बड़ा इतराता है जुगनू चांद की धूल को मल कर तेरी तारीफ तो बस इस रात ने की है बेपर्दा कर सके जो अख्ज की भीड़ को इतनी हिम्मत तो बस अफताब ने की है
बड़ा इतराता है जुगनू चांद की धूल को मल कर तेरी तारीफ तो बस इस रात ने की है बेपर्दा कर सके जो अख्ज की भीड़ को इतनी हिम्मत तो बस अफताब ने की है
ਬੇਸ਼ੱਕ ਕਹਿਣਾ ਕੋਈ ਗ਼ਲਤ ਨਹੀਂ ਕਿ, ਆਰਾਮ ਅਨੰਦਮਈ ਕਿਰਿਆ ਹੈ, ਪਰ ਮੈਨੂੰ ਮੇਰੇ ਸੌਣ ਦਾ ਡੂੰਘਾ, ਅਫਸੋਸ ਹੈ, ਜਾਗ ਆਈ ਤੇ ਪਤਾ ਕਿ, ਉਹ ਕਵਿਤਾ ਤਾਂ ਹਜੇ ਅਧੂਰੀ ਹੈ, ਜਿਸਨੂੰ ਪੂਰੀ ਪੜ੍ਹਨ ਦੀ ਮੈਨੂੰ , […]
भोजपूरी लोकगीत (पूर्वी धुन ) – तोहरो संघतिया याद आवे जब तोहरो संघतिया | करे मनवा तनवा के झकझोर | बिसरे नाही प्रेमवा के बतिया , बरसे मोरे नयनवा से लोर | याद आवे जब […]
क्योंकर छिलका खाए कृष्णा? इतिहास हमारा क्या कहता है ? क्या मतलब है इसका कहना? एक प्रश्न मन पूछ रहा है क्योंकर छिलका खाए कृष्णा? कदलीवन नारायण को प्यारा कदली से नित होती पूजा। तभी […]
पिता बचन को मान रामजी गए वास को वन में। राम उपासक बनके भरतजी सन्यासी हो रह जीवन में।।
यूँ तो किसी के गिरेवान में मत झाँकना । झाँककर भी किसी को कम नहीं आँकना। गिरिवर उठाने वाले से बचाकर माखन क्योंकर छीका नित -नित ऊँचा टाँगना।।
समय तो समय पर ही समय से चलता रहता है। फ़िक्र कहां है किसी को किसी की…? जमाना तो यूं ही आगे बढ़ता रहता है।
मेरे जीवन की पहली कविता मेरे गुरु को समर्पित Teachers Day स्कूल का वह दिन मेरे जीवन का एक सबसे खास दिन बन गया जिसे मैं कभी भुला नहीं सकती उस दिन मुझे पहली बार […]
माँ ! मुझे फौज में भेज दे। ना बेटा ! अपने मन को जरा परहेज़ दे।। बन जा बेटा आॅफिसर तू राज करोगे जनताओं पर। पब्लिक से नेताओं को भी नाज रहेगा सेवाओं पर।। साहेब […]
हम बदजबान थे बदनाम नहीं ईमान थी तू बस यह गलती कर बैठे
ढ़लती उम्र मे जनवरी को बीते दिसंबर की याद आयी है। आज गुजरे हुये वर्ष की पीर उभर कर सामने आयी है।
नब्ज टटोलकर देख ले निर्मोही तुम्हारे हीं प्यार में बीमार हूँ। ये दिल दे चुकी कब के तुझको सिर्फ एक दीदार को बेकरार हूँ।।
तुम्हें देख दिल मेरा चहकता है जो दुनिया देखूं तो बहकता है। तुम से है मेरी दुनिया प्रियतम तेरे दिल में मेरा दिल धड़कता है।।
ऐ फूल मेरे बाग के खुद को लपेट ले। आ रही है तितलियाँ खुशबू समेट ले।।
वक्त भी एक शिक्षक है जो देता सच्ची शिक्षा। वक्त का सम्मान किया जो नहीं मांगेगा कभी भिक्षा।।
गणों को नाज़ है कि वो तंत्र का हिस्सा हैं क्या पता उन्हें कि वो षड़यंत्र का हिस्सा हैं ये जो श्वेत वस्त्र धारी हैं कहलाते लोकतंत्र के पुजारी हैं असल में चुनावी वक्त के […]
