सबसे जुदा हो कर पा तो लिया तुमको मैंने पर ये तो बोलो कहाँ तक साथ चलोगे ? न हो अगर कोई बंधन रस्मो और रिवाजों का क्या तब भी मेरा साथ चुनोगे बोलो कहाँ […]

किसी की माशूक किसी की मंगेतर। किसी की नवोढ़ा किसी के प्रियवर।। मन का तार जोड़ के बैठी प्रिये तुम कब आओगे? वेलेंटाइन आ गया प्रिये तुम कब आओगे? भारत माँ के वीर सिपाही हमको […]

उनके कदम लड़खड़ाने लगे हैं जिसने चलना सिखाया था तुझको अपने कंधों का सहारा देना जिसने कंधों पर बिठाया था तुझको तू फंसा हुआ आडंबर में तू होड़ करें है कमाई की अपनी सब शौक […]

प्यारी गौरैया! आज तुम्हें इतने दिनों बाद अपनी छत पर देख अपने बचपन के दिन याद आ गए ,तब तुम संख्या में हमसे बहुत ज्यादा थीं, आज हम हैं ज्यादा नहीं पर कुछ पेड़ हैं […]

सघन बादल तुम….. मै धरती, प्रेम सुधा पीने को तरसी। उन्मुक्त प्रेम का हनन ना कर, हे घन! अब बरस, दुर्दशा ना कर। प्रेम आचमन करा दे मुझको, सुधा में नहला दे मुझको, प्रेम पाश […]

ढोंगी बाबा ————- पैसा, संतान, विवाह, घर- मकान, इन्हीं बातों का जाल डाल लोगों को भरमाते हैं। हां! कुछ शातिर लुटेरे चोगा पहन.. ढोंग खूब रचाते हैं। सीधे साधे लोगों का शोषण कर जाते हैं, […]

यह मंच कला को सौंपा है इसे कलंकित करना ठीक नहीं मासूम कला की बस्ती को दुख रंजित करना ठीक नहीं रंजित-राशि

कितना सरल था गांव का जीवन गले में चुन्नी बाल में रीवन बेरी के नीचे बच्चों की भीड़ थी बुजुर्ग परिवार की एक दृढ़ रीड थी दादा की ज्ञान की महफिल का लगना आंख बचाकर […]

सियासी खेल रचाया जा रहा है कुर्सी पाने के चक्कर में उंगली पर सबको को नचाया जा रहा है यहां रेस लगी है कुर्सी की हाथी, साइकिल और सेना की तोपों को सजाया जा रहा […]

झर झर नीर झरे नैनन से बीच हथेली रख मुखरे को। बिलख बिहारी विनती करते वो कैसे सहेगी इस दुखरे को।। देर भयो ग्वारन संग खेलत भूखा प्यासा लाल तुम्हारो। फिर भी मैया मारन चाहे […]

थोड़ी सी दिल्लगी, थोड़ा सा प्यार। थोड़ा सा गुस्सा, ज्यादा ऐतबार। ताज़गी, समर्पण आकर्षण हथियार। एक दूजे को बांधे रहे, गलबहियों के हार। रूठना,मनाना इनसे जीवन खुशगवार। नीरसता कर देती, जीवन बेकार। एक दूसरे के […]

कान्हा तूने माटी खाई डाँट के बोली मैया। ना ना कह शीश हिलाया नटखट बाल कन्हैया।। छड़ी दिखाकर मैया बोली मूंह तो खोलो कान्हा। मुख में सारा विश्व दिखाया कन्हा मुख में कान्हा।। मायापति की […]

हंसना मुस्कुराना ना तू दुख मनाना, हर दुख के बाद सूख है जरूर ये मन को है समझाना। अंधेरों के आगे रोशनी का साया है, रब ने दुख सुख से यह जीवन सजाया है। हंस […]

मनमौजी बनकर चलना ये कैसी आजादी है। बिन मर्यादा के जीना जीवन की बर्बादी है।। अनुशासन न कोई बंधन है न तुम पर कोई थोप रहा। एक सफलता की कुंजी है सुख सम्पदा सौंप रहा।। […]

हाथों को अपने फैलाकर के बाबूजी दे तो कहता हूं कभी मेरे मुंख को देख जरा मैं रोता बिलकता रहता हूं उन ठंडी सीत हवाओं मे उन कड़कती काली घटनाओं में मैं डरा सहमा सा […]

कंचन सो तेरो रंग री बावरी मुख पे कमल की लाली है हंसों का सिरताज ले बैठी अब भी झोली खाली है चीर सरोवर तल में झांकें तू तो बड़ी मतवाली है कहते सब संसार […]

