Author: राकेश पाठक

  • जीत जाएंगे

    जंग जारी है कोरोना के खिलाफ एक दिन जीत जाएंगे
    पतझड़ है घबरा मत बसंत आएगा गीत गाएंगे

  • इंसानियत धर्म

    अवतार है अनेक भगवान् एक है

    मजहब के नाम पर लड़ना न नेक है

    सब अपने रिवाजों से करे ईश वंदना
    इंसानियत भी धर्म है कहता विवेक है

  • पहले कर्तव्य

    पहले करे कर्तव्य फिर अधिकार लीजिए
    कर्मो की है प्रधानता संसार लीजिए
    काटेंगे फसल कल बोयेगे बीज आज
    कुछ प्यार लीजिए कुछ प्यार दीजिए

  • बादल

    शिव नहीं है चंदन नहीं हैं मगर सांपो को लिपटाए हैं
    आज कल इस धरती में इसी तरह के बादल छाए है

  • दुआए

    कुछ नहीं कर सकते हो तो दुआए करो
    शायद कबूल हो जाए
    महामारी का शूल चुभा है जो
    शायद गुलाब का फूल हो जाए

  • परोपकार

    दौलत का गरूर मत कर खाली हाथ जाएगा
    तेरा शुभ करम ही तेरी पहचान बनाएगा

    कुछ पुण्य भी कमा लो करके परोपकार
    इस लोक में उस लोक में तुझको बचाएगा

  • धरोहर

    वर्षो कि कमाई को करना नहीं बेकार
    कुरवनियो से हो सका है देश बन तैयार
    ये देश है धरोहर रखना सम्हाल कर
    हम भी है जिम्मेदार तुम भी हो जिम्मेदार

  • बेटा बेटी

    समझ गया है जमाना बेटा बेटी में फर्क नहीं होता
    जागरूक होते पहले से तो जीवन नर्क नहीं होता
    कन्या भ्रूण हत्या करना कराना अपराध है
    अनमोल है दोनों के बीच और कोई तर्क नहीं होता

  • दीपक जलाएं

    आओ सब मिलकर एक दीपक जलाए
    रोशनी करके अपनो के बीच का अंधेरा भगाए
    दलित उपेक्षित पीडि़तो के बच्चों को
    उनके घर जाकर निशुल्क पढ़ाए

  • सच्चा सुख

    सच्चा सुख मिलता है मेहनत की कमाई से
    बच के चलना जरूरी है इस युग की बुराई से
    ईमानदारी से बढ़कर कोई नीति नहीं है
    जीवन को सफल बनाए करके भलाई से

  • प्यार

    प्यार करना आसान है मुश्किल है निभाना नादानी मत करना सोच समझ कर जाना
    खिलौना समझकर खिलवाड़ मत करना
    उम्र भर ये रिश्ता पड़ता है चलाना

  • आशियाना

    अपने ही घर को मंदिर बना ले कही और नहीं जाना

    बोलती प्रतिमाए है घर के सदस्य सभी
    पुजारी की तरह अपना बना आशियाना

  • मां बाप

    पाएगा कुछ न वन्दे भगवान् को भुलाकर
    हसने की सोचता है मां बाप को रुलाकर
    इंसान के अवतार में भगवान् को पाया
    इनके चरण है चंदन पानी सा घुला कर

  • गाँव में

    गाँव में खेत हरे और है खलिहान
    गाँव में कूप, नल और है मैदान
    गाँव में बाग बन और है किसान

    गाँव में है भारत माता के प्राण
    गाँव में है कच्ची सड़क कच्चे मकान
    गाँव में है धंधा शहर सी दुकान
    गाँव में है शुद्ध जल और शुद्ध प्राण
    गाँव में है एकता देश की पहचान
    गाँव में दया है और धर्म, दान
    गाँव में है भोले भाले इंसान
    गाँव में है खेल कूद पशु के स्थान
    गाँव में है रोजगार और है खदान
    गाँव के लोग होते हैं बलवान
    गाँव के अन्न मे बस्ते भगवान्
    शहर बढ़ी भीड़ गाँव घूमो इन्सान

