हमने बिछाई हैं कई बार राह में पलकें वो भी पलट के देखेगा यह उम्मीद नहीं रखती हूँ जब से देखी है सनम की सूरत मैनें तब से मैं चाँद को चाँद नहीं कहती हूँ!!
हमने बिछाई हैं कई बार राह में पलकें वो भी पलट के देखेगा यह उम्मीद नहीं रखती हूँ जब से देखी है सनम की सूरत मैनें तब से मैं चाँद को चाँद नहीं कहती हूँ!!
वो तेरा बार-बार दिल दुखाएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।
वो तेरा बार-बार दिल दुख आएगा मगर मत रोना तुम तेरी आंखों में आंसू ले आएगा मगर मत रोना तुम उसकी राहों में बिछाओगे तुम दिल अपना वो तुझको अपनाएंगा यह उम्मीद मत रखना तुम।
सितमगर सितम देता ही रहा मैं उसे आखिरी समझ कर झेलती रही वह तो मेरे साथ खेल ही रहा था पर मैं भी अपने वजूद के साथ खेलती रही…
मुबारकबाद देते हो मेरी ना कामयाबी की इतना पत्थर दिल तो पत्थर भी नहीं होता….
यूं तो हम किसी की बात का बुरा इतनी जल्दी नहीं मानते पर दिल ही तो है भावनाओं को ठेस पहुंचेगी तो दिल रो ही पड़ेगा।
कितने करीने से सजा कर रखती हूं मैं तुम्हारी यादों को दिल की अलमारी में! और तुम आकर सब एक पल में बिखेर देते हो !!
ताज्जुब है तुम्हारी यादाश्त पर सारी बातें कैसे याद रहती हैं तुम्हें यही सोचती हूं मैं आजकल क्योंकि मैंने तुम्हें कल लफ्ज़ लफ्ज़ याद किया था और आज भूल गई।
इश्क़ हम करते कहाँ है ए दिल ही फिसल जाता है। दिल को क्या समझाएं जब देखो बर्बाद हो जाता है।।
ए अमित इश्क़ भी क्या बीमारी हैं। इश्क़ पे वश न हमारी है न तुम्हारी है।।
सोचा था अपनी मुकद्दर को एक नया नज्म देंगे। उन्हीं नज्म के आर में हम उनकी दास्तां लिखेंगे।।
दिन गुजर गए महीने गुजर गए साल गुजर गए। किसी की चाहत में, हम खुद को ही भूल गए।।
मेरी लिखी नज़्म पर , मिलती है सबकी दुआ और क्या तमन्ना करूं, शुक्रिया है शुक्रिया… नज़्म का अर्थ ——- कविता *****✍️गीता*****
दांतों तले आंचल दबा लेना। उफ़… कहाँ गया वो ज़माना।।
ए रास्ते ! मिट भी जाओ, अब आंखें मंजिल नहीं ढूंढती , बस रास्ता देखती है ,खत्म होने का।
तुम फिर से मेरी यादों का हिस्सा मत बनो, ना वजह बनो, मेरे मुस्कुराने की।
मत दो मुझे फुलों-सी मुस्कान, पर; कांटो सी चुभन भी नहीं चाहिए।
वो किसे दिखाएं; अपना साफ मन , जहां तन की बात पहले होती है।
दिल ले के दर्द देना, यह अदा सिखे कहाँ से। बताइए न यह राज़,आपने ने सिखे कहाँ से।।
दीवानो की तरह हम उन्हें चाहते हैं वो हमें नखरे हजार दिखाते हैं…
मुखौटे से भरे हुए मैंखाने हैं…. किस पे भरोसा करें यहां तो अपने ही बेगाने हैं।
मैं नाखुश-सी हूं आजकल, इसका कोई मलाल नहीं। मगर तू खुश रहे सदा , तेरी तकलीफों की सौगात; अपने लिए, खुद हमने खुदा से मांगी थी।
कब तक रहोगे यूं मायूस तुम ! जब आयेगे दुल्हन बनकर तो कहाँ जाओगे रूबरू होंगे जब हम तुम्हारे तो बाहुपाश में आ ही जाओगे…
सितारों से आसमान सजा हुआ है पर चाँद फिर भी तन्हा है भीड़ है मेरे आसपास रिश्तों की मगर जाने क्यों दिल उदास है !!
वो कुछ कहते नहीं आजकल बड़ा गुमसुम से रहते हैं लोग कहते हैं अवसाद के शिकार हो गये हैं..
बादल राजस्थान की सूखी जमीन की तरह लग रहे थे मगर फिर भी बरसात हो गई मेरा मन हरा-भरा था फिर भी रो ना सका..
