जब भी कोई शिकायत होते है तुमसे आईना उठा के ख़ुद मिलता हू खुदसे अकसर तो वो शिकायत ही नही बचती   रह भी जांए अगर तो ख़ुद से ही रह्ती                        …… यूई

मैं तो ता-उमर दिखाता रहा हूँ तुझको तेरा जो था असली चेहरा तुमने ना माना अपना उसको चेहरा तुझको था पसंद तेरा नक्ली चेहरा                        …… यूई

कभी कभी ये ख्याल आता है कि कभी उनका ख्याल ना आये तो दिल को राहत मिले| मिलते रहते है हमें अपना कहने वाले कई हमें जो वाकई अपना समझे कभी कोई ऐसा मिले|

आईने को तोड़ने से क्या होगा सच्चाई से मुँह मोड़ने से क्या होगा इन दोनों से आँखें मिला कर देख ज़िन्दगी की सच्चाई अपना कर देख झूठ की परतें गिर कर टूट जाएँगी ज़िंदगी जन्मो […]

बाहर सब यह जो हमारे दिखता हमको अन्दर हम जैसे वैसा सब दिखता हमको यह जो जमाने से है शिकायतें लाख हमको जमाने के दिल में है वैसी ही लाखो हमसे                                         …… यूई

यदि जड़ें ऊपर हो और तने नीचे तो न जड़ें गहराई पा सकती हैं और न तने का ही विकास होता है यदि जहां खिड़की होनी चाहिए वहां दरवाजे हों जब शांत वातावरण की चाहत […]

मेरे बाहर के यूनिवर्स को और मेरे अंदर के यूनिवर्स को मेरे अंतर्द्वंद को और बहिर्द्वंद को कविताएँ तराज़ू की तरह दोनों पलड़ों पर बिठाए रखती हैं कभी यह पलड़ा भारी हो जाता है तो […]

कुछ समीकरण पारस्परिक खींचतान झूंठी प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या ,द्वेष अहंकार सृजन और विसर्जन व्यक्तित्वों का टकराव झूठी अफवाहें सूनी निगाहें आत्मिक वेदना कम होती चेतना शीत युद्ध अलग- अलग ध्रुव विलगित से निकाय न भरने वाले […]

कुछ समीकरण पारस्परिक खींचतान झूंठी प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या ,द्वेष अहंकार सृजन और विसर्जन व्यक्तित्वों का टकराव झूठी अफवाहें सूनी निगाहें आत्मिक वेदना कम होती चेतना शीत युद्ध अलग- अलग ध्रुव विलगित से निकाय न भरने वाले […]

बेड़ियां जो पैरों में उसे घुंघरू बना लें आओ ज़िंदगी का मज़ा लें नाच ,गा लें औरों को नचा दें ज़िंदगी को खुशियों से सज़ा लें आओ बाधाओं को अवसर बना लें सूखती नदियों में […]

कुछ समय बाद बिछड़े दोस्तों से हम यु मिले , देख कर उनका नाम भी याद आया , रंग , रूप और उनकी दोस्ती का दाम भी याद आया , कभी गहरी दोस्ती थी उनसे […]

इंसान ख़ुद ही ख़ुद का है सबसे बड़ा है शिक्षक भटक जाए तो है ख़ुद ही ख़ुद का सबसे बड़ा भक्षक                                                   ……. यूई

मैंने पूछा कैसे ए मालिक तेरा नाम मिलेगा मालिक बोला, नाम मेरा ले कर क्या मिलेगा जां बंदे कर सेवा मेरे बंदो की उसमें ही तुझे मेरा पैगाम मिलेगा                          ……. यूई

सबने ज़िन्दगी का फल्स्फा समझाया पानी है बस शोहरत और दौलत यह है बस मेरे आने का मकसद इसी को पाने से मिलेगा सब आराम किया सब जो भी सबने कहां करके भी सब जां […]

मेहंदी रचे हाथों से मिली उस आपकी आखिरी अलविदा को, हमने दिल से यूँ मान लिया हाथ जोड़ तुम्हारा दिल रख तुम्हारी कब्र की बगल में खोद कर ख़ुद कबर अपनी ज़िन्दगी को सलाम किया […]

जबसे तुमने हमसे मुँह फेर लिया हमने तेरे घर का रास्ता छोड़ दिया हाँ कुछ मयकदो को घर बना लिया अब रिश्ता है यह पूरी बराबरी का ना रुकेंगे जब तक बर्बाद ना होंगे                       […]

दिल में रहते हो तुम घर है यह सिर्फ तुम्हारा बसते थे यहां सदा तुम बसेरा रहेगा स्दीवी तुम्हारा जाना हे तो जांओ पर ना इसे रुलाओ क्या पाओगे इसे तड़पा कर जो ना जी […]

नवल सुबह की नव शुभ किरणें करें सभी का वन्दन , क्रन्दन रुदन से रहे परे , करें सभी का अभिनन्दन, हो देवों की विजय सदा असुरों का संहार करें , सुन्दरता जीवन में खोजें […]

बाहों की पनाहो से हमें ज़ुदा कर गए दिल की दीवारो से भी विदा कर गए मज़बूरीया रही होंगी ज़रूर कुछ ज्यादा यादों के झरोखों से भी अलविदा कर गए                                                 …… यूई

तेरी ज़ुल्फों की पनाहो में हो गुम बुने थे जो प्यार के हसीन सपने जो थे दिल के इतने क़रीब अपने जाने हो क्यों ना सके वोह अपने                                …… यूई