कुन्दन था मेरा कुन्दन यादव कुन्दन बन के बीच सितारों में। फिर गहना बन निकलोगे तुम खालिस हो कर अंगारों में।। तेरी शहादत अमर रहेगी हर बच्चा बच्चा गाएगा। गान तुम्हारे नाम का ये ‘विनयचंद […]
कुन्दन था मेरा कुन्दन यादव कुन्दन बन के बीच सितारों में। फिर गहना बन निकलोगे तुम खालिस हो कर अंगारों में।। तेरी शहादत अमर रहेगी हर बच्चा बच्चा गाएगा। गान तुम्हारे नाम का ये ‘विनयचंद […]
हम भी बेसुध से तेरे बेवफाई से जीना छोड़ दिये थे बताना भूल नहीं की कोई साथ नहीं थे तब सिर्फ गिने चुने छोड़ तुम जानते तोह क्या बोलते सिर्फ इतनी सी बात पे तुमने […]
भोजपुरी कविता – तड़पत रही हम दिनरात | रिमझिम बरसत बा बरसात | तड़पत रही हम दिनरात | पिया बिना बुनीया ना सुहात | तड़पत रही हम दिनरात | गरजत बरसत अईले असढ़वा | लहकत […]
कविता- जितना जरूरी है | हो रहा युद्ध कोरोना से हमारा जितना जरुरी है | इंसानियत के दुश्मन वाइरस का मिटना जरूरी है | सबका साथ सबका विश्वास अब जिताएगा हमे | नियम लॉक डाउन […]
है कोई दरवाजा जो अभी तक बंद है मेरे दिल को अभी तुमने देखा ही कहां है
कलाकार सुशांत बालीवुड का गलीयारा बिखरा चरों तरफ सन्नाटा पसरा रो रो कर फैन्स का हाल हुआ एक कलाकार का शोषण हुआ क्या वजह था तुम हार गये सुशांत सिंह क्यो तुम चले गये लड़ते […]
ओस की बूंद चाटकर, हवा वंसती को खाकर। हरियाली का दामन पकड़, खुशी का प्यारे इजहार कर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वीरों की शक्ति अजर अमर रहें, थाती देश का सुसज्जित रहें। नयन की भाषा पढ़ना सिखों, अचल संपत्ति का हिसाब रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ओस की नयना शोभे तन पर, हवा वंसती मोहे मुझको । हरियाली तेरे बदन की सजनी, खुशियों की आभा बनकर बुलाये मुझको।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हवा का झोंका प्यार का एहसास कराता, ओंस की बूंद तन मन में आग लगाता। हरियाली खेतों की तराशे तुझे सनम, बसंती झोंका खुशीयों का गीत सुनाता।। महेश गुप्ता जौनपुरी
जरूर वहाँ कोई खड़ा है, रात के अंधेरे में। लगता है डर घेर लो, अपने बांहो के घेरों में।।
जब राहत के दवा लाया राहत इन्दौरी से । तब उतरने लगा इश्क़ ए बुखार मेरे सिर से।।
# शहीदों को शत-शत नमन कोई शहादत ज़ाया नहीं जाएगा। दुश्मन कदम पीछे जरूर हटाएगा। ये आज का सुदृढ़ भारत है, तू फिर से मुँह की खाएगा। आँखें पूरी खोल कर देख, सामने खड़ा शेर […]
बहुत याद आते हैं, वो गुजरे हुए पल। वो तुम्हारे खत का इंतजार। हर पल मिलने को बेकरार। गलियों में घुमना बनकर आवारा, पाने को एक झलक का दीदार। बहुत याद आते हैं। तुम्हारे मिलने […]
खाया नमक देश का तो थोड़ा नमकहलाल बनो। बेशक बिपक्ष बन बैठे हो पर भारत माँ का लाल बनो।। समर मरन और शत्रु दलन का सबूत मांगना क्या समीचीन है ? प्रमाण चाहिए खोतों को […]
ए सनम स्याही नहीं है तो क्या हुआ । तेरी नैनो के स्याही से काम चला लुंगा।।
पथ पथ ख़ुशी की खोज में भटकता रहता हूँ उसके नूर के लिए तरसता रहता हूँ वो है हमसे खफा उस से मिलने के लिए भेस बदलता रहता हूँ पैसा पा लिया शोहरत पा ली […]
मैं वादा नहीं करता, पर मिलेंगे फिर जरूर। किसी न किसी मोड़ पर, किसी न किसी राहे-आम पर। किसी न किसी मंजिल पर, किसी न किसी मुकाम पर। मैं वादा नहीं करता, पर मिलेंगे फिर […]