खुशियों की चाबी होती हैं बेटियां घर की लक्ष्मी होती हैं बेटिया खिलखिला कर सारे गम हर लेती हैं मुस्कान की तिजोरी होती हैं बेटियां
राह में काँटे बिछाना काम है उसका मेरे दिल को दुःखाना काम है उसका मैं हँस देती हूँ जो जरा-सा देखकर उसको मेरी हँसी से जल जाना काम है उसका
उदासी का आलम इस कदर छाया है रूबरू मेरे एक धुंध छाया है हौसले पंख लगा के उड़ने को तैयार हैं पर मेरे पंखों को किसी ने काटकर गिराया है..
रात होते ही गुलाबी सपने घेर लेते हैं हम आँख बंद करते हैं तो मुह फेर लेते हैं….
अधूरे लोग, अधूरी बातें, अधूरी जिंदगी के पन्ने , और अधूरी सांसे , बस ख्वाबों में रहना पसंद करते हैं।
ना आना हाथों की लकीरों के फरेब में, ज्योतिषी की दुकानों पर, मुकद्दर नहीं बिकता.. तदबीरों से बनाए जाते हैं मुकद्दर, तक़दीर खुद ही आ जाए रफ्ता रफ्ता..
जो है तू सामने, वो तू है नहीं, और है जो तू, ज़हन से, आजकल वो दिखता नहीं।
तुमने किया है पाक ए इश्क जो बड़ी शिद्दत से हमसे, तो अहसान फ़रामोश हम भी नहीं , आ! तेरी दर्द ए दवा का शफ़ाख़ाना, हमने भी खोल दिया है।
मेरी बेबसी को मशहूर ना कर, माना बड़ा जालिम है तू जमाने, फिर भी मजबूर ना कर, और मजबूत है बहुत हम अंदर से, माना टूटे हुए दिखते हैं, तू मजबूर ना कर! अक्सर मजबूर […]
जिंदगी अगर तू अश्म है , तो क्या! मत इतरा, मेरी मेहनत भी किसी फौलाद से कम नहीं।
ज़िन्दगी एक लंबा सफ़र है, दिन भी हैं और रात भी । कभी – कभी गम भी मिलते, और कभी – कभी सौगात भी..
अभिव्यक्ति बस दिल से:- ************** रोते नहीं हैं हम बस सिसकते रहते हैं तेरी यादों में आहें हम भरते रहते हैं नासमझ है तू जो नहीं चाहता मुझको ना जाने कितने दिल हैं जो मेरी […]
अभिव्यक्ति बस दिल से:- *************** गुजारी हैं तमाम रातें हमने तेरे बगैर ये तो छोटी-सी जिंदगी है ! गुजर जाएगी…
यूं तो आसमां पर नहीं ठिकाना अपना फिर भी हौसलों के पंख लिये जा रहे हैं उड़ना नहीं आता मगर ना जाने कैसे उड़ते जा रहे हैं..
सोचता हूं लाइफ रिपेयरिंग की कोई शॉप खोल लूं, बहुतों की यहां बिगड़ी पड़ी है।।
मैं जताती नहीं, प्यार तो क्या। उसे महसूस कर लेना , जब तुम्हारी जरूरत का ख्याल , मुझे तुमसे पहले हो…
क्यों खामोशी का कारवां है , तेरे और मेरे बीच , ना तुम उसे तोड़ते हो , ना मैं उसे लांगती हूं।
आपके बिन अब तो गुजरते नहीं जिंदगी के एक भी पल रोज रातों को आपकी तस्वीर से पूछता हूं कि काटेंगे कैसे तुम्हारे बिना कल।
मेरे सपनों का रास्ता गुजरता है आपकी जिंदगी से । मर्जी आपकी ठुकरा दे हमें या लगा ले गले खुशी से।
पहली रात के मिलन का वो एहसास याद रखना । हवाएं भी चलेंगी थम-थम कर मौसम भी होगा खास याद रखना।
किसी के लिए दोस्त फरिश्ते हैं किसी के लिए जिन्दगी जीने का बहाना मेरे लिए सिर्फ आस्तीन का सांप हैं नहीं है दिल में अब दोस्तों के लिए कोई ठिकाना…
लोग कहने लगे है, हम इश्क़ में पागल हो गए है। मैं कहता हूँ इश्क़ में पागल तो कोई कोई होते है।। शाहजहाँ भी मुमताज़ के लिए ही पागल हो गया। इसलिए आगरा में मुमताज़ […]
हमने उड़ते हुए बादल से पूछा कब तुम्हें बरसना है। उसने कहा नादान यह भी कोई पूछने की बात है ।। सभी को वफा के आशियाना तो एक मर्तबा बनाने दो। फिर देखना कैसे हम […]
देखते घड़ी की सुइयों को बार- बार हैं पढ़ते हैं तेरी पाती बार – बार हैं। कहां हो तुम कि आज इन्तजार है।
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