  • भूख

    भूख जब आती है
    तन मन में हलचल मचाती है भूख को
    जिंदा रखने के लिए
    दुनिया क्या क्या नहीं खाती
    भूख जब भूखी रह जाती है
    शैतान, हैवान बन जाती है
    भूख मिटाने के लिए
    शरम और इज्जत भी खाती है
    डाकू, आतंकी बनाती है
    मगर भूख जब ईमानदारी से मिट जाती है
    इंसान को भगवान् बनाती है
    भूख मरी तो मर जाएगा जीव इसलिए इसका
    जिंदा रहना जरूरी है
    कितना भी खाओ भूख रहती
    अधूरी है

  • कुल्हाड़ी मत चलाना

    कहा पेड़ ने मानव से
    कुल्हाड़ी मत चलाना
    मैं तुम्हारा पांव हूँ
    जब जाओगे मझधार में
    मैं तुम्हारी नाव हूं
    बचोगे तुम भी नहीं मुझे मारकर
    मैं तुम्हारी छाँव हूं
    प्यासे मर जाओगे
    मै बदलो को लुभाने वाला t
    ठाव हूं
    मर जाओगे प्रदूषण से
    मै तुम्हारी आखरी
    दाँव हूं
    मुझे पालो काल से बचाउंगा
    मै तुम्हारा प्यारा गाँव हूं
    कुल्हाड़ी मत चलाना
    मैं तुम्हारा
    शुकून, सुख, शांति, समृद्धि से
    भरने वाला घाव हूं
    कुल्हाड़ी मत चलाना

  • हे! बापू आओ

    अंग्रेजों के
    साहित्य और विचार
    हमारे मन मस्तिष्क में बैठे हैं
    डेरा डाल
    फूट डालो शासन करो नीति जैसे
    है हाल
    हमारी संस्कृति उपेक्षित है
    हम उलझे हैं
    अंधे अनुकरण के जाल
    हिंदी भाषा शर्माती है
    अंग्रेजी मालामाल
    अंग्रेजो की हिंसा का जहर फैल रहा ज्यों व्याल
    शोषण का पोषण कर दिया है कमाल
    वही पेड़ काट रहे बैठे हैं
    जिसकी डाल
    भेद वाद जारी है
    बज रहे हैं ताल
    भ्रष्टाचार दंगो के घूमते
    दलाल
    असहयोग आंदोलन कर रहे
    देश के लाल
    भारत माता हुई फिर से
    बेहाल
    अपने ही काट रहे अपनो का
    भाल

    कैसे सजाए भारत मां की
    आरती की
    थाल

  • रावण जिंदा हो गया है

    यह सच है कि
    जिस रावण को राम ने मारा था
    वह मर गया था
    लेकिन कुछ दिनो बाद
    प्रतिशोध की ज्वाला में जलते हुए
    आया शुक्राचार्य
    संजीवनी शक्ति का किया संचार
    कर दिया रावण को पुनः जिंदा
    पूरी सेना किया तैयार
    इस रावण के दस नहीं शिर थे कई हजार
    अनगिनत भुजाओं में असंख्य हथियार
    ये हरण नहीं करता नारियों का
    करता है बलात्कार
    रहता नहीं है यह लंका
    पूरी दुनिया में बजता है
    इसका डंका
    इसका भाई कुंभकरण भी खाता है दिन रात
    सोता नहीं है
    मार डालता है उसको जो
    रावण का होता नहीं
    मचता गया हाहाकार
    तब सज्जन दो चार
    गए विष्णु के द्वार
    कब लोगे प्रभु अवतार
    भगवान् ने कहा
    जब नहीं रह जाएंगे तुम जैसे दो चार
    संसार करेगा रावण की अधीनता स्वीकार
    तब शिव का तीसरा नेत्र
    खुल जाएगा
    प्रलय नृत्य करेंगे शिव
    प्रथ्वी का नाश होगा
    कोई नहीं
    बच पाएगा
    जब तक प्रलय नहीं होता तब तक
    शरण लो अजर अमर हनुमान की
    वही रक्षा करेगे तुम्हारे
    धर्म और प्राण की
    बोलो जय हनुमान की
    कलयुग के भगवान् की