जब वो पेदा होती है तो, हर कीसी के दिमाग में उदासी छा जाती है, बाप के सिर का बोझ भी कहीं जाती है, लेकिन उसी बाप के सिर का ताज बन जाती है, अपनों […]
आंखों से आंखें जब मिल जाती, प्यार का बिगुल दिल में बज जाती। इशारों की बातें जब जेहन में उतरती, आंखें गड़ाएं नजरें शनम को ढुढ़ती।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
पंच परमेश्वर का राय सदैव लेकर, करते रहना सत्य का अभिषेख। झूठे मक्कार को बेनकाब करके, लिखते रहना तुम सच्चाई पर लेख।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आंख में मिचोली बहुत हुआ, थाम लो अब मेरा तुम हाथ। प्रेम डगर बहुत कठिन है सनम, हाथों में हाथ लेकर चूम लो माथ।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
धोखा चाल को करो बेनकाब, पंच परमेश्वर से लगाओ गुहार। सत्य की राह पर चलकर प्यारे, उलझकर में पड़कर ना मानो हार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रेम डगर आसान नहीं है प्यारे, बरसों लग जाते हैं इसे परखने में। हौसले के दम पर जो लड़ते हैं, प्यार में वही जीत सफल होते कहने में।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आंखों का काम ही है, कहीं ना कहीं टिक जाना। परिस्थितियों को जांच परख कर, हौसले से प्यार का गुल खिलाना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रेम पथिक जब चलते राहों में, पाकर ही लौटते प्रेमी राहों को। गली मोहल्ले का नाम पता कर, चूम लेते कांटेदार शाखाओं को।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रेम में दिल का तड़पना होता है, अपने प्रीति को पाने का चाह होता है। दर्द लोक लाज सब बिसरा कर, प्रेमी खुद को पागल आवारा समझता है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नजर से नजर मिली दिल की बात कह गयी, दर्द प्यार तड़प और आह की बात कह गयी। छुप छुपकर देखना अच्छा लगा मोहब्बत को, तन्हाई जुदाई की बात पल पल की रात कह गयी।। […]
सच्चे आशिक जिस्म के मोहताज नहीं होते, प्रेम समर्पण करके खुद को आबाद कर जाते। आंच ना आये मोहब्बत की छोर में, इसलिए प्रेमी खुद को सरेआम मौत को गले लगाते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दिल जब लगता अच्छा बुरा कहां दिखता, तड़प आह दर्द को कहां वह गौर करता। आंखों आंखों से प्यार का इजहार करके, खुद को हिर रांझा जैसा मशीहा समझता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
समय ने ऐंसा करवट लिया, सब गूलर के फूल हो गये । कोरोना महामारी में पड़कर, सब अपनों से दूर हो गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बेकार से बेगार भली ये जिंदगी, रहम से भली बिखर जाये ये जिंदगी। ताने बाने सुनना मेरा आदत नहीं दोस्त, खुद को झुकना वसूल नहीं मेरी जिंदगी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना महामारी नहीं बहाना है, मनु समझो बात को यह जानलेवा है। हंसी-मजाक में ना लो इस वैश्विक महामारी को, सारी दुनिया इस समय कोरोना से हारी है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दाद देता हूं आपके परख को, सलाम करता हूं आपके समझ को। आप समझ लेती है इशारों इशारों की बातें, बड़ी शातिर है परखने में लोगों को, ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
रावण का अंत करना है तो, घर के वीभीषण को ढूंढ़ो । सच्चाई पर विजय पाना है तो, अपने अंदर के अवगुणों को ढूंढ़ो।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
