नापाक पाकिस्तानी शेर गरजना फैल रही है चारो ओर दिशाओ में, नापाक पाकिस्तान ले लेगें अपनी साये में । अब ना हम सुनेगें एक तेरे काली करतुतो को, अब तो वर्षा होगी मेरे वीर जवानो […]

जीवन की कडवी पुडिया जीवन की कडवी पुडिया सुबह शाम हथेली पर रूखे – रूखे मन से कडवी पुडिया खुलती है । कभी दुध के साथ कभी पानी के साथ इसको निगलना पडता है जिन्दगी […]

माँ माँ ओ मेरी प्यारी माँ जग से सुन्दर मेरी माँ गले मुझे लगाती तन मन को शीतल कर देती प्यार बहुत लुटाती माँ जग से सुन्दर है तू मेरी माँ मेरे जीवन की आशा […]

रक्षक रक्षक ही भक्षक हो गये है अपने ही भारत देश में भ्रष्टाचार फैलाते है काली चादर ओढ कर इमानदारी का परिचय देकर रक्षक ही धोखा देते है अपने को सच्चा बतलाकर औरो को लुटते […]

गुरु वन्दन हम सब गुरु के गोद में छात्र है गुरु के ज्ञान में आओ हम सब गुरु वन्दन करे चरण स्पर्श अभिनन्दन करे। गुरु का हमपे उपकार है हम सब उनका सम्मान करे जंगल […]

सरहद मानवता के बीच मे , खीच गयी देखो सरहदे। भूल रहे है सब अपनो को , मोह – माया झोड गलीयो को ।। खिंचकर सरहदे वे , अब देखो कितना मुस्कुराएॅ । निशाना साध […]

संसार कलह बडी हैं बेदरंग दुनिया में सलोने सपनो ने मुझे हॅसना सिखाया धुल भरी अॅखियो ने रास्ता दिखाया बेदर्द मचलती धुपो ने मुझे लडना सिखाया चुभती पैर में काटे सच्चाई बतलाया अधियारे संसार ने […]

इज्जत इज्जत के बचावे खातिर मालिक घर को तोडे या जोडे। मालिक अपनी सुझ बुझ से घर वाले को सडक पर कर सकता है । मैं मालिक हूॅ अपने घर का मेरे लिए कोई कानुन […]

बचपन खिलखिलाते चेहरो पर उषा की मुस्कान लिए रवि की तरंग किरणो से अधरो से किलकारी भरे। कूदक – फूदक कर सपनो में रंग भरे तोड – फोड समानो को बचपन को बिखेर चले। पल […]

पनाह मेरी अभिलाषा को समझो माँ स्वर्ग सी पृथ्वी पर दे दो पनाह बडी सुकून मिलती है माँ तुझसे क्यो मारना चाहती हो मुझ अभागन को। अभी तो हूॅ मैं तेरे गर्भ में माँ मुझको […]

लडिया देखो महलो पर गजब की सुन्दरता ढाई मिट्टी के दीपक से चन्द्र घटा भी शरमाई, नही मरेगा इस दिवाली कोई गरिब इंसान नव नवल प्रात कि दीपक उजाला बनकर छायी, जग मे छाया अंधेरा […]

आओ मिलकर खुशिया बाटे, दीप जलाकर नाचे गाये। गले मिलकर खुशिया बाटे, रंगोली के रंगो में रंग जाये। नमन उन्हे भी करते है, जो शहीद हुए देश के लिए। दीप जलाकर आज उन्हे, हम भी […]

चिडिया रंग – बिरंगे रंगो में कूदक फूदक कर उडती मीठे मधुर स्वरो से घर आंगन को महकाती । चुग – चुग दाने खाना बच्चो जैसे इठलाना चुनमुन प्यारी चिडिया तुम रंग बहुत बदलती हो […]

बेवफा प्यार ) मत कर पगले प्यार तू बहुत ही पछतायेगा दिल में लेकर कसक तडपता ही रह जायेगा । बिछडती मंजिल अपनी दर्द गहरा दे जायेगा पल – पल घुटेगा तू जुदाई ना सह […]

बाबूल छोड चली मैं बाबूल को अनजान डगर सा लगता है नयन भरे हैं नीर मेरे सब अपने पराये लगते हैं । अधिकार खत्म कर जा रही ससुराल का दामन पकडने इतनी रूहासी हो गयी […]

उम्मीद ना जाने क्यो लोग मेरे उम्मीदो को कुचलते रहते हैं मिठी-मिठी बाते करके दिल को छलते रहते हैं खौफ जमाते अपने पन का बातो बतो में रौदा करते हैं दर्द भरी जज्बातो को हॅस […]

मन कि बात जब मन कभी द्रवित होता ऑसू पलको पर होता रंग उडा उडा सा रहता मन मेरा खोया रहता अधरो कि मुस्कान ना जाने कहा खो जाती बातो कि घुटन में मन मेरा […]

भारत देश हम हैं भारत देश के प्रेमी लहरो से हम खेलेंगे बुरी नजर उठाने वाले टुकडे टुकडे तुमको कर देगें । हम हैं भारत देश के प्रेमी गद्दारो को अब ना छोडेंगे चापलूसी बनावटी […]

नारी मन कि उषा किरणो से वो मृद भाष कहॉ से लायी हो घर आंगन को महकाने का तुम ऐसा वरदान कहॉ से पायी हो माँ बहन बेटी बनकर तुम पीड़ा को छिपाने का पहचान […]

