✍?(गीताज ) ?✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है […]

✍?(अंदाज)?✍ —–$—– ✍ जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए रूठना मनाना क्रम है जीवन का रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है नेह का श्रद्धा आपार […]

जख्म दबा – कर मुश्काता हूं | चुप रहकर मैं चिल्लाता हूं | मेरी बातें खुल न जाये | बातों से ‘ मैं बहकाता हूं | घर में ‘ आग लगा मत देना | पानी […]

हुआ हूँ ख़ाक यहां रह गया ‘ धुआं मेरा | किसी में दम है तो रोको ये कारवां मेरा | सभी ये कहते है अक्सर ज़मीन मेरी है | कोई ये क्यों नही कहता है […]

**मत करो देर”** मत करो देर , झटपट पाट दो , दिल की दरारों को । जमाना क्या कहेगा ,समझ़ो, जमाने के इशारों को । जिदों का यह अड़ियली रुख ,बहुत ज्यादा, नहीं अच्छा , […]

हमने चाहतों को सजाना छोड़ दिया तेरे जाते ही जमाना छोड़ दिया क्यों हम टूटते ही चले जा रहे हैं लगता है उसने बनाना छोड़ दिया नींद भी हमें अब कम आती है ख्वाबों ने […]

कच्ची मिट्टी के जैसी मै धीरे धीरे धँसती हूँ मै लडकी हूँ इस आँगन की तब ही इतनी सस्ती हूँ   लोग लगाएगें बोली मेरी बडे सलीके  से लोग तमाशा देखेगें कि मै कितने में […]

✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ विकराल बन तू महाकाल बन मिसाल बन तू बेमिसाल बन अनंत अकूत अद्भुत साहस धर प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बन बुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बन सभ्यता […]

✍? (अंदाज ) ?✍ ——-($)—— ✍ विद्रूपता का सव॔ विनाश करो कण -कण मे दृढ विश्वास भरो शौर्यशिलता का प्रतीक तुम बुद्धि मे विवेक गुण खास धरो चिंतन करो स्वास्थ्य मंथन करो सुखद सम्भाव रहे […]

सिर्फ़ अपनी झूठी शान दिखाते हैं लोग दिल छोटा रखते हैं इमारत बडी बनाते हैं लोग नफ़रत दिल मे है प्यार जताते है लोग अपने सच से हैं बेख़बर ओरो को आईना दिखाते हैं लोग […]

मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार […]

✍? (अंदाज )?✍ ✍ नव पल परिवेश का अहवान हो अंतर्मन मे नैतिक उत्थान हो जीवन है जग मे एक भीषण युद्ध विजय भाव का मन मे उफान हो निज लक्ष्य मिले हो सबका भला […]

✍? (अंदाज ) ?✍ ——($)—– ✍ बिषमताओ से टकराना जरूरी है संघर्ष के जल से नहाना जरूरी है जीवन है गतिमान लय का रूप जिंदगी मे संवर जाना जरूरी है प्रतिकूलता है वक्त का इम्तहान […]

गजल सबको रस्ता दिखा रहा हूं मैं | साथ ‘ मिट्टी उड़ा रहा हूं मैं | इन दरख्तों में अब भी जिंदा हूं | अपना साया मिटा रहा हूं मैं | मुझको लाकर लिटा गए […]

//ग़ज़ल// जवां धडकनो को धड़कने दो यारों। जरा आशिकी औऱ बढ़ने दो यारों।१ महकता रहे गुल चमन प्यार का ही, फि़जा रुत सुहानी बहकने दो यारों ।२ करें प्यार इतना …समन्दर से गहरा, मुहब्बत जरा […]

गजल है चाह मिलूं उससे जो अक्सर नहीं मिलता | दीवार घरों में है मगर घर नहीं मिलता | ये आप भी देखें है कि बस मुझको भरम है | हर शख़्स परेशान है खुलकर […]

✍?अंदाज ?✍ ——-($)—— ✍ आलस्य न प्रमाद धर तनाव न अवसाद धर ऊमंग रख नस-नस मे उत्साह का स्वाद रख तरुणाई की बेला है जीत भाव आगाध रख संघर्ष से घबरा नही तरंगित शंखनाद रख […]

✍ ? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ रक्त से सनी धरती लाल देख चहुंओर हाहाकार हाल देख समरसता जल रही धूं धूं कर सद्भावना है बदहाल देख हिंसा आतंक का है जोर प्रबल छल-कपट का रुप […]

✍? गजल ?✍ ✍ तू ही हैअर्जुन आवाज सुन परिवेश का दर्दे साज सुन छटपटा रही धरती देख तू माहौल का क्रंदन आज सुन तेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान नव नीति का रम्य नाज […]

✍? गजल ?✍ —–(*)—– ✍ जग मे कुछ कर जाना जरूरी है जीवन मे मुस्कुराना जरूरी है चाहे हो कष्ट संकट गहनतम धैर्य से निकल जाना जरूरी है जग का काम है करना अवरोध बुद्धि […]

✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔ संत साधुओ को तारो निस्वार्थ बिलखता पल विषाक्त क्षण मे विषैले हवाओ को टारो साक्षाथ॔ छल-बलयुक्त विकृत इस दौर मे दिखाओ अपना सच्चा पुरुषार्थ […]

✍? गजल ?✍ —–($)—– ✍ सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है ईमान बेईमान के बीच लड़ाई है इंसान का इंसान मे नही विश्वास मानव का मानव के बीच खाई है परिवेश मे घुला है जहर […]

वज़्न – 122 122 122 122 अर्कान – फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन बह्र – बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम काफ़िया – आ (स्वर) रदीफ- है। मेरें दामन मे दर्द का सिलसिला है। रहा हर सफ़र जिन्दगी […]

✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ मेरी जिंदगी का निखार तू है मेरी मुस्कान का प्रसार तू है तेरी चाहत का मै हूं दिवाना मेरी मुहब्बत का आधार तू है मेरी कल्पना तमन्ना मेरी तू मेरी […]

कफ़न का ही इँतजाम कर दो | दो गज की जमीं नाम कर दो | दफन कर के मुझको जमीं में | मुझे गुल से गुलफाम कर दो | चलें आयेंगे देखने मुझको | ये […]

इश्क को माना खुदा है | देख लो क्या क्या सजा है | उन गुलों को क्यूं मसल दूं | जो मेरा भी हमनवा है | मुश्कुराहट देख के मेरी | आइना मुझ पर फिदा […]

? गजल ? ✍ तेरी नयन मदभरी गजब तेरी अदाएं रसभरी गजब मुस्कानो की पहचान नई तेरी सदाएं खरी-खरी गजब अंगड़ाई मे खिली मोहकता तेरी जुबां मे प्रीत भरी गजब चाहत मे ढला ईशक नवल […]

? गजल ? पाण्डव सा धैर्य धर्म मे संवरिए कौरव सा न अधम॔ मे संघरिए सांसारिक खुशी चाह के लिखे बेईमानी का न दामन धरिए सत्य सच्चाई संसार का है सुख निज को पहचान खुद […]

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । गजल उनको ही सुनाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । दरख्ते उम्मीद अब है कहां लगतें तेरे जमी पर रकीबों सा अब तड़पता रहा हूं […]

एक दिन आसमां से गुजर जायेंगे | कब्र दर कब्र में हम उतर जायेंगे | आँधियों से ये कह दो रहें होश में | गर नही तो गुजर रौंदकर जायेंगे | लाख तूफ़ान दरिया उठाती […]

रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने | माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने | इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको | आग ये सीने की अश्कों से बुझा […]

रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने | माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने | इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको | आग ये सीने की अश्कों से बुझा […]

मुफलिसी जहां की बस मैं जबान रखता हूं | आज हाथ में अपने आसमान रखता हूं | गौर कर जरा बस्ती पे कभी खुदा मेरे | हैं गरीब सब तो घर में दुकान रखता हूं […]

हर तरफ ही इश्क़ की कलियाँ खिला दी जायेगी | चाँद तारो की शरारत कुछ मिटा दी जायेगी | तुम कहो , तो चाँद – तारें आसमां से तोड़ दूँ | गर नही तोडूं मेरी […]

कदम दर कदम मै बढाने चला हूँ। सफर जिन्दगी का सजाने चला हूंँ। खुशी-ए-जमाना तुझे सौप कर मैं, सफल जिन्दगी को बनाने चला हूँ। मुहब्बत से ज़्यादा ये कुछ भी नही है, ग़ज़ल प्यार मैं […]

बहारो मे जब अकसर कुछ फूल आते है ये पौधे बेबसी अपनी अकसर भूल जाते है कुछ इस तरह मिलती है निगाह अजनबी से कहना क्या होता है हम अकसर भूल जाते है कल सरे […]

प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। हो सदा वचनों में इक नव सादगी , प्यार काे […]

चलना संभल कर यहां जर्रे जर्रे में है धोखा। अब सांसे भी सांसों को देता रहा है धोखा। यूं जिंदगी को न कर इस कदर रुसवा यहां हर गली हर चौराहे पर पसरा है धोखा। […]

वो गए है छोड़ के हर बार की तरह, हम क्यों हैरान हो बेकार की तरह, ये कौनसी पहली दफा है मोहब्बत में, ये सब चलता रहता है सरकार की तरह, पता है वो वापिस […]

बह्र – २१२२ / २१२२ / २१२ :::::::::::::::::::;::::::::::::::::::::::::: जो हुआ वो सब भुलाना चाहिए । रूठे मन को अब मनाना चाहिए।१ बैठ यारों अब यहा महफिल सजें मयकशी का दौर लाना चाहिए।२ गर शिकायत हो […]

जब न था इश्क दर्दे-ए-दिल न था! जब से उनसे उलझी नज़रें बेकली सी  हो गयी!! *********                     इब्दिता-ए-इश्क में..               उनके उठाए नाज़-ओ-खम!                      अब ना जाने अपनी फ़ितरत…                       बेवफा सी हो गयी!! […]

इंसान की शक्ल में आज हैवान नज़र आया, की मैख़ाने के करीब कोई बदजुबान नज़र आया, कोई ज़माने पे इलज़ाम लागते नज़र आया तो कोई खुद को ही ऊपरवाले का पैगाम बतलाया, मैंने तब खुद […]

=============================== वो जो तेरी यादों का समंदर कभी सूखता ही नहीं । लाख भुलाना भी चाहा मगर दिल भूलता ही नहीं। हैं बरसता हुआ गम की घटा जो सावन ले आया, जुदा ए सनम तुम […]

नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल […]

न सवाल हुआ , न जवाब ही हमारी तन्हाई में । आंखों ही आंखों से बात हुई हमारी तन्हाई में । खामोशी को इकरार समझने लगे थे,ख्वाबों मे, पर जिंदगी है हकीकत समझ में आई […]

जब एक दिन तुम बिना बताये दूर कही मुझसे चली जाओगी वापस फिर से आओगी क्या वापस फिर से आओगी क्या मैं नाराज था तुमसे उस पल मुझे मनाने वाला कोई नही था अब फिर […]

जा रही हूँ आज सबसे दूर, खुद की ही तलाश में। वहीं, जहाँ छोड़ आयी थी खुद को, किसी की याद में। पर अब उससे भी ज़्यादा मुझे ज़रूरत है मेरी। अब ढूंढना है मुझे […]