तू जला कर मुझे धुंए के छल्ले बना कर खुश है, तो मैं भी खुश हूँ हर रोज तुझे झुलसता देख कर, तू सुलगाकर मुझे दे रहा है हर लम्हा हवा, तो मैं भी निगल […]
तू जला कर मुझे धुंए के छल्ले बना कर खुश है, तो मैं भी खुश हूँ हर रोज तुझे झुलसता देख कर, तू सुलगाकर मुझे दे रहा है हर लम्हा हवा, तो मैं भी निगल […]
सुकून हम अपने दिल का अब कहू चुके है हम खुद को गम-ऐ-सागर में डुबो चुके है क्यों मजबूर करते हो हमें, ये खत दिखा कर हम पहले से ही उदास है, बहुत रो चुके […]
शुक्र है मोहोब्बत का कोई मज़हब नहीं होता वर्ना ये भी अमीरी और गरीबी का ख्याल करती मिल जाती हर शक्श-ऐ-आमिर को और हम जैसो को ये बेहाल करती……………………………!! D K
हमको तन्हाई में बुला-बुला कर रोये अपने आंसुओं को छुपा-छुपा कर रोये जब देखी उस ने हमारी सिद्क़-ऐ-दिल लोगो अपने ही आँचल में, वो मुँह छुपा-छुपा कर रोये…………….!! D K
यूँ ही नहीं लबरेज़ हो रही, हमारे दिल में यादें उसकी के हमने पिया था मय-ऐ-गुल्ल-रंग उसके नाम का लोगो……………..!! D K
कौन कहता है कम्बक्त, के हम बे-सरो-सामान सोया करते है के रात कटती है सिर्फ, निगेबानी इस दिल-ऐ-गम की करते करते……………!! D K
हमारी इस बात से भी लोग हमसे खफा रहते है के हम सब से क्यों रफा-दफा रहते है के रंग-ऐ-बईमानी जब सब पर चढ़ी है इस दुनिया में तो क्यों हम हरदम सफा-सफा रहते है…………………………..!! […]
उषा की रश्मि जब घोलती है चाय में चुस्ती, शुरू करते है दिन हम अपना | लेकिन शाम आते-आते आन पड़ती है फिर एक चाय की जरुरत; घोली हो जिसमे संध्या ने कोई अलौकिकता हमारे […]
जन्म लेकर साथ तुम मेरे पली थी भेदभावों के समन्दर में वहीं थीं में पला नाजों से लेकिन तुम नहीं कौन कहता पीर मन की अनकहीं पूज्या कहकर लड़कियों की कैसी साधना बहन तुम मुझे […]
तेरी आरजू ने यही काम किया है! मेरी जिन्द़गी को बदनाम किया है! कैसे मैं छुपाऊँ अंजाम को सबसे? दर्द ने नुमाइश तेरे नाम किया है! #महादेव_की_कविताऐं'(22)
कोई ये कैसे बताये, कि गम क्या है इश्क में इन्सा को होश कहां है!
रात का अन्धकार हूँ मैं मुझमे रौशनी भरने के आश में खुद जल कर मिट जाओगी, लेकिन यह अँधेरा कभी सूर्य का तेज नहीं देगा | -Bhargav Patel (अनवरत)
तेरा — मेरा इश्क पुराना लगता है । दुश्मन हमको फिर भी जमाना लगता है ॥ गुलशन – गुलशन खुशबू तेरी साँसों की । मौसम भी तेरा ही दीवाना लगता है ॥ पर्वत – […]
शब्द छलकते रहते है अनवरत आँखों से | और मैं उन्हें श्याही बना कर भरता रहता हूँ कोरे कागजो का खालीपन | -Bhargav Patel (अनवरत)
कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो जो किया है वादा, मुझे निभाने दो वो समां भी कितना रंगीन होगा जब मिल बैठेंगे दीवाने दो चलेंगी रात भर इस दिल की बातें और भरेंगे मय […]
हमारे साथ कदम से कदम मिला चल सको तो चलो के इस इश्क़ में कुछ देर ठहर सको तो चलो बहुत ही हौसला चाहिए, इस दिल की निगेबानी करने को अगर तुम इसकी पहरेदारी कर […]
किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता […]
शब्दों में नहीं तो खामोशी ही सही, किसी ज़ुबां में तो तू निकल कर सामने आ, कब तलक छुपता रहेगा तू राज़ अब दिल में, खुल कर अब किसी सच सा तू निकल कर सामने […]
देख रहा हूँ रात में जगमगाती लाइट्स इन अंजान रास्तो पर, ज्यों जीवन धबकता है शहरो के दिल में। एक तसल्ली रहती है मन में कि हम जिन्दा है। लेकिन चलती कार के साथ वो […]
न दिल तलाश कर न धड़कन तलाश कर, जो रूह में घर कर जाए वो दरिया तलाश कर, झुकता नहीं है आज कोई सर किसी के आगे, जहाँ हर आदमी झुक जाए वो चौखट तलाश […]
सबके ज़हन में आने की ये तरकीब निकाली हमने, के खुद ही के लापता होने की खबर फैला डाली हमने, बिक गया जब हर ज़रा ज़मी पर कुछ खाली न बचा, छोड़ कर ज़मी चाँद […]
