ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! मंज़िल-द़र-मंज़िल सफ़र करता है ठिकाना नहीं कोई इसका, ये सड़कों पर बसर करता है
ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! मंज़िल-द़र-मंज़िल सफ़र करता है ठिकाना नहीं कोई इसका, ये सड़कों पर बसर करता है
बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं। दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की […]
चाँद और सितारों की चाँदनी को भूलाकर ढूंढते हैं, चलो आज सब जुगनू की रौशनी के सहारे ढूंढते हैं, हुए बहुत दिन गहरे समन्दर की बाँहों में झूलते, चलो आज मिलकर हम सब उथले किनारे […]
राणा प्रताप का रक्त और हम कुंभा की कुर्बानी है हम है गीता की कृष्ण ध्वनि निर्मल गंगाजल पानी है उबल रहा है बीर शिवा का शोणित निज भुजदंण्डो मे हम हाड़ी की बलिदान कथा […]
उन्हीं की अदालत है, उन्हीं के वकील सारे, अब बेगुनाही के सबूत मेरे सब उन्हीं के हाथ हमारे।। – राही (अनजाना)
जिस्म में शामिल रूह का आज खुलासा देखिये, खुद ही इस भीड़ में घुस कर आप तमाशा देखिये, बदल सकता है तस्वीर जो इस सारे ज़माने की, उसी युवा के चेहरे पे आई आज हताशा […]
छोटे-छोटे से दिखते हैं बड़े मासूम लगते हैं, मेरे दिल के जो टुकड़े हैं बड़े बखूब दिखते हैं, बमुश्किल जोड़ कर रखता हूँ मैं इनको अमानत हैं, मेरे महबूब की आहट में ये तो फानूस […]
दिल को धड़कन की आवाज़ जब सुनाई नहीं देती, आँखों को रौशनी की जब कोई रात दिखाई नहीं देती, उलझे न रहें गर रिश्ते पैसों की चरखी में लिपट कर, तो अच्छे व्यक्तित्व को ये […]
निकल कर ख़्वाबों से बाहर मेरे ख्वाब आना चाहते हैं, हकीकत के आईने में मानो चेहरा आप लाना चाहते हैं, रहे हों जो अँधेरे की बाहों में कैद बेसुध मुसलसल, आज रौशनी के समन्दर में […]
रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए वो जिंदगी से मेरी, मानो बिन मौसम की बरसात झट से गिरकर तेज़ धूप सी खिला जाती हो, कम्बख़त मुझे थोड़ा तो भींग लेने देते कुछ देर उसके जाने […]
✋✋✋✋✋✋माँ का आशीर्वाद✋✋✋✋✋✋✋ जिंदगी का वो फसाँना आज भी है याद मुझको माँ की वो लोरी का गाना आज भी है याद मुझको जिंदगी के काफिले मे ताजशाही कम नही है माँ तुम्हारी ही दुआ […]
कलाई पर मौली और माथे पर रोली लगाया करती हैं, बहनें छोटी हैं मेरी मगर बातें बड़ी ही बनाया करती हैं, चुप रहती हैं कभी मुख से कुछ भी माँगा नहीं करती हैं, के बांधकर […]
मस्त हवाओं के हवाले से मैं तेरा पैगाम लेता हूँ, जब दिल चाहे मेरा तुझसे मैं तेरा सलाम लेता हूँ, बसा लेता हूँ तेरा चेहरा मेरी आँखों में कुछ इस तरह, के फिर इन आँखों […]
आज गिर गई बूँदें हज़ार, क़ुदरत ने बड़ा शोर मचाया है, समझा था उसकी ख़ुशियों का फुहार है ये वो तो देखते ही देखते तबाही का मंज़र सा ले आया।। -मनीष
तेरी हर बात में मजेदारी है तेरी हर याद बड़ी प्यारी है, मुश्किल के वक़्त तू हँसा देती है और मेरी हर बदमाशियों को तू छुपा देती है ये प्यार, ये दुलार तेरा हमेशा सबसे […]
