मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ? मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन- मैं दर्द की लिपटी हुई जंजीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- […]
मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ? मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन- मैं दर्द की लिपटी हुई जंजीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- […]
पत्थरों की नगरानी में शीशे के दिल रख दिए, इस नज़्म ऐ जवानी में ये किसने कदम रख दिए, मशहूर अँधेरे बाज़ार में जो मोल लग चुका था मेरा, इस ज़ख्म ऐ निशानी में ये […]
तरकीब कोई और ढूंढो ऐसे तो नज़र नहीं आने वाला, छुप कर बैठा है जो अंदर वो तो बाहर नहीं आने वाला, गहरा समन्दर है बहुत मन के भीतर हम सबके कोई, बिना डूबे तो […]
दिल के मेरे ताले की अजीज़ चाबी ले गया कोई, उम्र भर के लिए जैसे बेताबी दे गया कोई, शरारत कुछ ऐसी मुझसे छिप कर गया कोई, के अच्छे खासे दिल को खराबी दे गया […]
जितना भी देखा है मनो उतना ही कम देख है, मैंने इस दुनियाँ की आँखों में कितना कम देखा है, सड़कों पर पनपती इन बच्चों की कहानी से, किरदार जब भी देखा अपना मैंने विषम […]
tujhe paya to ye jana h aaj tak sab pakr bhi kuch na paya tha mile hai tujhe to pyar samajh aaya jis din se tumne humne apna mana h iss dil ne bas tujhe […]
सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता, वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता, सालों से बेकरार किया है मेरे दिल को जो उन्होंने, लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता […]
हाथों की लकीरों की आवाज़ सुनानी होगी, अब दिल में छुपी जो हर बात बतानी होगी, खामोश रहने से कुछ मिलता नहीं सफ़र में, अब खुद से ही खुद को पुकार लगानी होगी, अंदाज़ यूँही […]
तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका, तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका, बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर, तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं […]
तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका, तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका, बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर, तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं […]
चाहे बिक जाएँ मेरी सारी कविताएं पर, मैं अपनी कलम नहीं बेचूंगा, चाहे लगा लो मुझपर कितने भी प्रतिबन्ध पर, मैं अपने बढ़ते हुए कदम नहीं रोकूँगा, बिक ते हैं तो बिक जाएँ तन किसी […]
मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है। मेरे ज़ख्म को तेरा ठुकराना याद है। लबों को खींच लेती है पैमाने की तलब- हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
ज़माने के आईने में चेहरे सभी अजीब दिखते हैं, सच से विलग मानों जैसे सभी बेतरतीब दिखते हैं, जब भी खुद को खुद ही में ढूंढना चाहते हैं हम, अपने ही चेहरे पर गढे कई […]
यार दफन करना मुझे आग तोह तेरे पास भी नहीं होता तोह आज यह नौबत ना आती यार फूलों से सजाना नहीं कुछ तोह अपने पास रख देना कुचलने पढ़ अपने मरहम पढ़ ओढ़ लेना […]
Jalte hue abr ko zehar se bacha lo Fiza ye meharban, kal rahe na rahe Aab ko tezab ke kahar se bacha lo Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe… Azadi ka saaz bulandi se […]
वो है बेखबर, शायद न हो उसे खबर! कैसे हुआ ये इश्क़ मुझे न पता चला, इन दिनों इश्क़ इतने करीब से गुजरा की लगा बस हो गया। आते जाते उसे देख खुद में मुस्क़ुरती […]
एक प्रश्न है मुझे, ये इंसान क्या हो गया है तुझे? क्यों कर रहा है ऐसे काम, जिससे हो रहे हो बदनाम। क्या हक़ है तुझे, कर रहा इस सृष्टि को नष्ट, ये इंसान होगा […]
तुम शान थी मेरी , तुम मान थी मेरी , तुम अभिमान थी मेरी , इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी ! जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने […]
हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे , पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे ! हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर, तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर! […]
मैं नन्ही प्यारी बच्ची थी , दिलो दिमाग से सच्ची थी। दो लड़के मेरे साथी थे , मेरे दीपक के बाती थे। पायल मै खनकाती थी, संग उनके नाचती गाती थी। संग उनका रास ही […]
हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे लगता है जो कुछ है वो अधूरा है अल्फ़ाजों में कहां समाता है जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है
मेरे होकर भी मेरे खिलाफ चलते है, मेरे फैसले देख तब पर भी साथ चलते है।। ज्योति
मेरे होकर भी मेरे खिलाफ चलते है, मेरे फैसले देख तब पर भी साथ चलते है।। ज्योति
हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से […]
जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये […]
जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये […]
साहिर तेरी आँखों का जो मुझपर चल गया, खोटा सिक्का था मैं मगर फिर भी चल गया, ज़ुबाँ होकर भी लोग कुछ कह न सके तुझसे, और मैं ख़ामोश होकर भी तेरे साथ चल गया।। […]
Kabhi kabhi Mai sochta hoon Mai kya kar Sakta hoon Samaj ki rudhiyo se Bandkar jee Sakta hoon Julm sah Sakta hoon yaa Julm karke khus ho Sakta hoon Sach bataye Gaye jhooth Ko Apna […]
मोहब्बत के ख्वाब ने ये कैसा इत्तेफ़ाक कर दिया, दिल्लगी ने धड़कन को ही दिल के खिलाफ़ कर दिया, अच्छी ख़ासी तो चल रही थी ज़िन्दगी ‘राही’ अपनी, फिर क्या हुआ जो इस नशे ने […]
मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं, मैं कुछ करके दिखाना चाहता हूं। कोई मेरा साथ दे ना दे, मैं ख़ुद का साथ ख़ुद पाना चाहता हूं। मेरा दिल बहुत डरता है, कभी […]
कुछ फर्ज मेरा है कुछ फर्ज तुम्हारा है देश को स्वच्छ रखना ये फर्ज हमारा है….. देश की स्वच्छता का नारा लगाओ जन सेवा मे हाथ बढाओ ….. झाड़ू हमारा हथियार हो भारत भूमि से […]
पक्षी उड़ान भरता है और इंसान चाल चलता है। पक्षी एक वक्त का खा के भी खुश है और इंसान 7 पीढ़ियों का जोड़कर भी खुश नही।
खिलौना समझ कर ज़िन्दगी से देखो खेलने लगे, चुप रहने वाले भी देखो ज़रा कितना बोलने लगे, चौपाल लगाते दिख जाते थे गाँव में जहाँ तहाँ जो, आज साथ रहने वाले भी देखो अकेले डोलने […]
चाँद तारे आसमाँ सब की निगरानी करना, जब तक मैं न आऊँ इतनी मेहरबानी करना, जिस्म ऐ मोहब्बत पर जब तक रूह का रंग न चढ़े, गुज़ारिश ये के तुम इस कागज़ी पैहरन की क़ुरबानी […]
मैं अधूरा सा हूँ तेरे नाम के बग़ैर। यादों की तड़पाती हुई शाम के बग़ैर। मैं देखकर ज़िन्दा हूँ तेरी तस्वीरें- आँखें भी सोती नहीं हैं जाम के बग़ैर। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कितने चेहरे सामने आते जाते है हर रोज फिर क्यों कोई इक चेहरा दिल में अटक जाता है
बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो […]
बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया, मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया, भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने, उसका खुद का घर जैसे मानो […]
कौन सा रंग भरू, किस रंग से उकेरू मैं जिंदगी की तस्वीर फीकी जिंदगी को र्ंग नही जचते|
बेचकर चूड़ियाँ अपना घर चलाया करती है, चेहरे पर गम छुपाये कैसे मुस्कराया करती है, रहती तो है रंग बिरंगे काँच के टुकड़ों के संग, मगर बेरंग जीवन को यूँही बहलाया करती है।। राही (अंजाना)
दिल से दिल तक अपना रस्ता बना लेती है, एक हिंदी है जो सबको अपना बना लेती है।। राही (अंजाना) हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।
मेरे होकर भी मेरे खिलाफ चलते है, मेरे फैसले देख तब पर भी साथ चलते है।। ज्योति
हजारों पहरों के बीच भी चेहरा तेरा देख लेता हूँ, मेरी आँखों में तुझको मैं इतना गहरा देख लेता हूँ।। राही (अंजाना)
तेरी गली से आज फ़िर होकर गुज़रा हूँ। तेरी गली से आज फ़िर रोकर गुज़रा हूँ। आवाज़ दे रही थी मुझे तेरी तिश्नगी- तेरी गली से दर्द को छूकर गुज़रा हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
टूट गई साँसों की माला जैसे कोई साज, सुनी नहीं किसी ने मेरे दिल की वो आवाज़, बन्द हुए जब अंत समय में आँखों के मेरे काज, उड़ गए मेरे पंख पखेरू जैसे कोई बाज़।। […]
रिश्ते रूह में अब बंधा नहीं करते, वो हमसे हम उनसे कुछ कहा नहीं करते, मान लिया है मैंने के बस एक जिस्म हूँ मैं, और टूटे दिल को हम कभी सिया नहीं करते।। राही […]
किसी साज़ की आवाज़ ने मेरे दिल को छुआ ही नहीं कबसे, तुम्हारी साँसों के समन्दर की आवाज़ में मैं डूब गया जबसे।। – राही (अंजाना)
ये बारिश ये हसीन मौसम और ये हवाये लगता है आज मोहब्बत ने किसी का साथ दिया है.
Teri bo najr jo ek ham par mehrban hui ham to lela ban gaye tere chaht mai ham fakir ho gaye
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