ये ज़माना जो है दिखावे का ही है
अंतर्गुणो को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है
Category: शेर-ओ-शायरी
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ये ज़माना…
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मैंने जिंदगी को…
मैंने जिंदगी को हमेशा सहेली बनाकर रखा,
मगर वो है कि हमेशा दुश्मनी निभाती रहती है। -
यही दोस्ती यही प्यार ?
रास्ते कठिन है प्यार के, फिर भी मैने हिम्मत नहीं हारा।
तुम तो थोड़े ही दूर चल के कहने लगे अब मैं जीवन से हारा।। -
बिन बरसात के ही….
इश्क़ क्या करे हम, वो कहते है इसके पास दिल ही नहीं है।
उन्हें क्या पता कभी कभी बिन बरसात के ही हम भीग जाते है।। -
कहीं पे दिल तो कहीं पे निशाना
हम इतने भी नादान नहीं थे, जितना की वो मुझे समझते थे।
कस्मे वादे मुझ से करते थे, इश्क़ जनाब कहीं और फरमाते थे।। -
ना समझ
बड़ा ना समझ है यार मेरा
हमसे पूँछता है कौन है वो ?
थोड़ा दिमाग नहीं लगा सकता!! -
अरमां मचल रहे हैं
तेरी तारीफ में क्या कहूँ
लफ्ज कम पड़ रहे हैं
तू खूबसूरत है इतना
अरमां मचल रहे हैं -
ए कैसा इश्क़ है ??
।। आवारा से क्या पूछना इश्क़ किसे कहते हैं।।
।। हवस के नजरों से देखना भी क्या इश्क़ है।। -
कब तलक
कब तलक निगाहें यूँ चुराओगे
है यकीन एक दिन तो पास आओगे.. -
एक ही मुस्कान पर
आज भी हम तुम्हारी
एक ही मुस्कान पर,
सैकड़ों शायरी बना सकते हैं
तुम मुस्कान तो दो।
आज भी शब्दों के फूलों को
बिछाकर राह में
स्वागत करेंगे, तुम, हमें
आने का कुछ पैगाम तो दो। -
इश्क़ में रिश्क़
चल हट जा !! नहीं करना है मुझे इश्क़ विश्क़
मैं बर्बाद होता गया ले ले के इश्क़ में रिश्क़।। -
काश मोहब्बत मे भी चुनाव होते
सोच रहा था की
काश मोहब्बत मे भी चुनाव होते
एकदम खुल्लमखुल्ला प्रचार होतेऐसा गजब भाषण देते के
एक ही रॅली मे आपको अपना बना लेते -
पाक इश्क…
पाक इश्क अक्सर होता नहीं,
मगर जब होता है तो बेमौसम बरसता है!
और जिस पर बरसता है,
वो बहुत भीगता है,
आंसुओं से भी और उस खुमार से भी! -
शक्सीयत
अपने चहरे को इस तरह अपनी शक्सीयत के अनुरूप बनाइए…
कि अपके पूरे विवरण के लिए…
केवल चहरा ही काफी हों।।
HEMANKUR❤️ -
दर्द का आलम
दर्द का आलम सहसा बाढ़ बन गया,
जब किताब के पन्नो में;
उनकी तस्वीर रूबरू हुई। -
कौन सा क़ासिद तुम्हारे पास भेजूं
कौन सा क़ासिद तुम्हारे पास भेजूं
जो मुहब्बत की बता दे असलियत
कौन सी कविता दूँ लिखकर साथ में
प्यार की समझा दे थोड़ा अहमियत। -
साँवरे
साँवरे, इसमें हमारा नही कोई दोष
तुम्हारा ख्याल आते नही रहता होश
हमारी तो क्या बिसात
जब खयाल तेरा राधे को करता मदहोश। -
बड़ी बेबाक बातें करते हैं वो….
