मन के घोटक में बैठ कर दौड़ा किस दिशा में कहाँ चला राही, इस तरफ उस तरफ धरा-अंबर आया क्या हाथ में बता छनकर। खूब रख ईप्सा चला दौड़ा, वैसी ले दीक्षा चला दौड़ा, मन […]
मन के घोटक में बैठ कर दौड़ा किस दिशा में कहाँ चला राही, इस तरफ उस तरफ धरा-अंबर आया क्या हाथ में बता छनकर। खूब रख ईप्सा चला दौड़ा, वैसी ले दीक्षा चला दौड़ा, मन […]
अब भी ऐसे ख्याल आते हैं बिछुड़े गम गीत बन के आते हैं, जो फिसल कर गिरे थे हाथों से दाने मडुवे के गिरा जाते हैं। जिनसे उम्मीद न थी वे ही मिले स्वप्न के […]
उलाहना के भाव पढ़ लो ना घट रही दूरियां बढ़ा लो ना, हाँ कहो ना कहो जरा बोलो उठ रहा दिल में जो बता दो ना। बेवजह इस तरह से दिल में आ रहे बोल […]
कभी कभी अक्सर रातों में बीते कल की दृश्य नजरों के सामने एक फिल्म के रील की भाँति न जाने क्यों चलती है हंसता हुआ वो चेहरा रूठने की वो अदा फिर अचानक दिल छू […]
पत्थर से फूल पे ,यों न वार कीजिये जरा सोच समझ के एतवार कीजिये हमारे इशारे पे ही घटा रंग बदलते है कोई कोई तो कुर्बान भी हो जाते है टक्कर देना तुम्हें आया ही […]
पूरब को पत्र भेजा, पश्चिम पहुँच रहा है, भेजी जिसे मुहब्बत नफरत समझ रहा है। खाली पड़ी थी थैली भर दी थी उसमें दौलत हम चाहते थे भरना दिल में जरा मुहब्बत।
आँचल में तेरे ओ माँ! कितना स्नेह है ना, सब कुछ भरा हुआ है मन में तेरे दुआ है। तेरी दुआ से ओ माँ! हर पथ है मेरा रोशन, तूने दिया है इतना अनमोल मुझको […]
सुन्दर हरीतिमा यह फैली हुई धरा में, देती सुकून मन को, लगता है हूँ हरा में। लहलाते पेड़ डाली महकी हुई धरा में देती सुकून मन को लगता है हूँ हरा मैं। अब फूल खिल […]
नयनों की पुतलियां झपकी अनेक बार हृदय की धड़कनें धड़की अनेक बार, पंजों के मोड़ जाने कब-कब खुले जुड़े सच्चे के सामने कब कर खुले जुड़े। साँसें स्वयं चली, आशा कभी बनी आशा कभी गली, […]
धूल उड़ रही है बरसात में भी, कशिश रह गई है मुलाकात में भी। दिन लग रहा है इस रात में भी, बिछुड़े से लग रहे हैं मुलाकात में भी। सब रह नहीं गया है […]
अच्छा तो तुम कल छत पे आये थे ! पतंग को तंग करने या मुझको हिय से लगाने आये थे ?? सच बताओ क्या आज भी करते हो हमसे प्यार! या पड़ोसन को झांकने तुम […]
जीत ली तुमने दुनिया तो क्या हमारा हृदय न जीत सके देश जीते होगे तुमने पर प्रेम को न जीत सके। एक वक्त था जब तुम मेरे लिये गीत गाते थे स्वयं गाते थे उसे […]
नहीं करनी हमें तुमसे बराबरी क्योंकि तुम हमसे एक कदम आगे हो अच्छाई में भी आगे और बुराई में भी आगे हो। कल जब कोई तिनका भी तुम्हारा साथ ना देगा कल जब तुम्हें कोई […]
संस्कार है हमारे जीवन का आधार जिसकी दहलीज़ पार करने पर समाज बहिष्कृत कर देता है और जिसका पालन करने पर महापुरुष की उपाधि देता है। जीवन में संस्कार और शुद्ध आचरण हमें दैवीय शक्तियों […]
आगे बढ़ने की ललक में घमंड आड़े आता है, इंसान बढ़ना चाहता है दम्भ आड़े आता है। जिसके भीतर बारिश तो हो पर दम्भ उग आए, उसे साफ करना होता है वरना वह आड़े आता […]
