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anupriya sharma

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anupriya sharma

@Anu • Joined Feb 2015 • Active 8 years ago

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by anupriya sharma

जिंदगी कुछ रूकी रुकी सी है

January 17, 2017 in शेर-ओ-शायरी

जिंदगी कुछ रूकी रुकी सी है
सांसे कुछ थमी थमी सी है
मायूस है मोहब्बत मेरी
पुराने सायों से डरी हुई सी है

7 Comments »

by anupriya sharma

November 22, 2016 in शेर-ओ-शायरी

Vo janaab, bahut utarate he aajkal

Baato me jhalakta he gurur unka

Khabar nahi unhe hamaare hunar ki

Har lafz samandar e guru ko pee jaae jinka

3 Comments »

by anupriya sharma

काफ़िला गुजर गया तो क्या

September 27, 2016 in शेर-ओ-शायरी

काफ़िला गुजर गया तो क्या
हम तनहा है तो क्या
अकेले ही गुजर बसर कर लेंगें
दो लफ्जों को ही अमर कर लेंगें|

2 Comments »

by anupriya sharma

वक्त

September 8, 2016 in शेर-ओ-शायरी

कहां थे फ़ासले तेरे मेरे दरम्या
इक वक्त था जो जम गया था हमारे बीच

Tags: kavita 4 Comments »

by anupriya sharma

Zindagi

August 10, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

Dhal rahi he zindagi,

Shaam ki tarah.

Dhoob gaya he sooraj ab,

Andhere ab has chaaro taraf.

Ek ummeed ki kiran tha tu bas,

There bin nahi zindagi me kuch bhi ab.

 

2 Comments »

by anupriya sharma

मैनें आखिर वो बात कह ही दी

May 1, 2016 in शेर-ओ-शायरी

डरते डरते ही सही मैनें आखिर वो बात कह ही दी
जो लफ़्जों में कभी ढल ना सके वो अहसास आज बयां हो ही गये
मगर दिल अभी भी गमगीन सा बैठा हुआ है
जो मैनें कहा है, वो उसने समझा भी है या नहीं||

Tags: kavita 4 Comments »

by anupriya sharma

दर्द से भी इश्क हो गया है हमें

April 8, 2016 in शेर-ओ-शायरी

क्यों नहीं जुदा होता दर्द हमसे अब
लगता है दर्द से भी इश्क हो गया है हमें|

Tags: kavita 5 Comments »

by anupriya sharma

जिंदगी है कि गुजरती ही नहीं

March 14, 2016 in शेर-ओ-शायरी

दिन पे दिन गुजरते जा रहे है,
मगर जिंदगी है कि गुजरती ही नहीं

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by anupriya sharma

जलते है नाजुक पांव मेरे

March 2, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जलते है नाजुक पांव मेरे
वक्त की गरम रेत पर
अब के बस किसी काफ़िले में
कोई अपना मिल जाये

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by anupriya sharma

मेरा बचपन

March 1, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दोस्त बचपन के
याद बहुत आते है
जब बिछड़ जाते है

कहां बयां हो पाते है
जज्बात लफ़्जों में
अधूरे ही रह जाते है
मुकम्मल होने की हसरत में

शरारतें, मस्ती जिनसे होती थी मुकम्मल जिंदगी
छूट गयी सब बचपन के साथ
याद बहुत आता है मुझे
मेरा बचपन

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by anupriya sharma

शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने

January 30, 2016 in शेर-ओ-शायरी

शरारतें की है बहुत जिंदगी में हमने
अब जिंदगी है जो शरारत करती है

Tags: kavita 5 Comments »

by anupriya sharma

जलते है जिसके लिए, करोड़ों आंखो मे दीये

January 26, 2016 in शेर-ओ-शायरी

जलते है जिसके लिए, करोड़ों आंखो मे दीये
जान कुर्बान हर जनम में ऐसे वतन के लिए

3 Comments »

by anupriya sharma

दिल की दीवारों पे क्या लिखा है तुझे क्या पता

January 16, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दिल की दीवारों पे क्या लिखा है तुझे क्या पता
इन पर सर टकरा कर, ना जाने कितने खाक हो गये

