उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की। सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आगे बढ़ते हैं, कड़वे पल भुला कर। छोड़ वो यादें, जो चली गई रुला कर। मधुर यादों के साथ, आओ नववर्ष का, […]

नया साल और मेरा प्यार….. अक्सर तेरे ख़्यालों में शाम हो जाया करती थी, अब एक साल और बीत चला तेरे इंतज़ार में, काश कि इस नए साल में मेरा प्यार मिल जाए…..!! अक्सर तेरा […]

अच्छा किया तुमने याद दिला दिया…….. हक नही मुझे कोई फ़रमाइश करने का, हक नही मुझे कोई बेबुनियाद सी जिद्द करने का, सिर्फ तुम्हारी हर ख़्वाहिश पूरी करनी हैं मुझे…. कोई हक नही मुझे अपनी […]

आया नया साल । जीवन मेँ लायेँगे बहार, मन मेँ गायेँगे मलहार, दिल मेँ उमंग की करेँगे पुकार, आया नया साल। सपनोँ को करेँगे साकार, समय को नहीं जाने देँगे बेकार, संकट के सवालों का […]

किसी अनजान से बोझ से झुका झुका ये फल दरख्त़ की झड़ों में ढूंढ़ता सुकून के चन्द पल। कभी मिले पत्तों के नर्म साए तो कभी इनमे छनकर आती कुछ सख्त़ किरणें भी। बहुत रोया […]

नव वर्ष आने को है, कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है, सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है, छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ, उन उम्मीदों से पर्दा हटाने […]

एक दिन गया मैं चिड़ियाघर, एक भी जानवर न था वहां पर । यह देख मैं रह गया हैरान, हर पिंजरे में था एक इंसान ।। एक पिंजरे में लिखा था ‘ भेड़िया दुराचारी ‘ […]

मेरी नज़र के सामने साक़ी को रहने दो। हाथों में जाम है मगर बाक़ी को रहने दो। धधक रही हैं तस्वीरें यादों की दिल में- चाहत की ज़ेहन में झांकी को रहने दो। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

DESH KI AAN,BAN,SHAN KISAN KITNA PRESHAN KHET KI JAN,PHCHAN,ARMAN KISAN KITNA PRESHAN MEHNT KI JUBAN,MUKAN,PRWAN KISAN KITNA PRESHAN FASAL KE NA MILE DAM MHGAI KI MAR PED PR LTKA JMI PR BIKHRE ARMAN KISAN KITNA […]

मां भारती का सहस्त्र वंदन, रही है आवृत ये गोधुली से यहीं दिगम्बर ये अन्नदाता, लगे है पाथेय संबली से। यहीं पे खेले चराए गैया, जगत खिवैया किशन कन्हैया यहीं त्रिलोकेश सूर्यवंशी, यहीं कपिश्वर महाबली […]

रातभर हम ओस पर खींचा किए थे लकीरें, सुबह को सुरज मुआ दुनिया उड़ा कर ले गया। हमने ज़मीं पर बैठकर इंचों में नापा आसमां, जाना तो माना कहां तारे से तारा रह गया। आंखों […]

अन्नदाता कहलाता हूं पर भूखा मैं ही मरता हूं कभी सेठ की सूद का तो कभी गोदाम के किराये का इंतजाम करता फिरता हूं बच्चे भूखों मरते है खेत प्यासे मरते है अब किसकी व्यथा […]

हम तो नयन बंद कर बैठे थे, आपने हमे ऑखे खोलना सिखाया। हम तो सिर्फ सोना ही जानते थे, आपकी संगत ने हमें जीना सीखा दिया।। पर फक्र न करना ऐ मेरे मालिक, हमें जगाकर […]

मीलों का पथ, पथरीला भी पथिक हूं मैं भी, चल दूंगा। सारे मौसम शुष्क रहे क्यों बादल हूं मैं, बदल दूंगा। भीष्म बनो तुम, कर्ण बनो तुम पार्थ हूं मैं भी, ध्यान रहे। मार्ग मेरा […]

तारीफ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है ।। इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है ।। माना बरसों पुराना, […]

जवाब देने में हाज़िरजवाब बताये गए हम, के अपने ही घर में खामोश कराये गए हम, ज़िन्दगी बनाने को कितनी ही जगाये गए हम, के अपनी ही चन्द सांसों से दूर कराये गये हम, हर […]

पसीना सूखता नहीं धूप में। किसान होता नहीं सुख में।। अतिवृष्टि हो या फिर अनावृष्टि। प्रकृति की हो कैसी भी दृष्टि। किसानों के परिश्रम के बिना, कैसे पोषित हो पाएगी सृष्टि। संसार का पोषण करने […]