फुरसतों के पल न जाने हैं कहाँ आजकल गर वो होते तो हमें मिलते जरा मुश्किल के हल। खूब बारिश हो चुकी सूखे पड़े हैं जल के नल, आज जो भी न हो प्रातः होनी […]
तब की बातें अलग थी जब हम भी बिना पते के, पाती लिखा करते थे। बुझते हुए दीये को बाती दिया करते थे। हम सादा लिफाफा भेज दिया करते थे, वे उस पर अपना नाम […]
नहीं बैठ पाया वो पंक्षी किसी भी डाल पर, जिसके बच्चों को वृक्ष सहित गिराया गया हो। विश्वास अब किस पर करे वह जब यह कृत्य देवरूपी दिग्गजों ने किया हो। अब कहाँ रहे वो […]
सुविचार:-2 आज यकीन आ ही गया हमें- टूटे दिल और अधूरे सपनों से, वो बचपन के खिलौने काफी अच्छे थे।।
सुविचार:- दूसरों पर विश्वास जरा सोंच कर करना चाहिए, क्योंकि कभी कभी हमारी जिह्वा को हमारे ही दन्त काट बैठते हैं।
हमारी जिन्दगी का सफर बड़े आराम से कट रहा है क्योकिं ———————- अब हम परवाह नहीं करते कि कोई क्या कहता है।
नहीं सम्भल पाये हम ना जुल्फों को ही सम्भाला, मेरी कलम ने इस बीच कितनों को बेआबरू कर डाला।
देखो श्राद्ध आ गए स्वर्ग लोक से पितृ देख रहे अपने पुत्रों को देखो श्राद्ध आ गए हंस रहे अपनी ही परंपराओं पर सोच रहे काश जीते जी भी कोई क्रिया या करम होता तो […]
जल की बूॅंदें गिरी सारी रात, रात भर होती रही बरसात। तिमिर छाया रहा भोर में भी, ऐसे हो गये थे हालात। ना चन्द्र दिखे ना सूर्य ही आए, मोती गिरते रहे सारी रात। भीग […]
हम कहते रहे वक्त हमारा है जब ठोकर लगी तब ख्याल आया ज़माना सही कहता है वक्त न हमारा है न तुम्हारा है उसे तो बस चलते ही जाना है हम इन्सान क्यों नही वक्त […]
ख्वाहिशें मेरी मुझे स्वप्न नित दिखाती हैं एक पूरी हुई अन्य उभर आती हैं। जिनको मालूम नहीं पता मेरी निगाहों का नैन के तीर मेरे दिल में चुभा जाती हैं। उड़ रही तितलियां दूर बहुत […]
तुम ककड़ी सी शीतल मैं नमक सा स्वाद, मिर्च सी बहस से होता है विवाद। मुहब्बत नहीं है अपवाद क्यों करना समय बर्बाद आओ स्नेह को कर दें आबाद। खुशियों के पुष्प खिलेंगे जब मूल […]
सीमा में तैनात सिपाही तुझे सलाम है, देश के लिए की जा रही तेरी सेवा बेमिसाल है। सीमा सुरक्षित है तब हम सुरक्षित हैं, तू सीमा में खड़ा है सिपाही! तब हम सुरक्षित हैं।
वो न जाने क्यों अपना लगता है, कभी बीते कल में देखा सपना लगता है। तुम कुछ भी कहो गाओ बजाओ, लेकिन मुझे सबसे अच्छा राम का नाम जपना लगता है।
खुशफहमियाँ पास रख लो गलतफहमियाँ दूर कर लो, पावन रखो हृदय नफरत दूर रख लो। नफरत का कड़वापन, द्वेष की दीवारें, तोड़ कर मिल लो गले, बस मुहब्बत ही फले।
कुर्सी आप भी निराली हो, तरह तरह के लोगों के लिए तरह-तरह की छवि वाली हो। अलग-अलग लोग अलग अलग तरह की कुर्सी, छोटी-बड़ी, कच्ची-पक्की स्टाइलिश, साधारण लकड़ी की प्लास्टिक की, कठोर, आरामदायक। हर तरह […]
लड्डू कितने मीठे हो तुम गोल-गोल, पीले-पीले, लाल-लाल बेमिसाल। गणपति के प्यारे हो, रसना के दुलारे हो, खुशियों के सहारे हो, खुशी में प्यारे हो, शुभ अवसर पर खाये जाते हो, सफलता पर बांटे जाते […]
ऐ दिल! तू गम की बात न कर आराम फरमा काम की बात न कर। कितना सजने लगा है अब वो किसी और के लिए, हम बिखर गए अब संभलने की बात न कर।
