आंखों की यह पलकें झपका के तो दिखा सच बताऊ यह भी ना कर पाएगा। उस परमात्मा के कारण ही तेरा वजूद है उसके बिना, मिट्टी में मिल जाएगा। यह पैसा, यह शरीर सब नाशवान […]

कविता   उम्र की पतंगें : अनुपम त्रिपाठी   वे, बच्चे ! बड़े उल्हास से चहकते—मचलते; पतंग उड़ाते …………. अचानक थम गए !!   उदास मन लिए लौट चले घर को ———— पतंग छूट जाने […]

हर शाम चाहतों की आहट सी होती है! हर शाम जिगर में घबराहट सी होती है! जब रंग तड़पाता है तेरी अदाओं का, मेरी साँसों में गर्माहट सी होती है! मुक्तककार- #महादेव’

आइना आज फिरसे सामने आया,  बीत चुके समय की उन मुश्किलों और गलतियों को मुझसे रूबरू कराया, थोड़ा हंसाया और थोड़ा रुलाया, जब बीते हुए पलों का चेहरा सामने आया तब गुम हो चुकी यादों […]

हर शख्स निगाहों में प्यार लिए रहता है! हर वक्त जेहन में खुमार लिए रहता है! जब कभी रुक जाती है राह मंजिलों की, दर्द का जिगर में बाजार लिए रहता है! मुक्तककार- #महादेव'(23)

जब भी यादों की तस्वीर नजर आती है! तेरे ख्यालों की जागीर नजर आती है! मैं जब भी ढूँढता हूँ जिन्दगी की राहें, तेरी बाँहों में तकदीर नजर आती है! महादेव की कविताऐं’

अक्सर खुशी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए हँसी में भी आँख नम होता है   मेरे हाल पर हँसने वालों ज़रा गौर करो वक़्त ही तो है हरदम बदल रहा होता है सुना […]

अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था […]

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY

कुछ ख्वाब जिन्दगी में हमेशा अधूरे रह जाते हैं। अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं, अपने ही समझ नहीं पाते हैं। अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो, हम क्या चाहते हैं। “सुखबीर” जो अपने […]

तू तो नही पर तेरी कहानी याद आयी सबको भूले पर तेरी जफ़ा याद आयी तेरे लिक्खे सब ख़तों को जला दिए पर तुझपे लिखी वो ग़ज़ल याद आयी “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~

गुमशुम,मदहोश,खामोश कहाँ रहते हो वो क्या कहते है,हाँ मोहब्बत में रहते हो वो सुर्ख होंठ,क़ातिल नज़र बला की अदा एक दीद में क़त्ल का सामान रखते हो “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~

तेरे लिए मैं तन्हा होता जा रहा हूँ! तेरे लिए मैं खुद को खोता जा रहा हूँ! अश्कों में मिल गयी हैं यादों की लहरें, तेरे लिए मैं तन्हा रोता जा रहा हूँ! मुक्तककार- #महादेव’

वो लोग भी एक खास ही जगह रखते है जो वक़्त पर मेरे सामने आईना रखते है   कोई क्या लगाएगा मेरे वफ़ा का अंदाज़ा हम तो दिल भी किसी के पास रखते है   […]

दिन–रात लिखूँ हर बात लिखूँ दिल के राज़ लिखूँ मन के साज़ लिखूँ।   अपने वो दिन बेनाम लिखूँ लेकिन नहीं हुआ बदनाम लिखूँ कितना बनकर रहा गुमनाम लिखूँ इतना कुछ पाने पर भी बनकर […]

कुछ खो गया है मेरा या फिर मैं खुद ही लुटा रहा हूँ जिंदगी कहीं चल तू ही बता दे जिंदगी आज़ नहीं तो कल किसी और मोड़ पे सही मुझे कोई जल्दी नहीं लेकिन […]

इश्क़ का मज़ा तो सिर्फ बिछड़ने से आये वो आशिक़ी ही क्या जिसमे शादी हो जाये ‘विपुल कुमार मिश्र

चलो दर्द में भी मुस्कुराते हैं यादो के साथ टकराते है तुम आओ तो सही मिलकर दर्द को आंख दिखाते है #VIP~

