उसकी नज़रों की तलाशी में
मेरे किरदार बदले से मिले
मैं ढूंढ़ता रहा उसकी आँखों में
चंद कतरे पर जमे से मिलें
राजेश’अरमान’
Category: शेर-ओ-शायरी
-
उसकी नज़रों की
-
अब मंज़िल
अब मंज़िल मेरे साथ-साथ चलती है
जब से बनाया मंज़िल अपने साये को
राजेश’अरमान’ -
चंद क़दमों में
चंद क़दमों में थक के बैठ गया राही
मंज़िल मुसीबत नहीं जो बैठे- बैठे गले पड़े
राजेश’अरमान’ -
कुछ खास
कुछ खास है वो मेरे वास्ते
दे गए सब बिना मोल-भाव के
राजेश’अरमान’ -
वीराने भी
वीराने भी अब गुफ्तगू करने लगे
नज़र लग गयी इसे भी जमाने की
राजेश’अरमान’ -
चाहा था
चाहा था इक बार फिर अजनबी बन जाना
वो मिलते है हर बार अब अजनबी से
राजेश’अरमान’ -
कुछ तो हैरान
कुछ तो हैरान होगी ज़िंदगी भी
जब हमने अपना मुँह मोड़ लिया
राजेश’अरमान’ -
मंज़िल
मंज़िल की बेताबी खत्म हुई
यूँ कारवां से दिल लगाया हमने
राजेश’अरमान’ -

मुझसे नज़र मिला के कह
क्यों यह परदा दारी है, आ खुल के मेरे सामने आ
मुझसे नज़र मिला के कह, तू कभी ना ग़लत हुआ
सब नजरों में बन खुदा, भय का यह व्यापार चला
मुझसे ना कहना ओ खुदा, के युई है तेरी कोई बला
…… युई
-

फिर तू मुझे छल गया
गरूर–ए–नजर में तेरी, मेरा सर झुका रहा
तूने जब आवाज़ दी, दिल ने पलट कर कहा
शायद तूँ बदल गया, घर मेरा मुझे मिल गया
फिर तू मुझे छल गया, दिल से मेरा घर गया
…… युई
-

हर रिश्ता तार-तार हुआ
रूह मेरी तड़प तड़प गई, तूने ना पुकार सुनी
तुझसे ना–उम्मीदी में, बैरंग सी यह फिज़ा बुनी
ज़िन्दगी तो बसर गई, हर रिश्ता तार–तार हुआ
तेरे–मेरे इस खेल में, हर किरदार दागदार हुआ
…… युई
-

क्यों तूँ सोचता रहा
जाने क्यों तुम नाराज हुए, ख़ुद ही मुझको ज़ुदा किया
ना थे हम हमराज़ कभी, फिर क्यों यह शिकवा किया
ता–उमर चली तूने अपनी राह्, दिल मेरा लोच्ता रहा
चला जब मैं अपने दिल की राह्, क्यों तूँ सोचता रहा
…… युई
-