मत डाला करो अब और तेल! यह बाती तो कब की जल कर मिट चुकी है, उस ज्योत के क्षणभर के उजाले के लिए | -Bhargav Patel (अनवरत)
वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ के एक बार मिल कर मुझ से, फिर बिछड़ जाने के लिए आ मुमकिन है अब ये होश भी साथ ने दे मेरा मुझ […]
हो गयी रुकसत घटा बरसने के बाद खिला मौसम नया बरसने के बाद मेरे गमो से रूबरू हो कर ये हवा भी जोर से बहने लगी बरसने के बाद होता आमना-सामना कुछ पल के लिए […]
अपनी सूरत को ज़रा सा इधर कर दे मेरे हर दिल-ऐ-गम को बेअसर कर दे………..!! D K
तुमको मैं जबसे खुदा मान बैठा हूँ! जिन्द़गी को गुमशुदा मान बैठा हूँ! खोजती हैं महफिलें जमाने की मगर, खुद को मैं सबसे जुदा मान बैठा हूँ! #महादेव_की_कविताऐं'(22)
विक्स के इन्हेलर से ली हुई एक लंबी श्वास, ज्यों श्वासनली के बंध दरवाजे खोल देती है! तुम्हारे पुराने कपड़ो में से आती महक, दिल के उन बंध कमरो के ताले तोड़ कर, तुम्हारी यादो […]
जब तू साथ होती है सब अच्छा ही लगता है , तेरा गुस्सा यूँ हो जाना मुझे अच्छा ही लगता है ! तेरी आँखों की गहराई में डूबां हूँ मगर फिर भी , तेरा बाबू […]
मेरे हसने और रोने मे तेरी याद आती है , मेरे जगने और सोने मे तेरी याद आती है ! तेरी अमृत भरी आँसूं को क्या मालूम मेरी जां, सम्न्दर पार विराने मे तेरी याद […]
ढूंढते क्या हो हमें अब, इन वीरान कूचों मे मिलने की खुवाईश हो, तो हमारे कब्र पर चले आना…………!! D K
आँखों से आंसू गिर पड़े आज, इस यकीन लव्ज़ को सुन कर के कभी हमने कहा था उस से मोहोब्बत यकीन का दूसरा नाम है………….!! D K
इस चाँद की शख्शियत भी कुछ काम नहीं तुझ से ज़ालिम जब भी मन करता है देखने को, कम्बख्क्त ये नज़र नहीं आता……………!! D K
मुझे भी शौख हुआ था इस मोहोब्बत का साहिब जब गए इसको खरीदने, तो पूरी ज़िन्दगी ही बैचनी पड़ी……………!! D K
न जाने कैसे और कब इस घर की तस्वीर बदल गई के कभी मरीज़-ऐ-मोहोब्बतो का यहाँ जमघट लगा करता था………….!! D K
कुछ ज़ख़्म हमको ताउम्र याद रह जाते है साहिब के वक़्त भी हार जाता है, उन जख्मो के आगे…………..!! D K
न मोहोब्बत, न साथी और न कोई घर अपना शर्म आती है हमें खुद को, एक इंसान कहते हुए……………!! D K
तन्हाई खुद-बा-खुद बन गयी हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा चलो कोई ये तो नहीं कहेगा अब, ये तन्हा है दुनिया में………………..!! D K
इस खेल मे हारे तो इतना रोना आया है तुमको सोचो मोहोब्बत की बाज़ी हारते, तो क्या होता……………..!! D K
बहुत ही अजीब थी हमारी बंदिशे-ऐ-मोहोब्बत साहिब न वो हमको कैद कर सके, और न हम कही फरार हो सके…………!! D K
बड़ी ही ज़िल्लत-ऐ-ज़िन्दगी मिलती है इस इश्क़ मे साहिब हो अगर शौख-ऐ-चाहत दिल में, तो कर के देख लेना………………!! D K
हमारी आँखों को वो कभी गौर से देखता देखता साहिब तो वो भी रूबरू, रोने के सबब और जागने की खुमारी से होता……….!! D K
मेरे दर्द का आलम गुजर गया है! तेरी बेरुखी का जख्म भर गया है! कोई नहीं है मंजिल न राह कोई, चाहतों का हर मंजर बिखर गया है! #महादेव_की_कविताऐं'(21)
मैं अकेला ही चलूँगा । शीश पर तलवार मेरे, पाँव में अंगार मेरे, या काटूँ या फिर जलूँगा । मैं अकेला ही चलूँगा ।। तुम न मेरा साथ देना, हाथ में मत हाथ देना, अब […]
जिंदगी भी मीठी सुपारी के दाने-सी हो गई है | कुछ देर तक भरपूर मिठाश देती है | लेकिन हलक से उतरते ही गला दुखा देती है | 😛 😀 [It’s humorous. Don’t try to […]
जिंदगी की सुंदर प्लास्टिक, कचरें में बदल जाती है अगर यूज न हो ढंग से, ऐसे ही जल जाती है कभी कभी जिंदगी से बढी मौत हो जाती है जिंदगी कभी कभी पानी में भी […]
जब सुनाई नहीं देती यहाँ किसी को चीख भी किसी की, तो कौन सुनकर आऐगा आगे यहाँ अब खामोशी की आवाज तेरी, जिस तरह मुश्किल है बहती हवा को छू पाना, उसी तरह मुम्किन नहीं […]
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