कल रात मैंने अपने आईने से कहा- आजकल मैं बहुत अच्छा लिखने लगी हूँ सब कहते हैं.. आईने ने कहा दिल जो टूट गया ना !!
कल रात मैंने अपने आईने से कहा- आजकल मैं बहुत अच्छा लिखने लगी हूँ सब कहते हैं.. आईने ने कहा दिल जो टूट गया ना !!
अब हमारे तेवर कम हो गए हैं, क्योंकि अब तुम्हारे हम हो गए हैं। अब कहाँ समय जो कि बेकार घूमें तुम्हारी मुहब्बत में हम खो गए हैं।
यूँ ही सिलसिला चलता रहा कभी मैं कभी वो रूठता रहा टूटने लगे दिल बेतहाशा मगर इश्क आँच पर पकता रहा..
लड़का – मैं वो आशिक़ नहीं जो अपनी, फ़ितरत को धूल में मिला दे। गर यकीन न हो तो एक मर्तबा, दिल दे के तू मुझे अपना बना ले।। 💇 — अपना दिल ए पागल […]
यहाँ धोखा वहाँ धोखा, चारो तरफ धोखा ही धोखा है। कैसे कोई इश्क़ करे इसलिए हमने फैसला बदल दिया है।।
कहां आ गए हैं हम, जहां खामोश-सी शामें हैं। और चुप-सा सूरज उगता है। ना बांटता है मुस्कान, ना रौनकें फैलाता है।
नहीं मानते तकलीफ हम, लहू के बहने का । जब मन के घाव गहरे हो, जो न भरते हैं, ना दिखते हैं।
आज से नहीं तुम अज़ल से हमारे हो, गैहान जब से बना होगा तब से, दिल मे हमारे हो गजल में हमारे हो। अज़ल – अनादिकाल गैहान – सृष्टि
बालू के रेत में हमने आशियाना बनाया समंदर से कोरे कागज पे एग्रीमेंट करके । अचानक अमित ने कहा ए पागल आशिक़ लहरों पे यकीन करना जरा सोच समझ के ।।
गिले-शिकवे जरा कम कर दिये हमनें जब से वो दूजी गली जाने लगे वो हमसे दूर रहकर खुश रहेंगे इसलिए हम ये दुनिया छोड़ आज जाने लगे।।
आंखों का नूर हैं ये आंसू नूर की बूंदें यूं ना बहाया करो, किसी अपने पे तरस तो खाया करो। कहीं कोई परेशां सा हो जाता है , कुछ तो दोस्ती का फ़र्ज़ निभाया करो […]
ऐ दोस्त, आंख से ओस की बूंदें न गिराना , हम देखना चाहें फ़कत तेरा मुस्कुराना , अश्क आएं तो कह देना उनसे.. यहां तो है किसी और का ठिकाना
रात भर खोजा किए ,तेरे सवालों के जवाब,और .. कुछ और सवाल आ कर खड़े हो गए..
मैंने बड़े प्यार से पूछा आज उससे अगर मैं ना रहूं तो मेरी कमी तुम्हें खलेगी ? उसनें जवाब दिया- बादल चाहे जितने हों पर धूप तो रहेगी।
तुम अफ़सना सुना दो छोटी सी कोई मुझको जिससे मैं मीठे-मीठे सपनों की नींद सोऊँ।
कारवां तो गुजर ही जाएगा जिंदगी का,वक्त के साथ। चाहे वह गम का हो ,या सकुं का।
तुम गुमान की मूरत बने रहो, और मैं स्वाभिमान की प्रतिमा।
कुछ छुपा कर रखी थी यादें, कुछ सपने भी संजोए थे । हम सपनों के करीब जाकर, कुछ पल सिमट कर सोए थे।
ऐ वक्त तू बहुत अच्छा है औरों के लिए, मगर मेरे लिए कब तक बुरा रहेगा!
