चिडिया रंग – बिरंगे रंगो में कूदक फूदक कर उडती मीठे मधुर स्वरो से घर आंगन को महकाती । चुग – चुग दाने खाना बच्चो जैसे इठलाना चुनमुन प्यारी चिडिया तुम रंग बहुत बदलती हो […]
चिडिया रंग – बिरंगे रंगो में कूदक फूदक कर उडती मीठे मधुर स्वरो से घर आंगन को महकाती । चुग – चुग दाने खाना बच्चो जैसे इठलाना चुनमुन प्यारी चिडिया तुम रंग बहुत बदलती हो […]
बेवफा प्यार ) मत कर पगले प्यार तू बहुत ही पछतायेगा दिल में लेकर कसक तडपता ही रह जायेगा । बिछडती मंजिल अपनी दर्द गहरा दे जायेगा पल – पल घुटेगा तू जुदाई ना सह […]
बाबूल छोड चली मैं बाबूल को अनजान डगर सा लगता है नयन भरे हैं नीर मेरे सब अपने पराये लगते हैं । अधिकार खत्म कर जा रही ससुराल का दामन पकडने इतनी रूहासी हो गयी […]
आत्मकथा दोस्तो मैं बहुत गरिब परिवार से रह चुका हूॅ बात उस समय की है जब मै क्लास सेकेंड में पढता था ।उस समय मुझे बडी ही मुश्किल से किताब और कलम के पैसे मिलते […]
उम्मीद ना जाने क्यो लोग मेरे उम्मीदो को कुचलते रहते हैं मिठी-मिठी बाते करके दिल को छलते रहते हैं खौफ जमाते अपने पन का बातो बतो में रौदा करते हैं दर्द भरी जज्बातो को हॅस […]
मन कि बात जब मन कभी द्रवित होता ऑसू पलको पर होता रंग उडा उडा सा रहता मन मेरा खोया रहता अधरो कि मुस्कान ना जाने कहा खो जाती बातो कि घुटन में मन मेरा […]
भारत देश हम हैं भारत देश के प्रेमी लहरो से हम खेलेंगे बुरी नजर उठाने वाले टुकडे टुकडे तुमको कर देगें । हम हैं भारत देश के प्रेमी गद्दारो को अब ना छोडेंगे चापलूसी बनावटी […]
नारी मन कि उषा किरणो से वो मृद भाष कहॉ से लायी हो घर आंगन को महकाने का तुम ऐसा वरदान कहॉ से पायी हो माँ बहन बेटी बनकर तुम पीड़ा को छिपाने का पहचान […]
( गौरेया ) कूदक – फूदक कर रंग बनाती दाना को चुग कर खाती हो कभी घर में कभी आंगन में तुम मेरे आ जाती हो | गौरेया रानी तुम हो बडी सयानी हम सब […]
संवाद – वायु मानव / 02 चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु […]
करोडो लोगो की उम्मीद अभी भी अटके है प्राण मरा नहीं अभी भी, है उसमें जान हमेशा हमको याद रहेगा हमारा प्यारा मंगलयान
प्रकृतिसौंदर्य प्रकृति हवाओ के संग झुम रहे हम सब बगिया की रंग बिरंगी यादे कू कू गाती कोयल प्यारी । झर – झर गिरती पानी कि बुदे मदमस्त झुमती पेडो कि डाली सर-सर-सर फर-फर-फर गा […]
) पर्यावरण का हो रहा हरण वृक्षो की शामत हैं आयी लगे हैं धुन में वृक्ष काटने प्रकृति भी देखो हैं कुम्हलाई कटते रहे वृक्ष तो आक्सीजन कहा से लाओगे नन्हें मुन्हें मेहमान आयेंगे तो […]
प्रकृति धरोहर वृक्ष धरा कि हैं आभूषण मनमोहक छवि बिखरती चन्द्र रवि के किरणो से जीवन हर्षित करती है कोयल की मृदुगान प्यारी जग को रोशन करती ओश की सुनहरी बूँद चमचम सी करती हैं […]
संवाद – वायु मानव चन्द वायु की लड़ियों ने आकर मुझको घेर लिया सिसक सिसक कर कहने लगी पेड़ो क्यों काट रहे हो मैं दंग अचम्भा देखता रहा पूछ बैठा सवाल ये वायु तेरा क्या […]
कुछ ऐसे ही हाल होने वाला हैं मानव तेरा , सांस थमेगा जब तेरा याद आयेगा मेरा , सिसक सिसक दम हैं मैंने तोड़ा , तेरी भी बारी आयेगी होने दे सवेरा , महेश गुप्ता […]
