देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। […]
देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। […]
छलक जाए पैमाना, मैं जाम नहीं। भले खास ना सही, पर आम नहीं। एक बार गले लगा कर तो देखो, भूला सको मुझे, वो मैं नाम नहीं। गुरूर नहीं मेरा, खुद पर यकीन है, आज़मा […]
तारीफ़ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है । इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है । माना बरसों पुराना, […]
नक़ाब से जो चेहरा, छिपा कर चलती हो। मनचलों से या गर्द से, बचा कर चलती हो। सरका दो फिर, गर जो तुम रुख से नक़ाब, महफिल में खलबली, मचा कर चलती हो। तेरे आने […]
तुम्हें गुलाब लिखूं या फिर कंवल लिखूं। जी चाहता है तुझ पर एक ग़ज़ल लिखूं। गुल लिखूं, गुलफ़ाम या लिखूं गुलिस्तां, या फिर तुम्हें महकता हुआ संदल लिखूं। तन्हाई छोड़ बना लूं तुम्हें शरीक-ए-हयात, ज़िंदगी […]
फिज़ा में खुशबू, पहचानी सी है। छिपी कहां, मुझमें तू सानी सी है। ढूंढे उसे जो खुद से अलग हो , मैं जिस्म और तू रूहानी सी है। सूखी, बंजर जिंदगानी थी पहले, मैं तपता […]
इस कागज़ी बदन को यकीन है बहुत दफ्न होने को दो ग़ज़ ज़मीन है बहुत तुम इंसान हो,तुम चल दोगे यहाँ से पर लाशों पर रहने वाले मकीं* हैं बहुत भरोसा तोड़ना कोई कानूनन जुर्म […]
कोई ज़मीं बेचता, कोई आसमां बेचता । दौलत के नशे में चूर, ये ज़हां बेचता । कब परवान चढ़ा, मोहब्बत मुफ्लिशी का, दौलत मोहब्बत का है, आशीयां बेचता । दर-दर की ठोकरें, मुफ्लिशी के हालात, […]
हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत, कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते। अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते, बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते। कि देख के जुनून हम वतनों की आज, जो […]
तारीफ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है ।। इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है ।। माना बरसों पुराना, […]
सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता, वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता, सालों से बेकरार किया है मेरे दिल को जो उन्होंने, लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता […]
ghujari hai,zindgi aise bhi.. khud ko khud se dhundhne me. lapta sahi kaun apna waise bhi. dhundhta kha hai,koe dhundhne me.. jane do bhikre pdhe hai,saman ghar ke waise bhi. koe aur nhi rehta yha […]
ye ishq hi to hai, kha kisi ki. bala wajah fir kuan intejar krna.. khush guman hoti hai, hasinawon ki. ye wo mushe dekhta hai, khayal krna. hamari fitrat nhi,fitur hai kisi ki. ha wo […]
Umar hai choti,khawhishe jada hai. zindgi ye bta,ab tera kya irada hai.. siyah hai kam,panne jada hai. khawhishe kuch aur, likhne ka irada hai.. zindgi ye bta ,ab tera kya irada hai….. rasten hai lambi […]
इक समंदर यूं शीशे में ढलता गया । ज़िस्म ज़िंदा दफ़न रोज़ करता गया ॥ ख़्वाब पलकों पे ठहरा है सहमा हुआ । ‘हुस्न’ दिन-ब-दिन ख़ुद ही सँवरता गया ॥ ‘इश्क़’ है आरज़ू या कि; […]
गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये […]
हम तो चल दिये थे अपना कारवा लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने आंसू लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने गम […]
शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, […]
उत्कर्ष मेल में पहली बार मेरी ग़ज़ल बहुत बहुत शुक्रिया संपादक महोदय जी का । आपका सहयोग यूँ ही बना रहे ।
कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ […]
कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते, ए ज़िन्दगी महसूस तो कर सकते है पर छू भी तो नही सकते काश अब ये भी समज ले कि कोशिश नही की थी हमने, कुछ भी […]
परिन्दा कैद से छूटा नही है छुडाने कोई भी आता नही है बहुत खामोश है दरिया के जैसे बहुत बेचैन है कहता नही है दिवाना बन गया है प्यार में वो वो लड़ता है मगर […]
यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं, पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं| पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती, ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून […]
आजकल नींद सोती है मेरे बिस्तर पर, और मैं तो ख्यालों की दुनिया मैं टहलने निकल जाती हूँ|
मुझको मुझसे जीत कर, खुशियाँ मना रहे थे वो| शायद हारकर जीतने और जीत कर हारने के , उस एहसास से वाकिफ़ न थे वो|
