समय पतंग की डोर जैसी l मांजा बड़ी तेज है l किसकी पतंग काट जाए विश्वास नहीं l कभी राजा संग कभी रंक संग l पल में तेरा पल में मेरा हो जाए l कब […]
Submission for ‘Poetry on Picture’ Contest
समय पतंग की डोर जैसी l मांजा बड़ी तेज है l किसकी पतंग काट जाए विश्वास नहीं l कभी राजा संग कभी रंक संग l पल में तेरा पल में मेरा हो जाए l कब […]
महानता व्यक्तित्व मे नहीं, शब्दों में होती है l पहचान लिवास से नहीं, आत्मा से होती है l बल शारीरिक शक्ति में नहीं, आत्म बल में होती है l वीरता प्रवंचना से जीती विजय में […]
चरखे से अगर आजादी मिलता, हमें सेना की जरूरत न होता l चरखे से हिंदुस्तान चलता, हिन्द मे कोई विशेष ना होता l न हिंदू मुसलमान होता, सभी हिंदुस्तानी पूत कहलाता l न करगिल, न […]
गुलामी को आज़ादी में बदल दिया, हम वो शख्स है अपने भारत का। हर दिन लहू से सिंचे है देश को, इसलिए कहलाता हूँ सपूत भारत का।। गैरो ने लगाई थी पुरी ताक़त, फिर भी […]
हे वीर, नमन मेरा तुझको l वीर पुत्र , सूरवीर हो l l आप ही प्रहरी , प्रलय भी आप हो l अश्व जैसी तेज, सिंह की दहाड़ हो ll शांत प्रिय, रुद्र रूप […]
मैं मन की भाव हूँ, अहंकार से लिप्त हूँ l मैं लोभ , मैं मोह माया का जाल हूँ l मैं हिंसा का रूप, मैं विनाशकारी हूँ l मैं यूं ही बदनाम हूँ, वरना मैं […]
ज्यों पले इक मां की गोद में, नन्ही सी जान। त्यों पले तू भारत की गोद में, पाकिस्तान। समुद्र है हिंदुस्तान मेरा, लहरें हैं विशाल। एक लहर भी क्रोधित हो तो, तू हो जाए बेहाल। […]
लेके काँधे पे बन्दूक दिल में देशप्रेम अटूट चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर। न हीं जीवन की मोह न हीं परिजन बिछोह देश के खातिर दिया सब कुछ है छोड़। चल पड़े […]
करारा जवाब मिलेगा, अभिनंदन अपने पास होगा जब पाकिस्तान का बात होगा, 56″ इंच का साथ होगा, युद्ध जब चीन से होगा, जवानों का बलिदान होगा, फिर भी उसका अभिमान होगा, राजा रानी में तकरार […]
प्रिय सैनिक, जो तुम हो तैनात सीमाओं पर, तो हम हैं निश्चिंत घरों घर। है तुम्हारी रडार सी पैनी नजर , तो हमारे नैनो में बसता है सुकुं प्रति पहर। तुम निभाते हो ड्यूटी अति […]
उठा के बंदूक हाथ में, ए वीर तुम अब बढ़े चलो। जान हथेली पे रख के, अपना कर्तव्य निभाते चलो।। इस देश को तुम्हारे जैसे ही, सपूतों की जरुरत है। जंग की घड़ी आई है, […]
कविता – घोड़ा दबा दे सिपाही तीखी नजर से सिपाही आज ऐसा निशाना लगा दे, मार दे देश के दुश्मनों को उनका नामोनिशां तू मिटा दे। तूने सीमा में डटकर हमेशा दुश्मनों के छुड़ाये हैं […]
जागो हे भरतवंशी अलसाने की बेर नहीं । सहा सबकी साज़िशों को,करना है अब देर नहीं ।। शालीनता की जिनको कदर नहीं,विष के दाँत छिपाये है मौकापरस्त फितरत है जिनके,क्यू उनसे हम घबराये है फ़ौलाद […]
ये रणबांकुरे भारत के,सीमा पर देखो खड़े हैं हम चैन से सोएं रातों को, दुश्मन से वो लड़े हैं गर्मी का मौसम हो,या पड़े कड़कती सर्दी भारत मां की रक्षा करते ,पहन के फौजी वर्दी […]
तुम रहे हमेशा आगे ऐसे तूफान भी न छू पाए तुम्हारे देश के एक- एक कण को……. कोई अपना बनाकर न ले जाए….. जान हथेली पर लेकर तुम चीर लाते हो दुश्मन की आंख….. तुम […]
जाग हे पार्थ जाग तू, दे काल को अब मात तू, काल के कपाल पर अमिट रेखाएं खींच, अब तू काल समर जीत। स्वयं के सम्मान हेतु , विश्व के कल्याण हेतु , अपने अंदर […]