गणों को नाज़ है कि वो तंत्र का हिस्सा हैं क्या पता उन्हें कि वो षड़यंत्र का हिस्सा हैं ये जो श्वेत वस्त्र धारी हैं कहलाते लोकतंत्र के पुजारी हैं असल में चुनावी वक्त के […]
मैं नहीं रहा अफसोस नहीं उस त्याग की भट्टी में जलकर मैं देश की धमनी बहता हूं इस देश की मिट्टी में मिल कर
त्यागा श्रृंगार ले नयन अंगार क्या खूब वीरांगना शक्ति है अब पूत खड़ा किया सरहद पर क्या प्रबल राष्ट्र की भक्ति है
हिन्दी ओज कविता-अभिनन्दन बना लेंगे | मिट्टी वतन सिर माथे चन्दन बना लेंगे | ऊंचा तिरंगा भारत सदा वंदन बना लेंगे | रंगी शहीदो खून आजादी नमन उनको | कुर्बानी शहीदों हम वचन बंधन बना […]
जाने के बाद तुम्हारे हम दोस्त तो बनाते हैं वो महफिलों में खो जाते हैं हम फिर अकेले हो जाते हैं
वो झूठ बोल रहा था बहुत सलीके के साथ मैं ऐतबार ना करती तो क्या करती
न जाने किस मोड़ पर उनसे अब मुलाकात होगी। दोस्तो! बताओ फिर कैसे बीते लम्हों पर बात होगी।।
शोर बहुत है बाहर.. कि अंदर चुप ; अब रहा नहीं जाता ! क्या कहूँ उन बहरों से इस दिल की बात.. बिना धमाके के जिनको कुछ समझ नहीं आता !! :- प्रेमराज आचार्य
मंजिल का पता नही फिर भी चलते जा रहे हैं सपने देख देख कर हम मुसकुरा रहे हैं दिल चाहता है पूरे हो जाये ये इक पल मैं पर फासले इतने है कि कदम लडखडा […]
नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में ————————————— हम वतन थे जो त्रस्त थे बाहर, उनको घर उनके बुलाया तो बुरा क्या किया! बिना टिकट सवार थे भारी टिकट जो पूछी गई ऐसा बुरा क्या किया! […]
hello friends, कहने को तो प्रतिलिपि पर ये दूसरी कहानी है मेरी लेकिन सही मायनो मे ये मेरी पहली कहानी है क्योकि ये मेरे दिल के बहुत करीब है चलिये आपका ज्यादा वक्त जाया नी […]
उसके छोडने का अंदाज कुछ ऐसा था मेरे प्यार पर इलज़ाम कुछ ऐसा था ना वजह थी कोई ना बहाना था उसे तो बस मुझे छोडकर जाना था शायद मेरे किसी अपने का वो दीवाना […]
मेरी कोशिशों को नाकाम करके तुझे क्यो अच्छा लगता है। तेरे जहन मे ये जलन का मुद्दा ही क्यो चलता रहता है।। है हिम्मत गर तुझमे तो तू कदम क्यो न आगे बढाता है। तब […]
वीरों का दिल से अभिनन्दन। सीमा पर डटकर खड़े हुए, दो-नयन शत्रु पर गड़े हुए, हाथों में अस्त्र सुशोभित है, उर से भय आज तिरोहित है। जन-गण-मन करते हैं वन्दन, वीरों का दिल से अभिनन्दन। […]
कौन हूं मैं? ————- बिजलियां, आंधियां कोंधती उड़ती रहीं। धारियां, छुरियां दिल पे निशा देती रहीं। अठखेलियां, रंगरेलियां आवारगी करती रहीं। विरक्तिया,सिसकियां गम और ख़ुशी भरती रहीं। रीतियां, बेड़ियां बंदिशे देती रहीं। गलबहियां, कनअखियां सुकुन […]
Amar randhe misse gechey nil Tomar smriti ajo amaleen
मेरी आयत है तू जितना पढ़ू उतना खो जाता हूँ काश इतनी सिद्दत से पढ़ा होता तोह अव्वल आ जाते
