जरा कम ही शोर मचाया करो क्योंकि मैंने अक्सर शोर मचाने वालों को भीड़ का हिस्सा बनते देखा है जिनका स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं होता है सिर्फ दूसरों का अनुसरण करते हैं खुद की […]
जरा कम ही शोर मचाया करो क्योंकि मैंने अक्सर शोर मचाने वालों को भीड़ का हिस्सा बनते देखा है जिनका स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं होता है सिर्फ दूसरों का अनुसरण करते हैं खुद की […]
रिश्ता होने से रिश्ते नहीं बना करते निभाने से बनते हैं जो रिश्ते बनते हैं दिमाग से वह केवल बाजार तक चलते हैं जो निभाए जाते हैं दिल से वो आखरी सांस तक चलते हैं
ना जाने कितनी परीक्षाओं से गुजरना पडे़गा आखिर और कितना पिसना पडे़गा नसीहत सब देते हैं पढ़ने की अब नौकरी के लिए क्या किताबें घोलकर पीना पडे़गा अरमां हैं आसमान छूने के पर हकीकत की […]
वो एक कप कॉफी का वादा तुम्हें याद होगा रोज़ मिला करते थे तुम मुझसे उसी वादे की खातिर कहना चाहते थे मगर कह नहीं पाते थे कि चलोगी मेरी बाइक की बैक सीट पर […]
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° मेरे आने पर दिल में गिटार बजा करती थी चलती थी सड़कों पर तो कतार लगती थी अपने भी दिन हुआ करते थे साहब! जब मैं जवान हुआ करती थी… अब इन बूढी़ झुर्रियों […]
उम्र और जिंदगी में फर्क:- —————————— उम्र वो है दोस्तों जो बीते अपनों के बिना, ******************************* जिंदगी वो है जो अपनों के साये में गुजरती है|
उन्हें हमारी मौजूदगी से परहेज होने लगा हमें यह जैसे ही समझ आया हम मुस्कुरा के चल दिए….
जाहिर ना होने देंगे हम अपने दर्द को, तुम समझ ना सको तो कैसे हमदर्द हो !
मैंने गुस्से से उसे देखा उसने भी गुस्से से देखा मैंने आँखें दिखाईं वो भी आँखें दिखाने लगा मैं तंग आकर हँसने लगी तो वह भी खिलखिला उठा मैं मुस्कुराई वह मुस्कुराया मैं इतरायी वह […]
जब मुसीबत आई तो मैंने ये नहीं सोंचा कि ‘अब कौन काम आएगा’ बल्कि यह सोंचा कि देखती हूँ अब कौन साथ छोंड़ जाएगा..
वो जब आया घर तो बिल्कुल खामोश था कुछ नहीं बोल रहा था कोई आवाज नहीं मैंने पैकिंग खोली सेल डाले, चैनल सेट किया आवाज बढ़ाई रेडियो चलने लगा और पहली बात जो सुनाई दी… […]
मैं लड़ना जानती हूँ मगर चुप रहती हूँ ! ************** क्योंकि अगर मैं जीत गई तो जानती हूँ सब कुछ हार जाऊंगी
भीम पार्टी आई देखो भीम पार्टी आई दलित को गोद में लेकर खुद को नेता समझे भाई वह कहती है ब्राह्मण, ठाकुर और तलवार इनको मारो जूते चार और सभी प्यारे बंधु दलित पर हो […]
