ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं […]
ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं […]
Aasan nahi hota hai Kavita yoon hi likhana Dil ke jakhm fir se Hare karne padate hain.
माखन चोर माखन चोर। ब्रज में मचा है यही शोर ।। सब से नजरे बचा के देखो। कैसे भागे माखन चोर।। कहीं मटकी फूटी , कहीं माखन बिखरे । पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो, व्रज में […]
लगाव नहीं जिस देश के युवाओं को राजनीति व अर्थशास्त्र के क्षेत्र में । वो कैसे जानेंगे हम किस व्यवस्था में जी रहे हैं और कैसी स्थिति है हमारी देश की? वो कैसे बदलेंगे कुव्यवस्था […]
जिस नर को अपनी धरा पे अपनी भोग की वस्तु उपलब्ध न हो ।। वह नर नहीं वह तो निज धरा की बोझ है । अगर उन्हें निज धरणी से प्यार नहीं । तो क्या […]
हम भारत के वासी है, संस्कृति हमारी पहचान है । सारी जहां में फैली हुई, हमारी मान-सम्मान है । सादगी है हमारी सबसे निराली, अजब न्यारी है संस्कृति हमारी । प्रशंसक है सारी दुनिया हमारी, […]
रोती धरती चिखता अम्बर, सारा जहां है सोता-सा । आज भी धरती रोती अपने पुत्रों के इच्छाओं पे । मारुत भी आज दुषित हो चुका है, मानव के व्यवहारों से । मानव अब मानव बनने […]
मैं कवि हूँ, मैं फौलाद नहीं, सच कहता हूं, सच बात यही। जो सच से डरते हैं केवल कुढ़ते हैं वे सच बात यही।
रात भर के अंधेरे को जिस तरह सूर्य ने आकर , भगाया एक ही क्षण में, उस तरह आस का सूरज उगाओ आप भी मन में। भगाओ दूर चिंता को नजर रख लक्ष्य पर अपनी […]
हम उस देश के प्रहरी है जिस देश में तिरंगा लहराता है। बुलंदी वाले छत्रपति शिवाजी के चर्चे शत्रु भी करता है।। पंजाबी गुजराती मराठी गोरखा मद्रासी और मुसलमान। सभी देश पे आज भी अपनी […]
अहिल्या पत्थर बनायी जाती है —————******—————— करनी किसी की भी हो,सतायी नारी जाती है । हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।। युग युगांतर से यही,बस होता आया है अहम तुष्टि हो नर […]
इल्म भी नहीं हुआ तेरे जाने का आज भी कही बसती हो मेरे दिल मे इन बारिस की शामों मे अक्सर याद आती हो हा तेरा घरौंदा छोड़ उड़ गई पर देखो आज भी संभाल […]
Kavi man bahut hi komal hai. Hans kar jeena iska hal hai.
Chota sa dil hai toot hi jaata hai. Par koi nahi ye duniya hai. Yahan aisa ho jaata hai. Aawaz uthaane ki himmat hai Tujhame pagali. Rote nahi hain aise noor chala jaata. Just for […]
मेरा भारत कमजोर नहीं मेरा भारत कमजोर नहीं तू चाइना आँख दिखाना मत, औरों के कंधे पर रखकर हमको बन्दूक दिखाना मत। हम तेरी गीदड़ भभकी का उत्तर देने में सक्षम हैं, जल-थल- नभ में […]
ब्रह्मचर्य, हाँ ठीक है कहना, लेकिन क्या भारतमाता के सभी पुत्र ब्रह्मचारी बन सृजन से दूर चले जाएँ। नहीं – नहीं नयी पीढ़ी का सृजन युवा रक्त से हो, इसलिए विरक्ति की नहीं जरुरत सृजन […]
रक्षा का त्योहार है, ये बंधन नहीं है, प्यार है। मूल्य ना आंको भेंट का, यह प्रेम का उपहार है। दुरियां- नजदिकीयां, ये भृम का जंजाल है। भाव बिना हैं तीर्थ क्या, प्रेम हो तो […]