  • जमाना

    बीत गया है ख़ुशी और गम बांटने का जमाना
    पागलपन है अकेले ही हंसना रोना गुनगुनाना
    काटते हैं ये जब इन्हें बांटते नहीं हैं
    कितना मुश्किल है अब सुनना और सुनाना
    अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है मगर सब मौन
    कोई मतलब नहीं रहा जिए या मरे जमाना
    कह नहीं पा रहे कहे बिन रह नहीं पा रहे जारी है जीवन में सुख दुख का आना जाना
    खड़े हैं मेले में अकेले अकेले से
    कितना मुश्किल है अपने को पहचान पाना
    मर गये हैं संवाद और संवेदना आज के इस दौर
    बेहोश समझ कर मकसद था इन्हे जीवित कराना
    मशीनों से मुहब्बत कहे या यंत्रों की गुलामी
    पानी सा फोन दिखता और मीन सा जमाना
    दुनिया ये काम में अब व्यस्त है इतना
    प्रचलन में नहीं लोरिया सुनना व सुनाना
    बोझा सा ढोके थक रहे अपनों को अपने लोग
    गूगल गुरु से पूंछःते वृद्ध आश्रम ठिकाना
    नाते व रिश्ते आज औपचारिक हुए
    भूलते ही गए लोग अब इनको निभाना
    नफरत की लताओ से पादप घिरे हुए
    कितना है मुश्किल शाख से अब वंशी बनाना

    O

  • मतदान

    मतदान से बड़ा कोई दान नहीं होता है
    एक बार दे दिया तो उसे पांच साल ढोता है
    यदि चाहते हो सचमुच निज देश का विकास
    दिन में जागेगा नेता तब देश सुख से सोता है

  • आतंकवाद

    आतंकवाद की जड़ को काटने की जरूरत है
    जेल मे डालो या फांसी दो देखना नहीं मुहूर्त है
    इसने इंसानियत को शर्मसार किया है
    इंसान के अंदर छिपे ये शैतान की सूरत है

  • जय हिंद

    इक्कीसवीं सदी का हमारा हिंदुस्तान है
    घूर नहीं सकता कोई अब इतना बलवान है
    आतंकवाद अब नहीं बर्दास्त करेंगे
    अंतरिक्ष हो या धरती अपनी अलग पहचान है

  • धरती

    वस्त्रों के बिना नारी शोभा नहीं पाती है
    धरती को किया नंगी और शरम नहीं आती है
    कैसे सपूत हो तुम जब मां तड़प रही
    पीने को शुद्ध पानी ऑक्सिजन नहीं पाती है
    प्रथ्वी दिवस मनाकर आजाद हो गए
    परमाणु बम की होड़ से प्रथ्वी कि फटती छातहै
    ओजोन छिद्र की उसे चिंता सता रही
    सरकार फैक्ट्री की स्थापना कराती है
    जीवन है इसी गृह में यह जानने के बाद
    जनता जनार्दन इसे अब क्यूँ नहीं बचाती है बीमारियों की जड़ है इंसान तेरी भूख
    जनसंख्या मत बढ़ाओ प्रथ्वी नहीं बढ़ पाती है

  • भारत बसेरा है

    यह सच है कि मुझे काले काले बादलों ने घेरा है
    इतना आसान नहीं है मुझे डराना क्यूंकि भारत में मेरा बसेरा है

  • कसाई खाना

    कहा बकरी ने मेमने से
    मैं तुझे जहां भेजती हूँ
    हंसते हुए जाना
    ले जाने वाला भगवान् के सामने तेरी काटेगा गर्दन
    और तेरे जिसम का प्रसाद बांटेगा मगर तुम
    रोना मत
    क्यूँकि ये संसार एक कसाई खाना है
    यहां सबको इसी तरह जाना है

  • हमारी धरती मां

    गेंद जैसी गोल
    धरोहर है अनमोल
    थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है जीवो को अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है
    लेकिन कई दिनो से है यह बीमार
    ऊपर से परमाणु परीक्षण उसके अस्तित्व को रहा है ललकार
    ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, वनो का संहार जैसे भयानक खतरे हैं तैयार
    फिर भी वह देती है पुत्रों को उपहार
    ममता दया दुलार
    आओ सब मिल करे अपनी धरती मां का श्रंगार

