तेरा ख्याल जब भी बार-बार आता है! दिल में बेचैनी का किरदार आता है! बेताब नजर से लिपट जाती हैं यादें, तेरी गुफ्तगूं का इंतजार आता है! #महादेव_की_कविताऐं’ (23)
तेरा ख्याल जब भी बार-बार आता है! दिल में बेचैनी का किरदार आता है! बेताब नजर से लिपट जाती हैं यादें, तेरी गुफ्तगूं का इंतजार आता है! #महादेव_की_कविताऐं’ (23)
दिल न् सह पाया वो बात जो तू कही क्या देखकर तू मचल् गई प्यार में मेरे क्या कमी रह गई मैं वहीं का वहीं मगर तू बदल ग्ई
sochta hu waqkt se thoda waqkt churalu usse apni takdir banlu usse khud mai aise bassa lu k uske aks mai apni tasvir banalu by RLvgahlot
mohabat lafjo mai banyaa nhi hoti jisne piyar hota hai unki khata ki bhi koi sajja nhi hoti dur ho vo chahe jitni bhi mgr ye duriya humare dilo k darmiyaan nhi hoti mohobat mai […]
मुझको फिर भूली हुई बात याद आयी है! चाहत की सुलगी हुई रात याद आयी है! मैं मुन्तजिर हूँ आज भी दीदार का तेरे, मुझको फिर तेरी मुलाकात याद आयी है! #महादेव_की_कविताऐं’
मैंने आज किसी को नफरत और सियासत की धज्जियाँ उड़ाते देखा है, जब मस्जिद से निकलकर एक बच्चे को मंदिर में दीप जलाते देखा है !!
आँख की कीमत आशुओं से है और दर्द ने दिल को दिल बनाया है हम तो रह जाते सीधे-सादे ही दोस्तों ने हमे भी मतलबी बनाया है #VIP~
तेरी याद जब भी आस पास होती है! मेरी जिन्दगी खामोशी से रोती है! घेर लेता है मुझे बेबसी का मंजर, आरजू खुद को अश्कों में डूबोती है! मुक्तककार- #महादेव’
तेरा इन्तजार करू, तेरा एतबार करू लेकिन कब तक बता यू ही सुबह से शाम करू ! तेरे बिना राहे चलती नहीं मेरी लेकिन कब तक बता यू ही मंजिल-ऐ-राह को बदनाम करू! ‘निसार’
ग्रीष्म ऋतु की खड़ी दोपहरी, सुबह से लेकर शाम की प्रहरी, सूरज की प्रचंड किरणें, धरती को तपा रहीं हैं, फसलों को पका रहीं हैं ं, गुलमोहर की शोभा निराली, आम, लीची के बाग-बगीचे, खग-विहग हैं […]
जो साथ नहीं देते वे रूठ जाते हैं! रास्तों में अक्सर हमसे छूट जाते हैं! दूरियाँ बन जाती हैं दिलों के दरमियाँ, हौसले भी जिन्दगी के टूट जाते हैं! मुक्तककार- #महादेव’
कितना अच्छा होता कि कोई वक़्त को टटोल सकता झाँक सकता उसके पिछले हिस्सों में किस्सों में कोई कमी ना रहती सदा के लिए शायद अगर ऐसा हो सकता या यूं कहो कि बिखरी हुई […]
******************** साथी चल कुछ कर दिखलाएँ अमन- चैन के गीत सुनाएँ शोषण, घुसखोरी, गद्दारी अन्याय, अनाचार, भ्रष्टाचारी गली-गली नफरत का जहर द्वार-द्वार मच रहा कहर मिलकर आओ दूर भगाएँ साथी चल कुछ कर दिखलाएँ **************************
मैं भूला था कभी तेरे लिए जमाने को! मैं भूला था कभी अपने आशियाने को! भटक रहा हूँ जबसे गम के सन्नाटों में, हर शाम ढूँढता हूँ जामे-पैमाने को! मुक्तककार-#महादेव'(24)
विधा-ग़ज़ल काफिया-ओ रदीफ़-तो कभी ************************* चाहती हो मुझे अगर बताओ तो कभी देख कर मुझको मुस्कुराओ तो कभी यूँ ना तड़पाओ तुम इतना दिल को मेरे हाल-ए-दिल अपना सुनाओ तो कभी दोस्त तो है बहुत […]
ज्ञानी को होता है एकांत पसंद लेकिन किसीसे मिलने की तलब मूर्खता का प्रमाण तो नहीं होता कम से कम प्यार में तो नहीं होता।