तू ठेस देने वालों से न घबरा तेरे में हुनर बहुत है, तेरी लेखनी की धार में खनक बहुत है। हवाएं तो आती रहेंगी जाती रहेंगी, आँख में रेत का कण डालकर रुलाती रहेंगी, लेकिन […]
कवियों की नगरी में भी दिल दुखाने लगें हैं लोग ना चाहते हुए भी पास आने लगे हैं लोग। आम जिंदगी से परेशान होकर जी लेते हैं हम कल्पना में, वहाँ भी हलचल मचाने लगे […]
लोगों की नज़रों का क्या कहना झटपट रंग जमाते हैं झूँठे-मूँठे रिश्ते खूब बनाते हैं। माँ को कुछ समझते ही नहीं हर गलियारों में शोर मचाते हैं। बहन को माँ कहने लगे हैं लोग लोगों […]
कभी तुम झगड़ती हो, तो कभी रुठ जाती हो। फिर कभी चाय का कप लेकर, मुझे मनाती हो। पल-पल गुजरती जिन्दगी, रेत सी फिसलती जाती है। ओर तुम सारा दिन, मकां को घर बनाती हो। […]
दिल में कुछ ,जबान पर कुछ नजर आता है अपनों में भी ,शत्रु नजर आता है कुछ पलों की मुलाकात से ,पहचान नहीं सकते किसी के ह्रदय में क्या है ,जान नहीं सकते हर चेहरे […]
एक रात की बात बताऊं मित्रों , मेरे घर पर आए चोर । थी मैं अकेली उस दिन घर पर, मुझ पर आज़माने लग गए ज़ोर । “पैसे देदो, ज़ेवर देदो”, उनकी मांगों का ना […]
ये कैसी है रीति ये कैसी है नीति? निज राष्ट्र की जनता भूख से हैं मरती । ये अन्न स्वयं उगाती फिर भी ये अन्न को क्यूँ तरसती? ये कर भी देती राष्ट्र को फिर […]
हम दीन-दुखी, निर्बल, असहाय, प्रभु माया के अधीन है । प्रभु तुम दीनदयाल, दीनानाथ, दुखभंजन आदि प्रभु तेरो नाम है । हम माया के दासी, लोभी, भिखारी, दुर्जन, दुष्ट, विकारी प्रभु पापी है । प्रभु […]
कौन-सी नीतियों पे हमारी देश चल रही है? कौन-से व्यवस्था में हम जी रहे हैं? हर-जगह शोषण-ही-शोषण दिखाई दे रही है? आमजनता का बुरा हाल है इस देश में, और सरकार अपने ही नीति पे […]
तुम जो पूछते हो और सब ठीक ठाक अपनी तकलीफे गिनाऊ तोह क्या सच मे सुनोगे नहीं ना, तोह क्यों पूछते हो
चिख-चिल्लाकर ही देशभक्ति दिखाई जा सकती है क्या? जो मौन है कुछ बोलते नही, क्या वह देशभक्त नहीं है क्या है? जो चीखते है हम भगत है, वह भगत सिंह को जानते है क्या? कवि […]
निज राष्ट्र की दुर्दशा अब कोई क्यूँ कहता नहीं? भारतेन्दु हरिश्चन्द्रजी कह गये भारत दुर्दशा, अब कोई कवि महाराज जी ऐसी कविता क्यूँ लिखते नहीं? अंग्रेजों ने हमारी मान-सम्मान व सारी मर्यादा को मिट्टी में […]
।। दुषित व्यवस्था व वेतन की माँग ।। अब किसी मुद्दे पर प्रेम से बात से होती कहाँ? जो समाधान जनहित के लिए निकले किसी समस्या का । अब तो संसद में सिर्फ बहस ही […]
आइनस्टाईन जी कहते हैः- हम सबसे एक जैसा बात करते हैं, चाहे वह कुड़ा उठाने वाला बालक हो या चाहे वह किसी विश्वाविद्यालय का आचर्य हो कुल लोग जहां में मजदुर को हीन समझते हैं,इन्हें […]
होते हम खूद ही दुःखों का जनक और मिथ्यारोपन लगाते गैरों पर । अपने व्यवहार प्रतिकूल संबंध बनाते, ये नहीं देख पाते हम । इसलिए तो जगह-जगह पे ठोकर खाते-फिरते हैं हम । निज स्वभाव […]
तेरे दर्द ने हमें इस तरह बेगाना किया । तुझे भूलाके हमने खूद को याद किया ।। अपनी पहचान भूलाके हमने साथ प्यार का सपना देखा । कमबख्त! तुने मुफलिस समझे मेरा प्रेम-प्रस्ताव अस्वीकार किया […]
