Poetry on Picture Contest

मिट्टी से जुड़े सैनिक

आंधी और तूफानों में भी डटे रहते हैं, हम वो हैं जो हर मौसम में खड़े रहते हैं, उखड़ते हैं तो उखड़ जायें पेड़ और पौधे जड़ों से, हम तो वो हैं जो देश की ज़मी से जुड़े रहते हैं, आजाद दिख जाते हैं उड़ते परिंदे कभी, तो कभी बिगड़े हालात नज़र आते हैं, पर हम तो वो हैं जो हर हाल में तिरंगे की शान बने रहते हैं, धुंधली नज़र आती है जहाँ से सरहद के उस पार की धरती, उसी हिन्दुस्तान की मिटटी से हम हर पल जुड़े रहते हैं॥ राही (अं... »

Veer Jawan

Bhhanp leti hain ye aankhe aane vala hr khatra Iski hr saans desh k naam, desh ko samarpit hai khoon ka hr katra Ye mehaz banduk nahi hai iske paas , hr pal ka saathi hai Isike hone se hi to hum aam logo ko roz chain ki need aati hai Naa koi swarth hai naa koi abhiman hai Ye koi aur nahi hindustan ka Veer Jawan hai Ye jo vardi iske tan pr nazar aati hai Mehaz vardi nahi iski shaan ko darshati hai ... »

फौलादी फौजी

हाथ में हथियार और दिल को फौलाद किये बैठे हैं, सरहद के हर चप्पे पर हम बाज की नज़र लिये बैठे हैं, जहाँ सो जाता है चाँद भी चैन से हर रात में, वहीं खुली आँखों में अमन का हम सपना लिए बैठे हैं, ठण्ड से सिकुड़कर सिमट जाते हैं हौंसले जहाँ, वहीं बर्फीली चादर में भी उबलता जिगर लिए बैठे हैं, डर कर अँधेरी गलियों से भी नहीं गुजरते जहाँ कुछ लोग, वहीं हम सैनिक हर लम्हा दुश्मनों के बीच फंसे बैठे हैं॥ राही (अंजाना) »

जांबाज सैनिक

धूप हो या छाया आंधी हो या तूफान करते रहते हैं हम देश की सुरक्षा दिन हो  चाहे रात मैं हूं इस  देश का सैनिक जो कभी भी झुकने नहीं देते हमारे देश की मान मैं बॉर्डर पर पड़ा रहता हूं, घनघोर घन, शीत आतप सहता हूं, मैं जो जाता हूं जब भी काम पर, सिल जाते हैं होंठ बीवी के, भर जाती है आंख मां की, और पापा वापस आएंगे का चर्चा रहता है बच्चों की जुबान पर। Written by Shubham »

जाबाज सैनिक

धूप हो या छाया आंधी हो या तूफान करते रहते देश की सुरक्षा दिन हो  चाहे रात ये हैं हमारे देश के सैनिक जो कभी भी झुकने नहीं देते हमारे देश की मान  »

सैनिक कहलाते हैं हम

माँ की गोद छोड़, माँ के लिये ही वो लड़ते हैं, हर पल हर लम्हां वो चिरागों से कहीं जलते हैं, भेजकर पैगाम वो हवाओं के ज़रिये सपनों में अपनी माँ से मिलते हैं, हो हाल गम्भीर जब कभी कहीं वो, चुप रहकर ही खामोशी से सरहद के हर पल को बयाँ करते हैं, लड़कर तिरंगे की शान की खातिर, वो तिरंगे में ही लिपट कर अपना जिस्म छोड़ते हैं, जो करते हैं बलिदान सरहद पर, वो सैनिक सैनिक सैनिक कहलाते हैं हम॥ राही (अंजाना) »

वो हिन्द का सपूत है..

वो हिन्द का सपूत है..

लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो दुश्मनों पे टूटता है देख काल की तरह.. ज्यों धरा पे फूटता घटा विशाल की तरह.. स्वन्त्रता के यज्ञ में वो आहुति चढ़ा हुआ.. जो जल रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो सोचता है कीमतों में चाहे उसकी जान हो.. मुकुटमणि स्वतंत्रता माँ भारती की श... »

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ

जिम्मेंदारी को जब उसने महसूस किया तो, ऑटो रिक्शा भी चलाने लगती हैं वो ! पढ़ लिख के सक्षम होकर के वो अब, अंतरिक्ष में वायुयान उड़ाने लगती हैं वो !! कितने उदाहरण देखेंगे आप अब क्योकि, हर क्षेत्र में सकती आजमाने लगी हैं वो ! पति की शहादत पे अर्थी को कांधा दे, सुना हैं शमशान तक जाने लगी हैं वो !! समस्त बाधाओं को वो हरती क्यों हैं, कुछ बोलने से पहले वो डरती क्यों हैं ! प्रश्न ये ज्वलनशील है सबके सामने ये... »

बेटी की चाहत

अँधेरे कमरे से बाहर अब मैं निकलना चाहती हूँ, माँ की नज़रों में रहकर अब मैं बढ़ना चाहती हूँ, धुंधली न रह जाए ये जिन्दगी मेरी, यही वजह है के मैं अब पढ़ना चाहती हूँ, खड़ी हैं भेदभावों की दीवारें यहाँ अपनों के ही मध्य, मैं मिटा कर मतभेद सबसे जुड़ना चाहती हूँ, दबा रहे हैं जो आज मेरी देह की आवाज को, अब धड़कन ऐ रूह भी मैं उनको सुनाना चाहती हूँ॥ राही (अंजाना) »

एक ख्वाहिश मेरी भी

ख़्वाब देखती है आँखै मेरी भी उड़ना चाहती हु मै भी पढू , लिखू बनू अफसर मै भी आकाश मै उड़ता जहाज देखू मै जब भी साथ वो अपने मुझे ले जाता है पढ़ने , लिखने का जो तुम मुझको एक मौका दे दो है तो हक़ मेरा , पर तुम अपनी जायदाद समझकर देदो एक रोज अफसर बन तुमको भी जहाज मै बिठा आकाश की सैर कराऊँगी मै मुझे न सही मेरी, ख्वाहिश को अपना समझ लो बेटो को तो आजमा लिया सबने , अब मुझको भी अपनी अजमाइस का एक मौका दे दो ! »

बेटी हूँ हां बेटी हूँ

बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, छुटपन में कन्या बन कर संग माँ के मैं रहती हूँ, पढ़ लिखकर मैं कन्धा बन परिवार सम्भाले रखती हूँ, फिर छोड़ घोंसला अगले पल मैं पति घर में जा बसती हूँ, पत्नी रूप में भी मैं हर बन्धन में बन्ध कर रहती हूँ, खुद के ही पेट से फिर माँ बनकर मैं (बेटी) जन्म अनोखा लेती हूँ, पढ़ जाऊ तो नाम सफल और जीवन सरल कर देती हूँ॥ बचपन से ही सहती हूँ, मैं सहमी सहमी रहती हूँ, मैं बेटी... »

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

  माँ,मैं तेरे हर सपने को सच करके दिखाउंगी तेरे हर मुसीबत मे तेरे, मैं भी काम आउंगी रोशन कर दूंगी मैं तेरा नाम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे माँ,मैं तुझे कभी नहीं सताऊँगी तेरे होंठों पर हमेशा मुस्कराहट खिलाऊंगी कर दूंगी मैं भी कुछ ऐसा काम इस दुनिया मे मुझे भी आने दे माँ, इस दुनिया मे माँ,मैं तेरी ज़िन्दगी जीने की वजह बन जाऊंगी तेरे बुढ़ापे मे, मैं तेरी लाठी कहलाउंगी सब देखते रह ... »

बेटी की आवाज

माँ की कोख में ही दबा देते हो, मुझको रोने से पहले चुपा देते हो, आँख खुलने से पहले सुला देता हो, मुझको दुनियां की नज़र से छुपा देते हो, रख भी देती हूँ गर मैं कदम धरती पर, मुझको दिल में न तुम जगह देता हो, आगे बढ़ने की जब भी मै देखूं डगर, मेरे पैरों में बेडी लगा देते हो, पढ़ लिख कर खड़ी हो न जाऊं कहीं, मुझको पढ़ाने से जी तुम चुरा लेते हो, क्यों दोनों हाथों में मुझको उठाते नहीं, आँखों से अपनी मुझको बहा देत... »