सरहद की ये आड़ी-तिरछी लकीरें, किसने खिंची क्या पता! गर जो वो तुमको मिले, मुझे भी उसका पता देना!! बस पुछुंगी इतना ही, एकता ना तुमको भायी! सीमांत बना कर क्या मिला, इंसानो से ऐसी […]
मेरा आन वतन, मेरा बान वतन, मेरा शान वतन। गैरो में दम कहाँ जो करे, हमारे वतन को पतन।। अनेक आए अनेक गए, बाल न बांका कर सका। मेरा भारत भारत ही रहा, कोई न […]
हे कर्मवीर हे धर्मवीर हे परमवीर तुम शौर्य महान, हेभारत मा के वीर सपूत इस देश के लिए कुर्बान है जान बलिदान तेरा न व्यर्थ जाएगा तेरा लहू इस देश के काम आएगा न झुकने […]
Vo foji h hm Bharat jinki mata h Jiske vo rakshak h Din ho ya raat kdhe rhthe h jo Grmi ho ya thnd mdhe rhthe h jo Vo foji h hm Desh ki krte […]
….हर तरफ़ एक शोर है…..हर तरफ़ एक ही बात, मुल्क़ के लिए अपनी जान जो दे गए, यथासंभव हमें देना हैं मिलकर उनके परिवार का साथ….. जोड़ सकते है हम अगर एक लहर को तो […]
देखो चली नौजवानो की टोली। खेलेंगे लाल फिर लहू की होली।। चारो दिशाओं में गूंज रहा है। इंक़िलाब जिंदाबाद की बोली।। अग्निपथ पे चल पड़े है सपूत। ललकारे छोड़ के आसमां में गोली।।
आज फिर ए वीर, इम्तहान की घडी आई है। जागो ए सपूत, माँ फिर बेटा कह के बुलाई है।। उठा के बंदूक हाथ में शरहद के तरफ चलना है। माँ के कर्ज चुकाने का यही […]
न पायल पर, न काजल पर न पुष्प वेणी पर मरते हैं हम वो पागल प्रेमी हैं जो मातृभूमि पर मरते हैं । सियाचिन की ठंड में हम मुस्तैद है बन इमारत माँ सरहद की […]
सोचता हूँ, क्यों ये बंदूकें है तनी? उन जीवों पर जो दिखते हूबहू हम जैसे, नेताओं के कठपुतले बन, मात्र खून के कतरे है बहे। सोचता हूँ जब माता-पिता के विषय में, आँखों से मन […]
छोटी-सी ज़िंदगी में, हर कोई अपने सपनें सजाता हैं। विवाह तो सभी करते हैं… वह फौजी हैं साहब, जो आठवें वचन के साथ गृहस्थ जीवन अपनाता हैं। मात-पिता की सेवा को जो, भार्या घर छोड़े […]
लगा के निशाना दुश्मन पे, अपनी ताक़त दिखा देंगे। ज़ुल्म के सिन्हा चीर कर, वतन को आज़ाद कर देंगे।।
सिर पे कफ़न बांध चले हम, ईट के जवाब पत्थर से देने। देखे किस में कितना है दम, चले बस हम यही आजमाने।।
मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा। तेरी खिदमत में निकले मेरी जां। तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा, गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा। गर उठा कर देखेगा नजर इधर, रूह तक कांपेगी […]
जब जब ज़ुल्म कीआंधी हमारे देश में आयी। तब तब हम प्रहरी अपने देश की लाज बचायी।। निशाना हमारा चूक जाए ऐसा कभी हुआ नहीं। गर निकल गयी गोली तो समझ ले तेरी खैर नही।। […]
बदन पर लिपट कर उस घड़ी तिरंगा भी रोया होगा जब उसने अपने हिन्दुस्तानी फौजी को खोया होगा। माँ की छाती में भी दूध उतर आया होगा जब उसने अपने शहीद बेटे को गोद में […]
जंग का ऐलान हम नहीं करते, पर जंग छिड़ जाने पर पीछे नहीं हटते। यही तो है हम हिन्दुस्तानियों का हुनर, सिर कटा सकते हैं पर झुका नहीं सकते। आखरी साँस तक लड़ते हैं हम […]
मैं पुत्र उस नारी की जिनकी आंखों में पीड़ा देखी , उजागर करता हूं उन पीड़ा का……….। जनमानस से भरा जिसने धरती को , घर के कोनों में मजबूर हुई जीने को। दुर्गा, काली के […]
बेवजह ख्वाब को हम जिए जा रहे हैं हकीकत को धोखा दिए जा रहे हैं पता है मयस्सर, न होंगी ये ख्वाहिश मगर कोशिशें हम, किए जा रहे हैं मिली मुफ्त में है, ये नींदे […]
