दर्द ना पढ़ पाओगे, मेरे चेहरे से कभी
मेरी तो आदत है, तेरी बात पे मुस्काने की…
Category: शेर-ओ-शायरी
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तेरी हर बात
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मुस्कानों के पीछे
रोता हुआ ही मिले, हर टूटा इंसान
हमें भी गम छिपाने आते हैं, मुस्कानों के पीछे… -
दम नहीं तुझ में
अरे पागल आशिक़ बस इतने में ही तुम घबड़ा गए।
ज़ुल्म के दौड़ आया ही नहीं तुम अभी से घबड़ा गए।। -
गर दम नहीं
प्यार भी करती हो ज़माने से भी डरती हो।
गर दम नहीं है तो दो नाव पे क्यों चढ़ती हो।। -
इश्क़ फरमाते है
चलो हम तुम इश्क़ फरमाते है।
ज़माना यों ही जल जल मरते हैं।। -
ख्वाहिशों की बातें
ख्वाहिशों की मैं बातें आजकल नहीं करती
जिंदगी को बस किश्तों में जिया करती हूँ।
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ख्वाहिशे
रोती हैं ख्वाहिशे और तन्हाई मुस्कुराती है
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जब कभी भी हम तुझको याद किया करते हैं। -
रात-दिन
रात-दिन रहते थे हम एक-दूजे के साये में
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एक-दूजे के तन से हम बदन को ढका करते थे। -
हालात
आप चाहते तो हालात बदल सकते थे, आप के आंसू मेरी आंखो से निकल सकते थे । मगर आप तो ठहर गए झील के पानी की तरह, दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे।
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चाँद को बेदाग
चाँद में दाग है ये वो बार-बार कहता था
हम चाँद को बेदाग कहा करते थे
वो मेरी हर एक बात मान जाता था
हम हर एक बात पे उससे सवाल करते थे। -
ऐ सनम
जब से देखा तुमको ऐ सनम, हमसे ही दिल हमारा नहीं जाए संभाला । रात आंखों में ही कट जाती है, लगता है नींद ने आंखों से रिश्ता ही तोड़ डाला।
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गुरूर
छुप-छुप के देखती थी मुझको जब नजर उसकी
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तब कितना खुद पे हम गुरुर किया करते थे। -
अंदाज
रोज-रोज रूठती थी मैं और वह मनाता था
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अपनी जवानी के ये अंदाज हुआ करते थे। -
इश्क
तेरे इश्क का जुनून मेरे रग रग में बस गया है। ये एहसास मुझे अब हद से ज्यादा होने लगा है।
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मेरी ईद
उसकी दीद में ही मेरी ईद हुआ करती थी
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हम कुरान उसकी इबादत में पढ़ा करते थे। -
कल तलक फिरता था
कल तलक फिरता था वह मेरा बनके दीवाना
हम आंखों ही आंखों में बात किया करते थे
आज बहुत दूर है वो हमसे मगर फिर भी
हम सपनों में उनसे रोज़ मिला करते हैं। -
गुड्डी भी सुलझा लेंगे
नींदें हैं आजकल ना जाने क्यों रूठी हमसे
वो मिलेगा तो यह गुत्थी भी सुलझा लेंगे -
पैर पड़ लेंगे
दीद हो जाएगी तो बातें चार कर लेंगे
रोना आएगा तो उसके कंधे पर सिर रख लेंगे
वह जाने लगेगा रूठ कर अगर हमसे
हम मनाने के लिए उसके पैर पड़ लेंगे। -
हम तो सिहर जाते हैं
उनके आने से मेरा जहान जगमगाया था
उनके जाने के खयाल से भी पैर डगमगाते हैं,
छोड़ जायेंगे एक दिन वो मुझको तन्हा ही
यह सोचकर भी हम तो सिहर जाते हैं। -
खेल मुकद्दर का
टूट कर चाहने से कुछ भी
नहीं होता है,
सब खेल मुकद्दर का होता है
ये अब समझ पा रही हूँ मैं। -
मुनासिब
जिसके बिन जीना एक पल भी ना मुनासिब था
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उसके बिना पूरी उम्र जिए जा रही हूँ मैं… -
काँटों से भी मैं प्यार
उसके होंठों पे बनके मैं गुलाब टूटी हूँ,
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अब तो काँटों से भी मैं प्यार किया करती हूँ। -
कब्र में भी
खाक में मिला के उसने मेरे तन को राख किया
कब्र में भी उसी को याद किया करती हूँ ।
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उसकी शोखी
मैं तो मरती हूँ उसकी एक-एक शोखी पर
