Category: ग़ज़ल

  • गीत – इश्क ए शैलाब |

    गीत – इश्क ए शैलाब |
    उफनते हुश्न ए शैलाब मुझे बहा न देना तुम |
    शराबी नजरों शबाब ए जाम डूबा न देना तुम |
    मै मरीज ए इश्क तेरा मर्ज ताजा ही रहेने दो |
    जलती आग मोहब्बत की बुझा न देना तुम |
    देखा नही हुश्न तुझसा सर से पाँव लबालब |
    बिठा रखा सिर आंखो मुझे गिरा न देना तुम |
    लिखा दिल पे नाम तेरा खून की रोशनाई से |
    रौंदकर पैरो तले तेरा नाम मिटा न देना तुम |
    इधर उधर जिधर नजर मगर कहा नही है तू |
    चाहा टूटके तुझे तोड़के दिल भुला न देना तुम |
    याद क्या करना तुझे भूलने की फुर्सत तो मिले |
    गुजरे बगैर तेरे जिंदगी दिन दिखा न देना तुम |
    चाँद तारे न मांगो झुका दूँ फलक कदमो तेरे |
    मै ही तेरी जिंदगी गैर मांग सजा न लेना तुम |
    नजर उठे सहर झुके तो शबब शाम हो जाये |
    लहरा जुलफ़े बन घटा वर्षा भिंगा न देना तुम |
    हाल दिल न पुछो मांग लो जान हँसके दे दु |
    देख दिवानापन भारती अब मजा न लेना तुम |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक / गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब -9955509286

  • क्या मैं पागल हूँ

    दिल के कब्र में एक मर्तबा झाँक कर तो देख,
    मैं उम्मीद की चिराग जलाए बैठा हूँ।
    एक न एक दिन मुरादें होंगे पूरे मेरे,
    वर्षों से यही उम्मीद लगाए बैठा हूँ।।
    तेरी यादों के सहारे ए मेरे हमजोली,
    अपनी जीवन की कश्ती सजाए बैठा हूँ ।
    हर रात एक एक तारे आसमां से चुरा कर,
    तारों से तेरा नाम दिल पे लिख बैठा हूँ।
    अपनी तड़पती दास्तां के अनमोल पन्नों पे,
    ख्यालों की कलम से अपनी ख्वाईश लिखने बैठा हूँ।
    कहे अमित इश्क़ की दीवानगी भी क्या दीवानगी है,
    जिसे देखो ज़माने से यही कहता है क्या मैं पागल हूँ।।

  • मैं

    दिन रात शराब पी कर तंग आ गया हूँ मैं। बेवफा की नशा उतरता ही नहीं क्या हो गया हूँ मैं।। कभी इश्क़ से कोसो दूर रहा करता था मैं।आज इश्क़ के गुलाम बन कर रह गया हूँ मैं।। कभी न कोई गम था न कोई दर्द था आज़ाद पक्षी था मैं। किसी ने चलाया ऐसा तीर घायल हो गया हूँ मैं।। दिल की महफ़िल में आज अकेला रह गया हूँ मैं। कौन हूँ मैं, क्या हूँ मैं बस यही सोच रहा हूँ मैं।।

  • बड़ा जखम दिया है,इस ज़माने ने

    बड़ा जखम दिया है,इस ज़माने ने
    सदियों लगेगी मूशकुराने में,

    अजब सी दरियादीली देखी ज़माने की,
    गरीबों को रुलाने में,अमीरों को हँसाने में.

    कहीं पर खुले अत्तयाचार है,तो कहीं पे
    मीठी जुबान पे तलवार है,

    जरा सी बात पर सारे रीशते तोड़ देते हैं,सारी
    रीवायते छोड़ देते हैं,

    जहान सदियों गुजर जाती हैं,”महमूद” रिश्ते बनाने में,रुठो को मानाने में.

    बड़ा जखम दिया है,इस ज़माने ने
    सदियों लगेगी मूशकुराने में.!

    By- M.A.K

  • लओट कर ना आया,ओ रहबर

    लओट कर ना आया,ओ रहबर – रहगुजर मेरा,
    त उमर रहा,तनहा सफर मेरा,

    हर रिश्ते फरेब देते रहे मुझे,ज़िन्दगी के हर मोड़ पर,
    बेवजह नेछावर कर दिए मैंने लहु का एक एक कतरा मेरा,

    ये फज़ा भी रूठी रूठी सी लगती है मुझसे,
    ये उसी तरफ बहती हैं,जहाँ जाता नहीं रास्ता मेरा.

    एक कसम के खातिर सारी उम्र गुजर दी,
    कभी कभी सोचता हूँ ” महमूद “,
    क्या शर्त के बुनियाद पे टीका था हर रिश्ता मेरा.

