मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ? किसी राह पे मिली मंजिल है या तुम कोई किनारा । मगर दिल इतना मेरा अब टूटा किसी पे एख्तियार रहा ना मेरा । ये […]
मैं जानता नहीं हूँ, तु कौन है तु मेरा ? किसी राह पे मिली मंजिल है या तुम कोई किनारा । मगर दिल इतना मेरा अब टूटा किसी पे एख्तियार रहा ना मेरा । ये […]
ये जिन्दगी के रंग है, कभी खुशी तो गम है । आज जिसे अपना कहते ना थके । कल वो किसी का मेहमान है । मौत तो सबको आनी है, फिर क्यूँ जिन्दगी से मोह […]
इंसान इंसान से डरने लगा, अदृश्य जीवों से मरने लगा। जिन लोगों से महकती थी ज़िंदगी, उनसे मिलने से मुकरने लगा। वो दौर ना रहा, ये दौर भी जाएगा, मिलकर “अकेले – अकेले” ये दुआ […]
ब्रह्मचर्य है तो जिन्दगी है,अन्यथा जिन्दगी दुःखों का जड़ है । अगर जिन्दगी मौत है तो हाँ मुझे मौत से लड़ना मंजुर है । मौत तो आती वीरों का जिन्दगी में एक बार है । […]
सुख है तो दुःख है, जिन्दगी के दो पल है । नर को निराशा से क्या घबराया? आशा की घड़िया किसके संग सब दिन है? आज मातम की घड़ी कल फिर खुशियों का दिन है […]
कल के सहारे आज को मत गँवाओ नर । कल को क्या होना, ये किसने जाना है ? आज अपना कल किस का है किसने देखा है ? पल भर की जिन्दगी किसने जीभर के […]
घर की जिम्मेदारियों होती जिनके कंधो पे । मान-मर्यादा के सीमा का पालन करे । वो धीर पुरूष-मर्द कठिन कार्य करे । परिवार चलाये जो अपने मेहनत के पसीने से । अर्द्धंगिनी को जो सीता-सावित्री […]
बड़ी होती है जब किसी पिता की पुत्री । वर ढूँढने जब वो निकलते है सज्जनों की बस्ती । सौभाग्य वश सज्जन भगवान राम के सेवक होते है । इसलिए पिता प्रसन्नता से कन्यादान करते […]
तेरे संग मैंने ख्याब जो देखे वो ख्याब नहीं जिन्दगी है मेरी । ख्याब के सहारे कटते नहीं दिन, रात भी है बोझिल दिन भी है सुना । भूले है सपने, फूटी किस्मत, टूटे है […]
लोगों की परिस्थितियाँ अब कुछ ऐसी होने लगी है । लोग भौतिकवादिता की ओर अब बढ़ने लगे है। चारों तरफ हा-हाकार मची है जनसंख्या नियंत्रण का। फिर भी लोग इन्द्रियों के दास बनने लगे है […]
देख धरा की स्थिति अब मानव का दिल खिल उठता है। उसे खण्डित-खण्डित करके अपनी जिज्ञासा पूरा करता है। धरनी की दुःख सुनता अब कौन, धरती पूजा अब होता कहाँ? अपनी अज्ञात मा को अब […]
सबका सुनो, गैर से सुनो अपनी निन्दा तुम । ये जो निन्दा करते लोग, ये तेरे दुश्मन नहीं । ये तो तेरे जिन्दगी के सूर्यताप है । जिनके उगने से प्रकाशमय होता सारा संसार है।।1।। […]
जब लोग करे तुम्हारी निन्दा,सुनके क्रोध को तुम करो संयम । यह है तेरे अन्दर उच्च विचार, इसी से होगा तेरा कल्याण । जो तेरे दोष-अवगुण को बताता, ऐसे नर से मत खफा होना यार […]
वेद-पुराणों की बात है निराली । राष्ट्रसेवा है सबसे सर्वोपरी । जब तक राष्ट्र में एक भी प्रजा भूखा हो, तब-तक हक नहीं भोजन करने को राजा का । यह है उच्च आदर्श राजा का, […]
भूलाके सादगी हमने अपनी अस्तित्व ही मिटायी है । ब्रह्मचर्य को जिन्दगी का हिस्सा न बनाके अपनी सारी शक्तियाँ यूँही गँवाई है । किया है दुरूपयोग नरतन का हमने ऐसे ही व्यर्थ में जिन्दगी जी […]
बाबुल की दुआ है साथ तेरे, आशीष है मां का पास तेरे । दुनिया की न लगे बला तुझे , ईश्वर की रहमत साथ तेरे ।। जा-जा री बहना प्रातःबेला है संग तेरे -2 छाँव-छाँव […]