बड़ी बेबाक बातें करते हैं वो,
जमाना कब तक उन्हें चुप कराता।
जो खौफजदा है नहीं,
उन्हें खौफ कौन दिलाता….! -
हमारी मौजूदगी में।
झुक कर उठ जाती थी,
उनकी नज़रें,
हमारी मौजूदगी में।
और अब आलम ऐसा है,
कि उनकी नज़र,
अब उठती ही नहीं। -
ग़म की दवा
मय से मैने पूछा ग़म की दवा है क्या आपके मयख़ाने में।
मय कहा किस ग़म की दवा चाहिए आपको मयख़ाने मे। -
तुम्हें ढूंढती रही निगाहें..
तुम्हें ढूंढती रही निगाहें,
बरसों बीतने के बाद।
कभी तुमने ना खबर दी,
न ही तुम तक आने का पता। -
पिछली बरसातों में
खोखलापन है तुम्हारी बातों में
अब ना रही तेरे लिए
मेरे दिल में वो जगह !
जो हुआ करती थी पिछली बरसातों में.. -
कुछ तो है..
‘कुछ तो है कि तुझसे किये वादे की खातिर,
खुद से ही उलझ पड़ता हूँ कभी-कभी..’– प्रयाग
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तेरा लिखा हर पन्ना
लिखने का शौक जरा कम ही है मुझे
पर तेरा लिखा हर पन्ना पढ़ा करता हूँ…
हर बार गलतियों पर जुबां बोल पड़ती है
बस यही गुनाह बार-बार करता हूँ… -
पुलिसवाला हूँ मैं
सब कुछ देखा करता हूँ नादान नहीं हूँ मैं
पुलिसवाला हूँ गुनाह पकड़ ही लेता हूँ मैं… -
स्वर्ग से भी अच्छा है …
हिन्दू से पूछो , मस्लमां से पूछो , पूछना है तो सारे जहां से पूछो , सबका यही होगा कहना स्वर्ग से भी अच्छ है इस हिन्दुस्तान में रहना (संदीप काला)
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किसी को किसी से….
कौन किस पे कुर्बान होता है इस ज़माने में।
कोई वास्ता ही नहीं है यहाँ किसी को किसी से ।। -
कविता में भाव
वो कहते हैं तुम्हारी कविता में
भाव नहीं हैं
मैं क्या जवाब दूं
जब दिल ही नहीं हैं !! -
आईने ने कहा….
कल रात मैंने अपने आईने से कहा-
आजकल मैं बहुत अच्छा लिखने लगी हूँ
सब कहते हैं..
आईने ने कहा दिल जो टूट गया ना !! -
अब हमारे तेवर
अब हमारे तेवर
कम हो गए हैं,
क्योंकि अब तुम्हारे
हम हो गए हैं।
अब कहाँ समय
जो कि बेकार घूमें
तुम्हारी मुहब्बत में
हम खो गए हैं। -
इश्क आँच पर पकता रहा…
यूँ ही सिलसिला चलता रहा
कभी मैं कभी वो रूठता रहा
टूटने लगे दिल बेतहाशा
मगर इश्क आँच पर पकता रहा.. -
आज हमारी टक्कर है
लड़का – मैं वो आशिक़ नहीं जो अपनी,
फ़ितरत को धूल में मिला दे।
गर यकीन न हो तो एक मर्तबा,
दिल दे के तू मुझे अपना बना ले।।
💇 — अपना दिल ए पागल आशिक़,
तुझे ऐसे कैसे हवाले कर दूँ ।
लाख जतन से संभाला यौवन को,
बदल जाता है तू कैसे यकीन कर लूँ।।
लड़का – तेरा यौवन किस काम का जो किसी,
आशिक़ के कांतिल निगाह न पड़े।
लाख बचा ले तू अपना दामन,
फिर भी दीवानो से तू कैसे बचे।।
💇 ——तेरे जैसे कई आशिक़ आ कर चले गए,
मेरे हुस्न की आग ही कुछ ऐसी है।
तू मुझ पे क्या जादू चलाएगा,
तेरा ईमान ही बेईमान है।।
लड़का —मेरे ईमान पे नश्तर चलाने वाली,
कम से कम खुदा से तो डर।
माना कि ज़माने की डोर तेरे हाथों में हैं,
फुर्सत से बनाने वाले से तो डर।।
💇 —–हम कब नहीं थे तुम्हारे ए नादान,
तू हर मर्तबा छलने का काम ही किया।
गर तू करता है मुझ से सच्ची मुहब्बत,
जा क्या याद करेगा, यह शाम तेरे नाम किया।। -
धोखा ही धोखा
यहाँ धोखा वहाँ धोखा, चारो तरफ धोखा ही धोखा है।
कैसे कोई इश्क़ करे इसलिए हमने फैसला बदल दिया है।। -
कहां आ गए हैं हम।
कहां आ गए हैं हम,
जहां खामोश-सी शामें हैं।
और चुप-सा सूरज उगता है।
ना बांटता है मुस्कान,
ना रौनकें फैलाता है। -
नहीं मानते…..
