जब जब धर्म अधर्म के चंगुल में फंसा, तब तब इस धरती पे पुरुषोत्तम का जन्म हुआ। अत्याचार से धरती फटी अधर्म से नील गगन, तभी तो दिव्य पुरुष के हाथों अधर्मी का अंत हुआ। […]
Submission for ‘Poetry on Picture’ Contest
जब जब धर्म अधर्म के चंगुल में फंसा, तब तब इस धरती पे पुरुषोत्तम का जन्म हुआ। अत्याचार से धरती फटी अधर्म से नील गगन, तभी तो दिव्य पुरुष के हाथों अधर्मी का अंत हुआ। […]
विजयादशमी का यह पावन पर्व वर्षों से समाज को सच्चाई का सबक सिखाऐ पर आज यह एक प्रश्न उठाये आज प्रतयंजा कौन चढ़ाऐ कौन बाण आज छुड़ाए इस युग में कोई काबिल नहीं जो रावण […]
61-नहीं मरेगा-रावण अहम भाव में बसता हूं मैं कभी न मरता रावण हूं मैं स्वर्ण मृग मारीच बनाकर सीता को भी छलता हूं मैं..। किसे नहीं है खतरा सोचो केवल अपनी सोच रहे हो रावण […]
दशहरे का रावण सबसे पूछ रहा है हर वर्ष देखा है मैंने स्वयं को दशहरे पर श्रीराम के हाथों से जलते हुये, सभी को बुराई पर अच्छाई की जीत बताते हुये। उस लंकेश को तो […]
धनुष उठा श्री राम का, रावण की अब खैर नहीं चलो आज विजय की बात करें, हो कहीं किसी से,बैर नहीं त्रेता युग में रावण ने, श्री राम को ललकारा था सीता माता का हरण […]
हर दौर में अधर्म का प्रारम्भ एक नव-चरण होता रहा l हर एक युग में “हे रावण” तेरा नव-अवतरण होता रहा l हर बार अग्नि परीक्षाओं से गुजरी सीता सती सी नरियाँ , किसी न […]
हम सरहदों पर रहते हैं आज ज़माने से ये कहते हैं भारत माता के वीर सभी हम हमको सभी सरहद का रखवाला कहते हैं। है अगर हिम्मत किसी दुश्मन में तो आकर टक्कर ले हमसे […]
विजयादशमी हम मनाते है पर अपने अंदर के रावण को कहाँ जलाते है ? कटाक्ष कर रही है भगवान श्री राम की सच्चाई और निष्ठा ,रावण जैसे दुराचारी के क्रोध,कपट,कटुता,कलह,चुगली ,अत्याचार | दगा,द्वेष,अन्याय,छल रावण का […]
हिन्द भाषाओं का सागर है l मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था […]
आज पकड़े गए तुम कन्ह। माखन चुराते हुए,’ माखन खाते हुए।। रोज़ खीजते हो तुम रोज़ सताते हो । नटखट बड़े हो तुम कान्हा.🌹……….।। हाथ नहीं आते हो माखन चुराते हो🌷। माखन खाते तो तुम […]
हे अज्ञानी मानव, सुन ले मेरी पुकार, तेरी हूँ मैं पालनहार, फिर भी तू कड़े है वार l तुमको शुद्ध आहार दिया, मुझको प्लास्टिक की पहाड़ दिया, तुझको जीवनदायी पानी दिया, तुमने उसमें जहर मिलाया […]
अचानक से कर्ण में एक ध्वनि गूंजी , देखा तो भीड़ में कोई दम तोड़ रही थी, पालन हार अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही थी, कटती अंग – प्रत्यंग के साथ काली घटा छा […]
रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेंगे। वीर जवानो के गाथा फिर से हम दोहरायेंगे।। दो मिनट के मौन रख कर हम एक साथ। इंकलाब जिंदाबाद के नारा लगायेंगे।। वतन के लिए हमने क्या किया […]
आज आजादी की शुभ अवसर है , हे भारती नमन मेरा आपको है , आशीष दें आज आप मुझको , घर के दुश्मनों को मिटा सकूँ , बाहरी दुश्मनों का संहार कर सकूँ , भले […]
अपना देश कितना सुंदर कितना प्यारा। हर देश से प्यारा देश हिन्दुस्तान हमारा।। हिन्दी है हम हिन्दी ही मेरा परम धरम। इसलिए तो गर्व करे आज भी हिन्दुस्तान हमारा।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण वालों से […]
मैं कब कहता हूँ फूलों की सेज मिले, मुझे तो कमल जैसी सुदृढ मन मिले l जो खिलता तो कीचड़ में है, पर दाग नहीं लगने देता दामन में l कब कहता हूँ पीड़ा रहित […]
