KĦūšhbøø Šįñghåł, Author at Saavan's Posts

वो गलियाँ

उन गलियों से आज भी गुजरती हूँ मैं जिन गलियों से कभी गुजरता था तू ठहर जाती है नजर वहीं किसी मोड पर शायद आ जाये तू मुझको नजर लौट आओ ना तुम अपने शहर दिल लगता नही मेरा इधर इन हवाओं मैं लगती है मुझको कमी सांसों मे जुलती नही अब खुशबू तेरी याद है आज भी मुझको शहर का वो चौक जहां देखा था तुझको पहली दफा वो रंग आज भी पसंदीदा है मेरा जो पहना था तूने उस रात को दीदार को तेरे तरस गई अखियां दीदार को तेरे तरस गई अख... »

ऐतबार

वो झूठ बोल रहा था बहुत सलीके के साथ मैं ऐतबार ना करती तो क्या करती »

फिर भी चलते जा रहे हैं

मंजिल का पता नही फिर भी चलते जा रहे हैं सपने देख देख कर हम मुसकुरा रहे हैं दिल चाहता है पूरे हो जाये ये इक पल मैं पर फासले इतने है कि कदम लडखडा रहे हैं फिर भी हौंसलों को बुलंद करके आगे बढते जा रहे हैं मंजिल का पता नही फिर भी चलते जा रहे हैं। »

दोस्ती से ज्यादा

hello friends, कहने को तो प्रतिलिपि पर ये दूसरी कहानी है मेरी लेकिन सही मायनो मे ये मेरी पहली कहानी है क्योकि ये मेरे दिल के बहुत करीब है चलिये आपका ज्यादा वक्त जाया नी करते और कहानी शुरू करते है        आज मै बहुत खुश हू और वजह भी जायज है यार आखिर इतने वक्त बाद घर वापिस जो जा रही हू  5 साल बाद अपने देश India वापिस जा रही हू, हाँ क्यों India मेरा घर नही हो सकता क्या मेरे लिए तो India ही मेरा पहला घ... »

अंदाज

उसके छोडने का अंदाज कुछ ऐसा था मेरे प्यार पर इलज़ाम कुछ ऐसा था ना वजह थी कोई ना बहाना था उसे तो बस मुझे छोडकर जाना था शायद मेरे किसी अपने का वो दीवाना था मैं भी मजबूर थी वक्त के आगे तुम्हारी खुशी के लिए छोड दूंगी तुम्हे उससे किया ये वादा जो निभाना था »

मोहब्बत

तुम आए भी ओर चले गए मोहब्बत की सजा दे ही गए ना इजहार किया ना इकरार किया बस खामोशी से दिल को तार तार किया गलती तुम्हारी नही हमारी है जो अपनी बेवफा किस्मत पर फिर से ऐतबार किया »

Aadat

दर्द को छुपा कर जीना मेरी आदत सी हो गई है भीगी आँखों के साथ मुस्कुराना मेरी आदत सी हो गई है मर चुके है जजबात मेरे दिल के फिर भी टूटी ऊमिदों के साथ जीना मेरी आदत सी हो गई है »

Vaade

Meri jindagi me aake mujhe apna bna ke Usne tode the sare jo kie the vaade »

Mohabbat

Tu ruthta raha mai har baar tujhe manati rhi Apne dil ki khawaishon ko dil me jalati rhi Ye mukkamal mohabbat ki dastan hi kuch aisi thi Tu har baar mujhe thukrata raha Or mai har baar tujhe bepanah chahti rhi »