प्यार करना थी खता मेरी बता तो देते क्या थी सजा मेरी…
गम तो तिल भर भी उसे छू न सके ए खुदाया तू मेहरबान हो जा, मित्र है वह मेरा निराला सा उसके चेहरे का इब्तिसाम हो जा।
खबर नहीं कौन है वो, मेरा लगता है क्या, मगर इतना करीब दिल के, कैसे करूं मैं बयां.. …✍️गीता
जफ़ा मत कर, वफ़ा कर ले झियाँ मत बन, मुहब्ब्त कर सभी धोखा नहीं देते मुहब्बत से कभी मत डर।
तबस्सुम से तुम्हारी हम सभी गम भूल जाते हैं, आईन्दा दूर मत जाना जुदाई सह न पाते हैं।
कुछ तरीके बताओ ना मुझे, कैसे भूले हो तुम मुझे।
क्यों मनाएं किसी को, रूठना हमें भी आता है। जो भूले बैठे हैं हमें, भुलाना हमें भी आता है।
बेखौफ होकर जिंदगी जी लेते, अगर तुम्हें खोने का डर ना होता…
मुझे पता नहीं तुम्हें पाने का तरीका, पर खोने का सबब आज भी याद है……
मैं लिखती हूं कुछ अलग-सा, मुझे इंसानों से ,न नफ़रत हैं, बस करती, निंदा बुराइयों की, दुःख देने की , न हसरत है।
चाय के कप से उठते धुंए में, तेरी शकल नज़ार आती है, ऐसे खो जाते है तेरे ख्यालों में, की अक्सर मेरी चाय ठंडी हो जाती है। Read Also : Good Morning Shayari
यह न समझो हम बहुत दिल के बुरे हैं बस जरा अनदेखियों से बुझ गए हैं, लक्ष्य के थे पास लेकिन गिर गए थे फिर उसे पाने में पूरे खप गये हैं। इसलिए थोड़ा समय […]
सब कहते हैं! ज़माना बुरा है, मगर ज़माना बना तो हम से ही है, हम ढुंढते है खामियां औरों में, क्या सारी अच्छाईयां हम में ही है!
यदि कभी तुम प्यार की बिल्डिंग बनाओ तो मुझे अस्ल पर रख देना तब इत्माम पाओगे। क्योंकि मैं ही हूँ वो जो अधिकारिणी हूँ प्यार की त्याग कर मुझको कई इल्जाम पाओगे।
चलो विदा करते हैं उन यादों को, कब तक कैद रखे ! उन्हें यादों के पिटारों में।
आज भी आंखें सिर्फ उम्मीद के रंग ही तलाशती है, क्या रंग नहीं देखे! इन आंखों से पूछो।
‘वो जिसे तूने था पल भर में तार-तार किया, कभी तो पूछ अब वो ऐतबार कैसा है.. छोड़, जाने दे, आज तेरी बात करते हैं, वो तेरे दिल में जो रहता था प्यार कैसा है..’ […]
जहाँ मुस्कुराहटों की दौर है। अन्यत्र कहाँ अपना ठौर है।।
मुझको संभाल कर वो खुद गिर गए। ऐसा साथी सब को कहाँ मिल पाए।।
आज वे इस तरह से मुस्काये कि उलझे रह गए हम मुस्कुराहट में जो असली बात थी कहनी उसे कह नहीं पाए।
बहुत संभाल कर रखे हैं, कुछ रिश्ते मैंने। उनसे रूबरू भी होते हैं। कभी हंस कर निभाते हैं, तो कभी हंसा कर निभाते हैं।
हम हौसलों के पंख भी लगा लेते अगर उड़ने की चाह होती……
प्यार करता हूँ कविता से भले ही हथकड़ी डालो, लिखूंगा स्वेद से अपने गलफहमी नहीं पालो।
मुहब्ब्त ने हमें इस कदर आसिम बना के छोड़ा है, हर कोई मारकर पत्थर अजाब देता है।
मैंने कोई मौसम नहीं देखा ! मैंने तुम्हें चाहा है चाय की तरह !!
बेखुदी में जो उठ गये थे कदम तेरी बेवफाई याद आते ही खुद-ब-खुद रूक गये…
वो आज भी मुझे बेतहाशा मोहब्बत करता है, यकीन नहीं है मगर दिल को यही लगता है..
किसी अदीब को हम हस्तरेखाएं दिखाकर पूछना चाहेंगे, क्यों की प्यार ने यूँ बेवफाई।
गुजार दी मैंने जिन्दगी बस इन्तजार में तुम आकर सम्भाल लोगे मुझे टूटते हुए..
तुम्हारा और मेरा हाल एक जैसा ही है, तुम्हें गैरों से फुर्सत नहीं हमें तुम्हारी यादों से…
ख्वाहिशें थी तुम्हें पाने की साहब ! पर बदनामी के सिवा कुछ ना हाथ आया..
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