निशानी ऊँगली पर पहन कर मेरी छुपाते हुए, वक्त-वक्त पर वक्त का गिनना तेरा अच्छा लगा, कहा बहुत कुछ ख़्वाबों में हर रात तुमने मुझसे, और मुझे तेरा मुझसे नज़रें चुराना अच्छा लगा।। – राही […]
क्यों गरीबी की चादर में पैरों को फैलाना पड़ता है, क्यों चन्द ख़्वाबों को इस दिल में दबाना पड़ता है, खेल-खिलौने गुड़िया गुड्डे और वो रेलगाड़ी छोड़कर, क्यों रात दिन इस बचपन को रिक्शा चलाना […]
ना कहकशो का दौर है,ना वो हमसे गुप्तगुह करते है, संगदिल उस सनम से हम बेपनाह महोब्बत करते है। ज्योति
बारिश भी कहीं भी कभी भी हो जाती है सूखे मन को नम कर से ऐसा कोई नहीं
ghujari hai,zindgi aise bhi.. khud ko khud se dhundhne me. lapta sahi kaun apna waise bhi. dhundhta kha hai,koe dhundhne me.. jane do bhikre pdhe hai,saman ghar ke waise bhi. koe aur nhi rehta yha […]
सफलता का अपना ही बड़ा नाम है, जिसने पाया उसको सलाम है, जिसने खोया उसको नयी उमीदों का पेगाम है, इसे लफजो में बयां करना नही आसान काम हैI
बाबा की आलमारी लगती थी मुझको पयारी आचारों और चॉकलेट की फुलकारी अनसोचे ख्वाबो का पिटारा कलम किसमिस खिलौनो का पिटारा बचपन के उन ख्वाबो का ही तोह है सहारा आज ना बाबा रहे ना […]
तेरी आरज़ू से मुँह मोड़ नहीं पाता हूँ। तेरी तमन्नाओं को छोड़ नहीं पाता हूँ। यादों में ढूंढ़ लेता हूँ तेरी तस्वीरें- तेरे प्यार से रिश्ता तोड़ नहीं पाता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी आरज़ू से मुँह मोड़ नहीं पाता हूँ। तेरी तमन्नाओं को छोड़ नहीं पाता हूँ। यादों में ढूंढ़ लेता हूँ तेरी तस्वीरें- तेरे प्यार से रिश्ता तोड़ नहीं पाता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कभी तो किसी शाम को घर चले आओ। कभी तो ग़मों से बेख़बर चले आओ। हर रात बीत जाती है मयखाने में- कभी तो रास्ते से मुड़कर चले आओ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
किस से सिकवा करू, किस से सिकायत करू ; जब अपना समझा ही नही तो किस से दिल की बात कहूँ। ज्योति।
सागर से मिलकर जैसे नदी खारी हो जाती है, तुमसे मिलकर वैसे मेरी तबीयत भारी हो जाती है, बहुत हिम्मत जुटाकर भी तुमसे नज़रें मिला नहीं पता, क्यों देखकर मेरी धड़कन तुमपे वारी हो जाती […]
एक नहीं सी जान पर क्यों पहरे हजार रखते हैं, पिंजरे में क्यों हम उसका सारा सामन रखते हैं, छिपाकर क्यों घूमते हैं चेहरे पर चेहरे लगाये, क्यों आईने सी साफ नहीं हम अपनी पहचान […]
रवि’ रंग मोहताज नहीं किसी परिचय के अनुभवों का, स्वतंत्र मन्त्र है ये तो सबके जीवन के अनुदानों का, विषय नहीं कोई भौगोलिक, ये तो है ज्ञान व्यव्हारों का, जीवन हो सुलझा हर पल जैसे, […]
गम की अँधेरी रात में, तू दिल को बेकरार न कर आसमान के वही तारे एक रोज़ चाँदनी रात भी लाएँगे तू थोड़ा इंतज़ार तो कर।। -मनीष
