सवाल जीत का है या हार का न मालूम राही, मगर जिंदगी तो हर पल जंग सी लगती है।। – राही (अंजाना)
सवाल जीत का है या हार का न मालूम राही, मगर जिंदगी तो हर पल जंग सी लगती है।। – राही (अंजाना)
माना के आँसूओ में वजन नहीं होता, पर एक भी जो छलक जाए तो मन हल्का हो जाता है।। – राही (अंजाना)
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी उलझ सी गई है, तुम्हारे साथ में कुछ तो सुलझा सा था।। राही (अंजाना)
यूँ तो हल्की सी है ज़िन्दगी, वजन तो बस ख्वाइशों का है।। राही (अंजाना)
अँधेरे और रौशनी का कोई मलाल नहीं रखता, मैं ‘राही’ अपने दिल में कोई सवाल नहीं रखता।। राही (अंजाना)
मैं उसकी तलाश में हुँ जिसकी तलाश ” मैं ” हुँ… – राजनंदिनी रावत
कोई दीवाना कहता है हमको, कोई पागल करार देता है ये इश्क है महरबान हमपर, हरपल बेशुमार देता है
जब एहसासों को शब्दों में उतार न सकी मेरी कलम, तब स्याही की हर बून्द ने मिलकर तेरी तस्वीर बना ली।। राही (अंजाना)
इक दास्तान है दबी दिल में कहीं कोई सुने तो हम सुनाये कभी|
नेट के इस ज़माने में ऐ ” प्रेम ” ख़ुद ही तुम इक किताब हो जाओ …. पंकजोम ” प्रेम “
मेरे हर ख़्वाब पर तेरा ही पहरा है। अब कोई और इनका पहरेदार नहीं।
Jo log mujhe samhte hai, Unhe mujhse safai chahiye nahi…. Or jo log mujhe samjhte hi nahi, Unhe safai dene ka koi fayda bhi nahi….
वो परछाईं सा साथ चलता रहा है, कभी दिखता तो कभी छिपता रहा है, दिन के उजाले की शायद समझ है उसको, तभी अंधेरे में ही अक्सर मिलता रहा है, कभी चाँद सा घटता तो […]
गुजरती जाती है जिंदगी चुपके से लम्हो में छुपकर बहुत ढूढता हूं इसे, मगर कभी मिलती ही नहीं
इक फरियाद थी मेरे दिल की आरजू थी इक दबी दबी सी सब अधूरी ही रह जायेंगी कह कर गया था वो अभी
सारा का सारा सागर हो , फिर भी , प्यास अधूरी । अगर भाग्य में प्यास लिखी , यह.किस्मत की मजबूरी। जानकी प्रसाद विवश
तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त […]
प्यार की कैद से रिहाई रव करे न कभी । इश्क की रिहाई से ,मौत भली होती है । – जानकी प्रसाद ‘विवश’
“दरारें दिल की” ******** दरारें दो दिलोंकी दिख न जायें, दुनिया वालों को। प्यार से पाट लो, कहीं प्यार न बदनाम हो जाए ।
आप जैसे, प्यारे मित्रों से जीवन सुहाना होता है। न चाह कर भी, जीवन जीने का बहाना होता है। जानकी प्रसाद विवश
लफ्ज ही है जो कतराते है कागज पर उतरने से वरना अहसासो का दरिया तो साथ लिये फिरते है
बन्द पिंजरे से उड़ जाने का अरमान लिए बैठे हैं, कुछ परिंदे अपनी आँखों में आसमान लिए बैठे हैं, बनाये थे जो कभी रिश्ते इस ज़ालिम ज़माने से, आज उसी की बनाई सलाखों में नाकाम […]
खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में, लोग भटकते हैं दरबदर कस्तूरी की तलाश में, यूँ तो तय हैं सभी किरदार कहानी के मगर, हर मोड़ पर बदलते हैं चेहरे नए चेहरे […]
मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार वो पगली हंसते हंसते रो पड़ेगी ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार वो पगली हंसते हंसते रो पड़ेगी ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
जो लगे कब्र पे पत्थर हैं बराबर कर दे ऐ खुदा मेरे बराबर मेरी चादर कर दे ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