जब देश में रंगा बसंती चोला था। तब अंग्रेजी शासन भी डोला था।। महासंग्राम की जब आई घड़ी। सभी के दिलो में तब, शोला ही शोला था।। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सभी एक साथ। चीख […]
हमारा आन तिरंगा है, हमारा बान तिरंगा है। हमारा शान तिरंगा है, हमारा जान तिरंगा है।। हमारा धर्म तिरंगा है, हमारा कर्म तिरंगा है। हमारा सोच तिरंगा है, हमारा समझ तिरंगा है।। हमारा औकात तिरंगा […]
आये टोली ले मक्खन खिलाने को आये कान्हा ले अपने संग संगत को देखि मोहे कान्हा को छोड़ चलन छिप गये परदे के पीछे आज पकड़ में आया कान्हा मक्खन गिराये कान्हा भूमि पर
प्यारी सी एक परी, जिसका जादू हर ओर चला है। मेरे भईया-भाभी का घर, जिसने खुशियों से भरा है। मुस्कान जिसकी, दुनियां से न्यारी है। सुरत भी देखो, कितनी प्यारी है। दादी-बाबा, मम्मी-पापा और हम […]
यशोदा प्यारे कृष्ण कहें यशोदा मैया कान पकड़ कान्हा से तंग हुई मैं लल्ला अब तेरे शरारत से सुनो लल्ला माखन चोरी की आदत छोड़ो मेरे प्यारे कृष्ण मुरारी मटकी ना फोड़ों छूप-छूप कर तुने […]
बचपन की एक प्यारी छवि, जो आज तुम्हें मैं बतलाता हूं। मन कल्पना के दर्पण में, उसे देख मैं सुख पाता हूं। गांव की वह प्यारी गलियां, जिसमें बचपन का नटखटपन है। खट्टे मीठे ताने […]
ओ मैया! मोरी पीर बड़ी दुखदायी सब कहें मोहे नटवर-नागर माखनचोर कन्हाई। तेरो लाला बरबस नटखट कब लघि बात छपाई। ओ मैया! तेरो कान्हा माखन बिखराई। सो खावत सो माखन-मिसरी ग्वालन खूब खिलायी। फोड़ दई […]
तू है माखनचोर। कान्हा तुम आ जाते छुपके खा जाते हो माखन चुपके, तड़के आँगन सखियाँ करतीं शोर तू है माखनचोर। दही मगन खा मटकी तोड़ी करते नहीं शरारत थोड़ी, गाँव में अब चर्चा है […]
आयो कान्हा देखि मोहे तोरे संगी साथी कुछ भाग चलत, कुछ ले परदे कि आड़ छुप खम्ब कि ओट देखत मोहे कि आज मेरो पकड़ में आयो कान्हा जब यह आया चुपके से माखन खाने को […]
नटखट, ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों। संग सखा तू पुनि-पुनि मटकी पर नज़र लगायो।। सब ग्वालन से मिलकर झटपट माखन खायो। नटखट ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों।। मैया, ओ प्यारी मैया […]
छूप छूप के खाये माखन है ये माखन चोर बड़ा नटखट है प्यारा नंद किशोर घुसे घर में मित्रो के संग देखी माखन की मटकी देखा खूब सारा माखन सबकी नज़र उसी पे अटकी खाये […]
चलो कुछ नया करते हैं, लहरों के अनुकूल सभी तैरते, चलो हम लहरों के प्रतिकूल तैरते हैं , लहरों में आशियाना बनाते हैं, किसी की डूबती नैया पार लगाते हैं l चलो कुछ नया करते […]
सावन में ए सखी, खनके क्यों कँगना। कोयलिया गीत सुनाए ,क्यों मेरे घर अँगना।। बार बार दिल धड़काए, प्यास जगाए। जाने क्या करेगी, मेरी नादान ए कँगना।। जब सुनती हूँ, “ए शोभा पियु कहाँ ” […]
गरीबी एक एहसास है, इसमें एक मीठी सी दर्द है, रोज़ की दर्द में भी संतोष छिपी है, फकीरी में अमीरी का एहसास है, शायद यही गरीबी है l मुर्गे की बांग से सुबह जग […]
कविता- माखन ———————— नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला| मैं सह लूंगी बात तुम्हारी, आए शिकायत रोज तुम्हारी| सुन सुन के मै हार गयी हू, गगरी फोरा सब की सारी, […]
जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा, ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा, कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा, कभी माँ जसोदा […]
