है मुश्किल तो ख़ुद का साथ निभा यह दुनिया तेरा साथ क्या निभाएगी मुश्किलो में इसका विश्वास है हिल जाता खुदा पे भरोसा इसका इक पल में टूट जाता …… यूई
है मुश्किल तो ख़ुद का साथ निभा यह दुनिया तेरा साथ क्या निभाएगी मुश्किलो में इसका विश्वास है हिल जाता खुदा पे भरोसा इसका इक पल में टूट जाता …… यूई
माफ कर देता तेरी तुम्हारी बेवफाईओ को पर मुझे तुम्हारी कोई भी ख़ता याद नही …… यूई
ए लहरॊं की रागिनी राग का यह राज तो बता सुर तेरे से मचलती है लहरे या उनकी मस्ती से महकते सुर तेरे …… यूई
लगता सबको है यह पहली बार कि है यह बस मेरे वाला प्यार नही जानते हो तुम हो नादान है सदियों पुरानी यह रिवायते नजर इश्क प्यार इक़रार तकरार यही होता आया है यहां बार […]
रंग अपनी मेहँदी मेरे रकीबों के नाम कौनसी तूने यह नई कहानी लिख दी निभायी जिसने भी यहां रस्म-ए-वफ़ा उसने अपनी बर्बादी-ए-जिंदगी लिख ली …… यूई
हो ज़िन्दगी की बेवफाईयों से खफा मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी बचाने को तेरी रुसवाईया जमाने में ख़ुद की बदनाम कहानी लिख दी …… यूई
ज़िन्दगी को कर के ज़ुदा ज़िन्दगी से ज़िन्दगी को मिला दिया ज़िन्दगी में कोई ऐसी मौत का शिकवा क्यों करे पलकें मेरी बंद हुई उनकी पलकों तले …… यूई
खूब बेरहम इश्क है यह दर्द का खुदा दुश्मनों को भी इससे बचाए …… यूई
आपको हुआ है इश्क दर्द से तो कोई बात नही बचना कही दर्द को ना हो जाए इश्क आपसे …… यूई
क्या मेरी आँखों से ही तिरी कोई रंजिश थी उस दिन, या तिरे दीदार की हर खबर झूठी थी उस दिन, हर गलीं हर चौक पर तो दिल मेरा था झाँकता, फिर किन गुज़रगाहों से […]
रोज़ मार के भी ख़ुद को मर सके रोज़ जीना चाहके भी जी ना सके मरते हुए मरने का करते रहे इंतज़ार जीते हुए करते रहे जीने का इंतज़ार …… यूई
क्यों नहीं जुदा होता दर्द हमसे अब लगता है दर्द से भी इश्क हो गया है हमें|
रूक्मणी सी क्यूँ लगती हो तुम बनके राधा चली आओ ना चाँद निकलेगा छत पर मेरे आजा मेरी गली आओ ना फूल खिलते कहीं भी नहीं क्यूँ बहारों की बातें करूँ हम बसायेंगे मिलकर चमन […]
मौत ने किया है कुछ इस तरह मेरा इंतज़ार जैसे ज़िन्दगी ख़ुद करे जिंदा रहने का इंतज़ार …… यूई
कहने को तो हुए हम घर से बेघर इश्क तेरे ने किया ख़ुद से बेखुद ज़िन्दगी कुछ यूँ गुज़री फिर बेसुध ख़ुद की छोड़ लग गई सबकी सुध …… यूई
मेरे ही गुनाहों ने हो परेशान मुझसे सुनाया फ़ैसला खुद्की मौत का मुझसे …… यूई
तुम्हे इश्क कहूँ या अब कहूँ खुदा अब तो फर्क कोई ना पड़ता है उसके रंगों में रंगा हर काम तेरा तेरे रंगों में रंगा अब हर रंग मेरा …… यूई
रंग रूह को इश्क के पक्के रंगों को तूने वोह रंग प्यार का दिखलाया है जिसने ख़ुद में खुदी दिखला खुद की इन सब झूठे रंगों से पीछा छुड़ाया है …… यूई
नज़र-ए-हुस्न ने किया इज़हांर-ए-इश्क जबसे अरमानो को जैसे मेरे लग गए हो पंख तबसे …… यूई
जाम से मिलते ही मचलती शराब जैसे मयकदे में झूमते हो बेखुद मयकश जैसे कुछ यूँ ही बेखबर सा हो गया हूँ जगसे बना इश्क उतारा रूह में तूने अपनी जबसे …… यूई
लौटा दो सदाए लाखों बार हमारी ज़िन्दगी का सौदा करके आए हैं क्या हुआ जो तेरी नजर नही हमपे तेरे इश्क में लूटाने हम जान आयें हैं …… यूई
मुस्कुराहट के सिवा कुछ शक्ल दिखलाता नहीँ. हाले दिल की कैफियत कोई समझ पाता नहीँ. ग़म लिपटता है हमेशा जिस्म से कुछ इस तरह पास रहती है खुशी पर मैं नज़र आता नही. वक्त़ तू […]
बीत चुके हैं बरसों जिनको क्यों पल वोह याद दिलाते हो किए गहरे दफन जो जग जग रातों क्यों उनकी अब कब्रे खुदवाते हो …… यूई
लिखने का हुनर हमने कहीं से नहीं सिखा, जब दिल का दर्द हद से ज्यादा बढऩे लगा, तब जज्बातों को समझने वाला कोई ऩ रहा…। तो उठाई कलम औऱ हाल सारा इसे सुना दिया, जब […]
एक फूल के लिए कितना मुश्किल होता है कि वह अपनी पंखुड़ियों को तूफानों से बचा ले छिटकने न दें … पराग कणों को बिखरने न दे एक पेंड के लिए बड़ा कठिन होता है […]