मुझसे ये हाल दिल का कहीं कहा नहीं जाता है । पास तुम होते मगर तुमको ये बताया नहीं जाता है । जानता हूँ कि तुझे प्यार है मुझसे बेपनाहं सनम । ये तुमसे भी […]
1 जो आत्मनिर्भर है, उन्हें आत्मसम्मान की शिक्षा दे रही हैं क्यूँ हमारी सरकार? मजदुर अपने बलबूते पर ही जिन्दगी जीते, ये जाने ले हमारी सरकार । ये किसी के आगे भीख नहीं माँगते, जिन्दगी […]
है समाधान सभी समस्याओं का, भीरू-डरपोक नहीं चलाते राजव्यवस्था को । वो लूटते जग को और शोषण करते आमजनता पर । कर को खर्च करते हैं, वो निज-अपने स्वार्थ में और आमजनता को प्रताड़ित करते […]
अंधकार घना है कठिन घड़ी । हिम्मत रखिए मिलेंगे मंजिल । दूर-दूर तक जब कोई राह न सूझे । तो भी हिम्मत हारना हमें ना है मंजूर । हिम्मत-संघर्षों से एक नई राह बनायेंगे । […]
हमने सच बोला, वो बुरा मान गए ज़रा मुंह खोला, वो बुरा मान गए। सदियों से सुनती ही तो आई है नारी, आज ज़रा सुनाया, तो बुरा मान गए। औरों की चाहत को हमेशा चाहा, […]
छोड़ो व्यर्थ की बाते अब हम राम का नाम लेते है । सारी दुनिया को भूलाके अब हम राम को याद करते है । छोड़ों व्यर्थ की बाते अब हम राम का गुणगान करते है। […]
तेरे दर पे आया माता मैं, मेरी झोली भर दे । अपनी दया की वृष्टि से मेरी मईया मेरी मुरादे पुरी कर दे। बड़ी आश लगाये आये मा मुझे आशावान बना दे। तेरे दर पे […]
है ब्रह्मचर्य व्रत सभी व्रतों में महान । यह है शक्ति का आधार व गति का मूलाधार । इससे होता नर शारीरिक व मानसिक विकास । अतः तुम कर लो बंदे ब्रह्मचर्य व्रत महान । […]
हम उन बच्चों के साथी है ,जिनके पास न कोई साधन है। उनके पिता आत्मनिर्भर है, वो सरकारी की भ्रष्टाचारियों के चंगुल में फंसे है। वो लाख कमाते है, फिर भी अपनें बच्चें को अच्छी […]
जिस देश को कभी सोने की चिड़िया कहीं जाती थी । जिसकी धरा कभी सोने-ही-सोने उगलती थी । उस देश की जनता आज भूख से क्यूँ मरती है? निर्वस्त्र क्यूँ रहती उस देश के जनता […]
अति साहसी, मायादेवी, मूर्ख, लोभी जिनके व्यवहार। अपवित्र, निर्दयी, अवगुणों से भरा जिनका तन। छल-कपट से जो बाज न आये, यह है दुष्ट-निर्दयी स्त्री का गुण। पर सब नारी नहीं होत, इन अवगुणों के अधीन। […]
करो परिश्रम कठिनाई से, तुम जब तक पास तुम्हारे तन है । लहरों से तुम हार मत मानो, ये बात सीखो तुम मँक्षियारा से । जब मँक्षियारा नाव चलाता, विचलित नहीं होता वह विपरित धाराओं […]
हम उस देश के वासी है, जिस देश के घरेलु सकल उत्पाद कभी आकाश चुम रही थी । हम उस देश के वासी है, जिस देश की महानता का परचम कभी सारी विश्व में फैली […]
गाँव, मात-पिता, समाज से बना, हमारा ये प्रथम संसार है । सारी जहां में प्रथम पूजनीय, यहीं हमारा जन्मस्थान है ।। घर में ममता स्वरूप माता व पिता देवता समान है । लक्ष्मण जैसा भाई […]
राजतंत्र हो या प्रजातंत्र सब चाहते है नृपदुखभंजन। पर किसी क्या मिला ये जानते है जगत-जहां। सब रामराज की कल्पना करते पर राम की नीति कोय न जाने? राम की व्यवस्था चाहते हो तो अपनाओ […]
उठ मेरी छोटी सी गुड़िया सुबह हो गई उठ जा अब बाहर सूरज चमक रहा है सुबह हो गई उठ जा अब। अपनी सुन्दर बाल लीलाओं से महका गुड़िया रानी अभी बोलना सीख न पाई […]
