मुझसे मेरा ही एक अभिन्न अंग छीन लिया गया, मानो दिल से धड़कन का ही संग छीन लिया गया, हाथ मलता ही रहा देखकर कुछ कर न सका मैं, बेगुनाह मेरी आँखों से उनका हर […]

यहां हर कोई एक दूजे की कश्ती डुबाने को बैठा है, जान बूझकर ही मासूम सी हस्ती मिटाने को बैठा है, लत लगी है बस निकल जाऊँ किसी तरह सबसे आगे, सोंच लेकर यही पीठ […]

मोहब्बत होती तो मिलने की चाहत भी अजब होती, आँखों से ही आँखों को पिलाने की भी तलब होती, मिलता नहीं किसी शहर में जब ठिकाना कोई कहीं, ज़मी छोड़ के आसमाँ पर बिठाने की […]

उम्मीदों की नई सुबह नववर्ष की। सुख – समृद्धि और उत्कर्ष की ।। आगे बढ़ते हैं, कड़वे पल भुला कर। छोड़ वो यादें, जो चली गई रुला कर। मधुर यादों के साथ, आओ नववर्ष का, […]

नया साल और मेरा प्यार….. अक्सर तेरे ख़्यालों में शाम हो जाया करती थी, अब एक साल और बीत चला तेरे इंतज़ार में, काश कि इस नए साल में मेरा प्यार मिल जाए…..!! अक्सर तेरा […]

अच्छा किया तुमने याद दिला दिया…….. हक नही मुझे कोई फ़रमाइश करने का, हक नही मुझे कोई बेबुनियाद सी जिद्द करने का, सिर्फ तुम्हारी हर ख़्वाहिश पूरी करनी हैं मुझे…. कोई हक नही मुझे अपनी […]

आया नया साल । जीवन मेँ लायेँगे बहार, मन मेँ गायेँगे मलहार, दिल मेँ उमंग की करेँगे पुकार, आया नया साल। सपनोँ को करेँगे साकार, समय को नहीं जाने देँगे बेकार, संकट के सवालों का […]

किसी अनजान से बोझ से झुका झुका ये फल दरख्त़ की झड़ों में ढूंढ़ता सुकून के चन्द पल। कभी मिले पत्तों के नर्म साए तो कभी इनमे छनकर आती कुछ सख्त़ किरणें भी। बहुत रोया […]

नव वर्ष आने को है, कुछ भुलाने को है कुछ याद दिलाने को है, सच कहूँ तो बहुत कुछ सिखाने को है, छुप गई थीं जो बादल के पीछे कहीँ, उन उम्मीदों से पर्दा हटाने […]

एक दिन गया मैं चिड़ियाघर, एक भी जानवर न था वहां पर । यह देख मैं रह गया हैरान, हर पिंजरे में था एक इंसान ।। एक पिंजरे में लिखा था ‘ भेड़िया दुराचारी ‘ […]

मेरी नज़र के सामने साक़ी को रहने दो। हाथों में जाम है मगर बाक़ी को रहने दो। धधक रही हैं तस्वीरें यादों की दिल में- चाहत की ज़ेहन में झांकी को रहने दो। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मां भारती का सहस्त्र वंदन, रही है आवृत ये गोधुली से यहीं दिगम्बर ये अन्नदाता, लगे है पाथेय संबली से। यहीं पे खेले चराए गैया, जगत खिवैया किशन कन्हैया यहीं त्रिलोकेश सूर्यवंशी, यहीं कपिश्वर महाबली […]

रातभर हम ओस पर खींचा किए थे लकीरें, सुबह को सुरज मुआ दुनिया उड़ा कर ले गया। हमने ज़मीं पर बैठकर इंचों में नापा आसमां, जाना तो माना कहां तारे से तारा रह गया। आंखों […]

हम तो नयन बंद कर बैठे थे, आपने हमे ऑखे खोलना सिखाया। हम तो सिर्फ सोना ही जानते थे, आपकी संगत ने हमें जीना सीखा दिया।। पर फक्र न करना ऐ मेरे मालिक, हमें जगाकर […]

मीलों का पथ, पथरीला भी पथिक हूं मैं भी, चल दूंगा। सारे मौसम शुष्क रहे क्यों बादल हूं मैं, बदल दूंगा। भीष्म बनो तुम, कर्ण बनो तुम पार्थ हूं मैं भी, ध्यान रहे। मार्ग मेरा […]