छोड़ खिड़की दरवाजे अब मुँह पर ताले लगते हैं, जहाँ तहाँ भी देखो अब तुम चुप्पी के गाले लगते हैं, कदम कदम साथ निभाने के अक्सर वादे करते थे, आज सभी के ही मानो जैसे […]

आजादी के इतने वर्षों बाद भी, आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।। कभी नक्सलियों, आतंकियों से आजादी, कभी रिश्वतखोरों, भ्रष्टाचारियों से आजादी । कब ली राहत की साँस हमने, भूली बिसरी बातें हैं, […]

मैं जितना सुलझता गया वो उतनी उलझती गई, मेरे दिल में उतरती गई आँखों से छलकती गई, डोर इतनी मजबूत बंधी उसकी जुल्फों से जानो, के “राही” की राहें जैसे खुद ब खुद सँवरती गई।। […]

भोजपुरी गजल- देशवा ई जोहत बा केहु जीत के जश्न मानवत केहु हार के रोना रोवत बा | कही बाजे ढ़ोल नगाड़ा कही केहु भाग के कोसत बा | जे जितल बा उनके इनाम ई […]

बेटी है लक्ष्मी का रुप, मिलतीं है सौभाग्य से, घर का आंगन खिल जाता है, उसकी पायल की झन्कार से। बेटी ही तो मां बनकर, हमको देती नया जनम, सम्मान करें हर बेटी का, यह […]

जीना चाहती हूं मैं भी इस दुनिया को देखना चाहती हूं मां तेरे आंचल में सर रखकर सोना चाहती हूं बापू तेरी डाट फ़टकार प्यार पाना चाहती हूं मां मैं तेरा ही हिस्सा हूं तेरा […]

हो हार या कि जीत हो, करता रह प्रयास तू।। प्रथम रख तू धर्म को, करता रह तू कर्म को।। कर समस्या का सामना, समाधान तू खोजना।। हो हार या कि जीत हो, करता रह […]

बेटी घर की रौनक होती है बाप के दिल की खनक होती है माँ के अरमानों की महक होती है फिर भी उसको नकारा जाता है भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है आओ इस […]

पैदा होने से पहले मिटा दी जाएँगी बेटियाँ, बिन कुछ पूछे ही सुला दी जाएँगी बेटियाँ, गर समय रहते नहीं बचाई जाएँगी बेटियाँ, तो भूख लगने पर रोटी कैसे बनाएंगी बेटियाँ, जहाँ कहते हैं कन्धे […]

बड़ रहा अधर्म है, बड़ रहे कुकर्म हैं। इनके जवाब में आज वो उठ खड़ी।। तोड़ कर सब बेड़ियाँ, हुंकार है भरी। अपने स्वाभिमान के लिए है वो उठ खड़ी। संयम त्याग कर, ललकार है […]

तेरी तस्वीर बनाने में जब भी जुट जाया करता हूँ, खुद ब खुद ही जाना तुझसे जुड़ जाया करता हूँ, रंगों की समझ रखता नहीं हूँ शायद यही सोचकर, एहसासों का ही अंग तुझपे जड़ […]

चुनावों के इस मौसम में फिजा में कई रंग बिखरेंगे अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे

वोट डालने चलो सखी री लोकतंत्र के अब आयी बारी एक वोट से करते हैं बदलाव नेताजी के बदले हम हाव-भाव ! सही उम्मीदवार का करते है हम चुनाव, बेईमानों को नहीं देंगे अब भाव […]

जिस्म ऐ माटी में इस रूह को डालता कौन है, बनाकर इन पुतलों को ज़मी पर पालता कौन है, मिलाकर हवा पानी आसमाँ आग पृथ्वी को, वक्त वक्त पर ख़ुशी और गम में ढालता कौन […]

तेरे बग़ैर तन्हा रहने लगा हूँ मैं। तेरी बेवफ़ाई को सहने लगा हूँ मैं। जब भी ग़म तड़पाता है मेरे ख़्यालों को- अश्क़ बनकर पलकों से बहने लगा हूँ मैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

सोंच समझकर वोट दें तो बन जायेगी तकदीर, चलो निकाले सोच समझ कर ऐसी कोई तदबीर, विश्व पटल पर छप जाये अपने देश की तस्वीर, जागरूक करे जो हर जन को हो ऐसी कोई तरकीब, […]

निगाहें तुझ ही पर टिकाये रहता हूँ, मैं यूँही खुदको तुझमें गुमाये रहता हूँ, तुझको समझने की जिद ठानी हैं ऐसी, के हर दम मैं गर्दन अपनी झुकाये रहता हूँ।। राही अंजाना