8 Comments »

by anupriya sharma

कभी वो कुछ कहते है

January 12, 2016 in शेर-ओ-शायरी

कभी वो कुछ कहते है, कभी हम कुछ कहते है
हमारे रिश्ते चंद लफ़्जों में अक्सर महफ़ूज रहते है

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by anupriya sharma

कितनी बातें अनकही रह जाती है

January 11, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कितनी बातें अनकही रह जाती है
कितने लम्हे बिना जीए ही बीत जाते है
सोचते सोचते दिन महीने साल
धीरे धीरे सब गुजर जाते है

Tags: kavita 3 Comments »

by anupriya sharma

सूनी सूनी रातों में

January 5, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सूनी सूनी रातों में
कभी कोई दस्तक दे जाता है
मेरे दिल के दरवाजे पर…
कभी कोईे चेहरा नहीं दिखता
बस आहट होती है हल्की सी
और कुछ कदमों की आवाज
जो मचा देती है हलचल
मेरे सूने पड़े दिल में
सूनी सूनी रातों में…

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by anupriya sharma

आज मेरे आंगन में आफ़ताब आया है

December 24, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

आज मेरे आंगन में आफ़ताब आया है
सर्द दिन में लगता है ख्वाब आया है
नये नये रंगो में नहाया हुआ
जिंदगी का नया पैगाम आया है

8 Comments »

by anupriya sharma

लफ्ज है ये या बेबस दिल है मेरा

December 22, 2015 in शेर-ओ-शायरी

लफ्ज है ये या बेबस दिल है मेरा
धड़कन जिसकी किसी को सुनाई नहीं देती… अनु

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by anupriya sharma

जिंदगी जैसे रुक सी गयी है

December 19, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

दिल खोया हुआ है अलसाई बादियों में
ख्वाबों को भी नींद लग गयी है
सर्दी की इस अलसाई आदतों ने
जिंदगी जैसे रुक सी गयी है

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by anupriya sharma

सुनती आ रही हूं बातें दुनिया की

December 14, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

सुनती आ रही हूं बातें दुनिया की
बातों में पता नहीं अपनापन कहीं खो जाता है
करती हैं बातें दुनिया जमाने भर की
मगर खुद को बयां नहीं कर पाता है

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by anupriya sharma

काश कभी ऐसा भी हो

December 12, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

बहुत याद करते है हम आपको
क्या कभी आपके ख्यालों मे हम भी आते हैं
होती है गुफ़्तगू कई दफ़ा दिन में
क्या कभी आपके सपनों में हम भी आते हैं
काश कभी ऐसा भी हो
हम आपको याद करे
और आपका हाथ हमारे हाथों मे हो|

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by anupriya sharma

Let me come in your heart

December 10, 2015 in English Poetry

Where everything is silent,

Where everything is filled,

No space for anything else,

Take me there,

Above all the skies, all clouds and rainbow

Let me come in your heart

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by anupriya sharma

चलो इक कविता लिख देते हैं

December 9, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या कहूं, क्या लिखूं कुछ समझ नहींं आता
कुछ बाते हैं जो लफ़्ज का साथ ही नहीं देती
कुछ बाते हैं जो दफ़न है जहन में
कुछ बातें अनकही ही रह जाती है
कुछ न कह कर, कुछ न लिख कर
चलो इक कविता लिख देते हैं

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by anupriya sharma

लफ़्जों में ढ़लने लगी है जिंदगी मेरी

December 2, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोई अपना था जो खो गया
जिंदगी में जो पास था
जो दूर हो गया
यादों के सहारे रह गयी है जिंदगी मेरी
लफ़्जों में ढ़लने लगी है जिंदगी मेरी