मुझको बचाओ मुझको पढ़ाओ

कन्या बचाओ खुद कन्या कहती है- मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, सपना नहीं अब हकीकत बनाओ, बेटा और बेटी का फर्क मिटाओ, बेटी बचाओ अब बेटी पढ़ाओ, बेटे के प्रति प्यार और बेटी को समझें भार, ऐसे लोगों की गलत सोंच भगाओ, मुझको बचाओ तुम मुझको बचाओ, रखने से पहले कदम ना मेरे निशाँ मिटाओ, आने दो मुझको तुम सीने से लगाओ, फैंको ना मुझको कचरे के देर में, मारो ना मुझको तुम ममता की कोख में, घर के अपने तुम लक्ष्मी बनाओ, मुझक... »

जय हिन्द

ये  अजूबा  किसने  कर दिया फक्त एक मुट्ठी मैं सारा हिन्द इकट्ठा कर दिया तीन ही रंगों मैं सारा हिन्द बया कर दिया केसरी है वीरो के , बलिदानो का प्रतीक जिन्होंने  स्वय को समर्पित कर अपने लहू से तिलक कर हिन्द के माथे को चन्दन-सा महका   दिया ! सफेद है उस सांति का प्रतीक जिसके लिये फिरती है दुनिया मारी -२ लेकिन हिन्द गोद को इससे शुशुभित कर दिया ! हरा रंग है उस खुशहाली का प्रतीक जब हिन्द की मिटटी को दुश्म... »

रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

रंग नहीं महज़ ये तीनो……..

रंग नहीं महज़ ये तीनो हमारे हिंदुस्तान की शान है झंडा है ये हमारे देश का तिरंगा इसका नाम है सर से भी ऊँचा रखेंगे हम इसको जब तक जिस्म में जान है हर पल देते है सलामी दिल से के ये हमारी पहचान है दुश्मन क्या समझेगा इसकी ताकत अभी वो बहुत अनजान है पूछो जा कर उन लोगो से जिनकी ज़िन्दगी तिरंगे के बिना वीरान है मर मिटेंगे इसके खातिर हम के ये हमारा गुमान है अशोक चक्र से सुसज्जित है ये हर फौजी को इसका ध्यान है ... »

गणतंत्र

गणतंत्र

राजा-शासन गया दूर कही, गणतंत्र का यह देश है | चलता यहाँ सामंतवाद नहीं, प्रजातंत्र का यह देश है | दिया गया है प्रारब्ध देश का, प्रजा के कर में; किन्तु है राजनीति चल रही यहाँ सबके सर में | तोड़ते है और बाँटने है प्रजा को अपने धर्म से, विमुख करने देश की प्रजा को निज कर्म से | यद्यपि है शक्ति आज भी प्रजा के साथ, यदि मिल जाए समस्त भारतीयों के हाथ; जोड़ी जा सकती है शक्ति एक मुष्टि में, बज सकता है डंका अपन... »

मुठ्ठी में तकदीर

मुठ्ठी में तकदीर

मुठ्ठी में तकदीर है मेरी, मेरे वतन की कर ले कोई कितनी भी कोशिश मिटा नहीं सकता| क्या करेगा वो इन्सान आखिर जो देश का राष्टगान भी गा नहीं सक्ता|| »

कचरेवाली

कचरेवाली

इक कचरेवाली रोज दोपहर.. कचरे के ढेर पे आती है.. तहें टटोलती है उसकी.. जैसे गोताखोर कोई.. सागर की कोख टटोलता है.. उलटती है..पलटती है.. टूटे प्लास्टिक के टुकड़े को.. और रख लेती है थैली में.. जैसे कोई टूटे मन को.. इक संबल देकर कहता है.. ठुकराया जग ने दुःख मत कर.. ये हाथ थम ले..तर हो जा.. इक कचरेवाली रोज दोपहर.. कचरे के ढेर पे आती है.. जहाँ शहर गंदगी सूँघता.. वहाँ वही जिंदगी सूँघती.. कूड़े की संज्ञा में... »

कूड़े का ढेर

कूड़े का ढेर

जिसे कहते हो तुम कूड़े का ढेर; वह कोई कूड़ा नहीं! वह है तुम्हारी, अपनी चीजो का ‘आज’ | जिसे खरीदकर कल तुमने बसाया था घर में; उन्ही चीजो का है यह ‘आज’ | जिस जगह तुम उड़ेल देते हो अपना कल; उसी कूड़े के ढेर में खोजते है कुछ लोग अपना आज | जिन्हें ‘बेकार’ कहकर फैंक देते हो तुम कचरे में, उसी अपव्यय में तलाशते है कुछ लोग अपना बहुमूल्य रजत-कंचन | उनके थैलो में भरी हुई बासी, ... »

