ना खुद को बदल सका ना तेरी निगाहों को सिलसिला बस चलता रहा खत्म होने के लिए राजेश’अरमान’
ना खुद को बदल सका ना तेरी निगाहों को सिलसिला बस चलता रहा खत्म होने के लिए राजेश’अरमान’
टुकड़े से पड़े है तेरे दिल के आसपास देखना कहीं मेरा दिल तो नहीं राजेश ‘अरमान’
चुपके से कोई शाम ढल जाती है और छोड़ जाती है जागती रातें रातें करवटें बदलती है तारे जागते पहरा देते है ख्वाब आँखों में जगमगाते है होती फिर तैयार एक सुबह आतुर है मन […]
मासूमियत उसके चेहरे की यूँ ग़ुम हुई जैसे कोई गाँव ,शहर में तब्दील हो गया हो राजेश’अरमान’
काबिज जामे-लवो पर जलवा-ए शबाब हो गए घटा-ए जुल्फ मैखाना वलवला-ए रंगे चश्म शराब हो गए!? -रमेश
जब किसी को चाहना खता हो जाती है! खुशी ज़िन्दगी से लापता हो जाती है! बेनूर नज़र आती हैं महफिलें सभी, साँस-ए-जिस्म दर्दों की पता हो जाती है! Composed By #महादेव
. . ღღ__ख़ुदा से माँगते क्यूँकर, भला हम, दुआएँ उनके रोने की; . वो इश्क करने लगें किसी से, सज़ा को इतना ही काफी है!!…..#अक्स .
न जाने किस तरक्की की बात करते हो जब देखो नफरतों की बरसात करते हो हम बैठे है सरेराह जवाबों के तस्सवुर में जनाब तुम हो की हमसे सवालात करते हो जब भी मिलते हो […]
सामने खड़ी थी वो चंचल हसीना , दीवाना था जिसका मैं पागल कमीना, सब कह रहे थे तुझे देखती है , मुझे भी लगा वो मुझे देखती है , मैं इस ओर था वो उस […]
धर्मों में बिखरा इंसान सही मायने में नास्तिक है राजेश’अरमान’
उनके जुमलों से आती है बूँ जलन की हमने देखी है कुछ ताप उस अगन की फाकामस्ती भी कोई जागीर से कम नहीं लुत्फ़ उगते नहीं बदनसीबी है चमन की राजेश’अरमान’
मखौल ज़माने का उड़ाने वाले गुनहगार तुम भी हो नफरतों के पेड़ उगाने वाले तलबगार तुम भी हो गुस्ताखी औरों की तो दिखती है नंगी आँखों से खुद के गिरेबां पे होती हाहाकार तुम भी […]
लफ्जों की कबड्डी से मौन की कुश्ती भली राजेश’अरमान’
किसी ने कहा ,लिखते क्यों हो? मैंने कहा नहीं लिखता तो कहते कुछ लिखते क्यों नहीं? अपनी सोच को कलम में भर के लिखने को कोशिश कर रहा हूँ क्या करते हो ? सुरंग बनाता […]
स्पर्श करके देखा जब कभी इस दुनिया को हाथ मेरे लहूलुहान हुए स्पर्श करके देखा जब कभी सन्नाटों को सन्नाटे कुछ ओर सुनसान हुए स्पर्श करके देखा जब कभी अपने ज़ख्मों को दर्द कुछ और […]
खुद की तो अब तक तलाश अधूरी है बन्दे तुझे बन्दे रहने की आस जरूरी है कदम कदम पर फैले है आडम्बर इतने इन्हे खत्म करने का प्रयास जरूरी है राजेश’अरमान’
वज़ह कुछ नहीं फिर भी अंदर कुछ नहीं फिर भी धर्म क्या मैं जानता नहीं सबसे आगे खड़ा फिर भी जन्नत तो कोई ख्वाब है गर्क ज़िंदगी हुई फिर भी जुल्म अपने पे ही ढाये […]
. ღღ__कल फिर आईने ने मुझसे, ये पूछ ही लिया “साहब”; . कि कहाँ रहते हो आज-कल, और कबसे चेहरा नहीं देखा!!…..#अक्स .
ღღ__प्यार को अशआरों में, बयान करना बड़ा मुश्किल है; . ये तो अच्छा हुआ, निगाहों की हर बात वो समझते रहे!!….#अक्स .