तारीफ तेरी, नहीं मेरी जुबां करती है । नजरें पढ़ ले, हाले-दिल बयां करती है ।। इश्क में हूँ तेरे आज भी, जहां जानता है, तेरा हुश्ने-मुकाबला, कोई कहाँ करती है ।। माना बरसों पुराना, […]

छोड़ खिड़की दरवाजे अब मुँह पर ताले लगते हैं, जहाँ तहाँ भी देखो अब तुम चुप्पी के गाले लगते हैं, कदम कदम साथ निभाने के अक्सर वादे करते थे, आज सभी के ही मानो जैसे […]

आजादी के इतने वर्षों बाद भी, आजादी को हम जूझ रहे आज भी ।। कभी नक्सलियों, आतंकियों से आजादी, कभी रिश्वतखोरों, भ्रष्टाचारियों से आजादी । कब ली राहत की साँस हमने, भूली बिसरी बातें हैं, […]

मैं जितना सुलझता गया वो उतनी उलझती गई, मेरे दिल में उतरती गई आँखों से छलकती गई, डोर इतनी मजबूत बंधी उसकी जुल्फों से जानो, के “राही” की राहें जैसे खुद ब खुद सँवरती गई।। […]

हो हार या कि जीत हो, करता रह प्रयास तू।। प्रथम रख तू धर्म को, करता रह तू कर्म को।। कर समस्या का सामना, समाधान तू खोजना।। हो हार या कि जीत हो, करता रह […]

बड़ रहा अधर्म है, बड़ रहे कुकर्म हैं। इनके जवाब में आज वो उठ खड़ी।। तोड़ कर सब बेड़ियाँ, हुंकार है भरी। अपने स्वाभिमान के लिए है वो उठ खड़ी। संयम त्याग कर, ललकार है […]

तेरी तस्वीर बनाने में जब भी जुट जाया करता हूँ, खुद ब खुद ही जाना तुझसे जुड़ जाया करता हूँ, रंगों की समझ रखता नहीं हूँ शायद यही सोचकर, एहसासों का ही अंग तुझपे जड़ […]

जिस्म ऐ माटी में इस रूह को डालता कौन है, बनाकर इन पुतलों को ज़मी पर पालता कौन है, मिलाकर हवा पानी आसमाँ आग पृथ्वी को, वक्त वक्त पर ख़ुशी और गम में ढालता कौन […]

तेरे बग़ैर तन्हा रहने लगा हूँ मैं। तेरी बेवफ़ाई को सहने लगा हूँ मैं। जब भी ग़म तड़पाता है मेरे ख़्यालों को- अश्क़ बनकर पलकों से बहने लगा हूँ मैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

निगाहें तुझ ही पर टिकाये रहता हूँ, मैं यूँही खुदको तुझमें गुमाये रहता हूँ, तुझको समझने की जिद ठानी हैं ऐसी, के हर दम मैं गर्दन अपनी झुकाये रहता हूँ।। राही अंजाना

अपने दिमाग के कुछ खयालों को उड़ जाने दिया, मैंने अपने दिल को इस दिमाग से लड़ जाने दिया, कश्मकश बहुत देर चली फिर हार कर बैठ गया, मैंने अपने एहसासों को फिर यूँही मुड़ […]

सब कुछ सहना है मगर तुम्हें अपना नाम नहीं लेना है, आदमी तभी हो तुम जब तुम्हें कोई ईनाम नहीं लेना है, रखना है रोककर तुम्हें अपने आँखों के आसुओं को बेशक, अपनी मेहनत का […]

किसी सांचे में भी ढल नहीं पाया हूँ मैं, शायद ठीक से ही बन नहीं पाया हूँ मैं, वक्त बेशक ही लगा है मुझको बनाने में, पर सच है खुद को बदल नहीं पाया हूँ […]

देखा किसी ने नहीं है मगर बहुत बड़ा बताते हैं लोग, कुछ लोग उसे ईश्वर तो कुछ उसे खुदा बताते हैं लोग, पता किसी के पास नहीं है मगर रस्ता सभी बताते हैं लोग, कुछ […]

सुरज की स्वर्णिम किरणें जब पड़ती धरा पर, चहचहाते पक्षी मचाते कलरव, हौसलों की भरते वो उड़ान है, देखो जज़्बा उन पंछियों का, छू लेते वो आसमान है। देखकर पंछियों को लगता मेरे मन को, […]

बहुत कुछ कहते कहते रुक जाया करते हैं, बात ये है के हम इज्जत कर जाया करते हैं, रखते हैं अल्फ़ाज़ों का समन्दर अंदर अपने, और ख़ामोशी से दिल में उतर जाया करते हैं, प्रश्न […]