हर शायर के पीछे के दर्द को समझो ज़माने ने उसे नहीं समझा और तुम अल्फ़ाज़ों मे बहक जाते हो
वृत्ति मान्गकर जीवन यापन करने वाले के अंतरंग द्वारिकाधीश थे निज हाथों से सुदामा के चरण पखारते सच्चे मित्र श्रीकृष्ण थे ।। मित्रता हो ऐसी जहाँ भेद न कोई रह जावै मित्र का दुख स्वदुख […]
तुम्हारी राह देखकर ही तो मैं टूट गई हर रिश्ते से ऊपर था तू तेरे इश्क में मैं मगरूर हुई तेरे इश्क का चंदन घिसकर अंग प्रफुल्लित हुए सदा तेरी रजधूल ओ प्रियतम! मेरे मेरी […]
तुमने तो बहन आज मुझे पहना दी सुन्दर सी राखी, प्यारी सी कोमल सी राखी यह प्रेम रंग रंगती राखी। यह राखी है अनमोल सूत्र जो जोड़ रहा विश्वास अटल कोई उपहार नहीं ऐसा जो […]
कल ही आ जाना बहना तू परसों तो रक्षाबंधन है, कुछ देर बैठकर बचपन की यादों को ताज़ा कर लेंगे। तू भी अपने में व्यस्त हो गई हमको भी फुर्सत न रही अब कल ही […]
यशोदा ,देवकी को लगे है, कान्हा सबसे प्यारा। मेरी मैया सबसे प्यारी, कान्हा का ये नारा। मैया मैया कहता कान्हा, लगे बहुत है प्यारा। मेरी मैया सबसे सुंदर, माने ये जग सारा।
दिशा तुम्हारे कदमों की कविता पहचाना करती है, तभी यदा-कदा लिखने को प्रेरित कवि को करती है।
अभी और भी तीर हैं,तरकश में तेरे बाक़ी, हार से पहले रोता क्यूं है। इस युद्ध में तेरे विरूद्ध हैं कुछ लोग, कुछ लोग तेरे साथ भी हैं,। पलकें भिगोता क्यूं है।
अपनों की भीड़ में अकेली सी, खुद ही अपनी हूं मैं सहेली सी। किसी को अपना .गम बता के भी क्या हासिल, सुलझानी है खुद ही इस जीवन की पहेली।
चार राखी लाना पापा अबकी रक्षाबन्धन में। बड़े प्यार से बांधूगी मैं वीरों के अभिनन्दन में।। पहली राखी बांधूगी मैं भारत के वीर शहीदों को। दूसरी राखी बांधूगी मैं शरहद के वीर सपूतों को।। तीसरी […]
ज़िंदगी की तपिश बहुत हमने सही, ये तपन अब खलने लगी। रौशनी की सदा आस ही रही, रौशनी की कमी अब खलने लगी। बहुत चोटें लगीं, बहुत घाव सहे सहते ही रहे कभी कुछ ना […]
मित्र दिल के सैनिकों की जब खड़ी होंगी कतारें उन कतारों में विभूषित आप सेनापति रहें।
आया राखी का पावन त्योहार भैया। तुझको पुकारे बहना का प्यार भैया।। फूल अक्षत चंदन से मैं थाली सजाई। मेवा मधुर और घी की ज्योति जगाई।। आंगन में अहिपन बनाई दो-चार भैया। आजा, तुझको पुकारे […]
वो वक़्त जब कॉलेज में थे, तुम मिलने आया करते थे। कहते थे बस दोस्त रहेंगे, कॉफी साथ पिया करते थे। कहते थे तुम प्यार मत करना बातें रातभर किया करते थे। दोस्तों को अक्सर […]
जिंदगी में मुकाम और भी हैं मंज़िल एक है पर रास्ते और भी हैं। कितनी छोटी है जीवन की चादर पैर पसारने के आसमान और भी हैं। यूंँ नहीं बढ़ते हैं यहाँ फासले दुश्मनी के […]
जीवन का सफ़र सुहाना है साथी, गर साथ तुम्हारा है। जीवन की इस बगिया में, मैं तेरा सहारा हूं, तू मेरा सहारा है। बच्चों की ज़िम्मेदारी करनी है पूरी, अब ये काम हमारा है। जीवन […]
जिन्दगी में मुश्किलें हैं, और भी तो अड़चनें हैं, आपसे हम दूर रहकर क्या हमेशा खुश रहे हैं।
सख्ती से नहीं नरमी से पेश आएंगे किसी के प्यार में हम यह भी कर जाएंगे। यूं तो बुरे नहीं हैं हम साहब पर किसी के मार्गदर्शन में हम और सुधर जाएंगे।
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