मेरी बेटी। छोटी सी गुड़िया, कभी हंसती, कभी रोती। तो कभी रुलाती, तो कभी हंसाती। मेरी बेटी। अभी सीखा है, उसने शब्दों से खेलना। भाता है उसे, एक ही सार में, स्वर और व्यंजनों को […]

कविता क्या होती है कुछ शब्दों की तुकबंदी, या लय का विस्तार। जो अंत मन को व्यक्त कर लेती है या फिर सौंदर्य श्रृंगार। कविता क्या होती है? जिसने देश की खुशबू और होता है […]

मैं जिंदगी जी रहा हूं। दूसरों के दिए एहसानों, पर पल रहा हूं। भटक रहा हूं मैं, अपने आप से। घर के रास्ते, बार-बार टोह रहा हूं। कहां जाऊं, मैं किस डगर। जो भूख मिटा […]

कभी शौक था मुझे, रंगों से खेलने का, सपनों को बुननें का, तारों को गिनने का, चंदा से छिपने का , फूलों को छूने का, कभी थी झूले की चाह, तो कभी गुड़ियों की कभी […]

औंधे मुंह जा गिरी मैं। थामती रही हौसलों को, फिर भी वह जा फिसली। तब खत्म हुई जीवन आशा, संपूर्ण अब जीवन सारा। जा छिपी में तम शिविर में, बस अब मिटने की आशा। बदला […]

तुम बांध लो अपना सामान, कुछ भूल ना जाना, यह सुनते ही, बेटी का दिल बोला! यह घर भी, अपना-सा नहीं लगता। चार दिन बीत जाने के बाद, दोहराए जाते हैं यही सवाल! कि कब […]

चलो एक होड़ लगाएं, खुद से, खुद को बेहतर बनाने की , झूठ से , फरेब से, ईर्ष्या से, द्वेष से, छुटकारा पाने की, चलो एक होड़ लगाएं , बड़े चाव से , पाक इंसान […]

चलो ऐसा एक ज़हान बनाएं, जहां नहीं होगी , आदमी को आदमी से नफरत, नेकी की राह, नेकी हो सबमें, प्रेम हो सबसे, प्यार की हसरत, कदर करता हो, जहां हर कोई , हर किसी […]

नैतिकता को पढ़ना-सुनना, अक्सर बहुत अच्छा लागे, सबपर पूरा असर , पूरा समर्थन, मगर आचरण में सबके क्यों नहीं? यह सवाल विचित्र-सा, काल्पनिक-सा…..

मेरी बेबसी को मशहूर ना कर, माना बड़ा जालिम है तू जमाने, फिर भी मजबूर ना कर, और मजबूत है बहुत हम अंदर से, माना टूटे हुए दिखते हैं, तू मजबूर ना कर! अक्सर मजबूर […]

सही मायने में उजाला है, जहां बेटियों ने मां-बाप को संभाला है। चाहे मां पिता हो या मां पिता से सास-ससुर, उन्हीं से ही परिवार का सवेरा है।

मेरी बिटिया रानी, क्या वह चाहे, व वह ही जाने। हम उसकी, सदा ही माने। इशारों में भी, इतराती है। हम सब पर, रोब जमाती है। कभी इधर, कभी उधर, वो भागे। ना जाने, उसको […]

पिता का साया, छांव है शीतल सी। जो धूप से बचाती है, बचपन को बचाती है। वह कठोर हाथों का स्पर्श, बेशक तुम्हें अच्छा ना लगे। पर उसके पीछे की मेहनत, तुम बखूबी जानती हो। […]

राहें खत्म होती ही नहीं, इस जिंदगी की, हर मोड़ पर नया हुजूम मेरा इंतजार करता है, मु‌ड़ जाऊं इस राह से, खामोशी को तोड़कर , आगे बढ़ने को जी चाहता है मगर यह ऐसा […]

अभी-अभी कुछ बूंदों से रूबरू हुए, चमकते हैं मोती से, बरसते हैं बुंदों की तरह। पर आयानास ही नहीं बरसते। जब बनते हैं गम के बादल, सिमट जाते हैं पलकों पर। फिर गिरते हैं धीरे-धीरे […]

क्या नया है इस जीवन में, वही रोज की शाम सुबह है। जब हम थक जाते हैं, फिर उम्मीद के झरोखों से, झाकते हैं। बदल जाता है वह सब कुछ, हर सुबह न‌ई-सी लगती है, […]

ऊंचे-ऊंचे घरों में , रहने वाले लोग, आजकल घरों में ही रहते हैं, मगर मैं निकला हूं बाहर, साहेब ! रेहड़ी लेकर, खाली उदर बच्चों का, टिकने ही नहीं देता है।

कुर्सी क्या है ? कितना मुश्किल है इसे समझना। सब राजनीति की संरचना है, सुन रखे हैं पुराने वादें, अब नए वादों में फंसना है। ये तो कुर्सी का मसला है। कहीं सत्ता की चाल […]

जब उसने आँखे खोली, तब पाया एक नया संसार, रंग बिरंगी थी दुनिया उसकी, और खुशिया आपार, खेलती थी आँख मिचौली, संग अपने हमजोली, न पड़ती थी डॉट उन्हें, दो बोल मीठे बोलते, पा लेते […]