पाऊं गर तुम्हे … तो ढूंढ लेना मुझे …. मेरे गीतों और रचनाओं में। तुम पर […]
समुंदर पार कर दो ए केवट प्रिय मेरे पार कर दो गंगा प्रिय लक्ष्मण भ्रात है साथ और है जनक दुलारी साथ जाना है चित्रकूट मुझको करा दो गंगा पार हे केवट करा दो गंगा […]
आदाब सभी को मौत के डर ने ही ज़िंदा रक्खा है ख़ुदाया फिर भी ये इंसाँ इसी से डरता है हमारी साँस भी चलती उसी की मर्ज़ी से ही जहाँ में पत्ता भी उसकी रज़ा […]
हर सदी इश्क की ——————— समुद्र पार रेतीले मैदान में उगते गुलाब, नन्ही कोपलों से निकलते हरे पत्र, और नमकीन हवा में घुलती मिठास अनुराग की। मानसिक विरोधाभास के बीच पनपता स्नेह उम्र की सीमा […]
सब था मर्यादित रामचरित मानस में पर उपेक्षित उर्मिला की वेदना पर ध्यान किसी ने नहीं दिया जिस सम्मान की वो भागीदार थी वह सम्मान किसी ने नहीं दिया
गजल- कोरोना कहर माना की कोरोना कहर बड़ा मगर आया नहीं | सारा जहाँ दहसत मे हिन्द मगर छाया नही | फानूस बनके करता हिफाजत वजीरे आलम | ठहर गया वो लोकडाउन से कुछ कर […]
कविता – भारत जानता है | कोरोना हो या सेना दुशमन लड़ना भारत जनता है | एटम हो वाइरस दुशमन लड़ना भारत जानता है | प्रधान मंत्री मोदी जी ने जो कहा वो करेंगे हम […]
कोरोना बुरा है पास बुलाये कोई पास जाना बुरा है | बुलाकर दे दे तुमको कोरोना बुरा है | पास जाना अगर हाथ न मिलाना मगर गले मिल गये लग जाये कोरोना बुरा है| मिलना […]
आज स्कूल नही जाना माँ आज तो छुट्टी मना लेने दो कल सर दर्द का बहाना काम न आया आज पेट दर्द आजमा लेने दो घर के जैसे मस्ती कहाँ स्कूलों में बसती इसकी सच्चाई […]
इस हसीन शाम में , उमर की ढलान में हाथ थामे चलने को कोई मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है कल क्या हो नहीं जानती , पर इस मंजिल तक आते आते […]
अहम तोड़ दो दिल फिर से मिले धड़कनें तेज हुईं आंखों से बरसात हुई ऐसा लगा जैसे फिर से पहली मुलाकात हुई
एक जुनून ही हमें आगे ले जाएगा आगे की कहानी भी वही बताएगा मायूसी जाएगी नई सुबह फिर आएगी सन्नाटा जाएगा कल आज और आज कल बन जाएगा सन्नाटा चीर कर फिर से विश्व मुस्कुराएगा […]
हर फ़ैसला खुद करने की आदत थी उन्हें, बिछड़ने का फैसला भी अकेले कर लिया।
जीवन संदेश कल किसने देखा कल आये या ना आये आज की तू परवाह कर ले कही यह भी चला न जाये देख दुनिया की हालत अब तो तू संभल जा कहे रही तुझसे जो […]
तुम जीत हो संगीत हो मेरा मीत हो मेरी ही प्रीत हो सदियों से किया जिससे इकरार तुम वही महोब्बत की रीत हो दिन की शुरुआत से रात की एहसास हो दोपहर की धुप और […]
अकेली रातो से बाते कैसे करू बिन मिले उनसे मुलाकातें कैसे करू लोग कहते है दिन तो गुजर जाता है, राते नहीं निकलती कौन कहे इनको, अपने अकेलेपन से मोहोब्बतें कैसे करू वो हवा बनकर […]
हाय कोरोना हम खबरदार हो गए। लो अपने हीं घर में तड़ीपार हो गए।।
इश्क की गोद में जा बैठी जो कातिल था उसी को मीत बना बैठी। बुझ गई थी बहुत पहले ही क्यूँ आज दिल की आग जला बैठी। वो ख्व़ाब था किसी की नींदों का क्यूँ […]
कुछ दिनों से बदल सी गई हूँ पहले जीवन में कविता ढूंढ़ती थी अब कविता में जीवन ढूंढ़ती हूँ।
घर के बाहर मत जाना कोरोना मिल जाएगा। घर के भीतर बन्द रहो जीवन सोना मिल जाएगा।।
इस तरह सतर्क पहले कभी ना थे लगी जब से ठोकर हर कदम सम्भाल कर रखती हूँ
कोई सोचता है की आज पनीर कल गोभी की सब्जी खाऊंगा कोई सोचता है की कल परिवार का पालन कैसे करूँ कोई कहता है हैंड सैनिटाइजर इस्तेमाल करना है और किसी को साफ पानी और […]
कुछ रिश्ते साथ होने के अहसास से बनते है चाहे वोह इंसान कितना दूर ही हो
विपदा की घड़ी जब आती है हमें व्यवस्थित होना सिखाती है एकता का महत्व समझाती है अपने पराए में भेद बताती है धैर्य परिश्रम सहयोग समन्वय और अनुशासन का पाठ अवश्य पढ़ा जाती है विपदा […]
जो लोग आप की ताकत है जीवन के भाग्दौर के चलते समय नहीं दे पाते है अब घर बंद के चलतेी उनके साथ जीने का मौका दे रही है इस डर के माहौल में बस […]
एक पन्ना और जुड़ गया जीवन के अध्याय में चिरंजीव चिरस्थायी का जो आशीर्वाद दिया था माँ ने आज धुंधला प्रतीत हो रहा है अकस्मात एक प्रारब्ध बेला पर
एक पन्ना और जुड़ गया जीवन के अध्याय में चिरंजीव चिरस्थायी का जो आशीर्वाद दिया था माँ ने आज धुंधला प्रतीत हो रहा है अकस्मात एक प्रारब्ध बेला पर विचलित कर देने वाली घटना स्मरण […]
एक दौर वो भी गुजरा है! जब हम कागज और कलम लेकर सोते थे। यादों में पल-पल भीगा करती थीं पलकें , अभिव्यक्ति के शब्द सुनहरे होते थे। ना दूर कभी जाने की कसमें खाई […]
बाहर जाकर कोरोना का सौगात नहीं तुम लाना। बेशक आधा पेट हीं खाकर घर में तुम सो जाना।। खाना आधा पेट से प्राण चले नहीं जाऐंगे तेरे। अपना और अपने की जान सुरक्षित रहेंगे तेरे।।
रोग कोरोना से हुई मानवता बेचैन जीवन लगता रुष्ट है, बैरी दिखता चैन, बैरी दिखता चैन, मौत का नग्न – नृत्य है मौन-विधाता बता,किया क्यों क्रूर कृत्य है? रोग शमित होगा तभी, रहें भीड़ से […]
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