    By – M.A.K

  • जय हनुमान

    अद्वितीय सेवक हैं बल बुद्धि के निधान है
    अजर अमर कलयुग के प्रत्यक्ष भगवान् हैं
    असुरों के काल और संत जन रखवाले हैं
    श्री राम की असीम कृपा का पाया वरदान है
    फिर से बेहोश है लक्ष्मण प्रभु कृपा कीजिए
    संजीवनी बूटी ला कर बचाना तुम्हें प्राण है
    दीन दुखियों के कलयुग में आप ही सहारा है
    कुमति का निवारण कर सुमति देते हनुमान हैं
    दुनिया को निगल जाए तैयार है सुरसा
    बचाओ प्रभु हमको आप कलयुग में भगवान् हैं

  • राजनीति

    आ गया साल है पांचवा जानिए
    छा रहा है सहज मेघ ये मानिए
    बूंद दो भी बरस के न जाएगा ये
    मोर के जैसे शोर को छानिए
    घर बनेगा उन्ही का हकीकत यही
    पैर के नाप की ही चद्दर तानिेए
    भूल जाएंगे वो तुझको दान को
    वेवफा था सनम ज्यों उसे जानिए
    और बाते बनाना उसे आ रहा
    शोषको की कतारों खड़ा जानिए
    राजनीती यही है न कोई सगा
    आतंको की गढ़ी है पहिचानीए

  • जब मै बूडा हो जाउगा

    जब मै बूडा हो जाउगा,जब आँखो के दीये बूझ जाएंगे,
    कया तबी तुम मुझको चाहोगी,कया तबभी तुम मुझको प्यार करोगी,

    बोला ना.

    जब मेरी आँखे धुधली हो जाएंगी,जब चेहरे की झुर्रियां ज़िन्दगी की कशमकश से झोल जाएंगी,
    जब लडखडाते कदम अपनी मोहताजी का सहारा मगेगी,
    काय तब भी तुम मेरी हमकदम बन कर साथ चलोगी.

    बोलो ना.

    बोलो ना,जीस तरहा आज तूम मेरा हमसाया हो,हमकदम हो,
    जब मेरी शीकशत जिंदगी थक के चुर हो जाएंगी,
    जब मेरा अकेलापन तुमको आवाज देगा,
    कया तब भी तुम मुझसे मीलने आओगी,

    बोलो ना.

    जब मै बूडा हो जाउगा,कया तबी तुम मुझको चाहोगी.

    बोलो ना.

    By-M.A.K

  • एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

    एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

    ये दर्द ज़फ़ा का तेरे संघ सहने दे.

    ऐसे न नज़रे चुरा मुझसे,हूँ मै आखिर तेरा दीवाना,

    है जब तक साँस बाकि,तब तक तो तेरे इश्क़ में मुझको जलने दे.

    ऐसे न जुदा कर खुद को मुझसे ,

    हूँ मै एक बंजारा,मै चला गया तो वापस न आनेवाला

    तेरी बाँहों मुझको रहने दे,

    एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

    M.A.K

  • Jo Bit gai wo baat gah.

    Jo bit gai so baat gai
    Chalo ek nai suruat karen

    Mera gham tu lele tera gham mailelun
    Chal baith ek duje se kuch naat karen

    Bhuli bisry yaado se dard k faoware uthte hain
    gujara jamana bit gaya q usse khud ki tabiyat nasat karen,q ham usko yaad Karen.

    Jo bit gai so baat gai,chal ek nayi suruat Karen.

    By-M.A.K

  • मातृभाषा

    दर्द बनके आँखो के किनारों से बहती है!
    बनकर दुआ के फूल होंठो से झरती है!!

    देती है तू सुकून मुझे माँ के आँचल सा!
    बनके क़भी फुहार सी दिल पे बरसती है!!

    खुशियाँ ज़ाहिर करने के तरीक़े हज़ार है!
    मेरे दर्द की गहराई मगर तू समझती है!!

    जाऊँ कहीं भी मैं इस दुनिया जहान में!
    बन कर मेरी परछाईं मेरे साथ चलती हैं!!

    होगी ग़ुलाम दुनिया ये पराई ज़बान की !
    मेरी मातृभाषा तू मेरे दिल में धड़कती है!!

    ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’

  • कैसा है ये खयाल,,

    कैसा है ये खयाल
    ऐसा है अपना हाल
    जैसे,,,,
    लठ्ठे जल के
    बनता हो राख
    राख के भीतर
    छोटी सी आग
    आग मरता
    रहता है
    हाल अपना
    वैसा है,,
    जैसे,,,,,
    गर्मी के दिन में
    सूरज कि ताप
    मन में रखकर
    बरखा कि याद
    ताप पत्थर
    सहता है
    हाल अपना
    वैसा है,,,

  • लड़कियाँ

    घर आँगन में फूलों सी खिलती हुई लड़कियाँ!
    फ़ीकी दुनिया में मिसरी सी घुलतीं हुई लड़कियां!!

    उदासियों की भीड़ में हँसती हुई मिलती हैं!
    ज़िम्मेदारी के बोझ तले पिसती हुई लड़कियाँ!!

    ढल जाती हैं पानी सी हर बार नए आकार में!
    रिश्ते निभाके ख़ुद से बिछड़ती हुई लड़कियाँ!!

    लड़ रही हैं आज ख़ुद को बचाने के लिए!
    मंदिर में देवियों सी पुजती हुई लड़कियाँ!!

    निकल रही हैं खोल से अब पंख नए ले कर!
    तितली बन आकाश में उड़ती हुई लड़कियाँ!!

    ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’

  • जख़्म

    जख़्म तुझको मैं दिखा देता हूँ,
    दर्द अपना मैं भुला लेता हूँ।

    पास आकर जो बैठ जाते हैं,
    उनको अपना मैं बना लेता हूँ।

    कहते हैं मुझसे मन की अपनी,
    मैं भी मन उनसे लगा लेता हूँ।

    करते हैं खुल के बातें मुझसे,
    तो खुल के मैं भी सुना लेता हूँ।

    हैं नहीं जानते दिल की मेरे,
    दिल में जिनको मैं छुपा लेता हूँ।

    बैठ ख़ामोशी से देखो मुझको,
    आँख परिंदों से मिला लेता हूँ।

    घर है ना छत है सर पर मेरे,
    राही खुद से ही खफ़ा रहता हूँ।।

    राही अंजाना

  • जज़्बात

    यूँ अपने जज़्बात नुमाया क्यों करते हो !
    मेरी ख़ातिर अश्क बहाया क्यों करते हो !!

    क़िस्मत के लिक्खे से मैं भी वाकिफ़ हूँ !
    बातों से मुझको बहलाया क्यों करते हो !!

    जब साथ तुम्हारा है ही नहीं मुक़द्दर में !
    फिर मेरे ख़्वाबों में आया क्यों करते हो !!

    भूल के तुमको जिसने जीना सीख लिया !
    उसकी ख़ातिर नींदें ज़ाया क्यों करते हो !!

    अपना बनकर दुनिया ज़ख़्म लगाती है !
    सबको अपने राज़ बताया क्यों करते हो !!

    पत्थर दिल इंसानों की इस बस्ती में !
    तुम शीशे के महल बनाया क्यों करते हो !!

    ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’

  • तू कुछ कर गुजर..बस कुछ कर गुजर.

    हर अंधेरे को एक सवेरा मिलता है
    हर कांटो के ताज पर फुल खिलता है।
    फिक्र क्यूं करना समस्याओ की हे मनूष्य?
    हर काले बादल को एक रोशनी का किनारा मिलता है।

    संघर्ष किए बिना जीत नही मिलती है।
    हर तूफान मे भी एक नयी कली खिलती है।
    बीज बोना हमारा तो बस एक काम है।
    हर अंधेरी रात को भी भोर की जमी मिलती है।

    अाकाश की गहराई की परवाह मत कर
    हर परिस्थिती मे तू जवाब खोजता चल।
    फिक्र ना कर शोर मचाने वलो की
    तू कुछ कर गुजर..बस कुछ कर गुजर..।

    ये फिजा यू नही है इतनी भी बेखबर
    बस तू अपनी मंजील की तलाश कर..।
    हर समस्या के पहाड पर तू देता जा ठोकर
    बस तू कर गूजर..कूछ कर गुजर…।

    डॉ रमेश सिंह पल के बारे में अधिक जानने के लिए उनकी पर्सनल वेबसाइट पर जाये

    http://apanaswaroop.com

  • यादें

    बीते कल की परछाई है और तुम्हारी यादें हैं
    मैं हूँ, मेरी तन्हाई है और तुम्हारी यादें हैं..!!

    सर्द अंधेरी इन रातों में थोड़ी सी मदहोशी है
    टूटी सी इक अंगड़ाई है और तुम्हारी यादें हैं!!

    छूके तुमको आने वाली इन मदमस्त हवाओं ने
    भीनी खुशबू बिखराई है और तुम्हारी यादें हैं…!!

    ख्वाब तुम्हारे देखने वाली चंचल सी इन आँखों मे
    दर्द की बदली घिर आई है और तुम्हारी यादें हैं.!!

    ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’
    (21/12/2020)

  • यादों की बारात

    मुझे ठुकरा कर काश तुम अपना जीवन संवार लेते।
    तेरी बेवफ़ाई को ही हम अनमोल तोहफ़ा समझ लेते।।
    मुझे यह दु:ख नहीं कि तुम मेरे हमसफ़र नहीं बन पाए।
    दु:ख तो इस बात की है हम एक हो के भी एक हो न पाए।।
    जीवन में हर शख्स को मुकम्मल प्यार नहीं मिलता।।
    फिर भी यादों की बारात में यादों के फूल है खिलता।।

  • पहली प्यार की पहली निशानी

    पहली प्यार की पहली निशानी ।
    संभाल कर रखना ऐ मेरी रानी।।
    यदि कल हम मिले या न मिले।
    फिर भी गुलशन में गुल खिले।।
    मिलन पे मौसम भी बेमिसाल है।
    क्योंकि मुझे तुम से ही प्यार है।।
    जुदा कर दे खुदा में दम नहीं ।
    मुहब्बत है कोई खिलवाड़ नहीं ।।
    दिल दिया है तो जान हम देंगे ।
    सितमगर को हम परख भी लेंगे।।

  • तवायफ़

    अश्कों का समन्दर है अँखियों में मेरी
    एक कागज की किश्ती कहाँ से चलेगी।
    है ये बदनाम बस्ती हमारी सनम
    इश्क की फिर कलियाँ कहाँ से खिलेगी।।
    रोकड़े में खरीदे सभी प्यार आकर
    प्यार की ज़िन्दगी पर कहाँ से मिलेगी।
    मजबुरियों ने मुझको तवायफ़ बनाया
    ‘विनयचंद ‘ बीबी कहाँ से बनेगी।।

