रास्तों का कष्ट उस मुसाफिर को क्या जिस मुसाफिर ने इसे जीवन पथ समझा जिनकी मंज़िल ही उलझी बैठी हो उसने कब जीवन का मतलब समझा रास्ते चाहे सुलझे हो या उलझे कब रास्तों ने […]

कुछ अकेले से एहसास फिरते है दरम्या मेरे कुछ कशिश है उदास फासलों के घने अँधेरे दबे कदम चलती साँसें सहमे कदम आते सबेरे हलकी बारिश का मौसम आँखों में धुँआ के फेरे सोती रात […]

देखा जब भी लहरों को मचलते समुन्दर की गोद में लगता कोई बच्चा मचल रहा है अपनी माँ की गोद में देखा जब भी बादलों को मचलते आसमां की गोद में लगता कोई युवा मचल […]

प्रेम सिर्फ अनुभूति है नहीं, प्रेम अनुभूति से अलग कोई एहसास है जिसे देखा जा सकता है किसी की आँखों में किसी की साँसों में किसी की ख़ामोशी में किसी की सरगमों में किसी की […]

काँपते ख़्वाबों को हक़ीक़त की जुम्बिश न मिली रूठे अल्फ़ाज़ों को किसी प्यार की बंदिश न मिली तिश्नगी लबों तक आकर खामोश हो जाती है कशिश को भी और कोई, फिर कशिश न मिली फ़लसफ़े […]

चुपके से कोई शाम ढल जाती है और छोड़ जाती है जागती रातें रातें करवटें बदलती है तारे जागते पहरा देते है ख्वाब आँखों में जगमगाते है होती फिर तैयार एक सुबह आतुर है मन […]

जब किसी को चाहना खता हो जाती है! खुशी ज़िन्दगी से लापता हो जाती है! बेनूर नज़र आती हैं महफिलें सभी, साँस-ए-जिस्म दर्दों की पता हो जाती है! Composed By #महादेव

न जाने किस तरक्की की बात करते हो जब देखो नफरतों की बरसात करते हो हम बैठे है सरेराह जवाबों के तस्सवुर में जनाब तुम हो की हमसे सवालात करते हो जब भी मिलते हो […]

सामने खड़ी  थी  वो  चंचल  हसीना , दीवाना था जिसका मैं पागल कमीना, सब कह रहे थे तुझे देखती है , मुझे भी लगा वो मुझे देखती है , मैं इस  ओर  था  वो उस […]

उनके जुमलों से आती है बूँ जलन की हमने देखी है कुछ ताप उस अगन की फाकामस्ती भी कोई  जागीर से कम नहीं  लुत्फ़ उगते नहीं बदनसीबी है चमन की                     राजेश’अरमान’

मखौल ज़माने का उड़ाने वाले गुनहगार तुम भी हो नफरतों के पेड़ उगाने वाले तलबगार तुम भी हो गुस्ताखी औरों की तो दिखती है नंगी आँखों से खुद के गिरेबां पे होती हाहाकार तुम भी […]

किसी ने कहा ,लिखते क्यों हो? मैंने कहा नहीं लिखता तो कहते कुछ लिखते क्यों नहीं? अपनी सोच को कलम में भर के लिखने को कोशिश कर रहा हूँ क्या करते हो ? सुरंग बनाता […]

स्पर्श करके देखा जब कभी इस दुनिया को हाथ मेरे लहूलुहान हुए स्पर्श करके देखा जब कभी सन्नाटों को सन्नाटे कुछ ओर सुनसान हुए स्पर्श करके देखा जब कभी अपने ज़ख्मों को दर्द कुछ और […]

खुद की तो अब तक तलाश अधूरी है बन्दे तुझे बन्दे रहने की आस जरूरी है कदम कदम पर फैले है आडम्बर इतने इन्हे खत्म करने का प्रयास जरूरी है राजेश’अरमान’

वज़ह कुछ नहीं फिर भी अंदर कुछ नहीं फिर भी धर्म क्या मैं जानता नहीं सबसे आगे खड़ा फिर भी जन्नत तो कोई ख्वाब है गर्क ज़िंदगी हुई फिर भी जुल्म अपने पे ही ढाये […]

“ हद से बढ़ जाए कभी गम तो ग़ज़ल होती है । चढ़ा लें खूब अगर हम तो ग़ज़ल होती है ॥“ इश्क़ है—रंग , हिना—हुस्न ; याद है : खूशबू । फिर भी भूले […]

गम-ए-अंजाम हमें इसकदर डूबोते हैं! हँसते हुए ख्याल के ख्वाब हरपल रोते हैं! चलती है जब ज़िन्दगी दर्द की लकीरों पर, कांपते इरादों को अश्क ही भिगोते हैं! Composed By #महादेव

तेरा सजदा – 117           कोई तेरी खुदाई में घुल, ख़ुद को खुदी भुलाई है कोई अपनी खुदी में घुल,  तेरी खुदी भूलाई है                                                                                                           …… यूई

तेरा सजदा – 116           कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला तुझमें जान बसाई है कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला दुनिया में जान बसाई है                                                                                                           …… यूई

तेरा सजदा – 115           कोई जग की बेजड़-सोचें छोड़, तेरी ही सोच मन मन्दिर रचाई है कोई जग की सब सोचे जोड़, सिर्फ़ तेरी सोच ही बस भुलाई है                                                                                                          …… […]

तेरा सजदा – 114           कोई मन डोर तुझमें बंधवा खुदी ख़ुद से गँवाई है कोई मन डोर ख़ुद में बंधवा खुदी स्दीवी गँवाई है                                                                                                         …… यूई

तेरा सजदा – 113           कोई तेरे इश्क में पूरा सौदाई है कोई तेरे इश्क में भी हरजाई है                                                                                                         …… यूई

तेरा सजदा – 112           कोई मुश्क़िल हर पार कर तुझको स्दीवी पा जाता है कोई मुश्किलों का राग आलाप तुझको खो जाता है                                                                                                        …… यूई

तेरा सजदा – 111           कोई काँटों पे चल समा तुझमें जाता है कोई फूलों की राह भी ना चल पाता है                                                                                                       …… यूई