कब तक रहोगे यूं मायूस तुम !
जब आयेगे दुल्हन बनकर तो
कहाँ जाओगे
रूबरू होंगे जब हम तुम्हारे
तो बाहुपाश में आ ही जाओगे…
Category: शेर-ओ-शायरी
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कब तक रहोगे यूं मायूस तुम
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दिल उदास है
सितारों से आसमान सजा हुआ है
पर चाँद फिर भी तन्हा है
भीड़ है मेरे आसपास रिश्तों की मगर
जाने क्यों दिल उदास है !! -
गुमसुम से रहते हैं
वो कुछ कहते नहीं आजकल
बड़ा गुमसुम से रहते हैं
लोग कहते हैं अवसाद के
शिकार हो गये हैं.. -
बादल
बादल राजस्थान की सूखी जमीन
की तरह लग रहे थे
मगर फिर भी बरसात हो गई
मेरा मन हरा-भरा था फिर भी
रो ना सका.. -
बेटियां:-मुस्कान की तिजोरी
खुशियों की चाबी होती हैं बेटियां
घर की लक्ष्मी होती हैं बेटिया
खिलखिला कर सारे गम हर लेती हैं
मुस्कान की तिजोरी होती हैं बेटियां -
राह में काँटे बिछाना
राह में काँटे बिछाना काम है उसका
मेरे दिल को दुःखाना काम है उसका
मैं हँस देती हूँ जो जरा-सा देखकर उसको
मेरी हँसी से जल जाना काम है उसका -
उदासी का आलम
उदासी का आलम
इस कदर छाया है
रूबरू मेरे एक धुंध छाया है
हौसले पंख लगा के उड़ने
को तैयार हैं पर
मेरे पंखों को किसी ने
काटकर गिराया है.. -
गुलाबी सपने..
रात होते ही
गुलाबी सपने घेर लेते हैं
हम आँख बंद करते हैं तो
मुह फेर लेते हैं…. -
अधूरे लोग…
अधूरे लोग, अधूरी बातें,
अधूरी जिंदगी के पन्ने ,
और अधूरी सांसे ,
बस ख्वाबों में रहना पसंद करते हैं। -
हाथों की लकीरें
ना आना हाथों की लकीरों के फरेब में,
ज्योतिषी की दुकानों पर, मुकद्दर नहीं बिकता..
तदबीरों से बनाए जाते हैं मुकद्दर,
तक़दीर खुद ही आ जाए रफ्ता रफ्ता.. -
जो है तू सामने
जो है तू सामने,
वो तू है नहीं,
और है जो तू,
ज़हन से,
आजकल वो दिखता नहीं। -
शफ़ाख़ाना
तुमने किया है पाक ए इश्क जो
बड़ी शिद्दत से हमसे,
तो अहसान फ़रामोश हम भी नहीं ,
आ! तेरी दर्द ए दवा का शफ़ाख़ाना,
हमने भी खोल दिया है। -
मेरी बेबसी को मशहूर ना कर
मेरी बेबसी को मशहूर ना कर,
माना बड़ा जालिम है तू जमाने,
फिर भी मजबूर ना कर,
और मजबूत है बहुत हम अंदर से,
माना टूटे हुए दिखते हैं,
तू मजबूर ना कर!
अक्सर मजबूर लोग ,
इतिहास लिखते हैं। -
जिंदगी अगर तू अश्म है
जिंदगी अगर तू अश्म है ,
तो क्या!
मत इतरा,
मेरी मेहनत भी किसी फौलाद से कम नहीं। -
ज़िन्दगी का सफ़र
ज़िन्दगी एक लंबा सफ़र है,
दिन भी हैं और रात भी ।
कभी – कभी गम भी मिलते,
और कभी – कभी सौगात भी.. -
ना जाने कितने दिल..!!