मा समान नहीं जग में कोई ।। मा समान नहीं जग में कोई, पिता सम नहीं कोई महान । भाई जैसा न कोई साथी है, बहन जैसा न किसी का प्यार । आध अंग की […]
तुम कर लो लाख कोशिशे हिन्द को बर्बाद करने की । चाहे कोई भी भयंकर कुटनीति अपनाओ तुम । हो सके तो तुम अपनी सारी शक्ति लगा दो । मगर हो नहीं सकता सदा असत्य […]
गजल ।। क्या लिखूँ जो दुनिया को भाये । मैं नहीं तो क्या कोई तो भाये जहां को ।।1।। जहां को अगर लगते है शख्स वो प्यारे । तो मैं क्यूँ महफिल में सरेआम बदनाम […]
अंधियारा उजियारा का क्या संबंध है ? जैसे जिन्दगी में कभी दुःखों का पहाड़ है । तो कभी पवित्र आँगन में बहार है । जैसे सावन में मेघ के जल धरा के लिए अमृतसमान है […]
वह ज़ालिम हर मर्तबा इस दिल पे सितम पे ढाते रहे। हम उनके सितम को अपनी धड़कन समझते रहे।।
नई उमंगें, नया सवेरा आज मान ले कहना मेरा कदम बढ़ा ले उन्नति पथ पर क्यों बीती चिन्ता ने घेरा। रात-रात भर सपने देखे इधर-उधर की भारी उलझन कहाँ भटकता रहा रात भर दिन होते […]
पढ़े-लिखे बेरोजगारों की फौज खड़ी है, चारों ओर , कैसे हल निकले अब इसका घटा छा रही है घनघोर । जाग देश के शीर्ष सिंहासन कुछ ऐसी अब नीति बना, युवा फूल खिलने लग जाएँ […]
ओ मेरे जीवन साथी! तुझमें कितना है स्नेह भरा, तू इतना बेचैन हो जाती है यदि हो मुझको दर्द ज़रा। मुझको ही क्या घर में कोई छींके भी तो तू व्यथित हुई झट से काढ़ा […]
मेरा स्वप्निल प्रियतम तो कवितायें लिखने वाला हो, अपनी सुन्दर रचनाओं में हर भाव सजाने वाला को। अगर किसी कारणवश मुझमें कभी निराशा घर कर जाए, मेरा स्वप्निल प्रियतम तत्क्षण आशा का संचार करे। उसकी […]
आज तुम्हारी फोटो देखी जब मैनें स्टेटस पे। मेरे चेहरे पर ग्लो आया जैसे आता है फोकस से। मुझसे राखी बंधवाने की खातिर लेकिन जब तुम मेरे घर आये। पैरों तले जमीन गई आँखों में […]
वाह वाह मेरे विश्वकर्मा जी शिल्पकला का सबको कुछ न कुछ तो ज्ञान दिया। किसी को बढ़ई बनया तो किसी को कुम्भकार का मान दिया।। लोहार सोनार मिस्त्री का रूप राजकारीगर का शान दिया। पर […]
कविता – रक्षा का वादा | राखी का धागा भाई का बहना को रक्षा का वादा | रहेगा अजर अमर प्यार भाई बहन का जियादा | फूलो कली नाजो से पली बहना सबका दुलार है […]
मन के गम दूर करें आओ दो बात करें, जो हैं दिल टूटे हुए, उनमें उत्साह भरें। किसी की चाह रखें, न कभी डाह रखें, कठिन हो वक्त भले न कभी आह भरें। मजे भरपूर […]
आज अचानक माँ मुस्काई फोन उठाने के बाद बोलीं आकर खुशखबरी है बैठी मेरे पास सबने पूँछा क्या खुशखबरी ये तो हमें बताओ उत्सुकता में दिल धड़क रहा है और ना अब तड़पाओ उसकी शादी […]
लट के श्याम उलझे केशों की वो चमक अब, नैनों की नीलिमा अब होंठों की लालिमा अब, पतली सी वो कमर अब बाली सी वो उमर अब तोते सी नासिका अब पाने की लालसा अब, […]
चिंता त्याग प्रसन्नचित रह कविता तेरे साथ खड़ी, पूरी साथ न भी दे पाए तो भी ताकत बनी खड़ी।
सिर्फ धागों की नहीं है अहमियत यहाँ रिश्तो में प्यार की मिठास भी घुलती रहनी चाहिए। सिर्फ तू प्यार जताए तो कैसे चलेगा अक्सर नोक-झोंक भी होनी चाहिए। रेशम के धागे तेरी कलाई सजाते हैं […]
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