  • मुस्कुराने की दवा चाहिए

    बहुत गमगीन हो रही ज़िन्दगी
    मुस्कुराने की दवा चाहिए।
    मर्ज बनकर खड़ी है नफरते
    प्यार की एक हवा चाहिए।।
    चाहते हैं सभी सेकना रोटियाँ
    तप्त-सा कोई तवा चाहिए।
    इन्सान बनकर रहे सर्वदा
    बनने को ना खुदा चाहिए।।
    प्रेम की दुनिया सलामत रहे
    हर नजर इश्के अदा चाहिए।
    ये ‘विनयचंद ‘ मायूस होना नहीं
    दिल दरिया दया पे खरा चाहिए।।

  • प्रेम

    राहें हमारी मिलने के आसार नहीं हैं!
    कैसे कहूँ तुम्हारा इंतजार नहीं है!!

    मेरी हर दलील को ठुकरा चुका है ये!
    इस दिल पे मेरा कोई इख्तियार नही है!!

    ख़्वाबों में तुमसे रोज़ मुलाक़ात है मेरी!
    अफसोस हक़ीकत में ही दीदार नहीं है!!

    रूह के हर जर्रे में शामिल हो तुम ही तुम!
    और कहते हो लकीरों में मेरी प्यार नहीं है!!

    ©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’

  • बदल रही है ज़िंदगी

    बदल रही है ज़िंदगी, बदल रही हूँ मैं..!
    तुम इश्क हो तुम्ही में ढल रही हूँ मैं!!

    नरमी तुम्हारे हाथों की ओढ़े हुए हैं धूप..!
    तपिश में इसकी बर्फ़ सी पिघल रही हूँ मैं!!

    जाना तुम्हें तो ख़ुद का कुछ होश न रहा!
    गिरती हूँ कभी और क़भी संभल रही हूँ मैं!!

    ख़ुद से छिपाती हूँ मैं अपने दिल का हाल!
    लगता है जैसे हाथों से निकल रही हूँ मैं..!!

    रस्ता भी मेरा तुम हो मंजिल भी तुम ही हो!
    जाऊँ जिधर भी तुम से ही मिल रही हूँ मैं..!!

    n 3^07 !
    © अनु उर्मिल ‘अनुवाद’

  • इश्क़ के मारा दो बेचारा

    हम तो गिर कर भी संभल नहीं पाए
    क्या करें चाहत की डोर ही कुछ ऐसी थी।
    वो कहते रहे चिंगारी से कभी न खेलना
    हम जान कर भी अनजान बने रहे
    क्या करे हमारी तकदीर ही कुछ ऐसी थी
    जब मिला मैं इश्क़ के जौहरी से — उसने कहा
    अश्क़ न बहा ए मुकद्दर के फकीर आशिक़
    जो हाल तेरा है वही हाल कभी मेरी भी थी।

  • नई रोशनी हो

    सुबह की, किरण हो नई रोशनी हो,
    बहारों भरी हो, नई रोशनी हो।
    जिन्हें रात भर चैन की नींद आयी,
    उन्हें जगमगाती, नई रोशनी हो।
    बिखरते हुये दिल अंधेरा घिरा हो,
    उन्हें राह देती, नई रोशनी हो।
    युवा नव दिशा में कदम को बढ़ाये,
    पथों का उजाला, नई रोशनी हो।

  • बेवफा से वफ़ा

    दिल ले के वो नादान, दग़ाबाज़ी करते चले गए।
    रेत में हम उनके लिए, महल बनाते चले गए।।
    हमें क्या पता था, खूबसूरत समंदर की बेवफ़ाई।
    हम तो समंदर की सुरत पे, एतवार करते चले गए।।
    जो होना था सो तो हो गया, क्या करे “अमित ” ।
    ए आँखें भी बिन सावन के ही, बरसते चले गए।।

  • अंधेरे से ज्यादा, करीबी न रखना,

    अंधेरे से ज्यादा, करीबी न रखना,
    अंधेरे से दूरी बनाए ही रखना।
    भले ही जमाना, तुम्हें कुछ न समझे,
    मगर हौसले को बनाये ही रखना।
    चली आंधियां है, धूल उड़ रही है
    आंखों को अपनी बचाये ही रहना।
    भरी दोपहर, तेज सूरज की किरणें,
    मासूम चेहरा छुपाए ही रखना।

  • मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी

    वफ़ा कीजिए खुद वफ़ा ही मिलेगी,
    धोखे से बस बेवफाई मिलेगी।
    मुहोब्बत अगर साफ पानी से होगी,
    दिल ए गंदगी को , जगह ना मिलेगी।
    सड़क धूल से, इस कदर जब भरी हो,
    पांवों को निर्मल, वफ़ा ना मिलेगी।
    सदा कोसते हम रहे दुश्मनों को
    मगर इससे कोई दिशा ना मिलेगी।
    — डॉ0 सतीश पाण्डेय

