हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय, प्रभु माया के अधीन है । प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ, दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है । हम माया के दासी, लोभी, भिखारी, दुर्जन, दुष्ट, विकारी प्रभु पापी है । प्रभु […]
हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय, प्रभु माया के अधीन है । प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ, दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है । हम माया के दासी, लोभी, भिखारी, दुर्जन, दुष्ट, विकारी प्रभु पापी है । प्रभु […]
कौन-सी नीतियों पे हमारी देश चल रही है? कौन-से व्यवस्था में हम जी रहे हैं? हर-जगह शोषण-ही-शोषण दिखाई दे रही है? आमजनता का बुरा हाल है इस देश में, और सरकार अपने ही नीति पे […]
तुम जो पूछते हो और सब ठीक ठाक अपनी तकलीफे गिनाऊ तोह क्या सच मे सुनोगे नहीं ना, तोह क्यों पूछते हो
चिख-चिल्लाकर ही देशभक्ति दिखाई जा सकती है क्या? जो मौन है कुछ बोलते नही, क्या वह देशभक्त नहीं है क्या है? जो चीखते है हम भगत है, वह भगत सिंह को जानते है क्या? कवि […]
निज राष्ट्र की दुर्दशा अब कोई क्यूँ कहता नहीं? भारतेन्दु हरिश्चन्द्रजी कह गये भारत दुर्दशा, अब कोई कवि महाराज जी ऐसी कविता क्यूँ लिखते नहीं? अंग्रेजों ने हमारी मान-सम्मान व सारी मर्यादा को मिट्टी में […]
।। दुषित व्यवस्था व वेतन की माँग ।। अब किसी मुद्दे पर प्रेम से बात से होती कहाँ? जो समाधान जनहित के लिए निकले किसी समस्या का । अब तो संसद में सिर्फ बहस ही […]
आइनस्टाईन जी कहते हैः- हम सबसे एक जैसा बात करते हैं, चाहे वह कुड़ा उठाने वाला बालक हो या चाहे वह किसी विश्वाविद्यालय का आचर्य हो कुल लोग जहां में मजदुर को हीन समझते हैं,इन्हें […]
होते हम खूद ही दुःखों का जनक और मिथ्यारोपन लगाते गैरों पर । अपने व्यवहार प्रतिकूल संबंध बनाते, ये नहीं देख पाते हम । इसलिए तो जगह-जगह पे ठोकर खाते-फिरते हैं हम । निज स्वभाव […]
तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया । तुझे भूलाके हमने खूद को याद किया ।। अपनी पहचान भूलाके हमने साथ प्यार का सपना देखा । कमबख्त! तुने मुफलिस समझे मेरा प्रेम-प्रस्ताव अस्वीकार किया […]
मा समान नहीं जग में कोई ।। मा समान नहीं जग में कोई, पिता सम नहीं कोई महान । भाई जैसा न कोई साथी है, बहन जैसा न किसी का प्यार । आध अंग की […]
तुम कर लो लाख कोशिशे हिन्द को बर्बाद करने की । चाहे कोई भी भयंकर कुटनीति अपनाओ तुम । हो सके तो तुम अपनी सारी शक्ति लगा दो । मगर हो नहीं सकता सदा असत्य […]
गजल ।। क्या लिखूँ जो दुनिया को भाये । मैं नहीं तो क्या कोई तो भाये जहां को ।।1।। जहां को अगर लगते है शख्स वो प्यारे । तो मैं क्यूँ महफिल में सरेआम बदनाम […]
अंधियारा उजियारा का क्या संबंध है ? जैसे जिन्दगी में कभी दुःखों का पहाड़ है । तो कभी पवित्र आँगन में बहार है । जैसे सावन में मेघ के जल धरा के लिए अमृतसमान है […]
वह ज़ालिम हर मर्तबा इस दिल पे सितम पे ढाते रहे। हम उनके सितम को अपनी धड़कन समझते रहे।।
नई उमंगें, नया सवेरा आज मान ले कहना मेरा कदम बढ़ा ले उन्नति पथ पर क्यों बीती चिन्ता ने घेरा। रात-रात भर सपने देखे इधर-उधर की भारी उलझन कहाँ भटकता रहा रात भर दिन होते […]