क्या नाम है उसका कौन से देश से है वो असल मे दिल देने वाला तो सोचता ही नहीं इन सब बातों को।
दुनियाँ का कोई कानून चलता नही। रौशनी का दिया कोई जलता नहीं। कोशिशें अमन की दफन हो गयी हर मुद्दे पे बंदूक चलन हो गयी॥ कुछ अरसे पहले मैं गुलजार था। इस बियाबान जंगल में […]
दुनियाँ का कोई कानून चलता नहीं। रौशनी का दिया कोई जलता नहीं। कोशिशें अमन की दफन हो गयी हर मुद्दे पे बंदूक चलन हो गयी॥ कुछ अरसे पहले मैं गुलजार था। इस बियाबान जंगल में […]
तेरी चाहत मेरे गुनाह जैसी है! तेरी चाहत दर्द की आह जैसी है! आँखों में आहट है ख्वाबों की लेकिन, तेरी चाहत सितम की राह जैसी है! मुक्तककार- #महादेव'(22)
बेशक़ सहमा ज़रूर, पर कभी टूटा नही, तेरे लाख डराने पे, कभी रूठा नही, तेरा इतरांना भी अंदाज़-ए-हसीन ज़िंदगी, पर मेरे हौंसलो का साथ अभी छूटा नही। – पीयूष निर्वाण
यूँ ही दर्द हमें राहों में कबतक मिलेंगे? हम खौफ के सन्नाटों में कबतक चलेंगे? कदम आरजू के कभी रुकते नहीं मगर, हम शाम की तन्हाई में कबतक जलेंगे? मुक्तककार- #महादेव’
मेरी कोशिश तुमको पाने की है! अपने करीब तुमको लाने की है! कबतक सह पाऊँगा बेताबी को? तेरी हर अदा तो सताने की है! मुक्तककार- #महादेव’
वो दूसरों की गलती वो दूसरों पर एहसान चाहे मिले बेइज़्जती या मिले सम्मान वो दर्द का आलम वो प्रेमिका की बेवफाई वो उससे मिला धोखा या फिर लंबी जुदाई अक्सर भूल जाता हूं मैं, […]
सिहासन के बीमारों ,कविता की ललकार सुनो। छप्पन ऊंची सीना का उतर गया बुखार सुनो। कश्मीर में पीडीपी के संग गठजोड किये बैठे हैं। राष्ट्रवाद के नायक पत्थरबाजी पर मुक कैसे हैं॥ क्यूं चलकर नहीं […]
बड़े इत्मिनान से मेरे जहन में कुछ सवाल रक्खे थे, हो जाने को ज़माने से रूबरू मेरे खयाल रक्खे थे, बड़ी बेचैनी से एक नज़र जब पड़ी उनकी हम पर, खुद को यूँ लुटा बैठे […]
मैं जिन्दगी को तन्हा बिताता रहता हूँ! मैं दर्द को पलकों में छिपाता रहता हूँ! चारों तरफ हैं आन्धियाँ हालात की मगर, तेरी शमा चाहत की जलाता रहता हूँ! मुक्तककार-#महादेव’
उठती हुई नजर में एक आशा भी होती है! मंजिल को छूने की अभिलाषा भी होती है! रोशनी मौजूद है अभी जिन्दगी में लेकिन, जज्बों के टूटने की परिभाषा भी होती है! मुक्तककार- #महादेव'(27)
है मुझे एक मर्ज़ लेकिन मुझे खौफ नहीं क्योंकि है वो मर्ज़ बेखौफी का ही।
प्रेम के बारे में क्या बात करूँ प्रेम की अभिव्यक्ति शब्दों मे कहां होती है मिले न सबको प्रेम वो अलग बात है लेकिन प्रेम की चाह तो हरेक दिल में होती है।
तेरा ख्याल जख्म के रंगों से भर गया है! रूठे हुए नसीब की आहट से डर गया है! यादों की जंजीर से जकड़ी है जिन्द़गी, चाहत की जुत्सजू से तन्हा मुकर गया है! मुक्तककार- #महादेव'(25)
बहुत परेशान करती है तन्हा रातें हमकों। मुसल्सल याद आती है मुलाकातें हमको।। , ऐसे क्यूँ ख़फ़ा हो गए बिना सबब के तुम। क़ोई वजह थी जहन में तो बताते हमकों।। , ख़ुद मुज़रिम होके […]
उठती नजर में तेरा चेहरा नजर आता है! मुझपर तेरे प्यार का पहरा नजर आता है! ख्वाबों के दायरे में ठहर जाती है जिन्दगी, ख्वाहिशों का हर आलम गहरा नजर आता है! मुक्तककार- #महादेव’