अभिव्यक्ति बस दिल से:-
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रोते नहीं हैं हम बस सिसकते
रहते हैं
तेरी यादों में आहें हम भरते
रहते हैं
नासमझ है तू जो नहीं चाहता
मुझको
ना जाने कितने दिल हैं जो मेरी मोहब्बत में
तड़पते रहते हैं… -
तमाम रातें..
अभिव्यक्ति बस दिल से:-
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गुजारी हैं तमाम रातें हमने तेरे बगैर
ये तो छोटी-सी जिंदगी है !
गुजर जाएगी… -
हौसलों के पंख..
यूं तो आसमां पर नहीं ठिकाना अपना
फिर भी हौसलों के पंख लिये जा रहे हैं
उड़ना नहीं आता मगर ना जाने कैसे
उड़ते जा रहे हैं.. -
लाइफ रिपेयरिंग
सोचता हूं लाइफ रिपेयरिंग की
कोई शॉप खोल लूं,
बहुतों की यहां बिगड़ी पड़ी है।। -
मैं जताती नहीं
मैं जताती नहीं,
प्यार तो क्या।
उसे महसूस कर लेना ,
जब तुम्हारी जरूरत का ख्याल ,
मुझे तुमसे पहले हो… -
खामोशी का कारवां
क्यों खामोशी का कारवां है ,
तेरे और मेरे बीच ,
ना तुम उसे तोड़ते हो ,
ना मैं उसे लांगती हूं। -
तुम्हारे बिना
आपके बिन अब तो
गुजरते नहीं जिंदगी के एक भी पल
रोज रातों को आपकी तस्वीर से पूछता हूं
कि काटेंगे कैसे तुम्हारे बिना कल। -
मर्जी आपकी
मेरे सपनों का रास्ता गुजरता है
आपकी जिंदगी से ।
मर्जी आपकी ठुकरा दे हमें
या लगा ले गले खुशी से। -
पहली रात
पहली रात के मिलन का
वो एहसास याद रखना ।
हवाएं भी चलेंगी थम-थम कर
मौसम भी होगा खास याद रखना। -
आस्तीन का सांप
किसी के लिए दोस्त फरिश्ते हैं
किसी के लिए जिन्दगी जीने का बहाना
मेरे लिए सिर्फ आस्तीन का सांप हैं
नहीं है दिल में अब दोस्तों के लिए
कोई ठिकाना… -
पागल आशिक़
लोग कहने लगे है, हम इश्क़ में पागल हो गए है।
मैं कहता हूँ इश्क़ में पागल तो कोई कोई होते है।।
शाहजहाँ भी मुमताज़ के लिए ही पागल हो गया।
इसलिए आगरा में मुमताज़ महल प्रसिद्ध हो गया।। -
झूम झूम के…..
हमने उड़ते हुए बादल से पूछा कब तुम्हें बरसना है।
उसने कहा नादान यह भी कोई पूछने की बात है ।।
सभी को वफा के आशियाना तो एक मर्तबा बनाने दो।
फिर देखना कैसे हम आँखों से झूम झूम के बरसते है।। -
इन्तजार
देखते घड़ी की सुइयों को बार- बार हैं
पढ़ते हैं तेरी पाती बार – बार हैं।
कहां हो तुम कि आज इन्तजार है। -
मुझे पसंद नहीं है
हम उस राह से गुजरना नहीं चाहते,
जिस राह में खड़े हो जाए दिल्लगी।
कह दो पागल आशिक़ दीवानो से,
मुझे पसंद नहीं है किसी की आवारगी।। -
अपना पराया
तुम से दूर रह कर भी, हमने अब जीना सिख लिया है।
कौन है अपना कौन है पराया, हमने यह देख लिया है।। -
ए भी कोई मुहब्बत है
वो जवानी ही क्या जिस जवानी में कोई कहानी ही न हो।
वो मुहब्बत मुहब्बत ही नहीं जिसमें कोई अश्क ही न हो।। -
ईशारा
आज फिर फलक से सितारे जमीं पर आने लगे है।
शायद उनका ईशारा होगा जो मेरा एक अंदाज़ है।। -
कितनी कशिश थी..