पढ़े-लिखे बेरोजगारों की फौज खड़ी है, चारों ओर , कैसे हल निकले अब इसका घटा छा रही है घनघोर । जाग देश के शीर्ष सिंहासन कुछ ऐसी अब नीति बना, युवा फूल खिलने लग जाएँ […]
ओ मेरे जीवन साथी! तुझमें कितना है स्नेह भरा, तू इतना बेचैन हो जाती है यदि हो मुझको दर्द ज़रा। मुझको ही क्या घर में कोई छींके भी तो तू व्यथित हुई झट से काढ़ा […]
मेरा स्वप्निल प्रियतम तो कवितायें लिखने वाला हो, अपनी सुन्दर रचनाओं में हर भाव सजाने वाला को। अगर किसी कारणवश मुझमें कभी निराशा घर कर जाए, मेरा स्वप्निल प्रियतम तत्क्षण आशा का संचार करे। उसकी […]
आज तुम्हारी फोटो देखी जब मैनें स्टेटस पे। मेरे चेहरे पर ग्लो आया जैसे आता है फोकस से। मुझसे राखी बंधवाने की खातिर लेकिन जब तुम मेरे घर आये। पैरों तले जमीन गई आँखों में […]
वाह वाह मेरे विश्वकर्मा जी शिल्पकला का सबको कुछ न कुछ तो ज्ञान दिया। किसी को बढ़ई बनया तो किसी को कुम्भकार का मान दिया।। लोहार सोनार मिस्त्री का रूप राजकारीगर का शान दिया। पर […]
कविता – रक्षा का वादा | राखी का धागा भाई का बहना को रक्षा का वादा | रहेगा अजर अमर प्यार भाई बहन का जियादा | फूलो कली नाजो से पली बहना सबका दुलार है […]
मन के गम दूर करें आओ दो बात करें, जो हैं दिल टूटे हुए, उनमें उत्साह भरें। किसी की चाह रखें, न कभी डाह रखें, कठिन हो वक्त भले न कभी आह भरें। मजे भरपूर […]
आज अचानक माँ मुस्काई फोन उठाने के बाद बोलीं आकर खुशखबरी है बैठी मेरे पास सबने पूँछा क्या खुशखबरी ये तो हमें बताओ उत्सुकता में दिल धड़क रहा है और ना अब तड़पाओ उसकी शादी […]
लट के श्याम उलझे केशों की वो चमक अब, नैनों की नीलिमा अब होंठों की लालिमा अब, पतली सी वो कमर अब बाली सी वो उमर अब तोते सी नासिका अब पाने की लालसा अब, […]
चिंता त्याग प्रसन्नचित रह कविता तेरे साथ खड़ी, पूरी साथ न भी दे पाए तो भी ताकत बनी खड़ी।
सिर्फ धागों की नहीं है अहमियत यहाँ रिश्तो में प्यार की मिठास भी घुलती रहनी चाहिए। सिर्फ तू प्यार जताए तो कैसे चलेगा अक्सर नोक-झोंक भी होनी चाहिए। रेशम के धागे तेरी कलाई सजाते हैं […]
मेरा मित्र, सखा तो मैं ही स्वयं हूँ, मैं हूँ सुदामा तो मैं ही कृष्ण हूँ। मैं ही सुख- दुख का संयोग हूँ, मैं हूँ मिलन तो मैं ही वियोग हूँ। मैं माँ की ममता- […]
🌹🌹 Friendship Day special🌹🌹 गजल:- याराना प्रेम से भी बड़ा बन्धन, सुकून आये दोस्ती में। कभी कृष्णा कभी अर्जुन याद आये दोस्ती में। अपनी जिंदगी से हार थक करके हर इन्सान, सभी परेशानियां और गम […]
सबके के सब मिट्टी के मोल है । पैसा, धन-दौलत किसके संग है । आज जो सड़क का भिखारी है । कल वह अपनी मुकद्दर का दाता है ।।1।। किसका क्या है जहां में ये […]
स्वतंत्रता की नीब को मिट्टी खा रही है । सरकार को देख आज जनता काँप रही है । जो एक दिन तपस्वी राजा राम की माँग कर रहे थे । आज वो जनता रावण को […]
माँझी के नाव चलता बीच मँझधार में । उसे कोई विपरित धारा का प्रवाह रोकता नहीं । क्योंकि वह हर परिस्थिति में नाव को खेवा है । उसे सिर्फ मंजिल दिखता है, राह उसे बुलाता […]
वासना की गंदी हवा बह रही है । चारों-तरफ अत्याचार फैल रही है । त्राहि-त्राहि करते संत आज जगत में । दुर्जनों की गर्जना धरा को दबा रही है । सज्जनों की चिख अंबर तक […]
निर्मल मन को भाते हर लोग है । चाहे वो नर गोरा हो या काला । इन्हें रंग भेद आता नहीं । इसलिए ऐसे लोग जहां में संत कहलाते है ।।1।। संतों की महिमा इस […]