मेरे बापू चरखा के बल पर जिसने देश भक्ति को जगाया था गजब का हुंकार था बापू के जज़्बातों में सत्य अहिंसा की लाठी से जिसने धुल चटाया था खदेड़ गोरों के सैनिक को देश […]
न जाने किसने ये उसूल बना रक्खे हैं, मैं कहता हूँ सारे फ़िज़ूल बना रक्खे हैं।। राही अंजाना
कोई तो कहानी है अधूरी जो लिखनी बाकी है, चन्द पन्नों की किताब आज भी बिकनी बाकी है,
ये जो कलम की ताकत है ज़नाब, ख़ाक से उठा, आसमां तक पहुँचा सकती है।।
बन्द कर लो बेशक ऑंखें मर्ज़ी तुम्हारी सही, तुम्हारी आँखों से मुतासिर आँखें हमारी सही।। राही अंजाना मुतासिर – प्रभावित
शब्दों का भंडार लिए ज्ञान का प्रकाश लिए हर घर आंगन दिखती है जीवन का सारांश लिए। यूँ तो रहती मौन है फिर भी बहुत वाचाल है नेत्रहीन है स्वयं में लेकिन सबको दिखाती संसार […]
मेरी बिटिया ————— नन्ही मुन्नी गुड़िया सी, मीठी-मीठी पुड़िया सी । बातें करती गपर- गपर। वो हंसे तो खिलती धूप मगर। लड़ ती, भिड़ती, रोती ,हंसती जैसे धूप- छांव हंसती खिलती। लड़ने में रानी झांसी […]
जब भी खुद को मुश्किलों में पाया है, ये मालिक तुम्ही ने दिया सहारा है, भले ही नज़रों से नज़र नहीं आते हो, यकीनन तुमने ही हरदम मेरा हाथ थामा है।
बात इस दिल की दिल में रख लो तो अच्छा लगे, सपनों में ही सही मुलाकात रखलो तो अच्छा लगे, देखकर तुमको मैं ज्ञानी गूढ़ भी मूढ़ ही हो जाता हूँ, सुनो बातों की तुम्हीं […]
गलतफहमियों की कितनी और किश्तें बाकी रह गईं, इंसानों की कितनी और देखनी किस्में बाकी रह गईं।। नज़र-नज़ारे दिल-दिमाग और जुदाई सबपे लिखा मैंने, कहना मुश्किल है के और कितनी नग्में बाकी रह गईं।। राही […]
ठान लूँ गर मैं तो कुछ भी कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो असंभव भी संभव कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो बुलंदियाँ छू सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो […]
खबर मिली है के सबको ही ज़रा खबरदार रहना है, अपनों को अपनों से ही सम्भलकर मेरे यार रहना है, करली बहुत सी बेवकूफियां तुमने अब छोड़ो सबको, सुनो इस दुनियां में तुम्हें थोडा तो […]
सोये हुए मेरे अरमानों को उठाने आया था कोई, कल रात मुझको चुपके से जगाने आया था कोई, के एक उम्र बीत गई थी अँधेरी चार दिवारी में मेरी, खुले आसमाँ में मुझको सैर कराने […]
यूँ गर हाथों में हाथ तुम्हारा होगा जिंदगी का हर सफर सुहाना होगा बिता जाएंगे अंतिम लम्हों को भी मुस्कुराके गर आखिरी साँस तक साथ तुम्हारा होगा।।
इतिहास बदलना ही होगा ——————————– बस बहुत हुई झूठी गाथा , मियां मिट्ठू ज्ञान भी बहुत हुआ। स्वर्णिम इतिहास के गाथा का, झूठ लिखकर अपमान भी बहुत हुआ असली सेनानी गायब हैं, इतिहास के स्वर्णिम […]
प्रकृति की कैसी भयावह दृष्टि। कभी अनावृष्टि, कभी अतिवृष्टि। संजोये सपनों के, मकान ढह गए। जान, सामान संग अरमान बह गए। पानी की तेज रवानी से, जीते वह जो, जीवन-मृत्यु का द्वंद्व घमासान सह गए। […]
इंसान ही नहीं परिंदे भी नाराज़ लगते हैं, सच के पीछे छिपे हमेशा राज़ लगते हैं, राही अंजाना
