खत्म न हो जश्ने-रौनक हँसीन शाम की। आ टकरा लें प्याला और एक जाम की। देखो साकी खाली ना होने पाए पैमाना, ले आओ सारी मय, मयकदे तमाम की। आ टकरा लें प्याला और एक […]

तेरे आने से दिल को करार आया है। तुझे पाकर खुशियां बेशुमार पाया है। मैंने पी नहीं लेकिन, मैं नशे में चूर हूं, मुहब्बत का ये कैसा, खुमार छाया है। मौसमें भी अब रंगीन सी […]

मैंने ज़ाम से ज़ाम टकराना छोड़ दिया। यारों मैंने पीना – पिलाना छोड़ दिया। खबर जो फैली, कि मैं हो चला बै-रागी, दोस्तों ने महफ़िल में बुलाना छोड़ दिया। दोस्ती का मतलब जानता हूं मैं, […]

मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में […]

मेरे ख्वाबों में तुम रोज चले आते हो , ख्वाब टूटते ही तुम दूर चले जाते हो, जिंदगी बेजान न हुई होती इतनी , छोड़कर अगर तुम न जाते मुझको, तेरी तस्वीर इन आंखों में […]

मंज़िल पता नहीं, निकला हूं अंजान सफर में। अमृत ढुंढने निकला हूं , दुनिया भरी ज़हर में। इंसानियत बांध कर सभी ने, रख दी ताक पर, डरता हूं कहीं गिर ना जाऊं, खुद की नज़र […]

देखो फिर किचड़ उछालने का दौर आ चला है। खुद का दामन संभालने का दौर आ चला है। लाख दाग सही, खुद का गिरेबां बेदाग नहीं, दुसरों की गलतियां गिनाने का दौर आ चला है। […]

छलक जाए पैमाना, मैं जाम नहीं। भले खास ना सही, पर आम नहीं। एक बार गले लगा कर तो देखो, भूला सको मुझे, वो मैं नाम नहीं। गुरूर नहीं मेरा, खुद पर यकीन है, आज़मा […]

तारीफ़ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है । इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है । माना बरसों पुराना, […]

नक़ाब से जो चेहरा, छिपा कर चलती हो। मनचलों से या गर्द से, बचा कर चलती हो। सरका दो फिर, गर जो तुम रुख से नक़ाब, महफिल में खलबली, मचा कर चलती हो। तेरे आने […]

तुम्हें गुलाब लिखूं या फिर कंवल लिखूं। जी चाहता है तुझ पर एक ग़ज़ल लिखूं। गुल लिखूं, गुलफ़ाम या लिखूं गुलिस्तां, या फिर तुम्हें महकता हुआ संदल लिखूं। तन्हाई छोड़ बना लूं तुम्हें शरीक-ए-हयात, ज़िंदगी […]

फिज़ा में खुशबू, पहचानी सी है। छिपी कहां, मुझमें तू सानी सी है। ढूंढे उसे जो खुद से अलग हो , मैं जिस्म और तू रूहानी सी है। सूखी, बंजर जिंदगानी थी पहले, मैं तपता […]

इस कागज़ी बदन को यकीन है बहुत दफ्न होने को दो ग़ज़ ज़मीन है बहुत तुम इंसान हो,तुम चल दोगे यहाँ से पर लाशों पर रहने वाले मकीं* हैं बहुत भरोसा तोड़ना कोई कानूनन जुर्म […]

कोई ज़मीं बेचता, कोई आसमां बेचता । दौलत के नशे में चूर, ये ज़हां बेचता । कब परवान चढ़ा, मोहब्बत मुफ्लिशी का, दौलत मोहब्बत का है, आशीयां बेचता । दर-दर की ठोकरें, मुफ्लिशी के हालात, […]

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत, कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते। अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते, बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते। कि देख के जुनून हम वतनों की आज, जो […]

तारीफ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है ।। इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है ।। माना बरसों पुराना, […]

सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता, वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता, सालों से बेकरार किया है  मेरे दिल को जो उन्होंने, लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता […]

इक समंदर यूं शीशे में ढलता गया । ज़िस्म ज़िंदा दफ़न रोज़ करता गया ॥ ख़्वाब पलकों पे ठहरा है सहमा हुआ । ‘हुस्न’ दिन-ब-दिन ख़ुद ही सँवरता गया ॥ ‘इश्क़’ है आरज़ू या कि; […]

गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये […]

हम तो चल दिये थे अपना कारवा लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने आंसू लिए, मगर तुम रोक तो सकते थे हम तो चल दिये थे अपने गम […]

शैलेन्द्र जीवन से एक दिन शिला खण्ड जब टकराया, पिता की छाया हटी तो जैसे संकट मुझपर गहराया, संस्कारों का दम्ब था मुझमें सब धीरे-धीरे ठहराया, मेरे कन्धों पर परिवार का जिम्मा जैसे बढ़ आया, […]

उत्कर्ष मेल में पहली बार मेरी ग़ज़ल बहुत बहुत शुक्रिया संपादक महोदय जी का । आपका सहयोग यूँ ही बना रहे ।

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ […]

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते, ए ज़िन्दगी महसूस तो कर सकते है पर छू भी तो नही सकते काश अब ये भी समज ले कि कोशिश नही की थी हमने, कुछ भी […]

परिन्दा कैद से छूटा नही है छुडाने कोई भी आता नही है बहुत खामोश है दरिया के जैसे बहुत बेचैन है कहता नही है दिवाना बन गया है प्यार में वो वो लड़ता है मगर […]

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं, पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं| पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती, ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून […]

कवि होना भी खुदा की रहमत का ही नमूना है वरना युं अपने दर्द को शब्दों में बयां कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं।

हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी| हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी | मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी| मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ […]

गजल : कुमार अरविन्द नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते | मेरी किस्मत में क्या है वो पता जाकर के यूं करते | रखी इज्जत हमेशा है जिसने अपना समझकर तो | […]

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]

कुछ न कुछ टूटने का सिलसिला आज भी ज़ारी है इस दुनिया का डर प्यार पे आज भी भारी है।। टूटकर बिखरना, बिखरकर समिटना आज भी जारी है, पर पड़ जाए ना दरार इस बात […]

गजल : कुमार अरविन्द चले आओ मेरी आंखों का पानी देखते जाओ | कहानी है तुम्हारी ही , निशानी देखते जाओ | मैं जिन्दा हूं तुम्हारे बाद भी तुमको तसल्ली हो | कफ़न सरका के […]

✍?अंदाज ?✍ ——-$——– ✍ न करो चमन की बरबाद गलियां कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँ पुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना बागो मे खिलाना मोहक तितलियां आगाज करो नव राह बदलाव के गुलशनो मे रहे […]

✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ नूर हो तुम आफताब हो तुम लहर हो तुम लाजवाब हो तुम मेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ दिलकश गजब शबाब हो तुम जिसे समझा मैने दिल से अपना मुक्कमबल सच्चा […]

✍?(अंदाज )?✍ ———-$———- ✍ उठ जाग मत थक हार इंसान तू मानवीय औकात निखार इंसान तू है तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तू मानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ […]

✍?(अंदाज )?✍ ———$——- ✍ घोर कलियुग है देख पाप प्रबल चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित मन मे मैल देख बेईमानी सबल स्वभाव मे मिठास बोली मे छल दिखावा ठोस देख […]

इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या […]