पेश है आपकी खिदमत में:- गज़ल आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा तुझे भूलूँ या कैद दिल में करूँ ———————— दिल लगा लूँ या जान छुड़ा लूँ तुमसे आज कल सोंचता बहुत है […]
पेश है आपकी खिदमत में:- गज़ल आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा तुझे भूलूँ या कैद दिल में करूँ ———————— दिल लगा लूँ या जान छुड़ा लूँ तुमसे आज कल सोंचता बहुत है […]
आदाब सभी को मौत के डर ने ही ज़िंदा रक्खा है ख़ुदाया फिर भी ये इंसाँ इसी से डरता है हमारी साँस भी चलती उसी की मर्ज़ी से ही जहाँ में पत्ता भी उसकी रज़ा […]
राह भूल सी गई है हमको जो छोड़ आओ, तो बात बने मंज़िल की सरहद पर दीया जो छोड़ आओ, तो बात बने मेरी तेरी या उसकी बातें जो छोड़ आओ, तो बात बने ढाई […]
गम के आँसू सदा हीं बरसता रहा। मेरा जीवन खुशी को तरसता रहा।। मैंने मांगा था कोई ना सोने का घर प्यार की झोपड़ी को तरसता रहा। ना तुम्हारा रहा ना हमारा रहा गेन्द-सा दिल […]
आप सब की नज़र को आख़िर , क्या हुआ है शहर को आख़िर . नफरतों की लिए चिंगारी , लोग दौड़े कहर को आख़िर . चाँदनी चौक की वह दिल्ली , आज भूखी गदर को […]
दिल के टूटने का भी, क्या मातम मनाइए किस को है सारोकार, ज़रा कम मनाइए वो फिर किसी के दिल को, शीशे सा तोड़ेंगे उस बदनसीब का अभी से गम मनाइए
कभी सोचा ना हो वह काम हो जाता है, जो करीब है वह दूर चला जाता है। मासूम सा चेहरा इन नाज़ुक-ए- हथेलियों से, हिना का रंग-चंद अश्कों से उतर जाता है। फरेब करने वाले […]
तेरी दुआओं का असर है, वरना मैं तो मरने वाला था। एक हादसा जो टल गया, सर से जो गुजरने वाला था। जिंदा तो हूं पर हाथ नहीं है, वरना मांग तेरी भरने वाला था। […]
मोहब्बत की कर नज़रे-करम मुझ पर। यूँ ना बरपा बेरुख़ी की सितम मुझ पर। तेरी मोहब्बत के तलबगार हैं सदियों से, अपनी मोहब्बत की कर रहम मुझ पर। न मिलेगा मुझसा आशिक कहीं तुझे, तेरी […]
वाह रे कुदरत तेरा भी खेल अजीब। मिलाकर जुदा किया कैसा है नसीब। जब सख्त जरूरत होती है तुम्हारी, तब तुम होती नहीं हो, मेरे करीब। सब कुछ है पास मेरे, पर तुम नहीं, महसूस […]
किसी को देख, ना कर अफ़सोस । यूँ ना अपनी किस्मत को तू कोस । भले ही तन से नहीं हैं हम पास, भले ही ना ले सकूँ तुझे आगोश । पर मन तो एक […]
हिन्दी गजल- अमन चैन न हो सियासत कैसी जिसमे अमन चैन ना हो | साजिस ऐसी जहा भाई से भाई प्रेम ना हो | समझते है हम सब जिसे मसीहा अपना | लगे धारा एक […]
कहिए हुज़ूर और क्या लीजिएगा। दिल तो ले चुके अब जाँ लीजिएगा। तुम्हें हमसे मोहब्बत है या फिर नहीं, फैसला जो भी लो बजा लीजिएगा। मेरी ज़ुबाँ पर बस एक तेरा ही नाम, नाम मेरा […]
तीरे-नज़र से दिल जार-जार हुआ। ऐसा एक बार नहीं, बार-बार हुआ। देख उनकी तीरे-निगाहें, ऐसा लगा, कि उन्हें भी हमसे, प्यार-प्यार हुआ। करीब आते, हकीक़त से वास्ता पड़ा, मोहब्बत नहीं, दिल पे वार-वार हुआ। जिंदगी […]
तालीम और इलाज, तिजारत बन गई है। कठपुतली अमीरों की, सियासत बन गई है। मज़हबी और तहज़ीबी था, कभी मुल्क मेरा, वह गुज़रा ज़माना, अब इबारत बन गई है। लोग इंसानियत की मिसाल हुआ करते […]
फकीर बन तेरे दर पर आया हूं एक मुट्ठी इश्क बक्शीश में दे देना आशिक समझ दर से खाली ना भेजना अमीर हो तुम चंद सांसे उधार दे देना किस्मत की लकीरें हैं जुड़ी तुझ […]
कर गुज़रता कुछ तो, ज़िन्दगी रंगीन हो जाता। जो किया ही नहीं, वो भी ज़ुर्म संगीन हो जाता। मैं क्या हूँ, ये मैं जानता हूँ, मेरा ख़ुदा जानता है, आग पर चल जाता तो, क्या […]
ये रास्तें है कैसे हमसफ़र नही मिलते, छूट गए जो पीछे उम्र भर नही मिलते! सूख चूके है उनके दीदार के इंतजार में, हरे-भरे अब ऐसे शजर नही मिलते! तार-तार होते रिश्तों पर खड़ी दीवार […]
कहीं खामोश लम्हा है,कहीं ये शोर कैसा है, कहीं पर शाम मातम की,ये सुख का भोर कैसा है! कहीं मासूम जलते है ,पिघलते मोम के जैसे, सियासत का कहीं झगड़ा,बढ़ा हर ओर कैसा है! कहीं […]
तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे। तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे। बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से, मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे। मैं करना चाहता था, अकेले दिल […]
तोड़ कर हद , ज़माने की , हम कहीं दूर , सितारों में मिलें , बहा लाए , वहीं , वक़्त फिर से , बिछड़ी कश्ती से हम, किनारों पे मिलें , हों , रस्म-ए-दुनिया […]
Aye sanam mujko rulane ki, zarurat kya thi Tumko jaana hi tha to aane ki, zarurat kya thi mujko kehthe the ki, tum hi meri zindagi ho phir tumko ye zamane ki zarurat kya thi […]
Ghol kar Shishe me pyaar peene de Thand bahuth hai cigaar peene de Na my masjid me na mandir me baitha hun Tere dar pe paada hun yaar peene de BY- Abdul Sattar Najmi
तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं, तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं। तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे, तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं। […]
बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में। वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में। हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही, जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में। कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, […]
तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है। के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है। तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है। तू […]
ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच […]
अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि […]
ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने […]
मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से […]
तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में […]
उतरते साहिल पर शाम का सूरज जवां है हाथ छूट गए लेकिन यादें रवां है इतनी फुरसत कहाँ की लौट कर आयें खैर मसाफ़त से इश्क़ का तजुर्बा बढ़ा है मेरे बहकते कदमों में शराब […]
सोचा था किसने सिला यूं मिलेगा। मुहब्बत में मुझको गिला यूं मिलेगा।। कसमे वफा को जो तोड़ जाए तड़पते हुए दिल जो छोड़ जाए सह न सके जो हवा का एक झोंका कागज का मुझको […]
चाँद की सूरत, तेरी सूरत रानाई। होश उड़ा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। तारीफ करूँ क्या तेरे अहदे-शबाब की, जुबां बंद कर गई मेरी, तेरी अंगड़ाई। सारी रात बीती करवटें बदलते – बदलते, सहरे-नींदें चुरा […]
रेत का महल, पल दो पल में ढह गया। आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया। तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला, बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया। वह दरिया है, जो बुझा […]
चले भी आओ मनमीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है। सजाई महफिल है प्रीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। नजरों के आगे तुम्हारा डेरा धड़कनों में समाए हुए हो। जस्न-ए-मुहब्बत करीब अपने काहे को […]
मेरे महबूब को देख, चाँद भी शरमाया है। मेरा माहताब जो ज़मीं पर उतर आया है। चाँद भी कहीं, देखो बादलों में छुप गया, अक्स देख तेरा, रश्क से मुँह छिपाया है। ऐ चाँद, तेरी […]
दिले-नादाँ, तू इतना परेशाँ क्यूँ है। खता क्या हुई, इतना पशेमाँ क्यूँ है। इज़हारे-इश्क, कोई गुनाह तो नहीं, तेरे चेहरे की रंगत, फिर हवा क्यूँ है। इंतज़ार तो कर, इकरारे-ज़वाब का, यकीं तो रख, ख़ुद […]
तेरे असूल थे या फिर वो बदलते दौर थे . मेरे लिए जो और थे गैरों के लिए जो और थे . जिनको उठाने के लिए मिली मुझे सजा ए मौत , आज कहती हैं […]
खुली आँखों का ख्वाब जरूर मुकम्मल होता है। नींद में दिखा ख्वाब तो, याद भी ना कल होता है। ज़िद है, ख्वाब पूरे होंगे अपने एक दिन यकीनन, खुद पर यकीन रख, फिर मन क्यों […]
इश्क का दरिया जब ज़ेहन के समंदर से मिलता है। दिल के साहिल से टकरा, गज़ल बह निकलता है। हिज़्रे-महबूब का गम हो, या वस्ले-सनम की खुशी, ज़ेहन में अल्फ़ाज़ों का सैलाब उफनता, उतरता है। […]
तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ। हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ। हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में, क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक […]
ताज है मोहताज, सरताज कहाँ से लाऊँ। बना रखा है ताज, मुमताज कहाँ से लाऊँ। साथ निभाने का वादा करते थे कल तक, बीता हुआ वो कल, आज कहाँ से लाऊँ। संगदिल कहूँ या फिर […]
तेरी सूरत सदा रहती नजरों के पास नाम हाथों पे लिखने से क्या फायदा? तुम रहते सदा मेरे दिल में प्रिये सामने आके मिलने से क्या फायदा? दिल जख्मों को सहता मेरा इस कदर अब […]
तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब। सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब । किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया, सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब । कहते हैं तुमसे […]
आबाद जहां करने को, उम्मीद एक ही बाकी है, अब न कोई ज़िंदगी में, सहारा तू ही साकी है । हिज्र-ए-महबूब ने मुझे, क्या से क्या बनाया, खुद को डूबोया प्याले में, शराब तू ही […]
कभी दिल के करीब आकर तो देखो। प्यार का जज़्बात जगा कर तो देखो। लगने लगेगी सारी जिंदगानी हंसीन, किसी को ज़िंदगी में लाकर तो देखो। ना बहकने देंगे हम, तुम्हारे कदम, कभी गाम-दर-गाम मिलाकर […]
शायद ख्वाब है, जो हाथों में तेरा हाथ है । एक चाँद आसमां में है, एक मेरे साथ है । तेरी सूरत चाँद की सूरत, है मरमरी मूरत, तुझसा ना हँसीन कोई, तेरी क्या बात […]
माफ़ करना मेरी आदत है, इसमें दो मत नहीं। मैं बदला नहीं, बदला लेना मेरी फ़ितरत नहीं। मैं जहाँ था वहीं हूँ, मैं वही हूँ और वही रहूँगा, लिबास की तरह बदलने की मेरी आदत […]
खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं […]
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