हास्य कविता ——————– गारंटी है जरा भी हँसी नहीं आयेगी ! ****************** जर्जर हैं दीवारें इसकी मत तुम जोर लगाओ रहना है तो रहो नहीं तो तुम यहाँ से जाओ दूसरे भी हैं लगे लाइन […]
मेरा कानपुर वाला दोस्त आज बहुत याद आ रहा है एक अर्से के बाद दिल में उसका खयाल आ रहा है हनी सिंह के गाने मेेरे कहने पर गुनगुनाता था नाराज होती थी जो तो […]
कैसी है ये दरिन्दगी? हाथरस की बेटी संग जो होता है कुकर्म उसे जनता से छुपाया जाता है.. मीडिया की आवाज को आखिर क्यों दबाया जाता है… पहुँचते हैं कुछ राजनीतिक दल राजनीतिक रोटियाँ सेंकने […]
यह दिशा नहीं राजनीति की पीड़ित परिवार के घर जाओ यह दिशा नहीं राजनीति की रेप जैसी घटना पर राजनीतिक रोटियां सेकों यह दिशा नहीं राजनीति की घर में ही नजरबंद करो यह दिशा नहीं […]
हम उस देश के वासी हैं जहाँ तिरंगा लहराया जाता है भारत माता की जय हो’ यह नारा खूब लगाया जाता है पर अफसोस है इस बात का हमको यह कैसी है राजनीति! जब लुटे […]
दीवानगी का आलम कुछ यूं है जिधर भी देखती हूँ मैं लगता है बस तू है कितनी भी कोशिश कर लूं मैं तुझे भूल जाने की पर मेरी तो हर साँस में मौजूद तू है…
तुम्हे याद हैं वो लम्हे जब हम साथ पढ़ा करते थे तुम्हारी कॉपी से देखकर परीक्षा में लिखा करते थे तुम मुझे कॉफी के लिए रोज़ पूंछते थे और हम मना कर दिया करते थे […]
दरख्तों से गिरते पत्ते उठा करके रोये जब भी खुल गई आँखें फिर हम ना सोये जब भी आई मेरे सामने तुम्हारी सहेली लिपट करके उससे तेरी यादों में रोये…
शिद्दत से उठाओ तुम मेरा जनाजा हम ना कहेंगे किसी से कि जिन्दा अभी हैं हम…
दुबले-पतले बापू जी ऐनक पहने बापू जी राष्ट्रपिता कहलाते सबकी नोट पे रहते बापू जी नमक आन्दोलन हो या फिर असहयोग आन्दोलन हो सबका नेतृत्व आगे बढ़कर करते बापू जी देश को किया आजाद और […]
बार-बार वही खत खोलकर पढ़ती हूँ मैं कि आखिर क्या लिखा करते थे तुम हमारे लिये उठाकर तुम्हारा खत सीने से लगा लेती हूँ जब भी कभी तुम्हारी याद आती है यूँ महसूस कर लेती […]
इरादे हम जो कर लें गर फलक से तोड़ लें तारे! तो तेरा गुरूर फिर बोल कब तलक यूं ठहरेगा…
देख प्रज्ञा! तेरी मोहब्बत में दीवाने हो बैठे हैं वो हँस रहे हैं मुझ पर जो लोग सामने बैठे हैं तुमने जो शर्माकर फेर दीं निगाहें मुझ पर आबरू की आरजू में बेआबरू हो बैठे […]
आरजू बस तुम्हारी की मगर अफसोस इतना है सब कुछ हुआ हासिल एक तुझे छोंड़कर..
सारा आलम भीगा-भीगा है तेरा आंचल क्यों फीका-फीका है लगा ले मेरे प्यार का काजल जो तेरी नजरों से भी तीखा-तीखा है…
रंगीन है तिरंगा मेरे महबूब की तरह बेरंग है ये दुनिया मेरे रकीब की तरह..
