जिंदगी संग तो हर दिन की यारी है, तुम खुद ही बता दो मौत कब मिलने की तैयारी है।। -मनीष
जिंदगी संग तो हर दिन की यारी है, तुम खुद ही बता दो मौत कब मिलने की तैयारी है।। -मनीष
कोई बात है उनमें शायद जो याद आते है या फिर हमें बस याद करने की आदत हो गयी है
रेत से बने इस रक्त के पुतले पर, रस्म ऐ रूह का रूतबा क्या कहूँ, बदलते रोज़ चेहरों के मुखौटे पर, जश्न ऐ जाम का कब्जा क्या कहूँ॥ राही (अंजाना)
तेरी ख्वाहिश में हम क्या से क्या हो गये कभी अपने थे हम, अब बैगाने हो गये
मैंने सारे जवाब जो तुझे ख़त किये है. दिल के फरमान काग़ज़ी किये है. बहोत उदास तेरी चाहतो का शोहबर इन दिनो. हमनें अपनी फरमाईश जो कियें है। शौहदा अवध लिखे भी कैसे शहर बदनाम […]
ਸਮਾਂ ਬਦਲ ਰਿਹਾ ਹੈਂ, ਲੋਕ ਬਦਲ ਰਹੇ ਨੇ। ਸੱਚ ਆਖਾ, ਸਭ ਦੇ ਸੌਂਕ ਬਦਲ ਰਹੇ ਨੇ। ਚੰਦ, ਸੂਰਜ ਤਾਂ ਓਹੀ ਜਾਪਦੇ ਬਸ ਮਨੁੱਖ ਹੀ ਬਦਲ ਗਏ ਨੇ। ਧਰਮ ਤਾਂ ਬਸ ਦਿਖਾਵਾ ਲਗਦਾ ਅੱਜ ਧਰਮੀ ਲੋਕ […]
कभी लफ़्जों में ढल जाती हूं कभी आखों में पिघल जाती हूं मैं तो तेरी खुशबू हूं हर तरफ़ बिखर जाती हूं
जिंदगी का खेल अब तक समझ न आया वो दाव खेलते रहे, मैं हारता रहा
ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है, जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं, ये कैसा रंग, कैसा वर्ण, कैसा रोगन है, जो कभी चढ़ता भी नहीं, कभी उतरता भी नहीं, ये […]
kon yaad rakhta hai raakh ko jismo ke sab diwaane hai iss janam mai nibha na sake saat janmo ki baat karte hai @@ SAGAR @@
Besak koi bat na bne, Par koi bat kse bne, Jab tak meri mulakaat na bne..!!! #devil
MOhabbat krni jruri h Hakk ho to Jayaj,, Najaj ho to Majburi h mgr, MOhabbat krni jruri h
इक अरसे बाद नजरे मिली उनसे हमारी नजरों ने पहचाना और अन्जान कर दिया
नये साल का हम जशन मनायें कैसे बीता हुआ साल बार बार आकर आंखे नम कर जाता है|
पागल हैं, वे लोग जो कहते हैं कि, मरने के बाद जन्नत मिलती है ऐ दोस्तो मां की गोद में फिर एक बार सिर रखकर देखो।
दिन, महीने और साल गुजरते जाते हैं और इक दिन आदमी भी इनमें गुजर जाता है|
डूबना तय है हर किसी का जिस समन्दर में, काश उसी समन्दर के ऊपर तैर जाऊँ मैं।। राही (अंजाना) शकुन सक्सेना
कोई मिट्टी बता रहा है कोई मुक्ति बता रहा है, जीवन की इस उलझन को वो छुप के सुलझा रहा है॥ राही (अंजाना)
उनके ख्यालों में हमार ख्याल हो इतनी सी आरजू है उनके लफ़्जों मे हमारा जिक्र हो इतनी सी जुस्तजू है
कभी कभी जीवन के पथ में, ऐसा भी हो जाता है। कभी कभी मनचाहा मिलता , मिलकर भी खो जाता है।
ग़ालिब के जन्मदिन पर सभी शायरों, कवियों को हार्दिक शुभकामनाये… ग़ालिब ये किस जहान में तू हमे छोड़ गया है ना सच्चाई है ना अफसाने ना यार रहे ना दीवाने @प्रदीप सुमनाक्षर
रात पिघल जाती है यादों की जलन से! बात बदल जाती है लफ्जों की चुभन से! गरूर बना देता है दिलों में दूरियाँ, फासले मिटते नहीं इंसा के जेहन से! रचनाकार- #मिथिलेश_राय
अलविदा हम उनसे कैसे कहे रूह को जिस्म से अलग होने को कैसे कहें|
Kabh…Socha nahi Tha …. Dil… Mera bhi… dhadakta Hai…sirf usake liye Or ..fir ..pata Chala ..ki…usaka Dil … pahele se…hi dhadakta…Tha..mere liye…
Kabh…Socha nahi Tha …. Dil… Mera bhi… dhadakta Hai…sirf usake liye Or ..fir ..pata Chala ..ki…usaka Dil … pahele se…hi dhadakta…Tha..mere liye…
अपलक टकटकी लगाकर, देखते ही देखते । जिंदगी कब गुजर जाए, कुछ नहीं इसका पता।
निगाहों के रस्ते रस्ते , प्यार का पैगाम दिल तलक पहुंचे , प्यार की पहली नजर ही प्यार की पहली सीढ़ी है ।
बिखरना फिर सिमट जाना, इश्के अंजाम होता है । प्यास दिल की बुझाने को , नजर का जाम होता है।
उसके चुप रहने का अंदाज़ बहुत कुछ कहता है इशारो की बातें हैं कोई लफ्ज़ भी इतने सलीखे से नहीं कहता है।
Hamne to mohabbat Ke nashe me unhe khuda bana diya. Hosh to tab aaya jab unhone kaha ki khuda kisi ek ka nahi hota.
कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम क्या चाहते हैं। “सुखबीर” जो अपने […]
तू तो नही पर तेरी कहानी याद आयी सबको भूले पर तेरी जफ़ा याद आयी तेरे लिक्खे सब ख़तों को जला दिए पर तुझपे लिखी वो ग़ज़ल याद आयी “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~
इश्क़ का मज़ा तो सिर्फ बिछड़ने से आये वो आशिक़ी ही क्या जिसमे शादी हो जाये ‘विपुल कुमार मिश्र
चलो दर्द में भी मुस्कुराते हैं यादो के साथ टकराते है तुम आओ तो सही मिलकर दर्द को आंख दिखाते है #VIP~
अक्सर हंसी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए खुशी में भी आँख नम होता है #VIP~
कुछ लिखूंगा तो तुम बुरा मानगो. हमारी मोहब्बत पर रार ठानगो. अब यही रहा अंजाम -ए- इश्क मेरा. मेरी जज्बातो को जब्त कर हुश्न का इकबाल कर. यह मोहब्बत नहीं आसान इसका सम्मान कर. #अवध?
उससे दोबारा होगी मुलाकात क्योंकि गोल है दुनिया, इस उम्मीद में इंतजार उसका आज़ भी बरकरार है।
तेरे नैनों की किताबें पढ़ने की जिद्द पकड़ी है इस दिल ने, तू अपनी पलकों का ये पहला पन्ना तो पलट दे।
तुझसे मिलने का मुझे कोई आसार भी नहीं दिखता। लेकिन इंतज़ार तेरा करते–करते मैं फिर भी नहीं थकता।
बहुत मायूश रही मेरी मेहरबा मुझसे. ना कोई चाहत की रखी कोई सिल्सिला हमसे. कोई बताये कोई खबर मेरी चाहत की चांद की. अब तक घिरी में घर में अमावश की रात ही. अवधेश कुमार […]
बड़े मौजू हो चूकी ख्वाहिश की पेशकश मेरी. इरादे नफीश की खमबखम मेरी. जरा सून क्यो इल्तिजा का मायूस आरजू. मैं तेरी नहीं मोहब्बत की ख्वाहिश. अवधेश कुमार राय “अवध*
बहुत सुकून हो मोहब्बत तुमको एतराज हो हमसे. इस फिजा की तफतिश में एक बार हो हम से . कोई रेहबर हुआ था मेरा जिसे हमसे इल्तिजा थी इतनी. मोहब्बत में अश्को से रुठा जाना हुआ हैं . दोहमत लगती मोहब्बत छोड़ आये. हम तो जींदगी का सुकून छोड़ आये. अवधेश कुमार राय “अवध”
साथ देने में मेरा जिंदगी के दुखों का कोई सानी नहीं असल में तो दुख के बिना सुख का भी कोई मानी नहीं। मानी= अर्थ
कभी–कभी सोचता हूँ कि कुछ देर सोचना बंद कर दूँ।
अंत तो तेरा भी वही होगा अंत मेरा भी वही होगा लेकिन फर्क इस बात से पड़ेगा कि किसकी जगह लेने वाला कोई नहीं होगा।
साथी तो मेरे वो भी खूब रहे जो लगातार मेरी तनकीद करते रहे लेकिन अमल–अंगेज़ तो मेरे वो बखूबी रहे जो लगातार मुझसे कोई उम्मीद करते रहे। तनकीद=आलोचना अमल–अंगेज़ = उत्प्रेरक
जिंदगी की जंग मुझसे जारी है कभी मैं उसपे तो कभी वो मुझपे भारी है।
तेरा इन्तजार करू, तेरा एतबार करू लेकिन कब तक बता यू ही सुबह से शाम करू ! तेरे बिना राहे चलती नहीं मेरी लेकिन कब तक बता यू ही मंजिल-ऐ-राह को बदनाम करू! ‘निसार’
ज्ञानी को होता है एकांत पसंद लेकिन किसीसे मिलने की तलब मूर्खता का प्रमाण तो नहीं होता कम से कम प्यार में तो नहीं होता।
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