तू मुझे चाह ले संवर जाऊं।। या कहे टूट कर बिखर जाऊं।। रास्ता कौन मेरा तकता है लौटकर किसलिए मैं घर जाऊं।। तू सफ़र में हो तो ये मुमकिन है मैं संग-ए-मील सा गुज़र जाऊं।। […]

मेरी पुरनम कहानियां सुनकर।। दिल की डूबें न कश्तियां सुनकर।। तेरे चर्चे में फूलों की ख़ूशबू पास आती हैं तितलियां सुनकर।। दूल्हा बाज़ार से ख़रीदेंगे क्या कहेंगी ये बेटियां सुनकर।। वह मुझे याद कर रही […]

सौ बार सरे-राह सफ़र छोड़ना पड़ा।। मंज़िल पे हर परिन्द को पर छोड़ना पड़ा।। पुश्तैनी घर की जब मेरे दहलीज़ गिर पड़ी घर को बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ा।। दहशत के लिए हो रहे […]

उलझन भरी जिंदगी में नींद के लिए समय ही कहाँ है जब समय होता है नींद आती ही कहाँ है। नींद भी जरुरी है इंसान के लिए पर इंसान जरुरी कहाँ है नींद के लिए। […]

जिसके आ जाने पर कुछ भी पता नहीं चल पाता है क्या घटित हुआ संसार में कुछ पता नहीं चल पाता है, जिसके आ जाने पर तुम हम न डर न भयभीत रहते हैं उस […]

जिसके आ जाने पर कुछ भी पता नहीं चल पाता है क्या घटित हुआ संसार में कुछ पता नहीं चल पाता है, जिसके आ जाने पर तुम हम न डर न भयभीत रहते हैं उस […]

हिन्दी गीत – रिमझिम बरसात | रिमझिम बरसात आ गई | प्यारी तेरी याद आ गई | बुँदे तन को भिंगा गई | प्यारी तेरी याद रुला गई| छाए नभ मे बादल काले काले | […]

छुपे सूरज क्षितिज में तो यकीनन शाम कहते हैं जहां जन्मे प्रभू उसको अयोध्या धाम कहते हैं हमारी आस्था देवों में कोई कम नहीं लेकिन जो मर्यादा के स्वामी हैं उन्हें श्री राम कहते हैं।

गज़ल:- ❤❤ “मेरे दीवाने कहाँ गए” ❤❤ ————————— मेरे ख्वाब सजाने वाले कहाँ गए? मुझे जान-जान कहके बुलाने वाले कहाँ गए? —‐———————————- जो कहते थे तुझ बिन जी ना पाऊंगा एक पल मुझ पर मर […]

मेरे इलाही मेरे रक़ीब को सलामत रखना। वो भी रोयेंगे मेरे मह़सर में।।1।।  विकास कुमार कमति मेर रक़ीब मेरे माशुक को गुल दे दो। वो समझेंगे हमराह शव-ए-विशाल है।।2।।  विकास मेरे इलाही मेरे […]

मुहब्बत हो गयी है गम से, खुशियाँ अच्छी नहीं लगती। पहले दुश्मन मुहब्बत करते थे, अब दोस्त नफरत करते हैं।।1।।  विकास कुमार कमति.. बदलते वक्त के साथ, उसकी आँखें भी बदल गयी। पहले मुहब्बत […]

हमने वहीं लिखा, जो हमने देखा, समझा, जाना, हमपे बीता ।। शायर विकास कुमार 1. खामोश थे, खामोश हैं और खामोश ही रहेंगे तेरी जहां में । करतुते तो तु करती मेरी जहां में, हम […]

गज़ल ।। इतना अच्छा नहीं हुँ, जितना कि दुनिया कहती है । मैं कैसा हुँ, ये सिर्फ मैं जानता हूँ ।।1।। खूद के सवालों के कठघड़े में, मैं हरवक्त खड़ा रहता हूँ । दूसरों के […]

करता जा अथक परिश्रम क्रोध को पी पी के। मन को न विचलित होने दे नर । सदा तु करता जा सत्कर्म । परिस्थितियों का क्या है ? आना-जाना लगा रहता है ।।1।। नर के […]