  • मोहब्बत का सफर

    यारा! तुझ संग जिंदगी गुजारनी है
    मोहब्बत में तेरी हर शाम महकानी है,

    तेरे ही नाम से लहराता है आँचल मेरा
    तेरी दीवानी बन हर रात महकानी है,

    बिन तेरे प्यासी हूँ मेरे हमसफ़र
    प्रेम की गहराई में कश्ती डुबोनी है,

    दर्द भी मेरे तेरे प्यार में सिमट गए
    मेरी हर अदा में तेरी ही कहानी है,

    जिंदगी और जग में सब जायज है”मीता ‘
    जमाने से लड़कर मोहब्बत रंगीन बनानी है,

    किस किस को दूँ तेरे मेरे रिश्ते की दुहाई
    ‘पूनम रात है चांद की पालकी आज सजानी है।

  • पल दो पल

    दो पल बैठो पास हमारे
    ये पल यूँ ही गुजर जाएंगे

    दो पल का है साथ हमारा
    ये पल लौट कर ना आएंगे

    दो पल तुमसे बात तो कर लूँ
    ये पल पलकों में ही सिमट जाएंगे

    दो पल के लिए भी तुम ना आए तो
    ये पल तन्हाई में लिपट जाएंगे

    दो पल खुशी के धीरे धीरे रे मना साथी
    ये पल फिर कभी ना मिल पाएंगे।।

  • मुहब्बत को बदनाम न करो

    सुनो ए दोस्त तुम ए काम न किया करो।
    मुहब्बत को यों बदनाम न किया करो।।
    माना कि रास्ते बहुत कठिन है इश्क के।
    फिर भी अपनी इश्क़ पे यकीन किया करो।।
    जो हर मर्तबा खोता है वही शख्स पाता है।
    बस थोड़ा सा इन्तजार की घड़ियाँ गिना करो।।
    ए क्या पल में पागलपन पल में ही मयख़ाना।
    खुदा के लिए तुम ऐसा पागलपन न किया करो।।

  • बीते कल

    ए हमजोली जरा बता तो सही कहाँ गए वो दिन ।
    रह नहीं पाते थे कभी हम एक दूसरे के बिन।।
    वो कसमे वादे वो हसीन ख्यालों के मीठा ख्वाब।
    आज वक्त के साथ सभी क्यों दफन हो गए जनाब।।
    याद है तुम्हें जब हम कभी तुझ से रुठ जाया करते थे।
    चाँद से सितारे तोड़ लाने की तुम बातें किया करते थे।।

  • ज़िन्दगी तू ही बता..

    “साँस लेता हूँ फकत ये भी कोई कम तो नही,
    ज़िंंदगी तू ही बता मुझपे तू सितम तो नही..

    कभी पूछा न ज़माने के शरीफ लोगों ने,
    ‘दीवाने ये बता कि तुझको कोई गम तो नही?’

    किया हमने ही उसकी बात का ऐतबार मगर,
    उसका कहना कोई वादा या फिर कसम तो नही..

    क्यूँ खुदा तक नही पहुँची मेरी सदा अब तक,
    दुआ मुझसे ही चली मुझपे ही खतम तो नही..

    तेरी आँखों में यकीनन कुछ चुभ रहा होगा,
    वरना अब तक तो हुई आँखे तेरी नम तो नही..’

    – प्रयाग धर्मानी

    मायने :
    फकत – सिर्फ
    सदा – आवाज़

  • तुझे दिल में मैं उतार लूं

    अभी ना मेरा दीदार कर,
    थोड़ा ख़ुद को मैं संवार लूं।
    तेरा हर लफ्ज़ हो शहद सा,
    तुझे दिल में मैं उतार लूं।
    जब मिले तेरी नज़र से, नज़र मेरी,
    तेरी छवि जिगर में उतार लूं।

  • आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है

    आजादी के जश्न में तो मनाता हर कोई है
    आजादी का मायना समझ सके तो कोई बात बने

    समाज जब संवेदनहीन हो जाये
    तब कोई संवेदना से बाते करे तो कोई बात बने

    तिरंगे के कपड़े को तो सबने देखा है मगर
    उसकी रूह में झांक सकें तो कोई बात बनें

    हर कोई अपनी बात ही करता है यहां
    कभी कोई दूसरे की बात हो तो बात बनें

    मेरी बातों से लहू मत करना तुम दिल अपना
    किसी के क्रन्दन से जब दिल दुखे तो कोई बात बनें

  • पहचान क्यों अलग सी है..

    जय हिन्द साथियो

    पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में
    सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में

    है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा
    कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में

    हर रूप में हैं पूजते नारी को हम यहाँ
    तुमको खुदा मिलेंगे हमारे ईमान में

    ख़ुश्बू उड़े हवा में सुबह शाम पाक सी
    गीता सुनाई देती यहाँ पर क़ुरान में

    यूँ लाँघना कठिन है फ़सीलों को भी यहाँ
    बारूद भर दिया है यहाँ हर जवान में

    है केसरी सफेद हरे रंग से बना
    ऊँचा रहे तिरंगा सदा आसमान में

    बस खुशनसीब लिपटें तिरंगे में ‘आरज़ू’
    कर जाते नाम भी अमर दोनों जहान में

    जय हिंद
    जय जवान,जय किसान,जय विज्ञान

    Arjun Gupta (Aarzoo)