Main rasta hun, Falsafa nahin, Main chitij hun, Tera asman nahin Dhund le apna basera, Main tera ghar nahin, Apna gharaunda chod, Udh ja us doh, Jaha tera piya basey re, Yeh tapan jaruri tha, […]
Main rasta hun, Falsafa nahin, Main chitij hun, Tera asman nahin
देखकर जिसको जुड़ जाते हैं हाँथ अक्सर, आज वही फैला कर दोनों हाँथ बैठी है, झुकाकर निकलते हैं हम जिसके आगे सर अपना, आज वही सरेबाजार सर झुकाकर बैठी है, टूटने नहीं देती है जो […]
कैसे कहूँ कि तेरा दीवाना नहीं हूँ मैं! कैसे कहूँ कि तेरा परवाना नहीं हूँ मैं! जब छलक रही है मदहोशी तेरे हुस्न से, कैसे कहूँ कि आशिके-पैमाना नहीं हूँ मैं! मुक्तककार- #महादेव’
सपने देखा करो ओह यारों सपने साकार भी होते हैं। आज हम जिस मंजिल पर हैं कईओ के ख़्वाब ही होते हैं। बैठे बिठाए नहीं मिलती मंजिल मेहनत करने वाले ही कामयाब होते हैं। उनके […]
वक़्ता भी क्या बोले जब कोई उसे ध्यान से सुनने को तैयार नहीं। लेखक भी क्यों लिखे जब कोई कुछ दिल से पढ़ने को तैयार नहीं। गायक भी कैसे गाए जब कोई सुरों […]
जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम […]
अभी अभी वो वर्तमान थे , अभी अभी वो अतीत हो गए . वो कौन थे ? किसके थे वो ? प्रश्न सब बेमानी बेकार हो गए . ना वो थे किसी के, ना बाकि […]
Hy wt u think u lazy M i look like u crazy? Don’t u feel for me bad When i used to be sad. Hy look i could tell your dad, That u hv gone […]
क्या हुआ अगर मैं खामोश हो गया हूँ! जाम के नशे में मदहोश हो गया हूँ! भटके हुए पलों में खोया हूँ इसतरह, महफिलों में खानाबदोश हो गया हूँ! मुक्तककार- #महादेव'(22)
आतंक फैला है इस दुनिया में जैसे लगा आतंक का मेला। झूठ इतना फैल गया, जिससे सच खड़ा है, बेचारा अकेला। लोग कहते है कि, आंतक हमे हटाना है और अपने देश को, आतंक से […]
जाने कब से हैं मेरी आँखों में, ये ख्वाब किसके हैं मेरी आँखों में। मैं तो सूखा हुआ सा दरिया था, ये मौज किसकी है मेरी बाहों में।। मैं तो सोया था तन्हा रातों में, […]
इन हसरतों के बाजार में खून के रिश्ते भी टूट जाते हैं, सियासत की तंग गलियों में कुछ अपने भी छूट जाते हैं। अहंकार पाले बैठें हैं जो उनको कोई समझाये भी कैसे, जो जरा […]
बंद हैं आँखें मगर कुछ बोलती रहती हैं! राह तमन्नाओं की कुछ खोलती रहती हैं! जिन्दा है तेरी आरजू मेरे जेहन में, दर्द की लहरें जिगर में डोलती रहती हैं! मुक्तककार- #महादेव'(25)
न जाने क्या–क्या चीजें लिखता रहता हूँ मैं वक़्त की इस महँगाई में खुद के ही हाथों खुद को बिकता रहता हूँ मैं सब से दूर होकर पता नहीं किसके करीब खुद को खींचता रहता […]
अधूरापन ये मेरा क्या पता मेरे भीतर कोई आग जला दे और फिर कभी मेरे भीतर कोई कामयाब सूरज़ उगा दे। –कुमार बन्टी
जिंदगी भर ये क्या इन्तेज़ाम किया हमनें। इक उम्र तो बस यूँ ही तमाम किया हमनें।। , पता नहीं किस ख़्वाहिश में दर ब दर हुए। न सुकून ही मिला न आराम किया हमनें।। , […]
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