तेरी काया नहीं तो तेरा साया ही सही कुछ तो है जो मेरे साथ बाकी है, कभी मेरे ख़्वाबों में तेरे अक्स का मुझे छू कर चले जाना, तो कभी तेरे संग बीते लम्हों का […]
तेरी काया नहीं तो तेरा साया ही सही कुछ तो है जो मेरे साथ बाकी है, कभी मेरे ख़्वाबों में तेरे अक्स का मुझे छू कर चले जाना, तो कभी तेरे संग बीते लम्हों का […]
badi muddat se nahi likha mene koi lafz-e-ishq vazah Kalam tut jana he ya uska ruth jana…
अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, तिरंगे के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर मौसम […]
न रखो उम्मीद-ओ-बफा इस दहलीज़-ऐ-इश्क़ पर साहिब लूट जाते है दिल अक्सर, चाहत के इस बाजार में………………………!! D K
कहा से सुन लिया तुम सब ने, ये सरासर झूठ है माना इश्क़ किया है हमने, मगर सजा का हक़दार तो वो भी है……………!! D K
आज लिखू क्या, बस ये समझ ले शब्दों की कमी है दिल लबरेज़ है तेरी यादो से, और आँखों मैं नमी है…………….!! D K
इस मोहोब्बत ने बहुत आज़माया है हमको साहिब हमारा मशवरा है ये, कभी मोहोब्बत को न आज़माना…………..!! D K
क्यों डरते हो साहिब, बारिश के इन बौछारों से भूल गए क्या, बूँद-ऐ-आंसू अपनी आँखों के……………!! D K
काश सपना मेरा ये हकीकत हो जाए, मैं बाहर और तू यूँही अंदर हो जाए, रख कर बर्तन में तुमने मुझे बहुत सताया है, अब तुमको भी सताने की कुछ खुरापात हो जाए, खेले हो […]
किसी के जुल्फ का उठता हुआ बादल बुलाता है, अब तुम्हारी याद में खोकर कोई पागल बुलाता है ! चले आये हो जब से छोड़कर तन्हा किसी को तुम, अब उसके आँख का निकलता काजल […]
बन्द मुट्ठी में कई राज़ दबाये बैठा हूँ, अनगिनत शहीदों के कई नाम छुपाये बैठा हूँ, मेरी खातिर होती रही हैं कितनी ही कुर्बानी, मैं बेज़ुबान सही पर हर जवान की पहचान सजाये बैठा हूँ, […]
जिसकी आँख की सर्दी मुझे माकूल करती है उसीकी आँख की नर्मी मुझे मकबूल करती है पता है उसको कि ये मुमकिन नही लेकिन न जाने क्यो मुझ से वो अभी तक प्यार करती है
कोई काली कमा के रईस हो जाता है कोई सबकुछ लुटा के रईस हो जाता है दुनिया का दस्तूर निराला है यहां तो दिल का लुटेरा भी रईस हो जाता है|
Focused on my unseen, Wash away this dirt that wont come clean, Trying to walk my unsurity with positivity, Learning what cant be taught, muscle memory, Without a thought, whats severing me.. Whats always been […]
रात जाती है फिर से क्यों रात आ जाती है? धीरे—धीरे दर्द की बारात आ जाती है! भूला हुआ सा रहता हूँ चाहतों को लेकिन, करवटों में यादों की हर बात आ जाती है! #महादेव_की_कविताऐं'(26)
मैं हक़ीक़त में आजादी का एहसास करने ही लगा था के बस। फिर से मुझे ज़ंजीरों में जकड़ा जाने लगा।। आ ही गया था के वो लम्हा ए इमकान (सम्भावना) खुशनसीब, के बस यह एक […]
जय हिन्द का नारा फिर बुलंद करो टूटे आत्मसम्मान को फिर एक-सार करो चित की चेतना को फिर चिंतित करो आँखों के पानी को फिर लहु मै परिवर्तित करो अधरों की चुप्पी को फिर बाधित […]
गुलामी का अर्थ तो तब समझ आया, जब नौकरी की कुछ दिन एक प्राइवेट कंपनी में | कहते है उसे ‘नौकरी’ क्यों, यह तो जानता था | किन्तु वह अस्तित्व में है ‘चाकरी’, यह तो […]
रंग हैं विभिन्न देखो फिर भी एक नाम है, एक ही है माटी अपनी एक ही तो शान है, बीच में चक्र जो वो जीत का अभिमान है, मुठ्ठी में है बन्द जो तिरंगा अपनी […]
कट जाते है दिन पैसो की झनकार सुनने के लिए | किन्तु रात आते-आते शुष्क पड़ जाता है वह जीवनरस; जिसे पीने के लिए मथते रहते है जीवनसमुद्र | -Bhargav Patel (अनवरत)
तू जला कर मुझे धुंए के छल्ले बना कर खुश है, तो मैं भी खुश हूँ हर रोज तुझे झुलसता देख कर, तू सुलगाकर मुझे दे रहा है हर लम्हा हवा, तो मैं भी निगल […]
सुकून हम अपने दिल का अब कहू चुके है हम खुद को गम-ऐ-सागर में डुबो चुके है क्यों मजबूर करते हो हमें, ये खत दिखा कर हम पहले से ही उदास है, बहुत रो चुके […]
शुक्र है मोहोब्बत का कोई मज़हब नहीं होता वर्ना ये भी अमीरी और गरीबी का ख्याल करती मिल जाती हर शक्श-ऐ-आमिर को और हम जैसो को ये बेहाल करती……………………………!! D K