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by anupriya sharma

ख्वाहिश है बहुत दिल की

November 30, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

ख्वाहिश है बहुत दिल की
आंखो में गम है बहुत
ज़हन में है इक अजीब सी खामोशी
होती है घुटन हरदम
अब नहीं ख्वाहिशों का कत्ल करने को जी करता है
खामोशी को चीरने को जी करता है
इक बार मुस्कुराने की ख्वाहिश है

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by anupriya sharma

हर कोई रूह से अनजान है

November 27, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

किसी ने कहा था कभी कि मैं उड नहीं सकती
अब जमाना मेरी उडान देख के हैरान है
कभी लोग मेरी खामोशी की शिकायत करते थे
अब मेरे बोलने से परेशान है
आज तक समझ न सकी दुनिया मुझको
हर कोई रूह से अनजान है…..

12 Comments »

by anupriya sharma

बेहद ही खूबसूरत है जिंदगी

November 24, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

बेहद ही खूबसूरत है जिंदगी
हर पल नयी, नूतन
झिलमिलाती, चमकती हुई
आंखों में ख्वाबों के पुल बनाती हुई
कभी मुस्कुराती कभी रोती
आसूओं में भी खुद का आईना दिखाती
कभी चलती, कभी ठहरती
बेहद ही खूबसूरत है जिंदगी

Tags: life 7 Comments »

by anupriya sharma

दिल की आवाज किसी कोने में दफ़न हो गयी

November 22, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरी कहानी अनकही ही रह गयी
सितारों के उजालों में अंधेरे सी दब गयी
दुनिया ने मेरी सिर्फ़ सूरत ही देखी
दिल की आवाज किसी कोने में दफ़न हो गयी

Tags: kavita 9 Comments »

by anupriya sharma

हर कोई हमारे करीब आना चाहता है

November 19, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

हर कोई हमारे करीब आना चाहता है
मगर रिश्ता कोई नहीं निभाना चाहता है
चाहत तो हमारी बस सच्चे दिल की ही है
मगर झूठी दुनिया में सच कहां नजर आता है

Tags: kavita, शायरी 5 Comments »

by anupriya sharma

दीये जलने दो जरा

November 11, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

दीये जलने दो जरा
कूछ उजाला हो जाए
वैसे तो अंधेरे की आदत है
आज कुछ अलग हो जाए
जिंदगी गुजरी है सीधी सी
आज रोकेट को कुछ टेडा कर के छोड देते है
शायद इससे किसी अंधेरे में उजाला हो जाए|

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by anupriya sharma

download

इक नज्म है जिंदगी

October 20, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

इक नज्म है जिंदगी
जिसकी इबारतें हम लिखते है
गाते है, गुनगुनाते है
कई दफ़ा भूल भी जाते है
याद करने, भूलने में
लिखने औ मिटाने में
ये कारवां ए जिंदगी चले


 

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by anupriya sharma

hope_inside_heaven__s_tears

पलकों पर आंसू रहते है

October 14, 2015 in हिन्दी-उर्दू कविता

पलकों पर आंसू रहते है
दिल में जज्बात रहते है
कलम है जो कुछ कुछ लिख देती है
वरना होठ तो हमेशा खामोश रहते है

आंखो मे आसमां रहते है
पांव बादलों पर रहते है
लेकिन चंद लम्हों के लिये भी उड नहीं पाते
किसी की यादों मे हम कैद रहते है

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by anupriya sharma

मेरे अहसास

September 18, 2015 in शेर-ओ-शायरी

कभी लगता था कि मेरे अहसास सिर्फ़ मेरे है

अब शायद वो भी पराये हो गये

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by anupriya sharma

मैं तो सन्नाटा हूं

March 1, 2015 in शेर-ओ-शायरी

ये तो मुमकिन नही यूं ही फ़ना हो जाऊं
मैं तो सन्नाटा हूं फैलूं तो सदा हो जाऊं

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