( गौरेया ) कूदक – फूदक कर रंग बनाती दाना को चुग कर खाती हो कभी घर में कभी आंगन में तुम मेरे आ जाती हो | गौरेया रानी तुम हो बडी सयानी हम सब […]

संवाद – वायु मानव / 02 चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु […]

प्रकृतिसौंदर्य प्रकृति हवाओ के संग झुम रहे हम सब बगिया की रंग बिरंगी यादे कू कू गाती कोयल प्यारी । झर – झर गिरती पानी कि बुदे मदमस्त झुमती पेडो कि डाली सर-सर-सर फर-फर-फर गा […]

) पर्यावरण का हो रहा हरण वृक्षो की शामत हैं आयी लगे हैं धुन में वृक्ष काटने प्रकृति भी देखो हैं कुम्हलाई कटते रहे वृक्ष तो आक्सीजन कहा से लाओगे नन्हें मुन्हें मेहमान आयेंगे तो […]

प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]

संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]

कुछ ऐसे ही हाल होने वाला हैं मानव तेरा , सांस थमेगा जब तेरा याद आयेगा मेरा , सिसक सिसक दम हैं मैंने तोड़ा , तेरी भी बारी आयेगी होने दे सवेरा , महेश गुप्ता […]

मेरे बापू चरखा के बल पर जिसने देश भक्ति को जगाया था गजब का हुंकार था बापू के जज़्बातों में सत्य अहिंसा की लाठी से जिसने धुल चटाया था खदेड़ गोरों के सैनिक को देश […]

शब्दों का भंडार लिए ज्ञान का प्रकाश लिए हर घर आंगन दिखती है जीवन का सारांश लिए। यूँ तो रहती मौन है फिर भी बहुत वाचाल है नेत्रहीन है स्वयं में लेकिन सबको दिखाती संसार […]

मेरी बिटिया ————— नन्ही मुन्नी गुड़िया सी, मीठी-मीठी पुड़िया सी । बातें करती गपर- गपर। वो हंसे तो खिलती धूप मगर। लड़ ती, भिड़ती, रोती ,हंसती जैसे धूप- छांव हंसती खिलती। लड़ने में रानी झांसी […]

जब भी खुद को मुश्किलों में पाया है, ये मालिक तुम्ही ने दिया सहारा है, भले ही नज़रों से नज़र नहीं आते हो, यकीनन तुमने ही हरदम मेरा हाथ थामा है।

बात इस दिल की दिल में रख लो तो अच्छा लगे, सपनों में ही सही मुलाकात रखलो तो अच्छा लगे, देखकर तुमको मैं ज्ञानी गूढ़ भी मूढ़ ही हो जाता हूँ, सुनो बातों की तुम्हीं […]

गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं, इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।। नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने, कहना मुश्किल है के और कितनी नग्में बाकी रह गईं।। राही […]

ठान लूँ गर मैं तो कुछ भी कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो असंभव भी संभव कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो बुलंदियाँ छू सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो […]

खबर मिली है के सबको ही ज़रा खबरदार रहना है, अपनों को अपनों से ही सम्भलकर मेरे यार रहना है, करली बहुत सी बेवकूफियां तुमने अब छोड़ो सबको, सुनो इस दुनियां में तुम्हें थोडा तो […]

सोये हुए मेरे अरमानों को उठाने आया था कोई, कल रात मुझको चुपके से जगाने आया था कोई, के एक उम्र बीत गई थी अँधेरी चार दिवारी में मेरी, खुले आसमाँ में मुझको सैर कराने […]

इतिहास बदलना ही होगा ——————————– बस बहुत हुई झूठी गाथा , मियां मिट्ठू ज्ञान भी बहुत हुआ। स्वर्णिम इतिहास के गाथा का, झूठ लिखकर अपमान भी बहुत हुआ असली सेनानी गायब हैं, इतिहास के स्वर्णिम […]

प्रकृति की कैसी भयावह दृष्टि। कभी अनावृष्टि, कभी अतिवृष्टि। संजोये सपनों के, मकान ढह गए। जान, सामान संग अरमान बह गए। पानी की तेज रवानी से, जीते वह जो, जीवन-मृत्यु का द्वंद्व घमासान सह गए। […]

एक दूजे से मिलने की अनोखी आरज़ू रखते हैं, चराग हवाओं से लिपटकर भी आबरू रखते हैं, ब मुश्किल कुछ पल की मुलाकात के खातिर, बड़ी हिम्मत जुटाते वो खुद को रूबरू रखते हैं, राही […]

माना कि हूं अकेली, सहारा न चाहिए माना कि मौन हूं मै, इशारा न चाहिए। मेरी ख़ामोशी को तुम क्या समझोगे तुम तो शब्दों को जानते हो तुम्हारा नाम ‘जमाना ‘…. है तुम केवल कामयाबी […]

कुछ लोग इलाके में अपनी धाक रखते हैं। कुछ लोग दौलत पर अपना हक रखते हैं। ना सियासत, ना वसीयत की चाह हमें ‘देव’, हम तो दिलों में बसने का शौक रखते हैं।

चोर मचाए शोर ——————- चोर मचाए शोर -शोर जी , अजब देश का हाल, गाल बजाकर गाना गाए, चोर -चोर का शोर मचाए अंदर से बेहाल। मुंह के यह वाचाल मति गई इनकी मारी । […]