  • मेरी जान है भारत

    आदाब

    जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत
    फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत

    यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो
    सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत

    क़सीदा हो, रुबाई हो, ग़ज़ल हो यां कोई नग़मा
    सभी दानिशवरों का एक ही उन्वान है भारत

    कभी है खीर की ख़ुश्बू कभी मीठी सेवइयां हैं
    कभी दीपावली है ये कभी रमजान है भारत

    मेरा मशरिक़ में हो घर याँ ठिकाना हो मेरा मग़रिब
    रहूँ चाहे कहीं पे भी मेरी पहचान है भारत

    हज़ारों बोलियों की खुशबुएँ घुलती फ़िज़ाओं में
    सभी धर्मों से महका सा बड़ा गुलदान है भारत

    करेगा ‘आरज़ू’ कुर्बान अपनी ज़िंदगी हसके
    तू मेरी आन, मेरी शान, मेरी जान है भारत

    अर्जुन गुप्ता (आरज़ू)

  • वतनपरस्ती के अशआर

    आदाब

    जहाँ के वास्ते बेशक कोई वरदान है भारत
    फरिश्तों के लिए भी आरज़ू-अरमान है भारत

    यहीं जन्मी है दुनियाँ की पुरानी सभ्यता यारो
    सभी वेदों पुराणों का कोई सम्मान है भारत

    क़सीदा हो, रुबाई हो, ग़ज़ल हो यां कोई नग़मा
    सभी दानिशवरों का एक ही उन्वान है भारत

    कभी है खीर की ख़ुश्बू कभी मीठी सेवइयां हैं
    कभी दीपावली है ये कभी रमजान है भारत

    मेरा मशरिक़ में हो घर याँ ठिकाना हो मेरा मग़रिब
    रहूँ चाहे कहीं पे भी मेरी पहचान है भारत

    हज़ारों बोलियों की खुशबुएँ घुलती फ़िज़ाओं में
    सभी धर्मों से महका सा बड़ा गुलदान है भारत

    करेगा ‘आरज़ू’ कुर्बान अपनी ज़िंदगी हसके
    तू मेरी आन, मेरी शान, मेरी जान है भारत

    अर्जुन गुप्ता (आरज़ू)

  • Ghazal

    जय हिन्द साथियो

    पहचान क्यों अलग सी है सारे जहान में
    सब सोचते ऐसा है क्या हिन्दोस्तान में

    है सभ्यता की मूल ये हिन्दोस्तां मेरा
    कितनी मिठास मिलती हमारी ज़ुबान में

    हर रूप में हैं पूजते नारी को हम यहाँ
    तुमको खुदा मिलेंगे हमारे ईमान में

    ख़ुश्बू उड़े हवा में सुबह शाम पाक सी
    गीता सुनाई देती यहाँ पर क़ुरान में

    यूँ लाँघना कठिन है फ़सीलों को भी यहाँ
    बारूद भर दिया है यहाँ हर जवान में

    है केसरी सफेद हरे रंग से बना
    ऊँचा रहे तिरंगा सदा आसमान में

    बस खुशनसीब लिपटें तिरंगे में ‘आरज़ू’
    कर जाते नाम भी अमर दोनों जहान में

    जय हिंद
    जय जवान,जय किसान,जय विज्ञान

    Arjun Gupta (Aarzoo)

  • तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया ।

    तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया ।
    तुझे भूलाके हमने खूद को याद किया ।।

    अपनी पहचान भूलाके हमने साथ प्यार का सपना देखा ।
    कमबख्त! तुने मुफलिस समझे मेरा प्रेम-प्रस्ताव अस्वीकार किया ।।

    खेले तुमने मेरे जज्बात से झू़ठी मुहब्बत किया तुमने ।
    रंगीन-सी जिन्दगी में आखिर तुमने अपनी बेवफाई की रंग घोली ।।

    सीधे-सीदे जिन्दगी जी रहें थे हम, खूद में मस्त रहते थे हम ।।
    तुझसे मुलाकात क्या हुई? कमबख्त! तुने ऐसे-ही जिन्दगी लूट ली मेरी ।।

    बेवफा, संगदिल, बेरहम-बेह्या हम किसी को बद्दुआ नहीं देते, तो तुझे क्या खाक! देंगे?
    दुआ ही दुआ लगें यहीं दुआ है तुम्हें ।।

    तु जीले अपनी जिन्दगी खूद के उसूलों से गम नहीं इसका मुझे ।
    तु गैर की जहां में आबाद रहें, यहीं दुआ हैं तुम्हें ।।

    जहां न कह सके तुझे ओ! बेवफा तु वफा की दुनिया में सलामत रहें ।
    न लगे जहां की कोई बुरी नजर तुझे, ईश्वर तुझे हर बला से बचायें रखें ।।

    तु जिये अपनी जिन्दगी अपनी जहां में अपने लोगों के साथ ।
    गम नहीं इसका मुझे, तू जहाँ रहें अपने लोगों के साथ मस्त रहें ।।
    — विकास कुमार

  • क्या लिखूँ जो दुनिया को भाये ।

    गजल ।।

    क्या लिखूँ जो दुनिया को भाये ।
    मैं नहीं तो क्या कोई तो भाये जहां को ।।1।।

    जहां को अगर लगते है शख्स वो प्यारे ।
    तो मैं क्यूँ महफिल में सरेआम बदनाम हुँ ।।2।।

