आँगे बढ़ने प्रतियोगिता में सब हुए हिस्से दार पग बढ़ रहे हैं भीड़ के लगातार मुश्किल है भीड़ को पहचान पाना भीड़ में अपनी पहचान बनाना प्रतियोगिता में पिछड़ने वालो को अपराधी मानते हुए उपेक्षित […]
आँगे बढ़ने प्रतियोगिता में सब हुए हिस्से दार पग बढ़ रहे हैं भीड़ के लगातार मुश्किल है भीड़ को पहचान पाना भीड़ में अपनी पहचान बनाना प्रतियोगिता में पिछड़ने वालो को अपराधी मानते हुए उपेक्षित […]
दुनिया के सब देश मे, एटम बंब की होड़ शांति संधि सब शर्त को, पल में देती तोड़ पल में देती तोड़, बड़ा खतरा है भाई होगा दुनिया अंत, होड़ है ये दुख दाई कह […]
गर्मी ऋतु के बाद मे, आती है बरसात धरती उगती घास औ, तरु में आते पात तरु में आते पात, दामिनी चहुँ दिश चमके गिरती जल की बूँद, गगन में बादल दमके कह पाठक कविराय, […]
नारी नर में भेद मत, अब कर हे इंसान समता का अधिकार है, दो आँखो सा जान दो आँखो सा जान, बनो सब रूप पुजारी कन्या पत्नी बहिन, और माता है तुम्हारी कह पाठक कविराय, […]
नारी के सब रूप को, वंदन बारंबार जो करती सत्कर्म से, दोनों कुल उजियार दोनों कुल उजियार, सती श्री वीणापाणी ममता करुणा मूर्ति, जगत की है कल्याणी कह पाठक कविराय, आरती करे तुम्हारी हरण करो […]
करो काम भगवान् का, रखकर हरपल ध्यान सब जीवों के ह्रदय में, बसते हैं भगवान् बसते हैं भगवान्, दिखावा नहीं जरूरी रक्षक बन ईमान, आवश्यकता कर पूरी कह पाठक कविराय, प्रेम से खाई भरो सब […]
बच्चे बूढ़े युवक सब, ले साधन संचार अपनो से हुए दूर औ, तस्वीरों से प्यार तस्वीरों से प्यार, बढ़ी संवाद हीनता मोबाइल मन लीन, ऊर्जा रहा छीनता कह पाठक कविराय, सभी उपकरण हैं अच्छे सीमित […]
मन को परेशान मत करो गंदे विचारों से सीख लिया करो कुछ नदी के किनारों से मस्तिष्क में आएगे भूकंप के झटके बच कर रहना चाहिए घर की दीवारों से
रिमझिम रिमझिम बरस रहा पानी है चल रही शीतल हवा शाम ये सुहानी है हरी हरी घास से धरती करे मुस्कान कह रही प्रिय तम से मिलने की कहानी है
मानवता की सच्ची सेवा है सच्चे सुख का श्रोत है सहयोग चले गए अंग्रेज बापू का असहयोग आंदोलन जारी है बापू ने तो अत्याचार के खिलाफ चलाया था बड़ा भयानक है आज अपनो के ख़िलाफ़ […]
परिवर्तन प्रकृति का नियम है बदल जाएगा कोरोना संसार से सदा के लिए भाग जाएगा फिर से पटरी में दौड़ेगी समय की ट्रेन इंतजार कर फिर से हँसेगा और मुस्कुराएगा
आजकल मन बहुत उदास है ना जाने इसे किसकी तलाश है मुश्किल भरे दौर को बनाना खूबसूरत और खास है
मेरे मन अकेला जानकार मुझे सहानुभूति का भाव भरो अर्जुन नहीं हूँ परंतु अभिनय करना है श्रीकृष्ण सा समझाया करो भगवान् का अस्तित्व स्वीकार है खाली समय प्रभु भक्ति में विताया करो प्रदूषण में भी […]
दुख दर्द किसको सुनाए सब अपने मे खोए हुए हैं बुरा सपना देखकर जागे हम सब सोए हुए हैं मन का बोझ हल्का होता कुछ बाते करने से गैरों का क्या कहना जब अपनो से […]
गम के दौर में भी खुशी खोज लेना है बांट ले दुख दर्द अपनो का साथ देना है घर में हंसी खुशी का वातावरण रहे डूबे न नाव करना तैयार एक सेना हैं
