उनकी फितरत भी बड़ी कमल की होती थी रोज़ हमको वो भूल जाया करते थे वो, हमारी ज़िद्द भी मगर कमल की होती थी हर रोज़ हम उनको शिद्दत से याद कर लिए करते थे…………………!!

बहुत काम शब्दो मैं बया कर दी मैंने अपनी सक्शियत इस से भी काम शब्दो मैं बया करूँगा तेरी बेवफाई को , ज़माना भी जान पाएगा तेरे जैसे हरदर्द के किस्से को ज़माना भी जान […]

तड़प कर देख एक बार ज़ालिम कभी खुद को किसी पैर फनाह भी कर, सजा भी बाखूबी मिलेगी तुझ को चाहत मे बशर्त है की तू मोहोब्बत करने का गुनाह तो कर……………!!

अपनी पहचान को मैं सर-ऐ-आम कैसे करू अपनी चाहत को मैं गुमनाम कैसे करू उसने नहीं की बफ मेरे साथ ये और बात है भला मैं इस मोहोब्बत शब्द को बदनाम कैसे करू…………………!!

सुना है वो फिर से हमें चाहने लगे है आँखों से आंसू बहाने लगे है झेल रहे है वो भी शिकस्त-ऐ-पछतावा सुबह-ओ-शाम हमको बुलाने लगे है……………………………..!!

कुछ तो कमी तुझ मैं भी रही होगी कुछ तो तेरा भी कसूर रहा होगा ऐसे ही मोहोब्बत किसी को नहीं छोड़ती अकेला ऐसे ही कोई मोहोब्बत मैं तन्हा नहीं होता…………………….!!