शायद था मैं कोई अंग तेरा
था मैं चला कहां से, इसकी ना कोई याद मुझे
हुआ मैं ग़लत कहां पे, इसका ना आभास मुझे
चेतना है धुंधली सी, शायद था मैं कोई अंग तेरा
क्या वोही है घर मेरा, जिस्मे था कभी संग तेरा
…… युई
-
जुर्म उनके
जुर्म उनके ,सितम उनके ,खता उनकी
हम तो अब भी खाली हाथ बैठे है
राजेश’अरमान’ -
जीतने की ख्वाइश
जीतने की ख्वाइश में कछुए सा चल रहा हूँ,
लेकिन ख्वाइशों का खरगोश सोने के लिए रूकता ही नहीं
राजेश’अरमान’ -
अपने साये
अपने साये भी अब अनजान नज़र आते है
बिन बुलाये से मेहमान नज़र आते है
हर शक्स उदास हर रिश्ते अब तो
पत्थरों से ये बेजान नज़र आते है
राजेश’अरमान’ -
तालीम
तालीम कुछ गिनती की यूँ काम आई
बस जाती सांसों को गिनता रह गया
राजेश’अरमान’ -
सच ने जब
सच ने जब भी तोडा है दम
झूठ ने ही उसे अग्नि दी है
राजेश’अरमान’ -
था वो गुलाब
था वो गुलाब के मानिंद
नज़र बस तेरी काटों पे गड़ी
मैंने भी महसूस किया कैक्टस को
नज़रे जो कभी फूलों पे पड़ी
राजेश’अरमान’ -
जब अपनी ही
जब अपनी ही साँसें एहसान जताने लगे
समझ लो साँसें भी अपनी हो गई है
राजेश’अरमान’ -
कीमत
धर्म की दूकान सदियों से चल रही है ,
कीमत तो चुकाई पर सामान नहीं मिला
राजेश’अरमान’ -
बिखरी जा रही
बिखरी जा रही ज़िंदगी कुछ तेज रफ़्तार से
कोई मोहलत नहीं कुछ भी दुरुस्त करने को
राजेश’अरमान’ -
तेरी बेरुखी
तेरी बेरुखी इस कदर काम कर गई
बेवज़ह वक़्त को बदनाम कर गई
रिश्तों पे पड़ी धूल जब जमने लगी
ख़ामोशी के राज़ सरेआम कर गईराजेश’अरमान’
-
काफिला
हर फैसले मेरे तेरे क़दमों में थे
तूने क़दमों का फ़ासला कर लिया
न हो दरम्यां सांसें भी अपनी लेकिन ,
तूने ज़ख्मों का काफिला चुन लिया
राजेश’अरमान’ -
अजैविक गम
अजैविक गम की खाद से
ख़ुशी हो गई बोन्साई
राजेश’अरमान’ -
होठों पे
होठों पे ख़ामोशी की लहरें
ढूंढ़ती है लफ़्ज़ों के समुन्दर
राजेश’अरमान’ -
कुछ तो बात है तेरे शहर की
कुछ तो बात है तेरे शहर की
ये ज़ख्मों को भी तन्हा नहीं रखते
राजेश’अरमान’ -
सलीका
वो खफा है अब इस बात पर
आता नहीं सलीका गम उठाने का
राजेश ‘अरमान’ -
soch
अपनी उलझनों के हम यूँ आदी हो गए है
कभी मुजरिम तो कभी फरियादी हो गए है
न होता कुछ तो कुछ और जरूर होता
बस इसी सोच में कोई बर्बादी हो गए है
राजेश’अरमान’ -
“जवाब” #2Liner-62….
ღღ__मैं कह ही नहीं पाता, या तुम समझ नहीं पाते साहब;.कि अक्सर कुछ सवालों के, कोई जवाब नहीं होते !!…..#अक्स. -
मुक्तक
ख़्वाबे-वफ़ा के ज़िस्म की खराश देखकर
इन आँसुओं की बिखरी हुई लाश देखकर
जब से चला हूँ मैं कहीं ठहरा न एक पल
राहें भी रो पड़ीं मेरी तलाश देखकर©® लोकेश नदीश
-
लफ़्जो का खेल
सब लफ़्जो का खेल है इस दुनिया में
ये ही रिश्ते बनाते भी है बिगाड़ते भी यही है -
“जुदा” #2Liner-61…….
ღღ__इसमें कोई शक नहीं, कि तुम सबसे जुदा थे “साहब”;.मगर ऐसा भी क्या जुदा होना, कि हमसे ही जुदा रहो!!…..#अक्स.
-
कोई बद्दुआ करे!!#2Liner-60……
ღღ__तू गर नाराज़ है मुझसे, तो रह, खुदा करे;.मैं भी चाहता हूँ मेरे हक़ में, कोई बद्दुआ करे!!……#अक्स. -
“शौक-ए-दीदार” #2Liner-59……
ღღ__इबादतगाह भी जाऊं तो, तुझे ही ढूँढती हैं नज़रें;.शौक-ए-दीदार ने तेरे, मुझे काफ़िर बना दिया !!…..#अक्स.
-
“खत” #2Liner-58…..
ღღ__आखिर इसमें उनकी, खता भी क्या है साहब;.जब मोम सा दिल रखोगे, तो दुनिया जलाएगी !!……#अक्स.
-
“तौबा साहब, तौबा” #2Liner-56…
ღღ__वो इक पल जिसमें तुम्हारे लब हों, मेरे लबों के पास;.उस वक़्त भी हम रहें शरीफ?? “तौबा साहब, तौबा” !!…..#अक्स.
-
चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है
चाहतों की दुनिया से अब उकता गये है
सब दिखता है यहां, मगर कुछ मिलता नहीं -
“तुमसे गले मिले हुए” #2Liner-56
ღღ__यूँ तो अरसा हुआ है साहब, तुमसे गले मिले हुए;.पर जिस्म मेरा आज भी, इत्र-सा महकता है !!……#अक्स.
-
“याद” #2Liner-55
लो आ ही गयी साहब, उनकी याद, आज फिर आखिर;
.
और वो आज फिर नहीं आये, इतने इंतज़ार के बाद !!…..#अक्स -
वो खुशनुमा चेहरा
वो खुशनुमा चेहरा कितना नूरदार है आज की रात
जैसे फैल गया हो चांद पिघलकर उनके रूखसारों पर
-

शीश महल
जब से तुझको पाया है ,
जिव देखो तुझ्सा लगता है ,
दुनियाँ मानो शीश महल ,
हर चेहरा ख़ुद का लगता है I
…… यूई
-
“ख्वाब” #2 Liner-54
ღღ__आँखों को ख्वाब की, इस कदर भूख है साहब;.जैसे लगता है ख्वाब में, “तुम” आ ही जाओगे!!…..#अक्स.
-
“इन्तेहा” #2Liner-53
तसव्वुर में तेरे, अब तो कटती नहीं रातें;
.
आखिर तेरे इंतज़ार की, कोई इन्तेहा तो हो!!….#अक्स -
“रस्ता”……#2Liner-52
ढूंढने से ही मिलता है, पर रस्ता ज़रूर होता है;
जो महँगा होता है कभी, वो सस्ता ज़रूर होता है!!…..#अक्स