दोस्त नहीं अब हम दूर है कही तू किसी और की बाहों में मेरा भी नसीब चल पड़ा है किसी और के साथ लोग कहते है पहला प्यार भुलाया नहीं जाता हम कहते है भूलना […]

पंख काट जाल डाल .. धरती से ऊंचा ना उड़ने दिया, पुरुष महासत्ता का शिकार .. स्त्री को होना पड़ा। सुष्मिता थी वह स्त्री कुसुम, वज्र स्त्री होना पड़ा, स्वाभिमानी को अस्मिता कहा, बैरागन बनना […]

नारी ने चाहा की पर्दा प्रथा दूर हो उससे पर लोग हंस रहे हैं उसे बेपर्दा करके 👩‍🏫👩‍🔧👩‍🏭👩‍🔬👩‍🚀👮‍♀👷‍♀👸👱‍♀🤰🤱 आखिर क्यों

जटायु अंत में आंखें खोले हाथ जोड़ के करे वंदना रोता रोता बोली जटायु अपनी आंखें खोले जल जो पीले तो वह नहीं पीता राम बचा लो दुखी है सीता भक्ति रस में डुबके देखो […]

जटायु अंत में आंखें खोल हाथ जोड़ के करे वंदना रोता रोता बोली जटायु अपनी आंखें खोली जली जो पीले तो वह नहीं पीता राम बचा लो दुखी है सीता भक्ति रस में डुबके देखो […]

जीवन उपहार ——————- कभी खुरचते कभी लेप लगाते, कभी शीतल वाणी, कभी आंखों में पानी। कभी मौन धारक ,कभी गुनगुनाते। कभी प्यार बर्षा,कभी भुनभुनाते। कभी गलती करते ,कभी बनते सुधारक। कभी सुन्न मस्तिष्क, कभी बन […]

‍एक पिता आख़िर पिता होता है.. जीवन की छाया ख़ुशियों का साया पिता जो हो तो जीने में अलग अंदाज़ होता है पिता हर घर की चौखट से बँधा रिवाज़ होता है हमारी सबसे आसान […]

दिलों को जोड़ा ना गया, फैला दी मुल्क में खलिश। सुख चैन लूट कर,आतंकियों ने लगा दी आतिश। 1. धर्म के ठेकेदारों ने धर्म के नाम की बांटी बक्शीश, मासूम सी जानों को खून खराबे […]

रितुराज वसंत के आवन पे बसुधा ने कण कण सजा लिया है । शबनम की बारिश से धरणीधर और तृण तरुवर सब नहा लिया है।। पत्र पुराने त्याग दिए बृक्ष सब नव किसलय तन चढ़ा […]

ये जो मेरा कल आज धुंधला सा है सिर्फ कुछ देर की बात है अभी ज़रा देर का कोहरा सा है धुंध जब ये झट जाएगी एक उजली सुबह नज़र आएगी बिखरेगी सूरज की किरण […]

आया है मधुमास धरा पे रंग -बिरंगी खुशियाँ लेकर। वृक्षों ने परिधान बदलकर नवल पत्र दल बगिया लेकर।। पर्वत खेत बाग सब कुसुमित धरा गगन अज रंगिया केसर। “विनयचंद “इस रितुराज का कर स्वागत दिल […]

मधुमास सुहाना आया है धरती के आँगन में। रक्तिम कुसुम सजाया है प्रकृति के माँगन में।। दुल्हन -सी है सज गई धरती अम्बर मौर सजाया। भ्रमर तितलियाँ बने बराती पर्वत ढोल बजाया।। संग मयूरी लेकर […]

सचमुच ये रितुराज है। तेरे स्वागत में प्रकृति ने वसुधा के कण कण को सजाया। बाग – बगीचा बहती सरिता खुशबू से तरुवर नहलाया।। कोमल किसलय कोमल कुसुम मदमस्त कामराज है। सचमुच ये रितुराज है।।

आया वसंत आया वसंत । बोल रहा है आज दिगन्त।। पतझर ने कहा तरुवर से बनकर किसलय आया वसंत। पत्तों ने कहा फूलों से खुशबू बनकर आया वसंत।। आया वसंत आया वसंत। बोल रहा है […]

जब कोई हमसे हँसकर थोड़ा सा बोला देता है, अपने दिल के दरवाजे हल्के से खोल देता है। हम खुशी मे अपने आपको भूल सा जाते है, दो पलो मे ही सारे जीवन की खुशियाँ […]

खेतों में है फूली सरसों धनिया महके गम गम। बाग बगीचे सजे हुए हैं रंगीले पुष्पों से हरदम।। धरती को रंग डाला कुदरत ने रंगों से। हमने भी अंबर को रंगा रंग विरंगे पतंगों से।। […]