ऐ साकिया अब होश ना रहे, तू इतना पीला । फिर ना जिंदगी से करूं, कोई शिकवे-गिला । करते रहे हम सारी उम्र, बेपनाह बवफाई, बेवफाई के सिवा हमें, और कुछ ना मिला । जिसे […]

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं […]

चांद सा मुखड़ा है तेरा, समंदर से गहरी है आंखें तेरी, जुल्फें हैं घनेरी तेरी जो बिखर जाए तो दिन में रात हो जाए, चाल है मतवाली तेरी जिस पर किसी का भी दिल फिसल […]

चांद सा मुखड़ा है तेरा, समंदर से गहरी है आंखें तेरी, जुल्फें हैं घनेरी तेरी जो बिखर जाए तो दिन में रात हो जाए, चाल है मतवाली तेरी जिस पर किसी का भी दिल फिसल […]

चंद हर्फ़ तुम्हारी नज़र करता हूँ । तुम पे कुर्बान दिल-ओ-जिगर करता हूँ । मेरे ख्वाबों की ज़ीनत हो तुम, इंतज़ार तुम्हारा हर पहर करता हूँ । काँटों से दामन इस कदर उलझा, सुलझाने की […]

गुजर कभी मुफ़लिसों की बस्ती में। मिल कर हर खुशी मनाते मस्ती में। जरूरतें पूरी होने से बस मतलब इन्हें, क्या रखा दिखावे की महंगी सस्ती में। परवाह किसे, किनारा मिले ना मिले, कश्ती पानी […]

गुज़रा ज़माना याद दिलाता है ख़त। अब बीता ज़माना कहलाता है ख़त। रूठे को मनाना, हाले-दिल बताना, अपनों को अपना बनाता है ख़त। ना हुई कभी मुलाक़ात ना कोई बात, दो अंजानो को करीब लाता […]

न जाने तुम कहां खो गए, भरी दुनिया में जाने कहां खो गए, हम यहां तेरी याद में भटकते रह गए, हर शख्स में ढूंढा मैंने तेरा चेहरा, मिले न तुम बस तुम तन्हा कर […]

न रात को नींद न दिन को चैन है, तेरी वेरूखी से दिल बडा बेचैन है, जब तक चाहा दिल से खेला तुमने, भर गया जी तो पलटकर देखा भी नहीं तुमने, तेरी बेवफाई बहुत […]

मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा। तेरी खिदमत में निकले मेरी जां। तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा, गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा। गर उठा कर देखेगा नजर इधर, रूह तक कांपेगी […]

जो भी मिली रातें ग़ज़ब रोशन वो बेहया सब बेनक़ाब निकली उजलें इमलों में है ख़ुशी मतलबी ख़ामोश वफ़ाई बेचिराग निकली कोई जुदा हुई तोडा दम किसीने हर आरज़ू कमनसीब निकली लगी मेहंदी वो हाथों […]

चिर परिचित जब कोई आ टकराता ख्वाब में, फिजा का हर रंग तब घुल जाता शवाब में। स्वप्न सुनहरा पलकों पर घर कर लेता, रात छोटी पर जाती ख्यालों के ठहराव में। वक्त का फासला […]

दिल रोया, आंखों ने अश्क बहाया तेरी याद में। रौशनी भाती नहीं, चराग़ बुझाया तेरी याद में। तस्वीर बातें करती नहीं, अब जी भरता नहीं, इंतजार में दिन गिन-गिन बिताया तेरी याद में। ख्वाबों में […]

एक आवाज देकर, मुझे बुला लो तू सनम, दौड़ी चली आऊंगी, कुछ नहीं सोचूंगी सनम, तूने अब तक मुझे, पुकारा ही नहीं, तूने अब तक मुझे, ठीक से जाना ही नहीं, मैं तो तेरे प्यार […]

तेरी महफ़िल में सनम, कभी आएंगे न हम, चाहे तुम कितनी गुजारिश कर लो, हम न कभी आएंगे सनम, इस कदर हम इतनी दूर निकल आए हैं हम, तेरी महफिल में सनम, कभी आएंगे न […]

बिस्तर की सलवटें, शबे-हाल बयां करती है। भीगा सिरहाना, हिज़्रे-मलाल बयां करती है। बेशक लाख छुपाओ, ग़मे-जुदाई का दर्द लेकिन, बेरंग सा चेहरा, बेनूर हुस्नो-जमाल बयां करती है। मुस्कुराहट के पीछे, गम छुपाने का हुनर […]