जख्म बाबस्ता है तुम्ही से और तू ही है इस दिल का मरहम बस तुझे ही मागे ये दिल तू ही है बस मेरा हमदम
तुमको हमदर्द बनाया हमने कुछ इस तरह दिल को दर्द बनाया हमने सालों रहे तेरी मोहब्बत में बिगड़े संभल गये जब धोखा खाया हमने…
दुबली-पतली कद काठी थी धोती पहनकर चलते थे आँखों में थे अनमोल सपने ऐनक लगाकर चलते थे राष्ट्रपिता थे प्यारे बापू सबकी आँख के तारे थे अंग्रेजों के छक्के छूटे जब वह सत्याग्रह पर जाते […]
लैला मजनू ने सिखाया मोहब्बत में फना होना वरना हम तो तेरे साथ जीने के ख्वाब देख रहे थे जो ख्वाब कभी पूरे हो नहीं सकते थे हम तुझसे जुदा रह नहीं सकते थे मरने […]
बंदिशें कितनी लगाई गईं पहरे कितने दिये गए फिर भी ना मिट सकी मोहब्बत हीर-रांझा कितने ही चल बसे प्रगाढ़ होती गई मोहब्बत हद से बढ़ता गया जुनून जितनी तकलीफें मिली मजनुओं को सब सहते […]
खुले आसमान तले सुकून मिलता है बंद कमरे में घुटन होती है जब नींद के आगोश में होता है जहान प्रज्ञा किसी की यादों में बहुत रोती है…
हँसते-हँसते चले जाएगे जहान से हम बस एक बार तुम मुस्कुरा के मुझे देख लो आ ही जाओगे मेरी बातों में अपनी रातें सजाकर देख लो….
हँसते-हँसते चले जाएगे जहान से हम बस एक बार तुम मुस्कुरा के मुझे देख लो आ ही जाओगे मेरी बातों में अपनी रातें सजाकर देख लो….
सबसे खूबसूरत तोहफा है गुरू रब से भी पाक होता है गुरू ढूंढ लो चाहे सारी दुनिया में ना है जहान में कोई तुम-सा गुरू
मिन्नतें खूब कर लेंगे इबादत खूब कर लेंगे तू एक बार तो सही तुझे बाँहों में भर लेंगे…
निर्भया कितनी दफा रोई दरिंदों की पनाहों में सिसकता ही रहा यौवन वासना की बाँहों में तब तलक रूठेगा बचपन पूँछती है यही नारी मरेगी कब तलक बेटी बचेगा कब तलक अत्याचारी पुरुष की बन […]
आसमान अधूरा है सितारों के बिना ये दिल अधूरा है तेरी दोस्ती के बिना
पापा की प्यारी हूँ मैं फूलों की क्यारी हूँ मैं पर सबसे पहले नारी हूँ मैं… अहिल्या हूँ मैं सीता हूँ मैं पवित्र पावन गीता हूँ मैं कभी शेरनी तो कभी चीता हूँ मैं पर […]
उसे रूठने में एक पल भी नहीं लगा मनाने में उसे कुर्बान रात-दिन कर दिये हमने..
छलक कर आँख से आँसू पन्नों पर बिखर गया हर तरफ ढूंढता है दिल वो मोती किधर गया….
अचरज भरा आकाश है कहीं धूप है कहीं छांव है आसमान की चादर में सितारों के बूटे हैं बादलों के घोड़े हैं जो दौड़ते हैं इधर-उधर जुगनू भी अपनी प्रेयसी को ढूंढते हैं रात भर […]
अचरज भरा आकाश है कहीं धूप है कहीं छांव है आसमान की चादर में सितारों के बूटे हैं बादलों के घोड़े हैं जो दौड़ते हैं इधर-उधर जुगनू भी अपनी प्रेयसी को ढूंढते हैं रात भर […]
नीले आसमान पर सूरज की उपस्थिति सौंदर्य की पराकाष्ठा किरणों की लालिमा से चमक रहा है पृथ्वी का हर कण हर क्षण…. पत्तियों की सरसराहट से मधुमास का सुंदर आगमन चमन की सुगंध से महक […]
डगमगा जाते हैं कदम आजकल एक जरा से झोंके से मगर, एक वक्त था जब हमारे इरादे बुलंद हुआ करते थे..
हुनर सब में है बस तराशने की जरूरत है हीरा बन सकता है हर पत्थर बस पारखी नजर की जरूरत है…
जिंदगी की आरजू में दफ्न हो गये सुकून के कुछ पल थे और कुछ अधूरे ख्वाब !!
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