दिलकश ख्यालों से दिलकशी का सबक कुछ यूँ सिखा गये हो , हुज़ूर ! अब तो दिलकशी लफ्ज से भी डर लगने लगा है
पेश ए खिदमत् में तो है ही ये दिल आपके हुज़ूर, मारना है तो मार ही दो ना , यूँ तड़पाना गैरों को किसी बड़प्पन की निशानी तो नहीं,
“ हद से बढ़ जाए कभी गम तो ग़ज़ल होती है । चढ़ा लें खूब अगर हम तो ग़ज़ल होती है ॥“ इश्क़ है—रंग , हिना—हुस्न ; याद है : खूशबू । फिर भी भूले […]
Ek black face wali ladki ko dekhke arj kiya he. Hum dekhte the unko to log pagal samjhane lage. Hum ishq krne lage unse to rahnuma samajhane lage. Baton hi baton me humne kah diya […]
गम-ए-अंजाम हमें इसकदर डूबोते हैं! हँसते हुए ख्याल के ख्वाब हरपल रोते हैं! चलती है जब ज़िन्दगी दर्द की लकीरों पर, कांपते इरादों को अश्क ही भिगोते हैं! Composed By #महादेव
ღღ__सुलगती रहीं तुम्हारी यादें “साहब”, कल फिर से रात भर; . मैं जलता रहा तमाम रात, फिर से आंसुओं की बारिश में !!….#अक्स
लफ़्जों का खेल तो देखो कभी हंसाते है, कभी रूलाते है
दिन पे दिन गुजरते जा रहे है, मगर जिंदगी है कि गुजरती ही नहीं
WO sitam karte-karte choor ho gye Hum sahte- sahte mashahoor ho gye Lgg gyi hai aadat sahne ki hame Ya apni aadat se wo mazboor ho gye Her taraf jo aalam tha— kaise kahe Apni […]
ღღ__चलो मिल ही लेते हैं “साहब”, फिर कभी न मिलने को; . यही ख्वाहिश बची है दिल में, इक आखिरी ख्वाहिश की तरह!!….#अक्स .
तेरा सजदा – 117 कोई तेरी खुदाई में घुल, ख़ुद को खुदी भुलाई है कोई अपनी खुदी में घुल, तेरी खुदी भूलाई है …… यूई
तेरा सजदा – 116 कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला तुझमें जान बसाई है कोई लाज-शर्म-हया-तेह्ज़ीब भूला दुनिया में जान बसाई है …… यूई
तेरा सजदा – 115 कोई जग की बेजड़-सोचें छोड़, तेरी ही सोच मन मन्दिर रचाई है कोई जग की सब सोचे जोड़, सिर्फ़ तेरी सोच ही बस भुलाई है …… […]
तेरा सजदा – 114 कोई मन डोर तुझमें बंधवा खुदी ख़ुद से गँवाई है कोई मन डोर ख़ुद में बंधवा खुदी स्दीवी गँवाई है …… यूई
तेरा सजदा – 113 कोई तेरे इश्क में पूरा सौदाई है कोई तेरे इश्क में भी हरजाई है …… यूई
तेरा सजदा – 112 कोई मुश्क़िल हर पार कर तुझको स्दीवी पा जाता है कोई मुश्किलों का राग आलाप तुझको खो जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 111 कोई काँटों पे चल समा तुझमें जाता है कोई फूलों की राह भी ना चल पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 110 कोई तेरी जटिल राह् को अटल इरादों से पार कर जाता है कोई तेरी जटिल राह् में कुछ कदमों में ही बहक जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 109 कोई तुझमें सिमट कर सकून पाता है कोई तन में सिमट कर सकून पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 108 कोई तेरी आग में ख़ुद को जला जाता है कोई ख़ुद की आग में सबको जलाता है …… यूई
तेरा सजदा – 107 कोई तेरी रोशनी में जीवन भर जीता है कोई तेरी रोशनी को जीवन भर खोता है …… यूई
तेरा सजदा – 106 कोई तेरे पावन इश्क़ की रो में सर झुका कर बैठा रह्ता है कोई ख़ुद की दुनियावी चाहतों में नशों में लिप्त रह्ता है …… यूई
तेरा सजदा – 105 कोई अपनी हर सफलता को तेरी दुआ कह जाता है कोई अपनी हर सफलता में ख़ुद की दुहाई देता है …… यूई
तेरा सजदा – 104 कोई ग़ुरबत के वक्त को तेरी रज़ा मान हाथ जोड़ जाता है कोई दौलत की माया में ख़ुद के गुणगान गाता रह जाता है …… यूई
तेरा सजदा – 103 कोई तुझे पाने के इंतज़ार में ही मस्त रह्ता है कोई ख़ुद की चाहों को पाने में ही खोया रह्ता है …… यूई
तेरा सजदा – 102 कोई तेरी जूठन को भी चूम कर अपनाता है कोई तेरे प्रशाद में भी स्वाद ढूंढ़ ना पाता है …… यूई
तेरा सजदा – 101 कोई बिना ख्वाहिश के आजन्म तुझ्से मिलते रह्ता है कोई बिना ख्वाहिश के कभी याद भी ना तुझे करता है […]
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