मेरे मन का मोती, मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। मेरे राम मेरे श्याम… प्रभु मैं जपु तेरा नाम पल पल, तुझमें ही खो जाऊं । मेरे मन का मोती , मैं तुझको अर्पण कर जाऊं। […]

मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं, तेरा हर अरमान चाहती हूं। तू उड़ सके आजाद, यह पैगाम चाहती हूं। फिरे तू हर उन गलियों से, जो गुजरती हो बुलंद नगरों से। बीच में तू रुके ना […]

तेरी होठों की मुस्कुराहट का, अलग ही फलसफा है । जहां खोता हूं मैं , और दिल हंसता है । भूल जाता हूं , मैं इस अदब को , जिसे मोहब्बत कहते हैं। जहां खोया […]

अनमोल थी तेरी यादें, तेरे साथ की। वह किस्सें बयान करती है, चाहते हैं, हम भी अनमोल हो जाते। तेरी यादों की तरह, छू लेते तुम यादों में कभी। पर हकीकत से , उनका राब्ता […]

अक्सर मैं भूल जाती हूं , अपनी राह। ख्वाब अनेकों हैं, अब खत्म है चाह। कभी उम्र की सीमा रोक देती है, कभी दूसरों की सलाह। पर भुला कर बढ़ती हूं आगे, फिर से उठते […]

आजाद किसे कहें? सब बंधे हैं बंधन में। हर शाम पंछी, अपना घोंसला तलाशता है। जहां चाह होती है, अपने आशियाने की। वह बोलते नहीं तो क्या, दिख जाती है उनकी ममता, जब चुग कर […]

दोस्ती ना सही, दुश्मनी तो मत निभाओ। चार बातें बनाकर, यूं ठहाके तो मत लगाओ। यूं तो दिल सबका दुखता है, उसे और ना दुखाओ। माना तुम काबिल हो , अपने मुकाम पर। मगर मेरी […]

लड़की हूं लड़की होने का, दस्तूर निभा रही हूं। न जता सकी उस प्यार को, फिर भी निभा रही हूं। शौक रखती थी कुछ पाने का, अब उसे दबा रही हूं। कभी कोई सोचता नहीं, […]

पाकीज़गी अब दिखती नहीं , इन आबो-हवा में भी । कभी दम घुटता है तो, कभी मन । कभी सास भी बेपरवाह हो जाती है , हां, यह रुख भी बदला है , अब सुकून […]

बड़े शहर की जिंदगी को छोड़ , अब छोटे शहर की जिंदगी को, जीकर देख रहे हैं यहां भी लोग हैं; वहां भी लोग थे, यहां सोच बड़ी, वहां सोच छोटी , न निभाते हैं […]

शोर भीतर भी है। शोर बाहर भी है । ये ऐसा मंथन हैं। जो चलता रहता है। गुंजता रहता है। हम शांत नहीं कर पाते। बस बना लेते हैं। शोर को अपनी आदत का हिस्सा।

बहुत दिनों के बाद , जब खोला मैंने यादों का पिटारा । कुछ बचपन की किलकारियां गूंजी, कुछ मां की मीठी लोरी, कुछ पापा की डांट मिली। कुछ दिखे खेल पुराने जो खेलें अपनों संग, […]

बचपन जल रहा है, जल उसे बुझा न सकेगा, जल रहा है बड़ों की इच्छाओं के तले, उनकी आशाओं के तले, चाहते हैं पूरे हो सब ख्वाब, पर कभी पूछते नहीं उनसे, बांधकर एक सीमित […]

लफ्जों की पोटली , बांध लो ना तुम , क्या कहते हैं ,वो जरा सुन लो ना तुम, तब मांपना और तोलना , उनकी बातों को , फिर वह पोटली खोल देना तुम, तर्क वितर्क […]