लक्ष्मण और मेघनाद का युद्ध आ गया अंततः वह भी क्षण आरंभ हुआ समर भीषण। दो वीर अडिग, अटल वीरत्व था साक्ष्य धरा का तत्व तत्व। एक ओर अहीश स्वयं लक्ष्मण है मही सकल टिकी […]

तेरे कांधे पे सर रख, रोना चाहता हूं मां। तेरी गोद में सर रख, सोना चाहता हूं मां। तू लोरी गाकर, थपकी देकर सुला दे मुझे, मैं सुखद सपनों में, खोना चाहता हूं मां। तेरी […]

सपनो के धुंदले बादलों के पार एक चेहरा चमक जाता है कभी अपना-सा, कभी पराया-सा तरंगों को शूके बेक़रार कर जाता है कोई तो है कहीं न कहीं न कहीं जो हाथों की लकीरों में […]

आज दिल बेचैन है और बड़ा बेकरार है, बहुत याद आ रहा वो गाँव वाला यार है, बार-बार नजर आज उसका चेहरा आ रहा है, जैसे मुझे वो भी चीख-चीख के बुला रहा है, है […]

मैं जब कभी तेरी तस्वीर देख लेता हूँ। मैं अपने ख़्यालों की तक़दीर देख लेता हूँ। ख़्वाबों के समन्दर में उठती है चिंगारी- मैं तेरी अदाओं का तीर देख लेता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कतरा बन गिरो, पत्ते पर ओंस की भांति। कतरा बन गिरो, शीतल बारिश की भांति। कतरा बन गिरो, सीप में मोती की भांति। कतरा बन गिरो, पिघलते मोम सी ज्योति की भांति। कतरा बन गिरो, […]

कुंभ कुंभ ये है. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ . कुंम्म्मभ। संगम तट पर प्रयागराज में, ये है कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंभ कुंभ कुंभ. कुंम्म्मभ। श्रिवेणी में शाही […]

रिश्ते ना गहरा सागर हैं ना जल माटी की गागर हैं वे तो बस बहता दरिया हैं जीवन जीने का ज़रिया हैं कुछ रिश्ते तुम्हारी क़िस्मत हैं, कुछ रिश्ते तुम्हारी हसरत हैं, पर हर रिश्ता […]

परत दर परत यूँही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी, उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी, हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है कभी, के जिस्म को काट भूख […]

जज़बात आज फिर से उमरे है कलम आज फिर बरसे है फिर से इस नादान दिल को फिसलने का मौका मिला है फिर से आँखों में उसका नूर दिखने लगा है उम्मीद ना थी इस […]

माँ मुझे पगडन्डी पे चलना सिखला दो, मुझे जीवन का मतलब बतला दो, कहती हो मेरे जिगर का टुकड़ा हो पापा की लाडली हो फिर पराये धन का मतलब समझा दो, माँ मुझे पगडन्डी पे […]

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत, कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते। अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते, बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते। कि देख के जुनून हम वतनों की आज, जो […]

तुझसे क्या नाता जुड़ा की हर सकस मैं तू नज़र आया इतनी भी ना पास आ तू की मेरे अकेलेपन को तेरी आदत पड़ जाए गम ए दिल को दर्द की तोह आदत है पर […]

मकर संक्रांति में जैसे ही ढल निकले, सूरज चाचू उत्तरायण में चल निकले, सोचा नहीं एक पल भी फिर देखो, टिकाई नज़र आसमाँ पर हम नकले, चढ़ा ली खुशबू रेवड़ी मूंगफली की ऐसे, के सुबह […]

शब्दों से खेलना हुनर है मेरा, जज़्बातों से खेलना, हमें आता नहीं। कलम हथियार है मेरा, बाज़ुओं की ताक़त, मैं दिखाता नहीं। नर्म दिल हूं, हां मैं शायर हूं, मोहब्बत के सिवा, कुछ भाता नहीं। […]

देखा है दुनिया को रंग बदलते। मुंह में राम बगल में छुरा लिए चलते। गैरों को मतलब कहां हैं हमसे ‘देव’, यहां अपने ही अपनों को हैं छलते। देवेश साखरे ‘देव’

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है ये कागज की […]

यूं तो भारतवर्ष, कई पर्वों त्योहारों का देश है। भिन्न बोली-भाषाएं, खान-पान, भिन्न परिवेश है। आओ मैं भारत दर्शन कराता हूं। महत्त्व मकर संक्रांति की बताता हूं। सूर्य का मकर राशि में गमन, कहलाता है […]

आओ मनाए मकर सक्रांति, जीवन में लाए संस्कारों की क्रांति। सूरज देवता आए मकर राशि में, समय बड़ा बलवान जाने ना पाए बर्बादी में, स्नान ध्यान करें हम दान पुण्य, लोभ मोह क्रोध को कर […]

बेटी है यह कोई सामान नहीं, यह अनमोल खजाना है, जिसका कोई दाम नहीं, बड़े लाड़ प्यार से पाला था जिसको, हर बुरी नजर से बचा कर संभाला था जिसको, आज उस जिगर के टुकड़े […]

जुस्तज़ू क़ुरबत की फ़िर से बहक रही है। तेरी बेरुख़ी से मगर उम्र थक रही है। रात है ठहरी सी तेरे इंतज़ार में- तिश्नगी आँखों में फ़िर से चहक रही है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जीवन न्यौछावर कर दो हेतु परमार्थ। प्रतिफल की अभिलाषा बिना निःस्वार्थ। ईश्वर स्वयं बन जाएंगे जीवन सारथी, और बना लेंगे अपना सखा पार्थ। देवेश साखरे ‘देव’