ज़ुल्फ तुम्हारा, जैसे काली घटा हो। चाँद के रुख़्सार से, इसे तुम हटा दो। बिखरने दो चाँदनी हुस्नो-जमाल की, इसपे जैसे कोई चकोर मर मिटा हो। पहलू में बैठो, लौटा दो मुझे दिले-सुकूँ, मेरी नींद, […]

इश्के-फ़साना हमारा, मशहूर जमाने में। हमारी मोहब्बत पाक है, सही माने में। सीने में दिल तेरे नाम से ही धड़कता है, दिलो-जाँ कुर्बान, क्या रखा नज़राने में। बे-इंतिहा इश्क की इंतिहा गर गुलामी है, मुझे […]

वो जिंदगी बेमानी, जिसमें कोई रवानी ना हो। किस काम की जवानी, जिसकी कहानी ना हो। मैंने भी मोहब्बत किया है, हाँ बेहद किया है, किसी से दिल्लगी नहीं की, जो निभानी ना हो। हमारा […]

यूं तो हंसीनों की कमी नहीं तेरे शहर में। एक तुझ पे ही दिल आया पहली नज़र में। और कोई नजर आता नहीं, एक तेरे सिवा, इंकार नहीं, प्यार घोलकर पिला दो ज़हर में। रहने […]

ये रंगे – बहारा, ये हँसीन नजारा। खुदा ने तुझको, फुर्सत से संवारा। ना मैंने सुना कुछ, ना तुने पुकारा, समझते हैं तेरी, नजरों का इशारा। तू बहती धारा, मैं शांत किनारा, दिल की गहराई […]

नासूर पर तो मरहम भी बेअसर से निकले, करते है याद जिनको वह बेखबर से निकले। जब कभी मुझे पुराने दिनों की याद आती है, तब कभी तेरी याद में उस डगर से निकले। इश्क़ […]

मैं तो खुली किताब हूँ, यूँ भी कभी पढ़ा करो। अच्छा लगता है, बेवजह भी कभी लड़ा करो। मेरे कदम तेरी ओर उठते, तुझपे ही रूकते हैं, एक कदम मेरी ओर, तुम भी कभी बढ़ा […]

बेटी कभी तेरी पायल की झंकार सुनाई देती है, बेटी कभी तेरी चीखों की पुकार सुनाई देती है। बेटी ये देश है तुझ जैसी महान वीरांगनाओं का, बेटी तुझ में वीरांगना सी ललकार सुनाई देती […]

बेटी कभी तेरी पायल की झंकार सुनाई देती है, बेटी कभी तेरी चीखों की पुकार सुनाई देती है। बेटी ये देश है तुझ जैसी महान वीरांगनाओं का, बेटी तुझ में वीरांगना सी ललकार सुनाई देती […]

जहाँ में बेटियों को आज भी अपना इख्तियार चाहिए, गर्व से जीने बेटी आज वीरांगना सी ललकार चाहिए। आँगन में अपने ही क्यों महफूज नही होती है बेटियाँ, खुद की हिफाजत खुद करने हाथ में […]

ये जिंदगी भी कैसे करवट बदलती है । इस करवट खुशी, दूसरे गम मिलती है। रेत की मानिंद हो गई हसरतें सारी, जितना समेटो, मुठ्ठी से फिसलती है। जमीं छोड़ा आसमां छूने की ख्वाहिश में, […]

ऐसे भी रफ़ीक़ जो कयामत ढाते हैं। दावत देकर वो अदावत निभाते हैं। जान बनाकर जान लेने की कोशिश की, ज़ख्मों का सेज देकर अयादत आते हैं। ज़ुल्म करने से सहने वाला गुनहगार, यही सोच […]

बेशक दौलत बेशुमार नहीं कमाया है। मगर मेरे सर पर, बुजुर्गों का साया है। ज़हां की दौलत कम है, मेरे खजाने से, दुआओं का खजाना, मेरा सरमाया है। हादसा सर से गुजर गया, मैं बच […]

देर मिलता है, पर मिलता जरूर है। किस्मत पे अपने, इतना तो गुरूर है। खामोशी मेरी, लगने लगी कमजोरी, रहम दिल हूं, बस इतना कुसूर है। छत है सर, फिर भी हूं बेघर, घर जिनके […]

कम्बख़त तसव्वुर तेरी की जाती नहीं है। भरी महफिल भी मुझे अब भाती नहीं है। जिंदगी तो अब बेसुर-ताल सी होने लगी, नया तराना भी कोई अब गाती नहीं है। पुकारूं कैसे, अल्फ़ाज़ हलक में […]