मैं हूं मनमौजी, बात कहूं मैं मन की सीधी सपाट कहता है, श्रीधर सनकी
ये आप भी देखें है कि बस मुझको भरम है हर शख़्स परेशान है खुलकर नहीं मिलता कुमार अरविन्द ( गोंडा )
आइने में नजर न आयेंगे ऐसे चेहरे बना रहा हूं मैं ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
सोचा था जिंदगी इक पूरी किताब होगी मगर ये तो चंद लफ़्जों में ढ़लकर रह गयी|
डूबती कश्तियों के सहारे बैठ कर क्या होगा, समन्दर के इतने किनारे बैठ कर क्या होगा, तैरना है तो लहरों के बीच जाना ही होगा, यूँ डर के दायरे में सिमट कर क्या होगा।। ~ […]
अनुभव की राहों पर चलकर खुद मैंने भी देखा है, अपनों को अपनों से छलते खुद मैंने भी देखा है, आसमान को धरती से मिलते खुद मैंने भी देखा है, ख़्वाबों को यूँ पूरी रात […]
तू याद रख सके मुझे जिंदगी भर कुमार आ तुझे कुछ इस तरह मोहब्बत कर लूं ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
सुकूँ कुछ ऐसा मिलना चाहिए जिंदगी को, जैसे तेरे नर्म हाँथो पे मेरे हाँथ होने का एहसास हो।। -मनीष
अन्धेरा होकर भी अन्धेरा होता नहीं मेरे घर में, मैं जुगनू हूँ दोस्त रौशनी अपने साथ रखता हूँ।। राही (अंजाना)
अभी तो उनसे हमारी बात कहां हुई…. दिन तो हुआ मगर रात कहां हुई…. वह हमारे तो हो गए यादों में ही सही…. अभी तो अश्कों की बरसात कहां हुई…. गमों के कारवां लेकर आ […]
तेरी तस्वीर के आगे यह दुनिया कुछ भी नहीं है । जो भी देखेगा तुझे देखकर, दीवाना हो जायेगा ।
‘मुस्कुरा कर जो देखो तो सारा जहाँ हसीं दिख जाता है..’ वरना.. ‘भीगी आँखों से तो आईने में अपना चेहरा भी धुंधला नज़र आता है..’
इक इक दिन करके जिंदगी गुजर गयी फूल सी जिंदगी कांटो में ढल गयी
लफ़्ज हो गये है खत्म दास्ता बयां करते करते कुछ कहते हम अक्सर थम जाते है
इक नज्म है जो दबी हूई है दिल की दरारों में आज फिर बहुत कोशिश की मगर निकल ना पाई
देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है देखा है जिंदगी को मौत में बदलते
प्यार का इज़हार होने दीजिए। गुल चमन गुलजार होने दीजिए। खास हो एैसा ही, कोई पल दे दो, वक्त को हम – राज होने दीजिए। योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा ,छ०ग०
कौन कहता है के खेल को सीखना होगा, खेल है तो खेल को खेलना ही होगा, हार जीत की परवाह कहाँ है किसी को, पर अपने हिस्से का टुकड़ा तो छीनना होगा।। – राही (अंजाना)
मैं भी अब कुछ करने के क़ाबिल हो गया हूँ, रुपयों से खुशियाँ खरीदने की दौड़ मे मैं भी शामिल हो गया हूँ #पहलीनौकरीकीख़ुशीमे -मनीष
अरे कौशल मिलाओ ख़ून में तुम भी ज़रा पानी, बहुत ख़ुद्दार होना भी तुम्हें बरबाद कर देगा। ठा. कौशल सिंह✍️
यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, कोई हमसे ख़फ़ा है ही नहीं, इश्क है मर्ज़ है इसकी कोई भी दवा है ही नहीं।।। राही (अंजाना)
मेरी पलके झुकती नहीं तेरे इंतज़ार में,मेरी आंखे भर आती है तेरे दीदार में,तुझे क्या समझ आएंगी मेरे दिल की बातें तू तो बैठा है किसी और के इंतज़ार में,एक बार सुन ली होती मेरे […]
क्या बनायेगा मुद्दा, जमाना हमारी बातों का। हमारी तो ख़ामोशी भी चर्चा में है। राही (अंजाना)
तेरी ख़ामोशी भी चर्चा में है, तू कुछ कहेगा तो मुद्दा ही बनेगा सनम। – राही (अंजाना)
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.