घर मेरा तुम्हें हवादार नहीं लगता। मैने हकीकत कही तुम्हें असरदार नहीं लगता।। , कि कशती कहीं डूब न जाए सफर में मेरी। तुम दुआ करो तूफान मेरा तरफदार नहीं लगता।। , शक्ल से कहा […]

बंधु ! आज स्व. राजीव गांधी की पुण्य—तिथि है। एक सपना और उसमें समाहित लालसा का स्मरण दिवस। हार्दिक श्रुद्धांजलि के साथ एक व्यक्ति — दो भाव   कविता – 01    व्यक्ति—विशेष || स्वप्न—भंग […]

कभी कभी मैं खुद से पराया हो जाता हूँ! दर्द की दीवार का एक साया हो जाता हूँ! जब बेखुदी के दौर से घिर जाता हूँ कभी, नाकाम हसरतों का हमसाया हो जाता हूँ! #महादेव_की_कविताऐं’

तेरी आरजू है फिर करीब आयी सी! तेरे हुस्न की तस्वीर मुस्कुरायी सी! याद आ रही है तेरी रूबरू लेकिन, ढूँढती नजर में दर्द की गहरायी सी! #महादेव_की_कविताऐं’

तेरे दुआओं में असर देखना है अब तो ज़हर पी के देखना है तन्हाई में बहुत बसर कर लिए अब तो महफिलों में तन्हा देखना है कहते थे कि मर जायेंगे भूलकर तुम्हें अब तो […]

ग़म को आराम नही होना चाहिए अब तुम्हें हार ऐलान करना चाहिए अपने साये को खुद पत्थर मारेंगें शर्त है कि दोस्त खुश होने चाहिए दिल,वो भी खाली क्या बात करते है इश्क़ न हो,दुश्मनी […]

कुछ ख्वाब ऐसे थे, कुछ ख्वाब वैसे थे, कुछ दिल के हिस्से थे, कुछ दर्द के किस्से थे, कुछ खुदा को समझाने थे, कुछ खुद को समझने थे, कुछ टूटकर रह गए, कुछ अश्क संग […]

कबतक जी सकूँगा नाकाम होते होते? कबतक जी सकूँगा गुमनाम होते होते? भटक रहा हूँ तन्हा मंजिल की तलाश में, कबतक जी सकूँगा बदनाम होते होते? #महादेव_की_कविताऐं’

मैत्री म्हनजे गोड, निरागस, सुंदर, प्रेमल नातं, कधी हसवनारं तर कधी क्वचित रडवनारं…||ध्रू|| मैत्री म्हनजे जिव्हाला, एकमेकांबाबत मनात कलवला, मैत्री म्हनजे एक सुंदर जिव्हाल्याचा खेल, कधी चिडनारा तर कधी रुसनारा मजेशीर खेल…||1|| मैत्री म्हनजे सुंदर […]

कैसे कहूँ कि अब तुमसे प्यार नहीं रहा! कैसे कहूँ कि तेरा इंतजार नहीं रहा! हरपल करीब होती है तेरी जुस्तजू, कैसे कहूँ कि तेरा तलबगार नहीं रहा! मुक्तककार- #महादेव’

कभी–कभी कागज पर खिंची लकीरों के बीच भी कोई तस्वीर इस कदर से जिंदा हो जाती है कि जिसकी होती है वो तस्वीर उससे मिले बगैर ही उससे मिलकर होने वाली बातें उस तस्वीर से […]

तुम्हारे होठों का सिर्फ मधु ही मुझे प्यारा नहीं बल्कि प्यारी लगती हैं वो कड़वी बातें भी जो तुम कहती हो क्योंकि वो होती हैं हमेशा ही मेरे भले की।                                                 –   कुमार बन्टी […]

सपने में भी जब कभी तुम्हारा ख्याल आता है तो – दर्द से तड़फ कर जाग जाता हूँ मै  . जब अंधेरो के सिवा कुछ मिलता नहीं वहां तो- खुद ही खुद से घबरा जाता […]

मैं यादों का कभी कभी जमाना ढूँढता हूँ! मैं ख्वाबों का कभी कभी तराना ढूँढता हूँ! जब खींच लेती है मुझको राह तन्हाई की, मैं अश्कों का कभी कभी बहाना ढूँढता हूँ! #महादेव_की_कविताऐं’