रूबरू उसको मैं महसूस किया करती हूँ।।अभिव्यक्ति दिल से ❤❤
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एहसास किया करती हूँ
अक्सर दिल में बैठकर वो बात करता है
मैं आजकल ये एहसास किया करती हूँ ।अभिव्यक्ति दिल से ❤❤
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दीद हो जाए
दीद हो जाए उसकी एक बार मुझको बस
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हर आने-जाने वाले पर इसी वाइस मैं नजर रखती हूँ। -
दिल के दरवाजे
कोई आ ना जाए
दिल में मेरे रहने को
यही सोंचकर
दिल के दरवाजे बंद रखती हूँ।
एक बार खा चुकी हूँ पहले
प्यार में धोखा
इसलिए छाछ भी मैं फूंक-फूंक पीती हूँ। -
लौटकर आएगा वो
वह चला जाएगा ये
सोचकर मैं रोती थी,
रात को रात बनाने से अब मैं डरती हूँ।
छोड़कर जा चुका है वह तो
मुझे बरसों से
लौटकर आएगा ये इंतजार करती हूँ। -
चांद को चांद नहीं कहती हूं
हमने बिछाई हैं
कई बार राह में पलकें
वो भी पलट के देखेगा
यह उम्मीद
नहीं रखती हूँ
जब से देखी है सनम की सूरत मैनें
तब से मैं
चाँद को चाँद नहीं कहती हूँ!! -
उम्मीद मत रखना तुम
वो तेरा बार-बार दिल दुखाएगा
मगर मत रोना तुम
तेरी आंखों में आंसू ले आएगा
मगर मत रोना तुम
उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना
वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम। -
उम्मीद मत रखना तुम
वो तेरा बार-बार दिल दुख आएगा
मगर मत रोना तुम
तेरी आंखों में आंसू ले आएगा
मगर मत रोना तुम
उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना
वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम। -
सितमगर…
सितमगर सितम देता ही रहा
मैं उसे आखिरी समझ कर झेलती रही
वह तो मेरे साथ खेल ही रहा था पर मैं भी
अपने वजूद के साथ खेलती रही… -
मुबारकबाद
मुबारकबाद देते हो मेरी ना कामयाबी की
इतना पत्थर दिल तो पत्थर भी नहीं होता…. -
भावनाओं को ठेस
यूं तो हम किसी की बात का बुरा
इतनी जल्दी नहीं मानते
पर दिल ही तो है
भावनाओं को ठेस पहुंचेगी तो
दिल रो ही पड़ेगा। -
दिल की अलमारी
कितने करीने से
सजा कर रखती हूं मैं
तुम्हारी यादों को
दिल की अलमारी में!
और तुम आकर
सब एक पल में बिखेर देते हो !! -
आज भूल गई
ताज्जुब है तुम्हारी यादाश्त पर
सारी बातें कैसे याद रहती हैं तुम्हें
यही सोचती हूं मैं आजकल
क्योंकि मैंने तुम्हें कल
लफ्ज़ लफ्ज़ याद किया था
और आज भूल गई। -
दिल है कि मानता नहीं
इश्क़ हम करते कहाँ है ए दिल ही फिसल जाता है।
दिल को क्या समझाएं जब देखो बर्बाद हो जाता है।। -
वश
ए अमित इश्क़ भी क्या बीमारी हैं।
इश्क़ पे वश न हमारी है न तुम्हारी है।। -
चाहत
सोचा था अपनी मुकद्दर को एक नया नज्म देंगे।
उन्हीं नज्म के आर में हम उनकी दास्तां लिखेंगे।। -
दीवाना
दिन गुजर गए महीने गुजर गए साल गुजर गए।
किसी की चाहत में, हम खुद को ही भूल गए।। -
शुक्रिया….
मेरी लिखी नज़्म पर ,
मिलती है सबकी दुआ
और क्या तमन्ना करूं,
शुक्रिया है शुक्रिया…नज़्म का अर्थ ——- कविता
*****✍️गीता*****
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उफ़…
दांतों तले आंचल दबा लेना।
उफ़… कहाँ गया वो ज़माना।। -
ए रास्ते!
ए रास्ते ! मिट भी जाओ,
अब आंखें मंजिल नहीं ढूंढती ,
बस रास्ता देखती है ,खत्म होने का। -
#shayri 2liner तुम फिर से…
तुम फिर से मेरी यादों का हिस्सा मत बनो,
ना वजह बनो, मेरे मुस्कुराने की। -
मत दो मुझे फुलों-सी मुस्कान
मत दो मुझे फुलों-सी मुस्कान,
पर; कांटो सी चुभन भी नहीं चाहिए। -
वो किसे…
वो किसे दिखाएं; अपना साफ मन ,
जहां तन की बात पहले होती है। -
सिखे कहाँ से
दिल ले के दर्द देना, यह अदा सिखे कहाँ से।
बताइए न यह राज़,आपने ने सिखे कहाँ से।। -
वो हमें
दीवानो की तरह हम उन्हें चाहते हैं
वो हमें नखरे हजार दिखाते हैं… -
मैखाने
मुखौटे से भरे हुए मैंखाने हैं….
किस पे भरोसा करें यहां तो अपने ही बेगाने हैं। -
मैं नाखुश…
मैं नाखुश-सी हूं आजकल,
इसका कोई मलाल नहीं।
मगर तू खुश रहे सदा ,
तेरी तकलीफों की सौगात; अपने लिए,
खुद हमने खुदा से मांगी थी।