Category: शेर-ओ-शायरी

  • और कुछ अधूरे ख्वाब…!!

    जिंदगी की आरजू में दफ्न हो गये
    सुकून के कुछ पल थे और कुछ अधूरे ख्वाब !!

  • लफ्ज ना हों

    जरा सोंच कभी हम ना हों
    तेरी जिंदगी में कोई गम ना हों
    कैसे कटेगा वक्त तेरा
    अगर जुबां हो पर लफ्ज ना हों.

  • ख्वाबों का महल

    आखिर डूब ही गया
    ख्वाबों का महल,
    कितनी दफा रोंका था दिल ने
    समुंदर पर आशियां बनाने से…

  • लकीरें वक्त की

    रोज यूं ही नहीं बन जाते हैं अफसाने नये-नये
    लकीरें वक्त की बनती बिगड़ती रहती हैं…

  • नफरत के ज्वार

    हैं कितनी कड़वाहटें मन भरी आजकल
    किसी को देखकर नफरत के दिल में
    ज्वार उठते हैं…

  • एक आंसू

    यूं तो बड़े -बड़े तूफ़ानों
    से भी गुज़र जाती हूं
    और कभी एक आंसू ,
    से भी पिंघल जाती हूं ।

    *****✍️गीता *****

  • औरत का सम्मान

    औरत का सम्मान ,
    कुछ इस कदर किया जाए
    सरक जाए गर पल्लू गलती से,
    तो, झुका नजर को लिया जाए ।

  • कल ही दर्द ने..

    कल ही दर्द ने मुझसे रो कर कहा,
    बहुत सहन कर लिया मुझे तुमने।
    खुदा से अब ये इबादत है,
    रुबरु हो जाए सारी खुशियां तुमसे ।

  • एक वादा..

    किसी से किया कोई वादा,
    उसको निभा रहे हैं
    जीने की चाह नहीं है,
    बस, जिए जा रहे हैं .

    *****✍️गीता*****

  • ये दुनियां

    होते ना अगर तुम,
    तो छोड़ देते ये दुनियां
    हम कभी की….
    वो हंस दिए, और बोले,..
    तो हम हैं ना,
    ना कहना ..,ये अब कभी भी..

    *****✍️गीता*****

  • कर्म का पेड़

    कर्म का पेड़, खुदा के जैसा,
    परख के फल वो देता है,
    किसी को कड़वा, किसी को मीठा,
    मगर मिलता हमेशा मेहनत का है।

  • बदनाम बहुत हुए

    बदनाम बहुत हुए,वो लोग;
    जिन्होंने इश्क निभाया है,
    अंगार कोयले-सा है ये रस्ता,
    तड़पा बहुत, इस पर ,
    चलकर जो आया है।

  • तनहाई का आलम

    तनहाई का आलम पूरा हिमालय हो गया,
    अब दो दिलों का मिलन , क्षितिज-सा लगता है।

  • #2linershayari बहुत शिकायतें करती हूं मैं।

    बहुत शिकायतें करती हूं मैं,
    जानते हो तुम।
    फिर भी कभी शिकायत नहीं करते।

  • वो सिक्सर की तरह..

    वो सिक्सर की तरह लगी,
    आ सीने पर,
    दिल जीरो पर,
    बोल्ड हो गया,
    खुशी मिली,
    आईपीएल की तरह,
    मगर मैच हमारा ,
    टाई हो गया।

  • रात का पागलपन भी देखो!

    रात का पागलपन भी देखो!
    खत्म होती ही नहीं रात भर,
    जब होता था,
    सुकून ,
    तब सोता था,
    मगर अब ,
    नींद की हिम्मत भी देखो!
    आती ही नहीं रात भर।

  • ये जो वक्त का सितारा है

    ये जो वक्त का सितारा है,
    वो बेहिसाब- सा बदलता है ,
    और जब बदलता है,
    तो सारी कयानात बदलती है,
    फिजाएं भी बदलती हैं,

    और इंसान भी बदलता है।

  • कोहरा..

    कोहरा देख कर , मैं इक पल को रुकी थी,
    मैं बढ़ती रही आगे, और कोहरा छंटता गया…

    *****✍️गीता*****

  • कभी जाहिर करना आया ही नहीं।

    कभी जाहिर करना आया ही नहीं,
    तुम्हारे लिए मेरा प्यार।
    अब तक खामोश है….. मेरे लब।

  • समेटे हुए

    समेटते हुए ,
    आ रहे हैं हम,
    आज भी ,
    उन दिल के टुकड़ों को,
    जो वर्षों पहले टूटा था।

  • नाकामी की दस्तक।

    नाकामी की दस्तक पढ़ ली मैंने,
    फिर भी इंतजार करेंगे।
    हम अपनी कामयाबी का…..

  • #2linershayari बेजुबान हम न थे।

    बेजुबान हम न थे,
    बस बोलना न आया।

  • #2linershayari कौन सी शाम

    यह कौन-सी शाम है,
    यह कौन-सी रात है।
    जो न ढलती है,
    जो न कटती है।
    बिन तेरे यह जिंदगी हर-पल,
    सिमटती है….

  • #2linershayariमुस्कुराकर….

    मुस्कुराकर खत्म कर देती जीवन गाथा,
    पर उम्मीदों नहीं सोने न दिया।

  • साझा

    ज़िन्दगी में जो ख़ुशी मिली है ए दोस्त,
    बिन तेरे उस खुशी का क्या करूं…..
    उसमें मुझे तेरा साझा भी चाहिए।

  • तेरी यादें..