    बदनाम मैं नहीं तो क्या वो आम आदमी है ।
    जो जिस्म के बाजार में मेहनत के रोटि खाते है ।।3।।

    जिनके ऊँची शान है, उनके बोल के भी कुछ दाम है ।
    मगर जहां में फकीर के शान, सब मोल के महान ।।4।।

    यूँही लोग आज कुछ लिख देते है ।
    लोग बेवजह झंझट मोल लेते है ।।5।।

    वो वक्त आज नहीं जो लेख को पढ़ते कोई ।
    आज लोग सिर्फ पसंद टिप्पणियाँ पे ध्यान देते है ।।6।।

    मगर मेरे दोस्त कवि शायर लेखक पसंद टिप्पणियाँ से कोशो दूर होते है ।
    उनके विचार सूर्य के सूर्य के रौशनी तो क्या हर घरों में आबाद करती है ।।7।।।

    जहां को अगर लगते है शख्स वो प्यारे ।
    तो मैं क्यूँ महफिल में सरेआम बदनाम हुँ ।।8।।

    कवि विकास कुमार

  • याराना

    🌹🌹 Friendship Day special🌹🌹
    गजल:- याराना

    प्रेम से भी बड़ा बन्धन,
    सुकून आये दोस्ती में।
    कभी कृष्णा कभी अर्जुन
    याद आये दोस्ती में।

    अपनी जिंदगी से
    हार थक करके हर इन्सान,
    सभी परेशानियां और
    गम भूल जाये दोस्ती में।

    बना दे जिंदगी सुंदर
    निभाओ साथ जब दिल से
    यकीन करना बड़ा मुश्किल
    दग़ा गर कोई दे फिर से।

    दोस्ती है बड़े विश्वास
    और एहसास का बन्धन,
    निभाओ इसको तुम निःस्वार्थ
    हो विश्वास जब दिल से।

    मेरे मन के मंदिर में
    दोस्ती राज करती है,
    मेरे यार की मूरत
    ही मन में वास करती है।

    मेरे दोस्त और मुझसे
    है कुछ ज्यादा ही मीठापन
    साथ बस कुछ ही पल का है
    ये दुनिया बात करती है।

    कर्ण ने दुर्योधन से
    निभाया खूब याराना।
    रक्त के रिश्तों को तोड़ा
    निभाया खूब याराना।

    कन्हैया ने तो अर्जुन को
    गीता उपदेश दे डाला,
    उठा हथियार वचन तोड़ा
    निभाया खूब याराना।।

  • 🌹🌹याराना🌹🌹

    🌹🌹 Friendship Day special🌹🌹
    गजल:- 🌹🌹याराना🌹🌹

    प्रेम से भी बड़ा बन्धन,
    सुकून आये दोस्ती में।
    कभी कृष्णा कभी अर्जुन
    याद आये दोस्ती में।

    अपनी जिंदगी से
    हार थक करके हर इन्सान,
    सभी परेशानियां और
    गम भूल जाये दोस्ती में।

    बना दे जिंदगी सुंदर
    निभाओ साथ जब दिल से
    यकीन करना बड़ा मुश्किल
    दग़ा गर कोई दे फिर से।

    दोस्ती है बड़े विश्वास
    और एहसास का बन्धन,
    निभाओ इसको तुम निःस्वार्थ
    हो विश्वास जब दिल से।

    मेरे मन के मंदिर में
    दोस्ती राज करती है,
    मेरे यार की मूरत
    ही मन में वास करती है।

    मेरे दोस्त और मुझसे
    है कुछ ज्यादा ही मीठापन
    साथ बस कुछ ही पल का है
    ये दुनिया बात करती है।

    कर्ण ने दुर्योधन से
    निभाया खूब याराना।
    रक्त के रिश्तों को तोड़ा
    निभाया खूब याराना।

    कन्हैया ने तो अर्जुन को
    गीता उपदेश दे डाला,
    उठा हथियार वचन तोड़ा
    निभाया खूब याराना।।

  • दिल की डूबें न कश्तियां

    मेरी पुरनम कहानियां सुनकर।।
    दिल की डूबें न कश्तियां सुनकर।।

    तेरे चर्चे में फूलों की ख़ूशबू
    पास आती हैं तितलियां सुनकर।।

    दूल्हा बाज़ार से ख़रीदेंगे
    क्या कहेंगी ये बेटियां सुनकर।।

    वह मुझे याद कर रही होगी
    लोग टोकेंगे हिचकियां सुनकर।।

    सच भी उसको लगे बहाने सा
    ख़त्म होंगी न दूरियां सुनकर।।

  • सफ़र छोड़ना पड़ा

    सौ बार सरे-राह सफ़र छोड़ना पड़ा।।
    मंज़िल पे हर परिन्द को पर छोड़ना पड़ा।।

    पुश्तैनी घर की जब मेरे दहलीज़ गिर पड़ी
    घर को बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ा।।

