भेड़िए से सब तरफ फैले हुए हैं आज भी हैं लगाये टकटकी इज्जत मिटाने दूसरे की। वासना अपनी जहर सी वे उगलते हैं, राह चलती जिन्दगी को वे निगलते हैं। पापियों के पाप पर अब […]

हो सकता है, मेहनत से बहुत कुछ हो सकता है। संभावनाएं होती हैं, हर किसी बात की कुछ न कुछ संभावनाएं होती ही हैं। एक आशा की किरण पासा पलट देती है, मंजिल पर सच्ची […]

वो मिस्त्री के साथ काम करने वाला मजदूर, कहना मानने को है मजबूर, ईंट लपका दे, मसाला फेंट दे, थोड़ा गीला बना, थोड़ा सख्त बना, चल टेक लेकर आ, सरिया मोड़, टूटी हुई बल्ली को […]

जीवन श्लेष युक्त कविता है इसको सुलझाते-सुलझाते सारी उम्र बीत जाती है लेकिन सुलझ नहीं पाती है। अर्थ, रहस्य, लक्ष्य क्या इसका है किस हेतु बना यह या केवल है स्वप्न देखने मिटने हेतु बना […]

नाटक के किरदार अनेकों रूप-रंग के हैं अलग अलग मुखौटे पहने अलग ढंग के हैं। जीवन में मिल जाते हैं हम भी घुल मिल जाते हैं, कभी पहचान कर लेते हैं कभी धोखा खा जाते […]

पानी है यदि सफलता अभ्यास कीजिये, अपने हुनर का तुम निरंतर अभ्यास कीजिये। व्यवहार में कमी हो कहीं अहसास कीजिये कमियां सुधारने का, अभ्यास कीजिये। आदत है बोलने की तो सच बोलिये, जिह्वा में सच […]

रोना नहीं है तुम्हें प्रतिकार करना है, बुरी नजर से देख पाये नहीं कभी कोई , तुम्हें बन दुर्गा, महाकाली दुष्ट दल को मसल कर रखना है। तुम्हारी राह तब तक है नहीं महफूज जब […]

हवा की दिशा में भले ही सब बहें मगर तू फैसला खुद की हिम्मत से करना। हो अगर पंखों में ताकत, और पाने का जज्बा, तब तेरा निश्चित होगा, मन की मंजिल में कब्जा। हवा […]

ठकराये गर कोई तो पत्थर बन जाना है, ताकि नुकसान न कर पाये, सम्मान दे कोई तो फूल बन जाना है जो प्रेम की सुगंध लुटाये। प्रेम के बदले प्रेम होना ही चाहिए नफरत की […]

कुछ नया इतिहास रचना है तो हद को लाँघिये अन्यथा रेखा के भीतर, इंच में कद नापिये। दूसरे की औऱ अपनी कीजिये तुलना नहीं, तुम गलत के सामने गलती से भी झुकना नहीं। लिंग से […]

नाजों से पाली बिटिया के विवाह का अवसर विदाई का पल, वह रोक नहीं सका अपने आँसू। दो आँसू क्या निकले, भभक भभक कर रोने लगा, याद आने लगे बिटिया के बचपन के पल, कितना […]

जब भी खुशियों के पल आयें खूब आनन्द लीजिये, जिन्दगी की खूबसूरती का खूब आनन्द लीजिये। जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है, जूझना अपना काम है, लेकिन कर्म का भी मिलता दाम है। मगर कर्म […]

कभी-कभी हमारी बात पर भी गौर कीजिए, मीठे के साथ- साथ में कड़वा भी पीजिये। अंगूर, सेब, आम सब आम बात है, पंचरत्न नीम का भी स्वाद लीजिये। सूखा पड़े न वक्ष पर अश्कों से […]

आज कल परसों कभी तो पायेंगे कुछ नई आशा की किरणें दोस्तों। कब तलक भय का रहेगा राज यह कब तलक फैली रहेगी वेदना। कब तलक होगा रुदन चारों तरफ कब तलक साँसों के संकट […]