मेरी हर इक ग़ज़ल की अब तक ज़मीन तुम हो ….. मेरा अलिफ़ बे पे से चे और शीन तुम हो …. जज़्बात से बना मैं इक प्यार का नगर हूँ रहते हो इस में […]
कवि होना भी खुदा की रहमत का ही नमूना है वरना युं अपने दर्द को शब्दों में बयां कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं।
पानी से भरी आखें लेकर मुझे घूरती ही रही शीशे के उस पार खड़ी लड़की उदास बहुत थी।
गजल : कुमार अरविन्द जहां में चाहे गम हो या खुशी क्या | मेरे मा – बैन रंजिश दोस्ती क्या | खुदा मुझको यकीं खुद पे बहुत है | तो पंडित हो या चाहे मौलवी […]
हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी| हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी | मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी| मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ […]
यूँ तो दिल उबल रहा है, शब्दों के उबाल से | और ये कम्बखत दिमाग कहता है, अपने ज़ज्बातों को संभाल ले |
गजल : कुमार अरविन्द नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते | मेरी किस्मत में क्या है वो पता जाकर के यूं करते | रखी इज्जत हमेशा है जिसने अपना समझकर तो | […]
मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]
मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]
कुछ न कुछ टूटने का सिलसिला आज भी ज़ारी है इस दुनिया का डर प्यार पे आज भी भारी है।। टूटकर बिखरना, बिखरकर समिटना आज भी जारी है, पर पड़ जाए ना दरार इस बात […]
गजल : कुमार अरविन्द मुहब्बत की गली कूचों में क्या है | इधर देखो मेरी आँखों में क्या है | बड़ा ही जोर है उन के जुबां में | नही तो जोर जंजीरों में क्या […]
गजल : कुमार अरविन्द चले आओ मेरी आंखों का पानी देखते जाओ | कहानी है तुम्हारी ही , निशानी देखते जाओ | मैं जिन्दा हूं तुम्हारे बाद भी तुमको तसल्ली हो | कफ़न सरका के […]
✍?अंदाज ?✍ ——-$——– ✍ न करो चमन की बरबाद गलियां कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँ पुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना बागो मे खिलाना मोहक तितलियां आगाज करो नव राह बदलाव के गुलशनो मे रहे […]
✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ नूर हो तुम आफताब हो तुम लहर हो तुम लाजवाब हो तुम मेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ दिलकश गजब शबाब हो तुम जिसे समझा मैने दिल से अपना मुक्कमबल सच्चा […]
✍?(अंदाज )?✍ ———-$———- ✍ उठ जाग मत थक हार इंसान तू मानवीय औकात निखार इंसान तू है तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तू मानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ […]
✍?(अंदाज )?✍ ———$——- ✍ घोर कलियुग है देख पाप प्रबल चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित मन मे मैल देख बेईमानी सबल स्वभाव मे मिठास बोली मे छल दिखावा ठोस देख […]
mauz e zindgi humari unhei achi nhi lagti Kya… Jo takleefo k farman bejwa deti Hai wo.. cherei par hasi humarei haseen nhi lagti Kya.. Jo sikan ki lakire la deti Hai wo.. raat ko […]
इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या […]
पैदा कलम से कोई कहानी की जाए, फिर जज़्बातों की तर्जुमानी की जाए! खिलावे हैं खुद भूखे रहकर बच्चों को माँ-बाप के नाम ये जिंदगानी की जाए! ग़म से तो हाल ही में ही बरी […]
गजल वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए | बाखुदा हूं ‘ खुदा बाखुदा कीजिए | दर्दे – दिल आज मेरे मुखालिब रहे | सुखनवर से उन्हें ‘ आशना कीजिए | चांद तक की अदा […]
ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है —————————————- कोई एहसास दिल को छुआ है मुमकिन है,आपका आना हुआ है ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हुआ है सिसक रही तन्हाई भी हँस […]
बिछड़ा जो फिर तुमसे तनहा ही रह गया, ग़म-ए-हिज़्र मे अकेले रोता ही रह गया। मुसलसल तसव्वुर में बहे आँसू भी खून के शब् में तुझे याद करता, करता ही रह गया! मैंने शाम ही […]
सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ, हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ! तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके, मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ! आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर, खुनकी-ए-बहार में बदल […]
मयस्सर कहाँ हैं सूरते-हमवार देखना, तमन्ना हैं दिल की बस एक बार देखना! किसी भी सूरत वो बख्शा ना जायेगा, गर्दन पे चलेगी हैवान के तलवार देखना! सज़ा ए मौत को जिनकी मुत्ताहिद हुए हैं […]
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