हमको तन्हाई में बुला-बुला कर रोये अपने आंसुओं को छुपा-छुपा कर रोये जब देखी उस ने हमारी सिद्क़-ऐ-दिल लोगो अपने ही आँचल में, वो मुँह छुपा-छुपा कर रोये…………….!! D K
यूँ ही नहीं लबरेज़ हो रही, हमारे दिल में यादें उसकी के हमने पिया था मय-ऐ-गुल्ल-रंग उसके नाम का लोगो……………..!! D K
कौन कहता है कम्बक्त, के हम बे-सरो-सामान सोया करते है के रात कटती है सिर्फ, निगेबानी इस दिल-ऐ-गम की करते करते……………!! D K
हमारी इस बात से भी लोग हमसे खफा रहते है के हम सब से क्यों रफा-दफा रहते है के रंग-ऐ-बईमानी जब सब पर चढ़ी है इस दुनिया में तो क्यों हम हरदम सफा-सफा रहते है…………………………..!! […]
उषा की रश्मि जब घोलती है चाय में चुस्ती, शुरू करते है दिन हम अपना | लेकिन शाम आते-आते आन पड़ती है फिर एक चाय की जरुरत; घोली हो जिसमे संध्या ने कोई अलौकिकता हमारे […]
जन्म लेकर साथ तुम मेरे पली थी भेदभावों के समन्दर में वहीं थीं में पला नाजों से लेकिन तुम नहीं कौन कहता पीर मन की अनकहीं पूज्या कहकर लड़कियों की कैसी साधना बहन तुम मुझे […]
तेरी आरजू ने यही काम किया है! मेरी जिन्द़गी को बदनाम किया है! कैसे मैं छुपाऊँ अंजाम को सबसे? दर्द ने नुमाइश तेरे नाम किया है! #महादेव_की_कविताऐं'(22)
कोई ये कैसे बताये, कि गम क्या है इश्क में इन्सा को होश कहां है!
रात का अन्धकार हूँ मैं मुझमे रौशनी भरने के आश में खुद जल कर मिट जाओगी, लेकिन यह अँधेरा कभी सूर्य का तेज नहीं देगा | -Bhargav Patel (अनवरत)
तेरा — मेरा इश्क पुराना लगता है । दुश्मन हमको फिर भी जमाना लगता है ॥ गुलशन – गुलशन खुशबू तेरी साँसों की । मौसम भी तेरा ही दीवाना लगता है ॥ पर्वत – […]
शब्द छलकते रहते है अनवरत आँखों से | और मैं उन्हें श्याही बना कर भरता रहता हूँ कोरे कागजो का खालीपन | -Bhargav Patel (अनवरत)
कइस अकेला है वह, मुझे जाने दो जो किया है वादा, मुझे निभाने दो वो समां भी कितना रंगीन होगा जब मिल बैठेंगे दीवाने दो चलेंगी रात भर इस दिल की बातें और भरेंगे मय […]
हमारे साथ कदम से कदम मिला चल सको तो चलो के इस इश्क़ में कुछ देर ठहर सको तो चलो बहुत ही हौसला चाहिए, इस दिल की निगेबानी करने को अगर तुम इसकी पहरेदारी कर […]
किसी को भूल जाने मे वक़्त तो लगता है के आँखों के आंसू मिटाने में वक़्त तो लगता है जब बैठे हो चाहत-ऐ-किस्ती मे, तो सब्र करो इसको साहिल तक पहुचाने में वक़्त तो लगता […]
शब्दों में नहीं तो खामोशी ही सही, किसी ज़ुबां में तो तू निकल कर सामने आ, कब तलक छुपता रहेगा तू राज़ अब दिल में, खुल कर अब किसी सच सा तू निकल कर सामने […]
देख रहा हूँ रात में जगमगाती लाइट्स इन अंजान रास्तो पर, ज्यों जीवन धबकता है शहरो के दिल में। एक तसल्ली रहती है मन में कि हम जिन्दा है। लेकिन चलती कार के साथ वो […]
न दिल तलाश कर न धड़कन तलाश कर, जो रूह में घर कर जाए वो दरिया तलाश कर, झुकता नहीं है आज कोई सर किसी के आगे, जहाँ हर आदमी झुक जाए वो चौखट तलाश […]
सबके ज़हन में आने की ये तरकीब निकाली हमने, के खुद ही के लापता होने की खबर फैला डाली हमने, बिक गया जब हर ज़रा ज़मी पर कुछ खाली न बचा, छोड़ कर ज़मी चाँद […]
मत डाला करो अब और तेल! यह बाती तो कब की जल कर मिट चुकी है, उस ज्योत के क्षणभर के उजाले के लिए | -Bhargav Patel (अनवरत)
वादा न सही मगर, एक इंसा को बचाने के लिए आ के एक बार मिल कर मुझ से, फिर बिछड़ जाने के लिए आ मुमकिन है अब ये होश भी साथ ने दे मेरा मुझ […]
हो गयी रुकसत घटा बरसने के बाद खिला मौसम नया बरसने के बाद मेरे गमो से रूबरू हो कर ये हवा भी जोर से बहने लगी बरसने के बाद होता आमना-सामना कुछ पल के लिए […]
अपनी सूरत को ज़रा सा इधर कर दे मेरे हर दिल-ऐ-गम को बेअसर कर दे………..!! D K
तुमको मैं जबसे खुदा मान बैठा हूँ! जिन्द़गी को गुमशुदा मान बैठा हूँ! खोजती हैं महफिलें जमाने की मगर, खुद को मैं सबसे जुदा मान बैठा हूँ! #महादेव_की_कविताऐं'(22)
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