मत बर्बाद कर ए मेरे दोस्त नर तन बड़े ही जतन से मिले है ये मानुष-जन्म। कर ले दान-धर्म, दीन-दुःखी की सेवा कर । व्यर्थ मत गँवा जिन्दगी, कुछ तो ऐसे करम करें । जिसे […]
दुर्जनों को सुख मिलता है सज्जनों को चिढ़ाके । ये उसके अपने प्राकृत स्वभाव है, बदलते नहीं बदलते है । इन्हें परनिंदा, दुसरों की पीड़ा से आनंद मिलता है । यह दुर्जनों का अपना स्वभाव […]
देहिक सुख के कारण मनुष्य आंतरिक शक्ति खोते है । ब्रह्मचर्य व्रत को खंडित-खंडित करके अपनी जिज्ञासा पूरी करता है । और भी और भी सुख के कारण सारी शक्तियाँ गँवाता है । जो नर […]
जहां की भीड़ में मतलबी लोगों के संग में । बहुत कुछ सीखने को मिलता है, वो है जिन्दगी । पर जिन्दगी के भी कुछ रंग है । बेरंग है जिन्दगी हमारी । ये कहती […]
मैं आखिरी मुहब्बत का दस्तक दे रहा हूँ । और वो गैर की बाहों में सोई जा रही है । मैं वफा की डोर में बंधा हूँ । और अब वह वेवफा की रश्में निभा […]
जीवन की आपाधापी में त्यौहार सांकेतिक हो गए, जबसे कोरोना आया है तब से ऑनलाइन हो गए। प्यार ऑनलाइन हो गया मुलाकात ऑनलाइन हो गई, राखी ऑनलाइन कलाई ऑनलाइन हो गई बस जज्बात ऑफ लाइन […]
दिल खोल कर त्यौहार मनाओ दिल खोल कर प्यार दे दो राखी में बहन आई होगी दिल खोलकर उपहार दे दो।1। रोज-रोज ठगता है आज तो कंजूसी छोड़ आज तो राखी है भाई आज तो […]
भाई -बहन का प्यार भरा यह पावन पर्व मुबारक हो, खुशियों से भरा, जज्बात भरा, यह पावन पर्व मुबारक हो। सदा सम्मान रहे रिश्तों में प्रेम भरा ही भाव रहे, कैसी भी कोई स्थिति हो […]
पटरी पर फिर लौटा जीवन, पर पहले जैसी बात नहीं है। मुंह ढ़ककर घूमे हैं दिनभर, पहले जैसी रात नहीं है। हॉल, मॉल सब बंद पड़े हैं, विद्यालयों पर लगे हैं ताले। रौनक गुम है […]
तू जिंदगी ! दर्द भरे आसमान सी, मुसीबतें काले बादल है, मगर मैं ठहरा! हौसलों के रॉकेट सा , चीरता मेघों को जाऊंगा, जिंदगी तेरे आसमान को छलनी करता ,उभर जाऊंगा। ———मोहन सिंह “मानुष”
आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं
यह जो रोग फैला है यह मानवता के लिए भारी संकट है, जूझ रही है मानव जाति इस कठिनाई से, डॉक्टर, नर्स, फार्मेसिस्ट और लैब टैक्नीशियन जुटे हैं पूरी सिद्दत से पीड़ितों की सेवा में, […]
पूर्वसंध्या पर रक्षाबंदन की आप सभी को बहुत बधाई, बहनें सजाएंगी कल अपने भैया की मधुर कलाई। रेशमी धागे से बनी रंग बिरंगी राखी सजेगी, पूड़ी पकवान मिष्ठान बर्फी चॉकलेट और रसमलाई। पूर्वसंध्या पर रक्षाबंदन […]
पुकार रहा है जरूरतमंद तुम्हें आओ मदद करो मेरी, बेरोजगारी का समय है, कोविड के कारण छिन गया है रोजगार, शहर में कमाता था दो चार वो बंद हो गया गाँव लौट आया, यहाँ भी […]
🌹🌹 Friendship Day special🌹🌹 गजल:- 🌹🌹याराना🌹🌹 प्रेम से भी बड़ा बन्धन, सुकून आये दोस्ती में। कभी कृष्णा कभी अर्जुन याद आये दोस्ती में। अपनी जिंदगी से हार थक करके हर इन्सान, सभी परेशानियां और गम […]
दुनिया में छाया कैसा मंजर है धरा सूनी सूनी लागे खोया-सा अंबर है कोविड 19 से हर तरफ मचा हहाकार है बस एक संजीवनी बूटी की फिर से दरकार है ।। कहाँ छिपे हो संकट […]
तू मुझे चाह ले संवर जाऊं।। या कहे टूट कर बिखर जाऊं।। रास्ता कौन मेरा तकता है लौटकर किसलिए मैं घर जाऊं।। तू सफ़र में हो तो ये मुमकिन है मैं संग-ए-मील सा गुज़र जाऊं।। […]
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