  • हमारी धरती मां

    गेंद जैसी गोल
    धरोहर है अनमोल
    थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है
    सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है
    लेकिन कई दिनो से है बीमार
    थकी नहीं ढोकर जग का भार
    डिप्रेशन में चली गई है देख कर अपने पुत्र का बदला हुआ व्यवहार

  • हमारी धरती मां

    गेंद जैसी गोल
    धरोहर है अनमोल
    थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है
    सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए ये हमारी धरती माता कहलाती है
    लेकिन कई दिनो से है यह बीमार
    थकी नहीं है ढोकर संसार का भार
    डिप्रेशन में चली गई है देख कर अपने पुत्र का b
    बदला व्यवहार
    ग्लोबल वॉर्मिंग, ओजोन छिद्र, वनो का संहार
    मानो दुर्योधन की सेना हरण करना चाहती है
    दोपतीका श्रंगार
    कई सदियों से एटम बम परमाणु बम के परीक्षण
    धरती के अस्तित्व को रहे हैं ललकार
    उसे दुख है कि उसका इलाज कराने के बजाय
    उसके पुत्र बेचने को है तैयार

  • रोशनी

    तेरे घर की रोशनी क्यूँ देखूँ जब मेरे घर में अंधेरा हो
    आखिरी रात न हो जाए कही जब तक हर ओर सबेरा हो
    उसकी ख़ुशी हमारे किस काम की जिसे
    अहंकार के भूत ने घेरा हो

  • अजगर

    दसो दिशाओ मे
    बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर
    पड़े हैं तैयार
    उत्सुक हैं निगल जाने को संसार
    वो हमारे पास भी आते हैं
    और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं
    इस प्रकार वो अपना संगठन चलाते हैं
    निर्दोष जान गवाते हैं
    और वो पैसा कमाते हैं
    पैसा से ये नर भक्षी दानवो का परिवार चलाते हैं
    अक्सर अनचाहे अजगर ये एक न एक दिन मिल ही जाते हैं

  • टोकरी

    एक हाथ से ही अब बजने लगी ताली है
    खुशी ग़म की टोकरी कई दिनो से खाली है

  • राजनीति

    आ गया साल है पांचवा जानिए
    छा रहा है सहज मेघ ये मानिए
    बूंद दो भी बरस के न जाएगा ये
    मोर के जैसे शोर को छानिए
    घर बनेगा उन्ही का हकीकत यही
    पैर के नाप की ही चद्दर तानिेए
    भूल जाएंगे वो तुझको दान को
    वेवफा था सनम ज्यों उसे जानिए
    और बाते बनाना उसे आ रहा
    शोषको की कतारों खड़ा जानिए
    राजनीती यही है न कोई सगा
    आतंको की गढ़ी है पहिचानीए

  • बचाने के लिए

    मिली नहीं है आंख हरपल आंशु बहाने के लिए क्या कुछ नहीं जहां में देखने दिखाने के लिए
    अभी भी समय है हो जाओ सचेत
    बहुत कुछ बचा है बचाने के लिए

  • इंसानियत

    निभा तो सही सबसे इंसानियत का नाता है
    कड़ी धूप और बरसात से बचाने वाला छाता है
    परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता

    तेरा ही करम तेरे भाग्य का निर्माता है

  • वरदान

    क्यों मांगते हो वरदान परिस्थितिया सदा अनुकूल हो
    चलना हमारा काम है गली में कांटे हो या फूल हों

  • बुरा वक्त है

    बुरा वक्त है एक दिन यह भी बीत जाएगा
    विश्वास बनाए रखना एक दिन जीत जाएगा
    परीक्षा है परमात्मा की धैर्य से दे
    उम्मीद रख खुशी के गीत गाएगा

  • खुशियों की बरसात

    अपने देश में खुशियों बरसात कराएंगे
    अनेक प्रकार के ये लोग जिस दिन एक हो जाएंगे

  • उड़ान

    चुनौतीया है देश मे कई
    हम भी स्वीकार करते हैं
    देखकर दंग होता है जहां
    जब हम नई उड़ान भरते हैं

