करे हैं काम वो इस धूप में जलती सी इक औरत,,, गमों को झेल लेती है सभी, गहरी सी इक औरत।।। बडों का मान रखती है झुकी रहती है कदमो में,,, कि रिश्तों के दरख्तों […]
करे हैं काम वो इस धूप में जलती सी इक औरत,,, गमों को झेल लेती है सभी, गहरी सी इक औरत।।। बडों का मान रखती है झुकी रहती है कदमो में,,, कि रिश्तों के दरख्तों […]
dil mai uski mohobat ka ehsas hai vo dor ho kar bhi sadda pass hai hai jeete hai unki yaado mai bas ek choti si khwaish hai mout bhi aye tou unki baaho mai ksm […]
कुछ लिखूंगा तो तुम बुरा मानगो. हमारी मोहब्बत पर रार ठानगो. अब यही रहा अंजाम -ए- इश्क मेरा. मेरी जज्बातो को जब्त कर हुश्न का इकबाल कर. यह मोहब्बत नहीं आसान इसका सम्मान कर. #अवध?
कुछ बेरुखी रही आज कल घर मेरे. ना दिल रहा अकतियार मेरे. डबाडबाई आँखो से उतर आई अश्क कपोलो पर. कितनी बेरुखी रही मोहब्बत हमारे खित्ते है्. #अवध?
तेरे हुस्न का मैं अफसाना लिए रहता हूँ! तेरे प्यार का मैं नजराना लिए रहता हूँ! मैं रोक नहीं पाता हूँ यादों का कारवाँ, तेरे दर्द का मैं गमखाना लिए रहता हूँ! #महादेव_की_कविताऐं
चला गया है परदेश हमारा लाल पूँछ लेता है फोन पर कभी कभी हमारा हाल चाल बेटा— बहुत बिजी हूँ माँ टाइम नहीं मिलता कब आऊँगा वहाँ मुझे भी नहीं पता कैसी हो माँ […]
मैं दफ्न उजालों का डूबा हुआ शहर हूँ! मैं वक्ते-तन्हाई में यादों का सफर हूँ! ढूँढता हूँ खुद को खौफ के अंधेरों में, मैं ख्वाहिशों की राह में बेखुदी का डर हूँ! #महादेव_की_कविताऐं’
तुम को तलाशते तलाशते, खुद को भूल गये तुम को चाहते चाहते जिन्दगी से रूठ गये। पारुल शर्मा
चलो अपनी असलह रूपी कलम को बारूद से लबरेज कर लें,और दाग दें दुश्मनों और गद्दारें के तन पर कि शब्दों के बम रूपी गोले लहूलुान कर दें,ध्वस्त कर दें उनके नापाक इरादों को। सुना […]
हर तरफ आँधियाँ चल रही है नफरतों की हवाओं की साजिशें हैं या सियासी बुखार है। पारुल शर्मा
अनुच्छेद 370 का ही परिणाम हैं जो कश्मीर में अब भी तिरंगे जलते हैं। पथराव होता है देश भक्तों पर और जवानों के तन पे जख्म पलते है। दुश्मन की कायरता का मनोबल बढ़ता है […]
।। गम बनाम खुशी ।। गम बोला खुशी से —-बता बता दो जा रही हो जिसकी जिंदगी से। खुशी—वहाँ तो मेरा आना जाना लगा रहता है मैं देख नहीं सकती उनके दुखी चेहरे, तुम जाते […]
—————– वधू चाहिए ———— आये लड़के वाले छपवाने इस्तहार मेरी संजीवनी में एक वधू चाहिए आ गयी है कड़की घर में है परिवार छोटा सा घर गिरवी पड़ा है। ५ लड़कों ४ लड़कियों से जूझ […]
।। गम बनाम खुशी ।। गम बोला खुशी से —-बता बता दो जा रही हो जिसकी जिंदगी से। खुशी—वहाँ तो मेरा आना जाना लगा रहता है मैं देख नहीं सकती उनके दुखी चेहरे, तुम […]
मेरे शब्दों का आज फिर मुँह उतर गया तुमने फिर इन पर अपनी खामोशी जो रख दी। पारुल शर्मा