मुफ्त पर आश्रित है देश के बेईमान, अपना जेब भरने के लिए बेंच दिये इमान। माला पहन ईमानदारी का करते है ढ़ोंग, ऐंसे धूर्त पुरुष को करते है दूर से नमन।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कर्म हमेशा करते रहना, धर्म का देना सदैव तुम साथ। हे पावन धरा के वीर सपूत, वीभीषण को रखना तुम साथ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अन्याय जब हद से बढ़ने लगे, नारी का हरण कलुषित पुरुष करने लगे। धर्म का विभीषण जन्म तब हैं लेता, जब पाप अमृत कुंड का विकास होने लगे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
विनाश का जब जब पहरा होता है, तब तब एक दिव्य पुरूष अवतार लेता है। कृष्ण कन्हैया प्राण हर लेते है मामा का, विभीषण भाई का साथ छोड़ देते है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आशा की किरण देख मुस्कराते रहें, अपनों को गले लगा गला दबाते रहें। विश्वास में लेकर इमान का करते रहें सौदा, अपना समझ अपने को मौत के घाट उतारते रहें।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सर पर जब छा जाता कुलक्षित विचार, मानव करने लगता दुसरो पर अत्याचार। धन दौलत के ऐंसो आराम में अंधा होकर, तनिक नहीं करता वह अच्छे बुरे पर विचार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
टूट कर बिखर रहा आज रिस्ता हर मोड़ पर, हैवानियत का शिकार हो रहा बेकसूर बेचारा। धर्म मोह को त्याग कर कर रहें अपराध, सत्य को बचाने को बचा नहीं कोई सहारा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
रिश्ते में मतभेद जब हद से ज्यादा हो जाये, अहमियत अपनों का जब कर ना पाये। जब नारी का इज्जत का चीर हरण होने लगें, तब एक महाभारत की लड़ाई होने को आये।। ✍महेश गुप्ता […]
खुद पर लोग पर्दा डाल रहे हैं, दुसरो को लोग बेनकाब करने में लगे हैं। खामखा लश्कर में ऊंट बदनाम हो रहा, लोग यहां कौवे को कोयल समझ रहे हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बदनामी के डर से भाग ना जाओ, भागने वाले को दोषी मानती दुनिया। उठो लड़ो और अपना पहचान बनाओ, नहीं तो बदनाम कर देगी ये दुनिया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कौआ कब तक कोयल बनकर मौज करेगा, अपने सारे अय्यासी पर कब तक ऐस करेगा। भेड़िया भले ही शेर का खोल पहन लें, चोरी एक दिन उजागर होकर ही रहेगा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दाग अच्छे होते है माना मैंने, बदनामी के धब्बे होते हैं माथे के कलंक, बच कर रहना इस मतलबी दुनिया से, हंसती खेलती जिंदगी को बना देते है नरक।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
महाभारत की लड़ाई घर घर छाई, किस सकुनी ने भाई भाई में आग लगाई। कलयुग के प्रकोप में भला कोई मिला नहीं, एक दुसरे में झगडा लगा देखता तू मनु लड़ाई।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दुनिया के चक्कर में पड़कर, खुद को खुद से दूर ना करो। अपने अंदर के प्रतिभा को पहचान, देश का मेरे मित्र तुम नाम करो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
झूठ फरेब को करो बीच बाजार में बेनकाब, धूर्त को बदनाम कर सच्चाई का दो साथ। अपने पथ पर बढ़ते जाओ लेकर प्रभू का नाम, सब अच्छा अच्छा होगा नेक का दो तुम साथ।। ✍महेश […]
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