    दहशत के लिए हो रहे हैं हमले चारसू
    हमलों के ही ज़वाब में डर छोड़ना पड़ा।।

    अब तो मिला जो काम वही रास आ गया
    जब बिक नहीं सका तो हुनर छोड़ना पड़ा।।

    इनसान ने डंसने की रवायत संभाल ली
    सांपों को शर्म आयी जहर छोड़ना पड़ा।।

  • इतना अच्छा नहीं हुँ, जितना कि दुनिया कहती है ।

    गज़ल ।।

    इतना अच्छा नहीं हुँ, जितना कि दुनिया कहती है ।
    मैं कैसा हुँ, ये सिर्फ मैं जानता हूँ ।।1।।

    खूद के सवालों के कठघड़े में, मैं हरवक्त खड़ा रहता हूँ ।
    दूसरों के नजरों में जो अच्छा बनूँ तो क्या ।
    अपनी नजरों में गिरा रहता हूँ ।।2।।

    लाख दुनिया करनामे दिखाये तो क्या ।
    इस भौतिक जग में बेच आत्मा को ।
    वही शख्स हूँ मै, जो कभी भूल नहीं पाता ।
    क्षणिक आनंद को, मैं वही गलत विचारों का मारा, हरि का खिलौना हूँ ।।3।।

    हरि ने तो भेजा है, देकर निर्मल काया ।
    पर इस बंदे ने लगाया चुनरी में दाग है ।।4।।

    बन्दे के इस करतूत से ईश्वर नाराज है ।
    लेकिन ईश्वर समदर्शी है, पर न्याय के संग है ।।5।।

    मैं क्या करूँ, ये समझ नहीं पाता हूँ ।
    झूठी नगरी, क्षणिक देहिक आनंद में खोया रहता है ।।6।।

    सदा ही धिक्कारती है जो आत्मा,
    तो मैं खूद को आकाश से ऊपर से भी ऊपर से गिरा समझता हूँ ।।7।।
    इतना अच्छा नहीं हूँ, जितना कि दुनिया कहती है ।।
    कवि विकास कुमार

  • हमें गैरों से भी मोहब्बत है।

    हमको गैरों से भी मोहब्बत है,
    अकेला तुमसे होता,तो मर जाते।
    घर से दूर हैं घर के वास्ते,
    वरना हम भी सोचते हैं ,काश घर जाते।
    हम खड़े हैं हमने माज़ी से सबक लिया,
    वक़्त से अकड़ते ,तो हम भी टूट जाते।
    रूठ जाते हैं लोग बात- बेबात मोहब्बत में,
    गर तुम मनाते ,तो हम भी रूठ जाते।
    इस राखी कलाई सरहदों पर है,
    बहन सोचती है काश भाई घर आ जाते।
    हमारे बीच ये अनबन पहली मर्तबा तो नहीं,
    तुम खाली हाथ भी आते तो हम मान जाते।
    मुझे दुःख है तुम मेरे जीत पर ख़ुश नहीं,
    गर जानते ,तो हम जिंदगी से हार जाते।।
    ~ अजित सोनपाल

  • तेरे बिन गुजारा नहीं

    रोज मिलने के वादे तोड़ते हो जो तुम
    बात तेरी ये मुझको गवारा नहीं।

    बात ही बात पे रूठते हो जो तुम
    जानते हो तेरे बिन गुजारा नहीं।

    रोज अपनी गली देखते हो मुझे
    आशिक हूँ तेरा पर आवारा नहीं।

    थोड़ा नजरें इनायत फरमाओ तुम
    गैर नजरों के खातिर सँवारा नहीं।

    मेरी एकलौती चाहत अरमान तुम
    डोले हर फूल “राजू” वो भंवरा नहीं।।

    ~राजू पाण्डेय
    बगोटी (चम्पावत)

  • सनम

    राज़ को राज़ ही रहने दो ए सनम।
    मुझे गवारा नहीं कि तुझे कोई बेवफा कहे सनम।
    मैने मुहब्बत की है कोई खिलवाड़ नहीं।
    तेरी रुसवाई को सिन्हे में छुपाया है सनम।।
    माना कि वफा के बदले मिला बेवफाई ।
    यही तोहफ़ा मेरे लिए अनमोल है सनम ।।
    मर के भी यह दिल तुझे ही ढूंढेगा।
    यह झूठ नहीं सच है सनम तेरी कसम।।

  • दुआ इतनी है

    दुआ इतनी है कि रोज इस तरह भी बेशुमार आएं।
    दिन ढले तो बहार आए रात गुजरे तो बहार आए।

    घटाएँ चिलमन हैं खुशियाँ हैं रोशनी की किरण,
    घटाएँ ढलती रहें रोशनी के गुबार आएं।

    हमारी बात और है कि रहते हैं हम अंधेरों में,
    तुम उजाले हो क्यों न हमें तुम पर प्यार आए।

    कुछ समझ नहीं आता क्या बात है चेहरे में,
    देखें तो खुमार आए बिन देखे न करार आए।

    आज का दिन हो उल्फत का तरन्नुम हो साज हो,
    आज ही आज हो कल कभी कभार आए।

    जिंदगी की जिंदादिली मैं तुमसे आज कहता हूँ,
    अपनाते चले जाओ जिंदगी में निखार आए।

    संजय नारायण

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