मैया यशोदा से लिपट के, हँस के बोले नंदलाला। माखन कहाँ खाया है, तेरा सबसे दुलारा नंदलाला ।। दोष लगाना कान खिंचवाना, यही सभी को भाता है। बाल सखा से पूछ ले मैया, कहाँ था […]
पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं ।। करूँ क्यों मैं भला चोरी घर में हैं बहुत माखन। नचाती नाच छछिया पे चखूँ […]
कान्हा देख आगे से ऐसे माखन चोरी मत करना बता दे रही हूँ कह दूंगी मैया से फिर मत कहना।
मोहक छवि है कैसी, मनभावन कान्हा चितचोर की। माखनचोरी की लीला करते ब्रिज के माखनचोर की।। वसुदेव के सुत, जो वासुदेव कहाते थे नन्द बाबा के घर में नित दृश्य नया दिखाते थे यशोदानन्दन नामथा […]
भ्रम हुआ है तुमको, मैया ! भोला तेरा कृष्ण कन्हैया, माखन नहीं चुरायों है। लांछन लगाएं ब्रजबाला, ग्वालिन बड़ी ही सयानी चपला, मुझको बहुत नचायों हैं, ना नाचूं तो चोर बताएं! और मुख पर माखन […]
ब्रज की एक सखी के घर माखन चोरी करते गिरधर, पकड़ लिए हैं रंगे हाथ फिर भी करते हैं मधुर बात। बोली ग्वालिन यूँ कान खींच मन ही मन में रस प्रेम सींच, बोलो क्यों […]
कहे नटवर मैया से, मैं कब माखन खाया। झूठ के गगरी, समस्त ब्रजवासी है लाया।। मैं तो था ,अपने भैया बलराम के संग। अब आप ही बताए, मै कैसे माखन खाया।।
यशोदा पूछ रही कान्हा से, “लल्ला, मटकी से रोज़ – रोज़ माखन कौन चुराता है”। लाड लड़ा के बोले कान्हा, डाल के गलबैयां मां के, ” मैं क्या जानूं , मैं हूं नन्हा बालक ,तू […]
आजकल का यह जमाना है, सबको बेवकूफ बनाना है। समझदारी की कोई कदर नहीं, बस शानो-शौकत दिखाना है। नियमों को कोई यहां तोड़े, नियमों को कोई वहां तोड़े, बस एक दूसरे पे इल्जाम लगाना है। […]
साँवला सलोना चला, माखन चुराने को। मैया ने देख लिया, रंगे हाथ गिरधारी को। कान पकड़ के मैया, कहती हैं नंद से। क्यों चुराए है तू?, माखन यूँ मटकी से। इतने में बोलते हैं, कन्हैया […]
मां मैं तुमसे कुछ आज कहूँ। जग से प्यारी तुम मेरी मइया, नंदबाबा का मै अनमोल कन्हैया, फिर क्यू दाऊ है मुझे चिढाए , मैं काला मां तू क्यू गोरी, नंद मुझे क्या मोल के […]
अज्ञानता ही ज्ञान का पहला मार्ग है l अज्ञानता से हीन भाव रखना, अपने आप में मूर्खता है l अल्प ज्ञान भी ज्ञान है, जब तक अहम का वास नहीं है l महाज्ञानी भी अज्ञानी […]
श्यामल रूप है,नंद को लाल है। मोर मुकुट संग, पायल झंकायो है। नटखट अठखेलियों से, गोपियाँ रिझायो है। माखन खायो है, रास रचायो है। यमुना नदी किनारे, बंसी बजायो है। मटकियाँ फोड़त है, गौये चरायो […]
चुरा के माखन खाए नटवर नागर नंदा। कान पकड़ के खींचीआज मैया यशोदा ।। माखन चोर है, मैया यशोदा के नंद लाला। तभी तो शिकायत कर गयी समस्त ब्रजबाला ।। घर 🏡 घर में मटकी […]
मात हमारी यशोदा प्यारी,सुनले मोहे कहे गिरिधारी नहीं माखन मैनु निरखत है,झूठ कहत हैं ग्वालननारी। मैं तेरो भोला लला हूँ माता,मुझे कहाँ चुरवन है आत बस वही मै सब खाता, तेरे हाथों का माखन है […]
ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं […]
माखन चोर माखन चोर। ब्रज में मचा है यही शोर ।। सब से नजरे बचा के देखो। कैसे भागे माखन चोर।। कहीं मटकी फूटी , कहीं माखन बिखरे । पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो, व्रज में […]
हम उस देश के प्रहरी है जिस देश में तिरंगा लहराता है। बुलंदी वाले छत्रपति शिवाजी के चर्चे शत्रु भी करता है।। पंजाबी गुजराती मराठी गोरखा मद्रासी और मुसलमान। सभी देश पे आज भी अपनी […]
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