ये पूनम की रात भी बड़ी अजीब होता है पास इसके भी किस्से कई महफूज होता है कुछ हसीं तो कुछ दर्द – ऐ – गम होता है क्या करे रातो में ही दीदार-ऐ-चाँद होता […]
कबतलक तेरा इंतजार मैं करूँ? दर्द की नुमाइश हर बार मैं करूँ? खौफ है कायम बेरुखी का तेरी, कबतलक खुद को बेकरार मैं करूँ? मुक्तककार- #महादेव
उससे दोबारा होगी मुलाकात क्योंकि गोल है दुनिया, इस उम्मीद में इंतजार उसका आज़ भी बरकरार है।
तेरे नैनों की किताबें पढ़ने की जिद्द पकड़ी है इस दिल ने, तू अपनी पलकों का ये पहला पन्ना तो पलट दे।
तुझसे मिलने का मुझे कोई आसार भी नहीं दिखता। लेकिन इंतज़ार तेरा करते–करते मैं फिर भी नहीं थकता।
“ऐ दिल” तुझसे फुर्सत मिले जिन्दगी को तभी तो समझूँगा मैं। पारुल शर्मा
मेरे शब्दों का आज फिर मुँह उतर गया तुमने फिर इन पर अपनी खामोशी जो रख दी। पारुल शर्मा
तेरी खामोशी ने ही बिखेर दिया मुझे सफ़हों पर। और मेरी तमन्ना थी कि तेरी बाँहों का सहारा मिले।
जो हर चीज को दौलत से आँकते हैं उनके दिल कीमती नहीं होते ।
औरतों के घर कहाँ होते हैं जहाँ पैदा हुई वो मायका जहाँ शादी हुई वो ससुराल।औरतों के अपने कहाँ होते हैं।एक के लिए पराया धनदूजे के लिये पराये घर से आयी परायी लड़की। औरतों के […]
सफेद दरख्त अब उदास हैं जिन परिंदों के घर बनाये थे वो अपना आशियाना ले उड़ चले। सफेद दरख्त अब तन्हा हैं करारे करारे हरे गुलाबी पत्ते जो झड़ गये परिंदो के पर उनके हाथों […]
जब तेरी नजरों से मुलाकात होती है! चाहत की दिल से रूबरू बात होती है! यादों का तूफान कभी रुकता नहीं मगर, तन्हाइयों के आलम में रात होती है! मुक्तककार- #महादेव'(24)
बहुत मायूश रही मेरी मेहरबा मुझसे. ना कोई चाहत की रखी कोई सिल्सिला हमसे. कोई बताये कोई खबर मेरी चाहत की चांद की. अब तक घिरी में घर में अमावश की रात ही. अवधेश कुमार […]
बड़े मौजू हो चूकी ख्वाहिश की पेशकश मेरी. इरादे नफीश की खमबखम मेरी. जरा सून क्यो इल्तिजा का मायूस आरजू. मैं तेरी नहीं मोहब्बत की ख्वाहिश. अवधेश कुमार राय “अवध*
ये बरसात भी मुझसे कुछ कह रही है मै ही नही मेरी याद में वो भी रो रही है
तेरा ख्याल खुद को समझाने का रास्ता है! तेरा ख्वाब खुद को बहलाने का रास्ता है! मुश्किलों को थाम लेती है आरजू तेरी, तेरी याद चाहत को पाने का रास्ता है! #महादेव_की_कविताऐं’
॥ “ यादों के जुगनू “ ॥ वह लड़की ! : न भूली होगी मुझे : न भुलाई गई मुझसे वह लड़की जानती है —- ज़िस्म की ज़द — सम्बन्धों की हद इसीलिए तो […]
अब ना गाऊंगा गित तेरे यादो की. अब ना चाहुंगा प्रित तेरे सांसो की. कुछ थमा तुम्हारे हमारे बिच यादो का गुलिस्ता. जो हमसफर रुठ चुका हमारे घर से. जो चूक चुका महफिल की रंजोगम से. फिर गित ना गा पाऊंगा. महबूब तुझे गुनगुना ना पाऊंगा. अवधेश कुमार राय “अवध”
बहुत सुकून हो मोहब्बत तुमको एतराज हो हमसे. इस फिजा की तफतिश में एक बार हो हम से . कोई रेहबर हुआ था मेरा जिसे हमसे इल्तिजा थी इतनी. मोहब्बत में अश्को से रुठा जाना हुआ हैं . दोहमत लगती मोहब्बत छोड़ आये. हम तो जींदगी का सुकून छोड़ आये. अवधेश कुमार राय “अवध”