नहीं मानते तकलीफ हम,
लहू के बहने का ।
जब मन के घाव गहरे हो,
जो न भरते हैं, ना दिखते हैं। -
अज़ल से हमारे हो
आज से नहीं तुम
अज़ल से हमारे हो,
गैहान जब से
बना होगा तब से,
दिल मे हमारे हो
गजल में हमारे हो।अज़ल – अनादिकाल
गैहान – सृष्टि -
एग्रीमेंट
बालू के रेत में हमने आशियाना बनाया
समंदर से कोरे कागज पे एग्रीमेंट करके ।
अचानक अमित ने कहा ए पागल आशिक़
लहरों पे यकीन करना जरा सोच समझ के ।। -
गिले-शिकवे
गिले-शिकवे जरा
कम कर दिये हमनें
जब से वो दूजी गली जाने लगे
वो हमसे दूर रहकर खुश रहेंगे
इसलिए हम ये दुनिया छोड़ आज
जाने लगे।। -
आंखों का नूर
आंखों का नूर हैं ये आंसू
नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो,
किसी अपने पे तरस तो खाया करो।
कहीं कोई परेशां सा हो जाता है ,
कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो । -
ओस की बूंदें
ऐ दोस्त, आंख से ओस की बूंदें न गिराना ,
हम देखना चाहें फ़कत तेरा मुस्कुराना ,
अश्क आएं तो कह देना उनसे..
यहां तो है किसी और का ठिकाना -
सवालों के जवाब..
रात भर खोजा किए ,तेरे सवालों के जवाब,और ..
कुछ और सवाल आ कर खड़े हो गए.. -
धूप तो रहेगी।
मैंने बड़े प्यार से पूछा आज उससे
अगर मैं ना रहूं तो
मेरी कमी तुम्हें खलेगी ?
उसनें जवाब दिया-
बादल चाहे जितने हों पर धूप तो रहेगी। -
तुम अफ़सना सुना दो
तुम अफ़सना सुना दो
छोटी सी कोई मुझको
जिससे मैं मीठे-मीठे
सपनों की नींद सोऊँ। -
कारवां
कारवां तो गुजर ही जाएगा
जिंदगी का,वक्त के साथ।
चाहे वह गम का हो ,या सकुं का। -
तुम गुमान की मूरत…
तुम गुमान की मूरत बने रहो,
और मैं स्वाभिमान की प्रतिमा। -
कुछ छुपा कर रखी थी यादें…
कुछ छुपा कर रखी थी यादें,
कुछ सपने भी संजोए थे ।
हम सपनों के करीब जाकर,
कुछ पल सिमट कर सोए थे। -
ऐ वक्त….
ऐ वक्त तू बहुत अच्छा है औरों के लिए,
मगर मेरे लिए कब तक बुरा रहेगा! -
सजा मेरी
प्यार करना थी खता मेरी
बता तो देते क्या थी सजा मेरी… -
गम तो तिल भर भी उसे छू न सके
गम तो तिल भर भी उसे छू न सके
ए खुदाया तू मेहरबान हो जा,
मित्र है वह मेरा निराला सा
उसके चेहरे का इब्तिसाम हो जा। -
दिल के करीब
खबर नहीं कौन है वो, मेरा लगता है क्या,
मगर इतना करीब दिल के, कैसे करूं मैं बयां..
…✍️गीता