बड़े मायूस होकर, तेरे कूचे से हम निकले। देखा न एक नज़र, तुम क्यों बेरहम निकले। तेरी गलियों में फिरता हूँ, एक दीद को तेरी, दर से बाहर फिर क्यों न, तेरे कदम निकले। घूरती […]

कुछ ऐसा कर जाएंगे, सारा शहर देखेगा। मेरे शहर का, अब हर एक बशर देखेगा। मेरे सितारे भी चमकेंगे एक दिन यकीनन, गुज़रूं जहां से, हर शख्स एक नज़र देखेगा। कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश […]

हमारी रूह पर क़ब्ज़ा जमाने आ गई फिर से। ये लड़की प्यार में पागल बनाने आ गई फिर से।। , हमारे कब्र का रसता किसी से पूँछकर शायद। वो पागल नींद से हमको जगाने आ […]

सुन सदा मेरी, वो चल निकले। मेरे अपने ही संगदिल निकले। जिन पे भरोसा किया था हमने, वो भी साजिशों में शामिल निकले। ना रही कोई उम्मीद उनसे अब, मेरे जज़्बातों के, वो कातिल निकले। […]

दस्तकश कहां जाओगे। क्या मुझे भूल पाओगे। मैं तो तुम्हारी आदत हूं, क्या आदत बदल पाओगे। ख्वाब में मैं, जेहन में मैं, हर-शू मुझे हर पल पाओगे। इतना आसां नहीं भूल पाना, बगैर मेरे संभल […]

तुम्हें देख फीका लगने लगा माहताब। चुरा लिया तुमने, मेरी नींदें मेरे ख्वाब। शाने पे रख के सर, जुल्फों से खेलना, तुम्हें गले लगाकर जाना, क्या है शबाब। तुम्हारा समझाना, हद से न गुजर जाना, […]

स्याह रात की चादर ओढ़ कर। खुद्दारी की सभी हदें तोड़ कर। निकला हूं गुमनामी में पहचान ढूंढने, शोहरत की सभी ख्वाहिशें छोड़कर। घरौंदा ख्वाब का कहीं बिखर न जाए, बुना था जो तिनका तिनका […]

मोहब्बत का ऐलान, हम आज करते हैं। तुझपे जां कुर्बान, मोहब्बत पे नाज़ करते हैं। उन्हें इल्म है, हमारी मोहब्बत की हद का, जज़्बात से खेलकर, हमें नाराज करते हैं। ऐसे आज तक हमने चारागर […]

महफ़िल में तेरे आने का पयाम आया है। हर ज़ुबान पर बस तेरा ही नाम आया है। सब कि नज़रें टिकी रही, तेरी ही राह पर, तेरी निगाहों से बस मुझे सलाम आया है। पढ़ती […]

महफ़िल में तेरे आने का पयाम आया है। हर ज़ुबान पर बस तेरा ही नाम आया है। सब कि नज़रें टिकी रही, तेरी ही राह पर, तेरी निगाहों से बस मुझे सलाम आया है। पढ़ती […]

साथ मेरे एक तू और तेरा प्यार बाकी है। बाकी सब बेजान चीजें बेकार बाकी है। हालात संग, लोगों के मिजाज बदल गये, टूटा हूँ, बिखरा नहीं, अभी धार बाकी है। कितने ही इम्तहानों से […]

खत्म न हो जश्ने-रौनक हँसीन शाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। देखो साकी खाली ना होने पाए पैमाना, ले आओ सारी मय, मयकदे तमाम की। आ टकरा लें प्याला और एक […]

तेरे आने से दिल को करार आया है। तुझे पाकर खुशियां बेशुमार पाया है। मैंने पी नहीं लेकिन, मैं नशे में चूर हूं, मुहब्बत का ये कैसा, खुमार छाया है। मौसमें भी अब रंगीन सी […]

मैंने ज़ाम से ज़ाम टकराना छोड़ दिया। यारों मैंने पीना – पिलाना छोड़ दिया। खबर जो फैली, कि मैं हो चला बै-रागी, दोस्तों ने महफ़िल में बुलाना छोड़ दिया। दोस्ती का मतलब जानता हूं मैं, […]

मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में […]

मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में […]

मंज़िल पता नहीं, निकला हूं अंजान सफर में। अमृत ढुंढने निकला हूं , दुनिया भरी ज़हर में। इंसानियत बांध कर सभी ने, रख दी ताक पर, डरता हूं कहीं गिर ना जाऊं, खुद की नज़र […]