जी रहा हूँ तुमको पाने की आस लिए! जी रहा हूँ साँसों में तेरी प्यास लिए! ख्वाब बंध गये हैं नजरों की डोर से, प्यार के रंगों में तेरा एहसास लिए! #महादेव_की_कविताऐं”
There are symphonies in the cacophony, Harmonies in the chaos. Beauty where the ugly things lie Treasure within the dross. Sit with me O forgotten ones, Reconnect once again. Absorb and Basque in my beauty, […]
After all this time the small things matter, It did not fall nor did it shatter. I wish to be as dedicated as you, You loved so actively, proof Of the truth that we know […]
मेरी जिन्दगी की तस्वीर बन गये हो तुम! मेरी मंजिलों की तकदीर बन गये हो तुम! तूफान चल रहे हैं यादों के शामों-सहर, दिल में चाहतों की जागीर बन गये हो तुम! #महादेव_की_कविताऐं’
सूरज को रोशनी का गुमान किसलिए है? शाम तन्हाई की पहचान किसलिए है? टूटते नजारे हैं फिजा में हरतरफ, रात आहटों की मेहमान किसलिए है? मुक्तककार- #महादेव’
ये मदहोश शाम और तन्हाई का आलम अपनों के बारे में न सोचते तो क्या सोचते करीब-ए-मर्क़ है फिर भी अकेले इसलिये खबरी के बारे में न सोचते तो क्या सोचते हुआ कभी […]
मैं घायल हूँ मग़र मैं तो कभी बेचेन नही होता सिसकियां आती रहती है मग़र मैं तो नही रोता किसी घायल की बैचेनी सिर्फ घायल समझ़ता है जख्म का दर्द समझ़ता है या मरहम समझ़ता […]
टूट रहा हूँ मैं गमे-अंजाम सोचकर! टूट रहा हूँ मैं गमे-नाकाम सोचकर! मंजिल डरी हुई है दर्द-ए-बेरुखी से, तेरी बेवफाई का पैगाम सोचकर! मुक्तककार- #महादेव’
बैठे है अकेले राह में, दिल में कोई आश है , घडी की बदलती सुइयो के _सही होने का इन्तजार है , कुछ कदम बढाने है ,और ये सुनसान राह पार है , फिर करवट […]
साथ देने में मेरा जिंदगी के दुखों का कोई सानी नहीं असल में तो दुख के बिना सुख का भी कोई मानी नहीं। मानी= अर्थ
जिन्दगी में तेरी हरपल कमी रहती है! अश्क की आँखों में हरपल नमी रहती है! दौर भी है कायम तेरी तमन्नाओं का, दर्द की ख्यालों में हरपल जमीं रहती है! #महादेव_की_कविताऐं’
पागल,आशिक़,आवारा ही रहा आइनों के हर टुकड़े में मै ही रहा तू ने बेवफाई की इन्तहां कर दी मै की तेरे साथ वफादार ही रहा ….. #VIP~
न जाने क्या-क्या छुपा रही थी, गर्मी की सुबह, वो शाल ओढ़े जा रही थी, धूल से पाँव सने थे,चंचल नयन बोझिल हुए थे, भूख से पेट धँसे थे,चकित हो मैं देख रही थी, मन […]
न जाने क्या-क्या छुपा रही थी, गर्मी की सुबह, वो शाल ओढ़े जा रही थी, धूल से पाँव सने थे,चंचल नयन बोझिल हुए थे, भूख से पेट धँसे थे,चकित हो मैं देख रही थी, मन […]
******************** फूल खिलते रहेंगे यह सोचकर खुश था मगर दुख इस बात का, कि रौंदी जा रही मासूम कलियाँ ****************************
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