घर की चारदीवारी से बाहर कब जाएंगे कोरोना से हार गयी जिंदगी इसे कब हराएंगे गति रुक गई है दुनिया की प्रश्न गूंजते हौसला के पंख फिर से कब आयेंगे
मुस्किल घड़ी में भी हम घबराए नहीं भगवान् से दूर कभी जाए नहीं वक्त बुरा है इंतजार कर रहे हैं क्यूँकि अभी अच्छे दिन आए नहीं
मत गंवाओ जीवन खाने और सोने में मत गंवाओ जीवन हँसने और रोने में हर काम का हिसाब देना पड़ेगा जान मतलब तो कुछ निकाल इंसान होने में
क्या पाया नहीं तूने क्या माँग रहा है कब का हुआ सवेरा अब जाग रहा है भगवान् के सम्मुख ख़ुद का कर समर्पण रनछोण दास जैसे क्यूँ भाग रहा है
जारी रहता है जीवन में समस्याओ का आना जाना मुकाबला करो इनका मत बनाओ बहाना संघर्ष बिना जीवन में सौंदर्य नहीं आता गिरना स्वभाव है मगर फिर से संभल जाना
मत डरो रात से सुबह आएगी सदा नहीं रहा कोई कैसे रह जाएगी गम में डूबी हुई दुनिया फिर से खिलखिलाएगी और मुस्कुराएगी
मेरे गतिशील पैरों को आखिर तुमने रोक लिया फूल तुम्हारा शुक्रिया नतमस्तक हूँ तुम्हारे निश्छल स्वभाव के सामने थकी उबी आँखो के तारा हो तुम हिरण की तरह उछलने वाले मन को ठहरे हुए जल […]
झूठ की मिट्टी डालकर दफनाया गया है सत्य को परंतु वह अभी भी जीवित है मरा नहीं देर से ही सही भयानक रूप धारण कर सामने आएगा एक दिन वह एक दिन ऎसी अंधेरी रात […]
सदियों पुरानी मर्यादाओं को क्षण भर में तोड़ देना अपने अब वही है जो जानते हैं नीबू जैसे निचोड़ लेना बहुमंजिला इमारत के नीव के पत्थर गायब है फिर ऎसा विश्वाश कैसे आया कि इमारत […]
कोरोना ने कर दिया, तन मन धन बर्बाद हे भगवान् करवाइए, अब इससे आजाद कोरोना से रुक गया, दुनिया सकल विकास दवा बनी जिसकी कमी, करती गयी हताश मास्क लगाकर कीजिए, कोरोना को दूर छह […]
बरसात के पानी को मत व्यर्थ बहाना जलाशय और सोक्पीट खूब बनाना पानी बिना सब सून कमी दूर कीजिए हरहाल में जल का स्तर है बढ़ाना
वतन में भ्रष्टाचार भारी है सांसो की चल रही मारा मारी है दे नहीं सकते जो ऊंचे ऊंचे दाम दुनिया से जाने की उनकी ही बारी है
मन में उल्लास धधकता रहे अंगार की तरह हार के बाद भी जीत जाने की संभावना बनी रहे बीपत्तियों का सामना करे पहाड़ की तरह उम्मीद के दीपक जलाकर अंधेरे में चले अपनो के विश्वाश […]
हरी हरी बाग में सुगंध देती साग हैं बह रहा पानी मिट्टी की बुझी आग है झूम रहे तरु मानो खेल रहे फाग हैं हरियाली घास की मखमल सा बाग है बौर लगी आम में […]
माता कुमाता नहीं हो सकती परंतु पुत्र नहीं सुपुत्र रहा मां, धरती मां, भारत मां, प्रकृति मां , नदी मां, गौ मां आज सभी पीड़ित, उपेक्षित, असहाय महसूस कर रही है स्वार्थ ने मां बेटे […]
घर के आँगन में हँसते खेलते बच्चे दुनियादारी से अनजान खिले हुए फूल की तरह सौंदर्य और सुगंध बिखेर रहे हैं भौरो की तरह मन प्रतिदिन करता है रसपान भूल जाते हैं तनाव सब भूल […]
कैसे करें विश्वास लोग घात करते हैं सावधान उनसे जो मीठी बात करते हैं एक विश्वास ही जिन्दगी जीने का सहारा था लोग सोने के हिरण जैसे मुलाकात करते हैं
कर्म करते रहिए कभी बेकार नहीं जाते हैं आज नहीं तो कल कर्मो का फल पाते हैं हर काम के बदले पैसा न लीजिए रखिए सदा ही याद जो संस्कार सिखाते हैं