अन्दर की बातें बाहर करने वाले नजरों से गिर जाते हैं, बस एक कलम है जिससे मोहब्बत बढ़ती जाती है।
जीवन की उलझनों से फुर्सत लेकर आओ बैठो मेरे पास कुछ पल निहारो देर तक मुझे आगोश में ले लो मुझे मैं बैठा हूं तुम्हारे इंतजार में तड़पता रहता हूं तुम्हारे प्यार में मैं तुम्हारा […]
पितृ पक्ष आया है श्रद्धा का पक्ष है, विस्मृति पर अब स्मृति लानी है। उन्हें याद करना है जन्म दे गए जो, पाल-पोस कर हमें बड़ा कर गए जो, हमें सौंप संसार, विदा हो गए […]
फूल करेले के हैं फल बहुत कड़वे हैं, पाने तुझे ओ मंजिल ! छिल गए तलवे हैं। खूब बारिश हुई मुहब्बत की, आ गई बाढ और मलवा है, ऐसा लगता है घोंट कर रिश्ते आज […]
फूल करेले के हैं फल बहुत कड़वे हैं, पाने तुझको ओ मंजिल ! छिल गए तलवे हैं। खूब बारिश हुई मुहब्बत की, आ गई बाढ और मलवा है, ऐसा लगता है घोंट कर रिश्ते आज […]
अब धीरे-धीरे समेटने लगी है वह अपने साजो – सामान को, तपती गर्मी से झुलसती धरती को नहलाने आयी थी, प्यासे प्राणियों को खूब पानी पिला गई। धरती पर पड़े बीजों को उगा गई। ये […]
गुनगुना दे कोई तराना तू, सीख ले प्यार को निभाना तू। अपने मन को पहुंचने दे मुझ तक, दूर से मत मुझे लुभाना तू। कोरे कागज में नाम मत लिखना, खाली छाया की भांति मत […]
भारत देश हमारा, खूब फले-फूले, चारों तरफ हरियाली हो जन मन में खुशहाली हो, महके आँगन आँगन महक उठे कोना कोना, खुशियों का उगना खुशियों को बोना। अपना अपना फर्ज निभाएं सब, उन्नति होगी तब।
प्रेम से अधिक प्रिय कोई एहसास नहीं जो इसे नहीं समझते उनसे प्रेम की आस नहीं। बसाया कभी था जिसको ह्रदय में, अब उसी को मेरे प्रेम का एहसास नहीं।😥😥
वो शीतलता का आनन्द नहीं समझते हैं जो नफरत की आग लगाया करते हैं।
जीवन की सुंदरता को कहाँ वो जानते हैं ?? जो स्वयं से अधिक किसी और को पहचानते हैं।
जीवन की अभिलाषा है तू ही हार तू ही आशा है मैं बढ़ जाती हूँ जानबूझ कर तेरी गोद में सर को रख कर मिलता कितना सन्तोष मुझे व्यक्त नहीं कर सकती हूँ माँ मैं […]
हमारी हार हमारी जीत हो तुम हे अर्द्धांगिनी ! मेरी प्रीत हो तुम मेरे जीवन सफर की राजदार हो मेरे प्रणय का परिहार हो गीत की पहली पँक्ति सावन की बहार हो। हे अर्द्धांगिनी! सर्वस्व […]
कविता तुम ही तो साथी हो, संवेदना हो, प्रेम हो, लगाव हो, जुड़ाव हो, भावों का प्रवाह हो। बिछुड़न की आह हो, दिल की चाह हो। संगीत की गान हो, सुर की तान हो, शरीर […]
घनघोर बादल गरज रहे हैं सर्द हवाओं के झोंके मन को भिगो रहे हैं बीत गई अब तपन भरी रातें सर्द दिनकर’ सुबह को नमन कर रहे हैं गुलदाऊदी के पुष्प अब खिलने को हैं […]
अपने गुनाहों को मैं हमेशा छुपा लेती हूँ शर्म आती है तो नजरों को झुका लेती हूँ दीवार पर दिखते हैं कारनामे जब अपने आवेश में आकर मैं दीपक को बुझा देती हूँ ।
उर्दू मेरी जबान नहीं उसकी मुझे पहचान नहीं पर फिर भी प्यारी लगती है हिंदी जैसी लगती है इसमें सुंदर शब्दों को खिलते खेलते लफ्जों को एक नई पहचान मिली जैसे भावों को जान मिली […]
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