    सारी रात लड़े हम तेरी यादों से
    सारी रात बहस करी तेरे वादों से
    और सुबह तेरे मीठे सपनों ने सुला दिया…

    *****✍️गीता *****

  • एक तेरे बगैर ही….

    एक तेरे बगैर ही न गुजरेगी ये ज़िंदगी….,
    मैं क्या करूं सारे जमाने की खुशियाँ लेकर….

  • हर्फ़ ब हर्फ

    आजकल हर्फ़ ब हर्फ तोल परख कर लिखतीं हूं
    न जाने कौन सा मायना निकाल ले दुनिया!!

  • जुल्म से कांपी इंसानियत

    जब जब ज़ुल्म की जलजले इस ज़मीन पे फन फैलाया।
    तब तब इन्सान की इंसानियत खून की आँसू ही रोया।।

  • मगर ये इश्क…

    बहुत खुश थे हम,
    दुनिया में अपनी,
    मगर ये इश्क !
    सारी खुशियां खा गया,
    कब से भुला दिया था तुमको,
    तेरी यादों को,
    मगर फिर अचानक क्यों,
    मुझे रोना आ गया।

  • जज्बा जो जगा है ज़हन में

    जज्बा जो जगा है ज़हन में,
    कुछ पाने का,
    उसे कैंसर से कम ना समझना,
    उबल रहा है हौसला,
    फौलाद-सा,
    कभी गलती से पस्त ना समझना।

  • बहुत मनाता है दिल मुझे

    बहुत मनाता है दिल मुझे ,
    उसके लिए,
    मगर मैं कैसे विचलित होती,
    ठोकरों से उभरना सीख जो लिया ।

  • छोड़ दिया हमने…

    छोड़ दिया है हमने;
    आजकल,
    उनके दिल में रहना
    भला कैसे सांस लेते!
    पसंद नहीं हमें भीड़ में रहना!

  • वे जानते हैं हमारे बारे में

    वे जानते हैं हमारे बारे में ,
    मगर ,
    थोड़ा आड़ में रखते हैं ,
    पसंद नहीं है हमें उनका रूस जाना,
    मगर ,
    वह कभी-कभार रूठ जाते हैं।

  • इस बार

    इस बार अगर ठुकरा दिया तूने
    तो फिर कभी लौटकर ना आएगे
    चली गई साँस भी मेरी तो भी
    तुझसे कंधा ना लगवाएगे….

  • मैं कविताएं नहीं लिखती

    मैं कविताएं नहीं लिखती
    ना लिखना ही जानती हूँ
    बस अपनों के दिये दर्द ही
    बयां करती हूँ..

  • मरने की कगार पर

    मरने की कगार पर पहुँच गये हैं हम
    पर लोगों ने आज भी मुझ पर
    चिल्लाना नहीं छोंड़ा…

  • ईद का चाँद

    आँखें पथराई हैं तेरी राह देखकर
    मुलाकात को बेचैन हैं इतना
    पर तू तो ईद का चाँद हो गया है..

  • जलते चिराग..

    जलते चिराग़ों से कह दो, कहीं और जा के जलें ,
    ख़ुशी बहुत है यहां जलने वालों का काम नहीं…

    ……….✍️ गीता………

  • दिल में..

    महफ़िल में हमसे हर शख्स खफा था,
    क्यूंकि, जो दिल में है, लब पर वही हर दफा था ।

    *****✍️गीता*****

  • क्या जिंदगी है

    बचपन में खेल का तकाजा,
    जवानी में मौसम के तकाजा
    तो बुढ़ापे में उम्र की तकाजा ।।
    जब आ जाए अंतिम घड़ी ,
    उठ जाता है हम सब के जनाजा ।।

  • लत

    तुम हर मर्तबा यही कहते हो, इश्क़ बुरी लत है।
    चुपके चुपके दिल चुरा लेना,ए कौन सा लत है।।

  • पत्थर दिल

    अश्क़ बहा के भी उस बेवफा को मैं अपना न सका।
    उनको खबर थी मेरी हालत फिर भी वो बेखबर रहा।।

  • ओस की बूंदों को।

    ओस की बुंदों को,
    चमकते देखा है।
    उनकी आंखों में,
    कहीं बिखर न जाए।
    मेरे छूने से।

  • अपनी सूरत पर।

    जब उन्हें यूं घमंड हुआ,
    अपनी सूरत पर।
    वक्त ने भी दिखला दिया,
    जब झुरिया पड़ी चेहरे पर।

  • नींद की चादर।

    नींद की चादर ओढ़ कर,
    सोए जमाना हो गया।
    रात यूं ही कट जाती है,
    और पल में सवेरा हो जाता है।

  • हिचकियां

    कोई मुस्कुरा रहा है आज यूं ,
    हमें फुरसत में याद कर के
    हिचकियां आना तो चाह रही हैं,
    पर हिचकिचा रही हैं..।

  • जिंदगी की कड़वाहट

    मिट जाए जिंदगी की कड़वाहट ,
    ए खुदा! तू इसे मीठा सा सच कर दे।

  • मुझे सोने नहीं देती

    मैं अक्सर आंखें मूंद लेता हूं,
    चैन से सोने के लिए,
    मगर मक्कारी;
    बीमारी जमाने की;
    मुझे सोने नहीं देती!

  • राज़

    कुछ पन्नों को रखें राज़, ये भी आजमाइए
    दर्द में मज़ा लेते हैं कुछ लोग,
    ज़िन्दगी को खुली किताब ना बनाइए…

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