  • सिन्दूर

    धरती से आकाश जितना दूर होगा
    उतना ही दीर्घायु तुम्हारी मांग का सिंदूर होगा

  • नैतिक जिम्मेदारी

    नैतिक जिम्मेदारी है सबकी सुंदर परिवेश बनाना फैलती है गंदगी से बीमारियां इनको दूर भगाना

  • डरो मत

    डरो मत तूफानों से आते जाते रहेंगे
    कवि हैं कविताओं से हिम्मत बढ़ाते रहेंगे

  • देश के सैनिकों

    मेरे वतन के सैनिकों अब देश ही परिवार है
    कबूल करो देशवासियों की दुआ और प्यार है

  • देश की पहचान

    माता कहते हो जिस देश को वहां नारी का सम्मान है
    अनेकता में एकता ही भारत की पहचान है

  • हौसला

    हौसला आप यूँ ही बनाए रहे
    देश की इस धरा को बचाए रहे
    भेड़ियों की सभी चाल नाकाम हो
    देश सीमा कि शोभा बढ़ाए रहे

  • दर्पण

    आज भी नहाते हैं लोग
    सुबह उठकर
    फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं
    दर्पण मे देखकर चेहरा अपना
    मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं
    फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर
    बड़े आकार का दर्पण खरीद लाते हैं
    परंतु इसके सम्मुख भी जाकर
    वही प्रक्रिया दुहराते हैं
    मांग बढ़ती देख बाजार में
    दर्पण के प्रकार और आकार बढ़ा दिए जाते हैं
    क्या हम सचमुच वैसे ही है
    जैसा ये दर्पण दिखाते हैं
    हां मे जवाब सुनकर
    मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं
    मगर दर्पण के सिवाय
    अपने आसपास किसी और को नहीं पाते हैं

  • पर्यावरण के दोहे

    पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय
    सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय
    नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय
    मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय
    धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार
    प्रकृति रोग वर्षा करे, जगत हुआ बीमार
    प्रकृति अंग लकवा हुआ, दुखी नहीं संतान
    वृद्धा आश्रम छोड़ कर, कहे जाप भगवान्
    एटम बम के पालना, झूले राजकुमार
    बापू गौतम बुद्ध की, सभा में हाहाकार
    झरना नदिया बाग वन, पर्वत और पठार
    रक्षा कर अस्तित्व की, कहत पुकार पुकार

  • वतन मे खिले

    नीचता ऊ़चता देखते हम चले
    आइए भूल जाए न सिक्वे गिले
    एक जैसा सदा भाव लेकर चले
    फूल जैसा बगीचा वतन. मे खिले

  • शहादत

    शाहीदो की शहादत कभी हम भुला सकते नहीं
    रोना जिन्हे आता नहीं और रुला सकते नहीं

  • अपराध क्या है?

    अपराध नहीं है
    शेर का हिरण को खाना
    चिड़ियों का चुगना दाना
    पेड़ का कड़ी धूप में मुस्कुराना
    अपराध नहीं है शेर चिड़िया, पेड़ का पाठ शाला न जाना क्यूँकि पाठशाला में जाता है केवल इंसान का बच्चा
    अपराध है इंसान के बच्चे का शेर चिडि़या, पेड़ को कच्चा चबाना
    अपराध है इंसान के बच्चे की पाठशाला का
    जिसने उसकी आदत बिगड़ने दिया
    मध्यांह भोजन का देकर खाना
    पाठशाला के अभाव में वह अपराध का आदी न होता
    सर्वाहारी होने के बाद भी आता नहीं पचाना
    अपराध है अस्पतालों का जिसमे बैठे डॉक्टर
    उसके उदर की भूख नहीं शांत करा पाए अब तक
    यदि यही चला तो तय है प्रथ्वी का इंसान के उदर में जाना
    क्योंकि इंसान के बच्चे की पाठशाला ने उसे सिखा दिया है
    सब कुछ खाना और पचाना

  • कोशिश

    कोशिश जारी है एक दिन मंजिल हम भी पाएंगे
    जिस रास्ते पर चले हैं चलते रहेंगे कही और नहीं जाएंगे

New Report

Close