✋✋✋✋✋माँ का आशीर्वाद✋✋✋✋✋ तेरे पैरो की धूल जबसे लगाई है माथे पर जहाँ की हर चमक अब सामने जुगनूँ सी लगती है मेरी औकात क्या है कुछ नही है इस जमाने मे वो तो माँ […]
फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं, चन्द शब्द मेरे तुमसे जब चुप्पा हो जाते हैं।। – राही (अंजाना)
बेमोल थे जो झूठे बाज़ार में, वो सारे साहूकार बिक गए, मैं अनमोल ही था सच है,जो मेरा कोई मोल न लगा।। – राही (अंजाना)
बचपन से ही शिक्षक के हाथों में झूला-झूला करते हैं, ज्ञान का पहला अक्षर हम बच्चे माँ से ही सीखा करते हैं, प्रथम चरण में मात-पिता के चरणों को चूमा करते हैं, दूजे पल हम […]
क्या हिम्मत रखता था तू डरता था न मौत से, ठान लिया जब जीतने की सफलता मिली हर ओर से तेरे रुतबे ने ही तो कइयों को राजनीति से प्रेम कराया है, अटल हमेशा अटल […]
✍✍देखो देश को कैसे बचा लिया इसने , देश के खातिर साँसो से लोहा लिया इसने झंडा झुके ना आजादी दिवस की कैसे यमराज को टहला दिया इसने। अटल तेरी गाथाये संसार मे गूँज रहा […]
सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
ये धरती है वीर बहादुर भगत राज गुरु लालों की, आजादी की जंग में थे शामिल दीवाने दिलवालों की, एक माँ से दूर रहकर एक माँ का आँचल रँगने वालों की, हर मौसम में जो […]
मृत मेरा शरीर है, मैं आज भी मरा नहीं, अटल जिंदगी से एक पल, मैं कभी डिगा नहीं, मौन मेरे नैन हैं पर शब्द कोई हिला नहीं, लौट कर आऊँगा मैं ‘अटल’आज भी डरा नहीं॥ […]
मेरे आँखो मे गुमाण उनका था , वसा ना पाया मेरे आँखो ने किसी दुसरे को दिल मे क्योकि मकान उनका था ! तमाम दर्द -जख्म मिट गये मेरे लेकिन जो ना मिट पाये उसमे […]
ये धरती है वीर बहादुर भगत राज गुरु लालों की, आजादी की जंग में थे शामिल दीवाने दिलवालों की, एक माँ से दूर रहकर एक माँ का आँचल रँगने वालों की, हर मौसम में जो […]
लाल लाल है रक्त उनका लाल लाल मैदान है याद रखना देशवासी जिसने दिया बलिदान है स्वार्थ नहीं था कुछ इनका ना ही कुछ अरमान थे भारत माता ,भारतवासी इन पर ये कुर्बान थे थे […]
रण में उतर जा प्रण कर ले, लड़ते जा तब तक जब तक तू कीचड़ के ढेर में कमल स न खिले, मंज़र कैसा भी हो, ताकत अपनी झोंक दे हिम्मत को हमेशा आगे रखकर […]
सालों पहले मिली आजादी के बाद भी आज हम खुद से लड़ रहे हैं हम कैसे मान लें कि हम प्रगति की ओर आगे बढ़ रहे हैं, कहीं सरहद पर पूरे उत्साह से खड़ा जवान […]
मैं अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा नहीं शांति रहने दो..!! लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो..!! ??जयहिन्द??✍वाहिद
पहली बार जब रोया तोह भूख और प्यास थी दूसरी बार जब रोया स्कूल का पहला दिन था तिसरी बार जब रोया तब स्कूल का आखरी दिन था कॉलेज के दिन तोह रुलाने के थे […]
काश तेरी उल्फ़त की हर बात भूल जाऊँ। काश तेरी कुर्बत की हर रात भूल जाऊँ। भूल जाऊँ दिल से कभी तेरे सितम को- काश तेरे ज़ख्मों की सौग़ात भूल जाऊँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.