झांक हमारे अंदर लहू है, पानी नहीं। आज़मा कर देख, हम किसी से कम नहीं क्यों इतराता है, तू अपनी ताक़त पे। गर आज हम नहीं, तो कल तू भी नहीं।। अपना हक़, सिन्हा चीर […]
Ye tasveer suna rahi h, darde manjar ki kahani is tarah Na jane ab vaapas aana ho kab Is shahar, is gali, aur is jagah Tune o corona kya kar dala Kaam chhina, sukh- sukun […]
भारतवासी बना प्रवासी, कैसा किस्मत का खेल है मजदूरों की भीड़ से भरी, यह भारतीय रेल है घर जाने की जल्दी में, मची ये रेलमपेल है भाग रहे गृह राज्यों में ये, जैसे यहां कोई […]
क्षणभर में क्षीण हो छलकी आंख भारत मां की जब मजदूरों के छाले सीने में लेकर बैठ गई निज संतान का दर्द दिखा तो ऐसी दर्द की आह,,,,, भरे जैसे लोह पथ गामिनी सीने के […]
सपनो की दुनिया आँखों में लिए चले थे दूर, पता नहीं था हो जायेंगे वो इतने मजबूर | षडयंत्रो की चालो में जो बुरे फंसे मजदूर, कहाँ पता था हो जायेगा वक़्त भी इतना क्रूर […]
हां मजदूर है; सो मजबूर हैं, उनकी क्या खता; जो घर से दूर हैं पैदल चल- चल; थक कर चूर हैं, सड़कें सारी; तपती तंदूर है, ट्रेनों में भी; भीड़ भरपूर है, सरकारों को आखिर; […]
वक्त ने कैसा करवट बदला बेज़ार होकर। तेरे शहर से निकले हैं बेहद लाचार होकर। पराया शहर, मदद के आसार न आते नज़र, भूखमरी करीब से देखी है बेरोजगार होकर। तय है भूख और गरीबी […]
हमारा कसूर क्या था आखिर क्यों मजदुर हुए हम दर दर भटकने पर मजबूर हुए हम इस महामारी से तकरार है रोजी रोटी की दरकार है अपनों से मिलने के लिए बेक़रार हुए हम मरने […]
अब छोड़ चले हम परदेश । जब से लगी किस्मत में ठेस ।। घर परिवार में मिल जायेंगे । वहीं पे रूखी सुखी खायेंगे।। एक तरफ करोना के शैलाब । दूसरे तरफ मौत के शैलाब […]
चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों। लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद- ए-कहर दोस्तों।। साथ तेरा मिला हमें कदम -दर-कदम। चीन से आके वाइरस ये बड़ा बेरहम।। है ये कैसा मचाया जुल्म -ओ-कहर दोस्तों। चल […]
विलासता से कोसों दूर हूँ। हाँ, मैं मजदूर हूँ। उँची अट्टालिकाएँ आलिशान। भवन या फिर सड़क निर्माण। संसार की समस्त भव्य कृतियाँ, असम्भव बिन मेरे श्रम योगदान। फिर भी टपकते छप्पर के तले, रहने को […]
कोरोना नामक महामारी हमारे देश में है आई इस महामारी ने पूरे प्रशासन में हड़कंप है मचाई। सरकारों ने महामारी से निपटने के लिये कई तरकीब है अपनाई पर सबसे सख्त तरकीब तालाबंदी नजर आई। […]
कह चले हैं अलविदा उन शहरों को जिनमें हम कमाने-खाने आए थे, महामारी में बचे रहे तो.. फिर आएँगे l मजदूर हूँ, हुनर हाथों में और दिलों में सपने लिए आएँंगे इंतजार था बंद खुलने […]
कवि /कवित्रियों की वेब गोष्ठी को पूनम का प्रणाम🙏 आप अनुभवी गानों में एक कविता प्रस्तुत करने का साहस कर रही हूंँ आपके स्नेह और सहयोग की आकांक्षा है.
ये मेहनतकश हैं भारत के, चल पडे बैठकर रेल में इनकी दुविधा समझें हम सब, ना लें इसको खेल में देश बन्द हुआ, काम बन्द हुआ पेट बन्द तो नहीं होता काम नहीं, कमाई नहीं […]
!सुनों! सुनो! ये जो दरिद्र मजदूर हैं, वास्तविकता में यही तो मजबूर हैं| क्रूरता की पराकाष्ठा तो देखो, अब तक ये कुटुंब से दूर है| भूतल से नभतल तक यह जो हाहाकार मचा, प्रकृति ने […]
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