ये देश है हमारा इसे हमे ही बचाना है दअपहतर में हो या घर में मास्क तो लगाना है अनमोल है जीवन और देश हमारा सहयोग से सबके महामारी को हराना है
हे! इन्सान मत बोल बोलना मना है तेरा मुख सच या झूठ बोलने के लिए नहीं खाने के लिए बना है दिन रात खाए जा फिर भी बिना बोले तू नहीं रह सकता जिंदा अभिव्यक्ति […]
बने हुए रास्ते तकदीर वाले पाते हैं हम तो चलते भी हैं और रास्ते बनाते हैं शायद कोई करे पदचिन्ह का अनुकरण कांटो को हटाते हैं और फूल बिछाते हैं
सत्ता के मद में हो गए चूर चूर हैं जनता से आजकल वो दूर दूर हैं भर लो उड़ान कितनी ऊँची आकाश में आना पड़ा धरा में जितने भी शूर हैं
माना कि तुम इस बार फिर से हार गए हो बस जीतने की सोचो मझधार गए हो साहस में कमी अपने आने नहीं देना हर हार से कुछ कमियाँ सुधार गए हो
नहीं मिल रही राह तो बनाकर तुम चलो सुन लो सभी की सुनाकर तुम चलो चलना ही जिंदगी है यह भूलना नहीं मंजिल अभी दूर है सब भुलाकर तुम चलो
मत सुनो उनकी जो नकारात्मकता से भरे है पतझड़ में तलाश करो अभी भी कुछ पेड़ हरे है भीम की तरह कमजोरियों में प्रहार करते रहे हौसला बढ़ाओ उनका जो घन की घोर घटाओं से […]
मत घबराओ सोचकर सांपों का डेरा हो गया है हैरान मत हो जानकार सपेरा हो गया है मत तलाश करो अंधेरे में दीपक और टार्च की जागो तो सही देश में सवेरा हो गया है
छिप गया है सूरज सवेरे फिर आएगा झूठ मत बोलो जमाना जान जाएगा झूठ को बना लोगे व्यवसाय तुम अगर सदा के लिए लोगों का विश्वास चला जाएगा
ठहर जा शिकारी मत करो शिकार पर आज भी जारी है पशु पक्षी का संहार कुछ विलुप्त हो गए धरा से कुछ खड़े हैं कगार जैसे गिद्ध मृत्यु प्राप्त जानवरों को खाते हैं आज कल […]
रिश्वत के बिना आजकल काम नहीं होते हैं सब योजना बेकार है जब दाम नहीं होते हैं बिगड़ी बनाने वाले होते हैं रिश्वत खोर कहते हैं सब कुछ दौलत अब राम नहीं होते हैं
सांप ने कहा अपने साथियों से मैं देख आया हूँ शहर की जमीन वहां चूहों के अनगिनत बिल है आज ही पलायन करो शहर की ओर चूहे भी खाएंगे और बना बनाया घर पाएंगे वहां […]
बेटी के बाप के घर में दहेज का दानव आया है छीन कर खुशियाँ उसकी अपना घर बसाया है इक्कीसवीं सदी में भी जारी है ये अभिशाप बेटी के दोनों पक्षों को जिसने नर्क बनाया […]
आय न सके बढ़ाय पर, मंहगाई की मार जीवन जीना कठिन है सुन लीजै सरकार सुन लीजै सरकार, कैसे परिवार चलाए गर्दन कटे गरीब, नहीं तलवार चलाए कह पाठक कविराय, बढ़ेगी यूँ महगाई पिछड़ जाएंगे […]
खाने सोने में रहे, जीवन लोग गंवाय उन्नति देखी और की, सिर धुन धुन पछिताय सिर धुन धुन पछिताय, काम कुछ करिए ऎसा जगत करे सम्मान और पाए भी पैसा कह पाठक कविराय, कर्म बिन […]
देश एकता अखंडता, जोड़े सूत्र समाज जो तोडे़गा वह नहीं, हो सकता युवराज हो सकता युवराज , पांच वर्षों तक छाए लेना है मतदान, देश दंगा करवाए कहते हैं कविराय, चलेगा अब ना ऎसा जोड़े […]
मैंने नहीं देखा सुना है कि कल अज्ञात गरीब की बेटी का बलात्कार हो गया मैंने नहीं देखा सुना है कि कल पड़ोसी के घर में चोरी हुई मैंने नहीं देखा सुना है कि दबंगों […]
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