मन का रूख सदा रहता इन्द्रियों के तृप्ति में । पर जो नर मन को सात्विक रूख दे दे । वही कहलाते जग में वीर्यवान, ज्ञानवान है । ऐसे ही नर जग में युगपुरूष कहलाते […]

ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है । अन्यथा जिन्दगी असफलता की सीढ़ी है । वीर्य पे टिका मानव का संसार है । अगर नर वीर्यहीन है, तो उसका जिन्दगी बेकार है ।।1।। आज के दौर में […]

परिस्थितियों का क्या है ? आज खुब हँसाया है तो कल रूलायेगा भी । आज हँसके जो दिन गुजारे है, व कल रोके भी गुजारना है । मगर योगी हरपल हँसके गुजारते जिन्दगी है । […]

कैसे-कैसे लोग जहां में रहते है ? कुछ दूसरों के भला के लिए जान गँवा देते है । कुछ अपने लिए दूसरों की जिन्दगी मिटा देते है । अजब रंग है मनुष्य के रक्त का […]

मेरे अल्फाज अब कहाँ रहें, ये तो तेरी मुहब्बत की जहागीर हुई । ये तो तेरे हुश्न-शबाब में खोया है, तेरी मुहब्बत में ये कुछ कहता है । ये मेरे अल्फाज़ रहे अब कहाँ, ये […]

बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा । कभी याद आया कभी दिल को दुखाया । ओ जाना-2 कहाँ खोया-खोया जरा तो बताना । बीच भवर मैं तुने छोड़ा साथ हमारा ।।1।। वफा की रंगी […]

तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली । तु जाते-जाते यूँ किसी को चाहा । मगर वो बंदा हुआ न किसी का । तेरी वेवफाई थी बहुत ही निराली ।।1।। सख्श था वो बहुत भोला-भाला । […]

अपनी प्रोन्नति नहीं कर सकते तो, क्या दूसरे की उन्नति से जलोगे क्या? अपनी संस्कृति को गँवा चुके हो, और खुद को भारतीयता कहने का ठोंग रचते हो? खुद सशक्त, धनवान, समृद्ध-शक्तिशाली बन सकते नहीं […]

लड़का नहीं होता किसी घर का कुपुत्र माहौल बनाता उसे संत-असंत । मात-पिता का गुण भी होता पुत्र के रक्तों में इसलिए लड़का अकेला दोषी नहीं होता । कौन कहता है लड़का आज आवारा है, […]

मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ? किसी राह पे मिली मंजिल है या तुम कोई किनारा । मगर दिल इतना मेरा अब टूटा किसी पे एख्तियार रहा ना मेरा । ये […]

ये जिन्दगी के रंग है, कभी खुशी तो गम है । आज जिसे अपना कहते ना थके । कल वो किसी का मेहमान है । मौत तो सबको आनी है, फिर क्यूँ जिन्दगी से मोह […]

इंसान इंसान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। जिन लोगों से महकती थी ज़िंदगी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, मिलकर “अकेले – अकेले” ये दुआ […]

ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है,अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है । अगर जिन्दगी मौत है तो हाँ मुझे मौत से लड़ना मंजुर है । मौत तो आती वीरों का जिन्दगी में एक बार है । […]

सुख है तो दुःख है, जिन्दगी के दो पल है । नर को निराशा से क्या घबराया? आशा की घड़िया किसके संग सब दिन है? आज मातम की घड़ी कल फिर खुशियों का दिन है […]

घर की जिम्मेदारियों होती जिनके कंधो पे । मान-मर्यादा के सीमा का पालन करे । वो धीर पुरूष-मर्द कठिन कार्य करे । परिवार चलाये जो अपने मेहनत के पसीने से । अर्द्धंगिनी को जो सीता-सावित्री […]

बड़ी होती है जब किसी पिता की पुत्री । वर ढूँढने जब वो निकलते है सज्जनों की बस्ती । सौभाग्य वश सज्जन भगवान राम के सेवक होते है । इसलिए पिता प्रसन्नता से कन्यादान करते […]

तेरे संग मैंने ख्याब जो देखे वो ख्याब नहीं जिन्दगी है मेरी । ख्याब के सहारे कटते नहीं दिन, रात भी है बोझिल दिन भी है सुना । भूले है सपने, फूटी किस्मत, टूटे है […]

