प्रभु अब तो बुला ले प्रभु अब तो अपने पास बुला ले छल -कपट की इस दुनियाँ में क्या बचा अब काम हमारा जहां जहान के सारे रिश्ते अपनी – अपनी कीमतें लिये रिश्तों के […]

कितने दरिंदगी के हाँथ है इस दुनिया में, कि अब इंसानियत का चेहरा शर्म से लाल है। और उस बच्ची का जिस्म खून से बदहाल है। दिल में ख्वाब थे,कन्धों पर किताबों का बोझ , […]

डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता, क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है। डर तो रौशनी की किरणों से लगता है, क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है।

बनाकर बातों से बातें, यहां बातें निकलती हैं, यूँ ही, ज़िन्दगी के सफर की रातें निकलती हैं, के जिंदा है जो ग़र कोई, तो अपनी वो ज़ुबाँ खोले, यहाँ बेजुबानों की जुबाँ से भी खुराफातें […]

बनाकर बातों से बातें, यहां बातें निकलती हैं, यूँ ही, ज़िन्दगी के सफर की रातें निकलती हैं, के जिंदा है जो ग़र कोई, तो अपनी वो ज़ुबाँ खोले, यहाँ बेजुबानों की जुबाँ से भी खुराफातें […]

बनाकर बातों से बातें यहां बातें निकलती हैं, बस यूँहीं जिंदगी के सफर की रातें निकलती हैं, भरकर बैठे रहते हैं कुछ लोग अपने अंदर इतना, के पूछो एक और बाहर भरमार कहानी निकलती हैं… […]

ये मतलबी दुनिया मुझे, अपना नही लगती। लोग कहते है,मै मगरूर हूँ, “” घमण्डी हूँ।। जब कर दिया अपनो ने घायल, जब चिल्लाये दुनिया के समाने करवा दिया जब गलती का एहसास, तब लोग कहने […]

मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]

कश्ती पर सवार है जिंदगी ना जाने कब मिलेगा किनारा दूर से तो दिख रहा है खुबसूरत हर एक नजारा फ़िर रहा हूँ मैं मारा मारा दिल में है आशा पोहचु में उसी किनारे पे […]

मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]

तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]

मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो, यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम, मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त, मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।। राही (अंजाना)

जब तुमने मिलना छोड़ दिया, दिल ने धकड़ना छोड़ दिया, राह फ़िज़ाओं ने बदली पुष्पों ने खिलना छोड़ दिया, बहक उठा मन का पंछी कदमों ने लहकना छोड़ दिया, जब से रुस्वा हुई मन्ज़िंल “राही” […]

तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]

सोंचता हूँ अपनी एक नई दुनियाँ बना लूँ, जिसमे अपनी ही मनचाही तस्वीरें लगा लूँ, खुशियों के बिस्तर बिछा लूँ और दुखों को अपने घर का रस्ता भुला दूँ, सूरज चँदा को अपनी छत पर […]

न दिन खरीद पाओगे न रात बेच पाओगे, इन हाथों में न तुम अपने हालात बेच पाओगे, खरीदने की चाहत जो तुम दिल में सजाये हो, इन आँखों से तुम न ये ख्वाब बेच पाओगे, […]

गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये […]

कल्पनाओं की कलम से जो चित्र बनाये वो कवि, खामोश आवाजों को सुन कर जो अल्फ़ाज़ बनाये वो कवि, समन्दर को बाहों में समेट कर जो दिखाए वो कवि, कलम को शमशीर से भी तेज […]

सरहद के आर पार देखती हैं नज़रें उसकी, ज़िगर के आर पार देखती हैं नज़रें उसकी, खामोश दिखती हैं मगर बहुत बोलती हैं नज़रें उसकी, दिल में मोहब्बत का रंग घोलती हैं नज़रें उसकी।। राही […]

पैसा तेरी गजब कहानी—- पैसे के लिए बीक रही “जिस्म और जवानी”; पैसे तेरी गजब कहानी’——- पैसे पर मिलते एक से एक”.. सुन्दर अप्सरा”हुस्न और जवानी; पैसे तेरी गजब कहानी। पैसे पर बीक रहे नौकरी […]

अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है। अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है। जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम, होश में लौट कर आना बहुत कठिन है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

अपनी यादों को मिटाना बहुत कठिन है। अपने गम को भूल जाना बहुत कठिन है। जब राहे-मयखानों पर चलते हैं कदम, होश में लौट कर आना बहुत कठिन है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

इस मतलबी शहर को छोड़कर भाग जाने का ” दिल चाहता”; लेकिन भाग कर कहाँ जाऊँ—– कही भी जाना होगा मतलबी शहर मे जाना होगा । लग रहा इसी” नरक” मे जीवन बीताना होगा; बार–बार […]

खुली आँखों का खुवाब अच्छा नहीं होता बेबसी का रुआब अच्छा नहीं होता जो अपने बन कर भी न बन सके अपने उन पर मोहोब्बत का दवाब अच्छा नहीं होता देव कुमार