कितनी कशिश थी,
उनकी मासूमियत में।
भूल जाते थे सारा जहां।
जो बदल गए अब,
एक तूफान के बाद।
अब न झलक मिलती है,
ना निशान दिखते हैं।.. -
कितने कोरे कागज….
कितने कोरे कागज रंग डाले,
तुम्हारे लिए।
फिर भी ना कह पाए,
जो कहना था…. -
बिन बुलाए आते हैं
बिन बुलाए आते हैं गमों के सागर,
मुसीबतों के तूफान,
और कभी चाहकर भी नहीं होती,
खुशियों की बारिश ,
मुस्कुराहटों की बौछार। -
घूंघरू की आवाज़
फिर वही, कहीं से आयी घूंघरू की आवाज़।
दिल को लुभा रही है, फिर वही पुरानी साज।। -
बाद में पता चला…..
सोचा रहा था मैं, इश्क़ है बेदाम की।
बाद में पता चला, इश्क़ है बड़े काम की।। -
शेर व ग़ज़ल
कहीं हीर की टोली तो कहीं रांझे की टोली।
अंजुमन में गूंज उठा शेर व ग़ज़ल की बोली।। -
वाह!!
जब वो अपनी स्याह भरी गेसूओं को
अपनी अंदाज से संवारने लगी।
खुदा की कसम तब वादियों के
नियत भी धीरे धीरे बदलने लगी।। -
कभी वो नचाती थी उसे
कभी वो नचाती थी उसे,
अब सत्ता उसे नचाती हैं,
गांव को गोद लेना,
तो बात पुरानी ठहरी ,
अब मीडिया को भी,
गोद लिया जाता है। -
उनके शहर में
क्या करूंगा “अमित “जा के उनके शहर में।
वफा के बदले मिला बेवफ़ाई उनके शहर में।। -
मुझको अगर जीतना है।
मुझको अगर जीतना है ,
तो ज़िद कभी ना करना,
बस हृदय को;
थोड़ा-सा छू जाना। -
ये जो उदासी है तेरे अन्दर….
ये जो उदासी है तेरे अंदर,
वो खुशी में बदल जाएगी।
तू उठ तो सही,संघर्ष के लिए ,
वक्त तो इंतजार में है तेरे,
किस्मत भी बदल जाएगी। -
तक़दीर और तदबीर
जब तक़दीर से दोस्ती की, तब तदबीर ने मुझ से कहा।
मुझे मत छोड़ ए नादान गर मैं नहीं तो तकदीर कहाँ।। -
फिर क्यों न…..
माना कि मुकद्दर पे जोर चलता नहीं किसी का।
फिर क्यों न मेहनत से ही दोस्ती कर लिया जाए।। -
वक्त और तक़दीर
वक्त को हमने वक्त की तरह बड़ी मेहनत से कदर किया।
तभी तो आज मैं अपनी तक़दीर को अपने वश में किया।। -
चलो फिर सजाएं
चलो फिर सजाएं
मुहब्बत की दुनियां
नहीं रोक पाये
हमें अब ये दुनियाँ।
बहुत हो चुकी अब
कमबख्त दूरी,
दर्द गम का सहना
नहीं है जरूरी। -
मैं चाहती हूं…
मैं चाहती हूं ख्वाबो की पौड़ियों पर चढ़ना,
मगर पीछे से जिम्मेवारियों की रस्सी खींच रही है -
बन गए शायर
असर है आपका शायद
कि हम भी बन गए शायर
किया इजहार शायरी से
ज़माना कह न दे कायर। -
जिंदगी ने सौगात में
जिंदगी ने सौगात में ,
खूबसूरत-सा लम्हा जरूर दिया ,
मासूम से हाथों ने जब ,
उंगलियों को मेरी थाम लिया।