लोगों की परिस्थितियाँ अब कुछ ऐसी होने लगी है । लोग भौतिकवादिता की ओर अब बढ़ने लगे है। चारों तरफ हा-हाकार मची है जनसंख्या नियंत्रण का। फिर भी लोग इन्द्रियों के दास बनने लगे है […]

देख धरा की स्थिति अब मानव का दिल खिल उठता है। उसे खण्डित-खण्डित करके अपनी जिज्ञासा पूरा करता है। धरनी की दुःख सुनता अब कौन, धरती पूजा अब होता कहाँ? अपनी अज्ञात मा को अब […]

सबका सुनो, गैर से सुनो अपनी निन्दा तुम । ये जो निन्दा करते लोग, ये तेरे दुश्मन नहीं । ये तो तेरे जिन्दगी के सूर्यताप है । जिनके उगने से प्रकाशमय होता सारा संसार है।।1।। […]

जब लोग करे तुम्हारी निन्दा,सुनके क्रोध को तुम करो संयम । यह है तेरे अन्दर उच्च विचार, इसी से होगा तेरा कल्याण । जो तेरे दोष-अवगुण को बताता, ऐसे नर से मत खफा होना यार […]

वेद-पुराणों की बात है निराली । राष्ट्रसेवा है सबसे सर्वोपरी । जब तक राष्ट्र में एक भी प्रजा भूखा हो, तब-तक हक नहीं भोजन करने को राजा का । यह है उच्च आदर्श राजा का, […]

भूलाके सादगी हमने अपनी अस्तित्व ही मिटायी है । ब्रह्मचर्य को जिन्दगी का हिस्सा न बनाके अपनी सारी शक्तियाँ यूँही गँवाई है । किया है दुरूपयोग नरतन का हमने ऐसे ही व्यर्थ में जिन्दगी जी […]

बाबुल की दुआ है साथ तेरे, आशीष है मां का पास तेरे । दुनिया की न लगे बला तुझे , ईश्वर की रहमत साथ तेरे ।। जा-जा री बहना प्रातःबेला है संग तेरे -2 छाँव-छाँव […]

मुझसे ये हाल दिल का कहीं कहा नहीं जाता है । पास तुम होते मगर तुमको ये बताया नहीं जाता है । जानता हूँ कि तुझे प्यार है मुझसे बेपनाहं सनम । ये तुमसे भी […]

1 जो आत्मनिर्भर है, उन्हें आत्मसम्मान की शिक्षा दे रही हैं क्यूँ हमारी सरकार? मजदुर अपने बलबूते पर ही जिन्दगी जीते, ये जाने ले हमारी सरकार । ये किसी के आगे भीख नहीं माँगते, जिन्दगी […]

है समाधान सभी समस्याओं का, भीरू-डरपोक नहीं चलाते राजव्यवस्था को । वो लूटते जग को और शोषण करते आमजनता पर । कर को खर्च करते हैं, वो निज-अपने स्वार्थ में और आमजनता को प्रताड़ित करते […]

अंधकार घना है कठिन घड़ी । हिम्मत रखिए मिलेंगे मंजिल । दूर-दूर तक जब कोई राह न सूझे । तो भी हिम्मत हारना हमें ना है मंजूर । हिम्मत-संघर्षों से एक नई राह बनायेंगे । […]

हमने सच बोला, वो बुरा मान गए ज़रा मुंह खोला, वो बुरा मान गए। सदियों से सुनती ही तो आई है नारी, आज ज़रा सुनाया, तो बुरा मान गए। औरों की चाहत को हमेशा चाहा, […]

छोड़ो व्यर्थ की बाते अब हम राम का नाम लेते है । सारी दुनिया को भूलाके अब हम राम को याद करते है । छोड़ों व्यर्थ की बाते अब हम राम का गुणगान करते है। […]

तेरे दर पे आया माता मैं, मेरी झोली भर दे । अपनी दया की वृष्टि से मेरी मईया मेरी मुरादे पुरी कर दे। बड़ी आश लगाये आये मा मुझे आशावान बना दे। तेरे दर पे […]

है ब्रह्मचर्य व्रत सभी व्रतों में महान । यह है शक्ति का आधार व गति का मूलाधार । इससे होता नर शारीरिक व मानसिक विकास । अतः तुम कर लो बंदे ब्रह्मचर्य व्रत महान । […]