दर्पण के सामने खड़ी होकर, जब भी खुद को सँवारती हूँ उस दर्पण में तुमको साथ देख,अचरज में पड़ जाती हूँ शरमाकर कजरारी नज़रें नीचे झुक जाती हैं पर कनखियों से तुमको ही देखा करती […]
शक्ति संपन्न की जनक दुलारी जब तुमने लांछन लगाया था चाहती प्रलय वो ला सकती थी धरती की गोद में सो जाती है शुक्र मनाओ कि वो रो जाती है धरती पर एक कण बचता […]
मैं शिवांशी , जल की धार बन शांत , निश्चल और धवल सी शिव जटाओं से बह चली हूँ अपने मार्ग खुद ढूँढती और बनाती आत्मबल से भरपूर खुद अपना ही साथ लिए बह चली […]
तू आया तो बसन्त है….। तू गया तो बस अन्त है।।
अतीत के फफोले तेजाबी बारिश दहकते लावे की तपिश या कोई आतिश ताउम्र का सबक बस एक कुफ्र। निमिषा
गुजारिश की मैने लाखों दफ़ा रो रोकर उससे दिल ना पसीजा मगर उसका आंखें बंद होने को आयी हैं बहुत रो चुके अब दर छोड़ चला उसका
रोज सोचते यही है उनसे तोड़ देंगे सारे नाते याद में उनकी नहीं कटेगी रो-रोकर मेरी रातें फ़ैसला जब करते हैं हम दिल रोक लेता है मेरी आँखों से बहे समंदर घुटती हूं अंदर ही […]
रोज सोचते यही है उनसे तोड़ देंगे सारे नाते याद में उनकी नहीं कटेगी रो-रोकर मेरी रातें फ़ैसला जब करते हैं हम दिल रोक लेता है मेरी याद से बहे समंदर घुटती हूं अंदर ही […]
कुछ तो खेल है हाथ की लकीरों का हाथ ना आया लगाया हाथ जिसमें न पाने की तमन्ना थी मिला हरदम वही मुझको जुस्तजू जिसकी थी हमने उसी से हाथ धो बैठे जिंदगी बन गई […]
कुछ तो खेल है हाथ की लकीरों का हाथ ना आया लगाया हाथ जिसमें न पाने की तमन्ना थी मिला हरदम वही मुझको जुस्तजू जिसकी थी हमने उसी से हाथ धो बैठे जिंदगी बन गई […]
गुलामी की जन्जीरों में जकड़े है ज़िस्म मेरा इस दिल का सौदा करें भी तो कैसे। जिस्म तो जिस्म रूह भी है बेबस तुझे मोहब्बत का सजदा करें भी तो कैसे। तुम सोचोगे सब बहाने […]
कोई दिल दरबारे खास बने तो जान निछावर करते हैं हमें सूरत की प्रवाह नहीं सीरत से मोहब्बत करते हैं
प्यारे कभी बेवफा नहीं होते। अपने कभी खपा नहीं होते। ऐ वक्त हमसे खपा मत होना क्योंकि हम तुमसे दफा नहीं होते।।
पदम् गाना🎶🎵🎤🎶🎤 गाना🎶🎵🎶🎤🎵🎶🎤🎵🎶🎤🎵🎶🎤
तटबंदिनी ———— तटबंदिनी सी मै सागर से तुम। बंधन सारे मेरे लिए! आज़ाद परिंदे तुम। निमिषा
हिंदी गजल- अब सफा कीजिये | टूटे रिश्तो मे जान बाकी हो अगर , प्यार से सींचकर अब वफा कीजिये | काँच के जैसा होता है दिल का रिस्ता यहा | टूट न जाये दील […]
हिन्दी गजल- मुझको भुलाए है | दिल मे क्यो मेरे आप समाये है | ख्वाब आंखो क्यो आप दिखाये है | जिधर भी देखिये आप का नजारा है | क्या बताए कैसे मैंने रैन बिताए […]
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