बचपन

बचपन

जो बेबसी देख रहे हैं हम आज उनके चेहरो में , वो ढूंढेंगे दो वक्त की रोटी कूड़े पड़े जो शहरों में ! जात,पात,दुनियादारी उन्हें इन सबसे मतलब क्या, पेट की आग बुझाने को वो चल पड़ते हैं अंधेरों में !! शिक्षा,प्यार,खिलौना आदि ये शब्द वो जाने भी कैसे, जिनकी जिंदगी बीत जाती है इन कूड़ों की ढेरों में !! जिंदगी उनकी भी सुधरनी चाहिये ये सच तब होगा, उन्हें अपना बचपन मिल जाये एक नए से सवेरों में !! @नितेश चौरसिया  »

बचपन

बचपन

  जो बेबसी देख रहे हैं हम आज उनके चेहरो में , वो ढूंढेंगे दो वक्त की रोटी कूड़े पड़े जो शहरों में ! जात,पात,दुनियादारी उन्हें इन सबसे मतलब क्या, पेट की आग बुझाने को वो चल पड़ते हैं अंधेरों में !! शिक्षा,प्यार,खिलौना आदि ये शब्द वो जाने भी कैसे, जिनकी जिंदगी बीत जाती है इन कूड़ों की ढेरों में !! जिंदगी उनकी भी सुधरनी चाहिये ये सच तब होगा, उन्हें अपना बचपन मिल जाये एक नए से सवेरों में !! @नितेश चौर... »

jud dai

mere pass bhi khab hai tu pankh jud dai mere pass bhi dil hai, dhadkan jud dai mere pass bhi sai hai ruh jud dai mere pass bhi himat hai junun jud dai mere pass bhi lakirai hai kismat jud dai mere pass boot hai khuda  jud dai mere pass bhi khab hai pankh jud dai »

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है क्यों करते हो नफरत तुम इन सब को देख कर ये हम जैसों की ज़िन्दगी को सरल कर रहे है जब आते है गली मे, कुत्ते भोंकते है इन पर सब देखते है इनको शक की नज़र से कभी झाँक कर देखो इन सब के घर और आंगन मे ये अपनी ज़िन्दगी का क्या हस्र कर रहे है अक्सर हम फैंक देते है कचरे को यू... »

कचरे में खोयी जिंदगी

कचरे में खोयी जिंदगी

चुन कर कचरे से कुछ चन्द टुकड़ों को, जिंदगी को अपनी चलाते हुए, अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥ थम जाती है जहाँ एक पल में साँसों की डोरी, वहीं बच्चों को अक्सर चुपाते हुए, दो रोटी को कचरा उठाते हुए॥ अक्सर देखे जाते हैं कुछ लोग थैलो में जीवन जुटाते हुए॥ जहाँ बन्द होती है आँखे हमारी, जहाँ भूल कर भी हम रुकते नहीं हैं, लगाते हैं खुद ही जहाँ ढ़ेर इतने, एक लम्हा भी जहाँ हम ठहरते नहीं है... »

रोटी तलाशती ज़िन्दगी।

रोटी तलाशती ज़िन्दगी।

तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी. फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के. कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे. ज़हर भरे स्थानों में इन्हे अमृत की खोज है. ये जगह दो जून की रोटी देती ही रोज है. कुछ कपडे ही मिल जायें फटे तन ढकने को. यही हैं ताकती निगाहें थोड़ा सा हँसने को. लेकर वही फटी मैली बोरी चल दिये रोज. मन में विश्वास लिये आज मिलेगा कुछ और. भूखा है पेट इनका औ... »

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू

मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू उतर जाती है ये सीनै में सुकून देने कुछ नहीं में इसका ईमान जानता हू मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू टूटे हुए दिलो को सुकून बड़ा देती है ये कुछ नहीं में बस इसका अरमान जानता हू मैं हु एक शराबी शराब जानता हू कुछ नहीं सिवा इसके नाम जानता हू न करो कोई इस मासूम को यूँ ही बदनाम कुछ नहीं बस में इसका हर नाम जानता हू म... »

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