Ek waadaa phir Milne ka bs wada bhr rah jate hain Bah jata hai samay ka dariya wo udhar- hum idhar rah jate hain Nikal jate hai door bahut pichhe ojhal saare ho jate hai […]
कैसे कहे कोई उसको गम नहीं है! जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है! हरतरफ तुम खोज लो इलाज-ए-मर्ज को, हर दर्द’ का मगर कोई मरहम नहीं है! Composed By #महादेव mkraihmvns@gmail.com
ღღ__गुफ्तगू बेशक नहीं करते, निगाहें फिर भी रखते हैं; . ना जाने प्यार है कैसा, जो कभी बयाँ नहीं होता!!…..#अक्स
ज़िन्दगी ना कर पाई फ़ैसला मैँ शराब का नशा छोड़ दूँ या तेरी जुस्तजू की उम्मीद एक ने मुझे जीने ना दिया दूसरे ने मुझे पीने ना दिया …… यूई
बैठा हूँ बीच बाज़ार, लेकर अपनी यादों को बेशकीमती है यह गहने, इनका कोई मोल नही आए वोह ले जाएँ मुझसे, बेमौल मेरी जागीरें को वोह जो हो तपा वर्षो, मेरे जैसे दर्दो की अगन […]
जाने कितने दर्द समेटे होंगे उसने जो यादों को अपनी बाज़ार ले गया …… यूई
कोई मुझे यहां कवी बुलाता कोई बोले शब्दों का खिलाड़ी कोई समझे बुनता मैँ लड़ियाँ कोई समझे चुनता मैँ कलियां ना मैँ कवी ना कोई खिलाड़ी मैँ तो बस एहसास का पुजारी उतार अंतर […]
हूँ लाखो वर्षो सी यूँ ही जल रहा मैं हूँ ख़ुद में आग लगा कर जल रहा मैं जला ख़ुद को कर रहा रोशन तुमको मैं किसी को लगता निकला अभी यहां मैं किसी को […]
हुज़ूर देखा था मैंनें भी उसे सारी तस्वीरें सरेआम नीलाम करते हुये, लगता हैं वो अन्जान हैं इस बात से की यादों के खरीददार नहीं होते,
वक़त की कमी नही है यहां, यूँ ही गर देखो तो गया वक़त ना लौट कर आए, गौर से देखो तो …… यूई
सिर्फ दिखने को लगता है सबको आराम है नहीं किसी को यहां कभी भी आराम हर पल है हर शय उसकी गतिशील यहां है नहीं किसी को थमने की यहां पर थाह …… यूई
प्यार लुटाया दिल खोल खूब तब जा कमाया यह नाम खूब माना के हुए बदनाम हम खूब है यह बदनामी नाम से भी खूब पिघलाया इसने तेरे दिल को खूब बाँहो में समेटा मुझको तुमने […]
कहते हो राज़ छुपे है हजारों मुझमें देखा है अपना अक्स कभी मुझमें कोशिश तो की होती पास आने की ख़ुद खुल जाते राज़ तुम्हारे दिल के […]
कहते थे मेरी आँखों में ही रहना कभी फ़ासले दूर कर जाएँ तो क्या कहते थे क़रीब मेरे दिल के रहना जिस्म ना मिल भी पाए तो क्या कहते थे मुझे मन से ना भुलाना […]
सुना है नाम बहुत है उसका बदनाम होने के लिये, बहुत बड़ा राज होता है जना़ब कामयाबी यूँ ही नहीं मिलती,
मैं और तुम साथ साथ बड़े हुए दोनों साथ- साथ अपने पैरों पर खड़े हुए तुम्हारी शाखाएं बढ़ने लगीं पत्तियां बनने लगीं दोनों एक साथ जीवन में आगे बढ़े अपने -अपने कर्मों के साथ् तुमने […]
अपनी छटपटाहटों को ही देता हूँ मन के जज़्बातों को डायरी में उतार लेता हूँ ये छटपटाहटें सिर्फ मेरी अपनी ही नहीं औरों की छटपटाहटों को भी उधार लेता हूँ अंदर और बाहर की लड़ाईयों […]
ये बात अफवाह सी लगती है कि ,सच्चा प्रेम कहीं मिला भीड़ में कहीं इंसान दिखा यह बात अफवाह सी लगती है कहीं ज्ञान का दीपक जला किसी के हिस्से का अँधेरा मिटा कुछ ज़िन्दगियों […]
शाम का समय सूरज विश्राम करने को तत्पर दिन पर तपने के बाद सारी दुनिया तकने के बाद अपूर्ण ख्वहिशे दिन भर की मन में रखे हुए ये सोंच कर कि चलों रात में चन्द्रमा […]
हरी जाली से देखने पर सूखे पेंड भी हरे लगते हैं नज़र का फ़ेर हो जाए तो पिलपिले भी खरे लगते है । तेज
एक युद्ध में कितने युद्ध छिपे होते हैं हर बात में कितने किंतु छिपे होते हैं नींव का पत्थर दिखाई नहीं पड़ता अक्सर रेल चलती है पर पटरियों के जैसे सिरे दबे होते हैं जिसने […]
ღღ__कहाँ रहते हो तुम भी, आज-कल “साहब”; . बात-बिन-बात, दिल दुखाने नहीं आते!!….#अक्स
ღღ__कोई याद ही ना करे, ये तो हो सकता है “साहब”; . मगर भूल जाए मुझको, भला ये कहाँ मुमकिन है!!….#अक्स
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