छोड़ कर एक जिस्म को एक जिस्म में जाना होता है, बस यही एक इस रूह का हर एक बार बहाना होता है, रूकती नहीं बड़ी मशरूफ रहती है ज़िन्दगी सफ़र में, कहते हैं के […]

तेरे बाहों के हार में, सब कुछ हार जाऊं। तुझ पर अपना दिलो – जां मैं वार जाऊं। तुझ से हार कर भी जीत है मेरी ‘देव’, तेरे आगोश में, जन्नत का मैं करार पाऊं।

तेरी अक़ीदत मेरी इबादत तेरी ज़ीनत(श्रृंगार) मेरी सलत (prayer) तुझसे मिलाने के लिए उस खुदा का शुकराना, तेरी चाहत में इस नाचीज़ का कबूल कर नज़राना ऐसा क्यों लगता हैं की ज़िन्दगी के कुछ पल […]

अपनी आकांक्षाओं को, मैं पर देना चाहता हूं। खुले आसमान को, मुट्ठी में कर लेना चाहता हूं। कल्पनाओं को आकार देना इतना भी मुश्किल नहीं, बस अपनी सोच को, नई नजर देना चाहता हूं। देवेश […]

उंगली पकड़ कर थामा था जिसका हाथ पता नहीं क्यों वो छोर गया मेरा साथ मेरे अनकही बातों को समझने वाले जज़बात पता नही क्यों खुदा को नहीं आया रास मेरे सभी ख्वाइशों को सुनने […]

ये दिल हर एक पे निसार मत करना , क्या खबर किस जगह पे रुक जाये सास उसका एतबार मत करना आईने की नज़र न लग जाये इस तरह से श्रृंगार मत करना ……..@आजीज शेख…।

हँसो, के मैं जहाँ जा रहा, वहां तुम्हारी सोच भी नहीं जाती | हँसो, के मेरी आँखें जो सपने संजोए हैं, तुम्हारी देख भी नहीं पाती | हँसो, तुम हँसो | हँसो, के तुम्हारे यार […]

[01] आज का गीत आज का गीत, कुछ इस तरह बना ! मानो किसी बदन पर बेशुमार हुस्न संवरा शब्द : लुभावने तिल की तरह बिखर गए कागज के गुदाज़ बदन पर सौन्दर्य प्रतिमान बन […]

हुनर किसी ज़रिए का मोहताज नहीं होता । कल उन्हीं का है, जो कुछ आज नहीं होता । गिरने से डरता क्यों है, पहले उड़ान तो भर, वो भी सीख जाता, जिनका परवाज़ नहीं होता […]

अपने काँधों पर अपनी ज़िन्दगी को उठाना पड़ा, वक्त के पहिये से कदमों को अपने मिलाना पड़ा, उलझने बहुत मिलीं दिल से दिमाग के रास्ते यूँ के, खुद से ही खुद ही को कई बार […]

असमंजस इसमें बिल्कुल नहीं के बच्चा हूँ मैं, बात ये है के ज़हन से अभी भी कच्चा हूँ मैं, आ जाऊँ बाहर या माँ की कोख में रह जाऊँ, सोच लूँ ज़रा एक बार के […]

ज़मी पर जब भी गिरूँ आसमां से उठाने आता है, सोये हुए ख्वाबों को वो मेरे रोज़ जगाने आता है, दिखता किसी को नहीं ढूंढते सब हैं ठिकाने उसके, एक वो है जो राही को […]

खामोश दिखने वाले अक्सर बहुत बोला करते हैं, अपने ही अंतर्मन को वो हर दम टटोला करते हैं, जिज्ञासा छिपती है पर चेहरे पर दिख जाती है, कभी कभी जब मुख से वो चुप्पी तोला […]

मन में है असमंजस, नहीं आता कुछ समझ, जिस काम को करने पर मिले खुशी,ओंरो को मिले गम ,उस काम को करूं या ना करूं रहता यही असमंजस। मन में है असमंजस, घर पर हो […]

गरीबी की हर शय को मात देने को बैठा हूँ, मैं उम्र के इस पड़ाव को लात देने को बैठा हूँ, मजबूत हैं मेरे काँधे कुछ इस कदर मेरे दोस्तों, के मैं अपने सपनों को […]

किस असमंजस में पड़ा इंसान। किस दोराहे पे खड़ा इंसान ।। दौलत के रिश्ते हैं, रिश्तों की यही अहमियत है । वक्त के साथ अपने, जज़्बात बदलने की सहुलियत है । जरूरत खत्म, रिश्ते खत्म, […]

दिल की कलम से ये पैगाम लिखता हूं। तुम्हारे हिस्से खुशियां तमाम लिखता हूं। खुशियों से रोशन हो हर राह तुम्हारा, नये साल का नया कलाम लिखता हूं।।

सोचता था मैं कल आएगा नया सवेरा लाएगा पर इस बार भी वही बंजर धरा वही निसहाय मैं वही आंसू थे झोली में मेरी उम्मीद आई चुनाव आए नेता आए वादे भी आए पर दो […]

रिश्तों की उधेड़ बुन में खुद को ही सिलना भूल गया, सबसे मिलने की चाहत में खुद से मिलना भूल गया, बचा नहीं कोई फूल खिले सब मेरी ही फुलवारी के, एक मैं जाने कैसे […]

दिल जोड़ने वालों ने ही दिलों के तार काट दिए, खिलौनों से खेलने वाले बच्चों के यार काट दिए, ब मुश्किल ही बचे थे चन्द किस्से इस बचपन के, सुना है उसके भी किसीने पन्ने […]

माँ की ममता का हिसाब कराना मुश्किल है, दो और दो से ज्यूँ आठ बनाना मुश्किल है, बिछी हुई है यूँ बिसात यहाँ मानो सम्बंधों की, जिसमें अपनों पर ही चाल लगाना मुश्किल है, इंसानों […]