एक दूजे से मिलने की अनोखी आरज़ू रखते हैं, चराग हवाओं से लिपटकर भी आबरू रखते हैं, ब मुश्किल कुछ पल की मुलाकात के खातिर, बड़ी हिम्मत जुटाते वो खुद को रूबरू रखते हैं, राही […]
माना कि हूं अकेली, सहारा न चाहिए माना कि मौन हूं मै, इशारा न चाहिए। मेरी ख़ामोशी को तुम क्या समझोगे तुम तो शब्दों को जानते हो तुम्हारा नाम ‘जमाना ‘…. है तुम केवल कामयाबी […]
कुछ लोग इलाके में अपनी धाक रखते हैं। कुछ लोग दौलत पर अपना हक रखते हैं। ना सियासत, ना वसीयत की चाह हमें ‘देव’, हम तो दिलों में बसने का शौक रखते हैं।
चोर मचाए शोर ——————- चोर मचाए शोर -शोर जी , अजब देश का हाल, गाल बजाकर गाना गाए, चोर -चोर का शोर मचाए अंदर से बेहाल। मुंह के यह वाचाल मति गई इनकी मारी । […]
आंखो ने आंखो में झांका, ना जाने क्या-क्या कह डाला। अदृश्य लिखावट पढ़ ली मैंने, मौन स्वीकृति गढ़ ली मैंने। निमिषा
आंखो ने आंखो में झांका, ना जाने क्या-क्या कह डाला। अदृश्य लिखावट पढ़ ली मैंने, मौन स्वीकृति गढ़ ली मैंने। निमिषा
पपीहे का ज़ुनून देखो, नहीं छोड़ता आस। बारीश की पहली बूंद से ही बुझाता प्यास। चींटी दोगुना बोझ लाद, चढ़ती ऊंचाई पर, गिरती बारम्बार वो, पर करती पुनः प्रयास। वफादारी आज इंसानों में दिखाई नहीं […]
मेरे सपने बेशक जरूर बड़े हैं, पर आसमां छूने की चाह नहीं । जमीं पर रह, कुछ ना कर गुजरूं, इतना भी ‘देव’ गुमराह नहीं ।
जहा विधा को उम्मीद समझा जाए यूवा को देश की नीव समझा जाए चलो ऐसा एक मजहब बनाया जाए जहां ईनसान को ईनसान समझा जाए
मौसम सुहान होते ही मिजाज उनका आशिकाना होने लगता है साँझ ढलते ही हर कवि शायराना होने लगता है कितना भी संभालो इन उंगलियों को हाथ जाकर कलम को छूने लगता है. शायद ये कोई […]
धड़कन को दिल में रहने का हर्जाना चाहिए, महबूब को संग रखने का जुर्माना चाहिए।। राही अंजाना
महफ़िल में तेरे आने का पयाम आया है। हर ज़ुबान पर बस तेरा ही नाम आया है। सब कि नज़रें टिकी रही, तेरी ही राह पर, तेरी निगाहों से बस मुझे सलाम आया है। पढ़ती […]
महफ़िल में तेरे आने का पयाम आया है। हर ज़ुबान पर बस तेरा ही नाम आया है। सब कि नज़रें टिकी रही, तेरी ही राह पर, तेरी निगाहों से बस मुझे सलाम आया है। पढ़ती […]
कहीं से कहीं तलक कोई और नज़र आता नहीं, बचपन में खेल के सिवाये कोई और भाता नहीं, कहाँ से शुरू और कहाँ पर खत्म हो जाते हैं लम्हें, ढूंढने निकलो तो कोई ओर छोर […]
कितनी ऊँची अटल अम्बारी है निर्मल, कोमल और सबसे न्यारी है माँ -बाप की तू दुलारी है तू गर्व कर तू नारी है. दुनिया समझें तू तो एक बेचारी है हमेशा दबकर रहने की तेरी […]
प्यासी धरती है पुकार रही बादल तू बरस न गरज बस तू बरस हो रोम रोम पुलकित मेरा खिले अंकुर नया मिले नवजीवन इन फूलों को इन पौधों को खिल जाए यह चमन इंद्रधनुषी रंगों […]
आँखों ही आँखों में, जाने कब बड़ी हो जाती है देखते ही देखते, वो घड़ी भी आ जाती है न चाहते हुए भी, अपने दिल के टुकड़े को खुद से जुदा करने की, बारी आ […]
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