नींद पलकों में भरी स्वप्न आंखों में सजे आज आलस्य त्याग और कल मिलेंगे मजे। आज है काली निशा तारे तक खो गए हैं ठोस चट्टान भी देख यह रो गए हैं। ये हवा चल […]

अर्थ का महत्व है शब्द तो शब्द है, बिना अर्थ के शब्द निरर्थक है। अर्थ कुछ भी लगाया जा सकता है, निश्चित अर्थ या निर्मित अर्थ। चेहरे के भाव का अर्थ मूँछों में ताव का […]

कूड़े के ढेर में खोजने में लगे थे नन्हें नन्हें हाथ, तन्मयता के साथ, जरूरत की चीजें, दे रहे थे सामाजिक जीवन को, सच्ची सीखें। पूछा तो बोले उनके घरों से निकला हुआ यह कूड़ा […]

इतना करना आज तू, उम्मीदें मत छोड़, टूटन में भी टूट मत, ले आ नूतन मोड़, ले आ नूतन मोड़, स्वयं के जीवन मे तू, नहीं हताशा रखूं, ठान ले अब मन में तू, कहे […]

स्थिति कैसी भी आये मगर तू रखना मन में हिम्मत। हिम्मत से ही जीत मिलेगी, हारेगी कठिनाई। कभी घड़ी कठिन आ जाये, समझ परीक्षा आई। भय मत करना आये चाहे कैसी भी कठिनाई। तुझे लगेगा […]

श्रीराम हरो पीड़ा मनुज अब सुमिरन करता है। जहां तहाँ फैली महामारी, दुखी हुई प्रजा यह सारी, दूर करो रजनी अंधियारी, सुमिरन करता है, मनुज अब सुमिरन करता है। संकट से घिर गए हैं सारे […]

भीड़ के बीच में ख्याल खुद का रखो, हर सको दर्द दूजे का नुस्खा रखो। वेदना हो भले दिल के भीतर भरी मगर होंठ में आप मुस्कां रखो। यह न अहसास हो दूसरे को कभी […]

थोड़ा निहारने दो कुदरत की छवि मुझे तुम तुम भी निहार लो ना इस वक्त भूलो सब गम। सूरज निकल रहा है सब ओर लालिमा है, कलरव में उडगनों के प्यारी सी मधुरिमा है। चारों […]

अंधेरी राह जीवन की हमारी रोशन करते हैं, हमें जो ज्ञान देते हैं उन्हें हम शिक्षक कहते हैं। दिशा देते हैं जीवन को करा कर बोध अक्षर का नयन में ज्योति देते हैं उन्हें हम […]

हर बार चिपकाता है वह पोस्टर। बैनर टाँगता है हर चुनाव में। इस आशा में कि कभी तो बैठूँगा अपने विकास की नाव में। कुछ खिला पिला दिया जाता है तात्कालिक संतुष्टि को, ठेके-पल्ले का […]

हैं वह मर्यादा का नाम जिन्हें सब कहते हैं श्रीराम, पुरुषोत्तम, आदर्श संस्थापक, न्यायप्रिय श्रीराम। जन्म हुआ दशरथ जी के घर अयोध्या जैसा धाम, अपमानित थी मात अहिल्या उन्हें दिया सम्मान। लांछन से पत्थर बन […]

आत्मसम्मान जीवित रखो वक्त काफी कठिन क्यों न हो, बस रहो कर्मपथ पर अडिग वक्त काफी कठिन क्यों न हो। मन में घबराहटों के लिए कोई स्थान ही मत रखो, खोज कर खूब सारी उमंगें […]

धरा माँ है हमारी पालती है पोसती है, इसी में जिंदगी सारे सुखों को भोगती है। अन्न रस पहली जरूरत है हमारी जिंदगी की, वायु-जल के बिन कहाँ है कल्पना इस जिन्दगी की। और सबसे […]

कैसे हो बेकारी दूर मेहनतकश को काम नहीं है, बैठा है मजबूर। कब तक ऐसा रोग रहेगा, सोच रहा मजदूर। रोजी-रोजी की चिंता है, घर से आया दूर। मन में चिंता है जीवन की, कठिनाई […]

सुन लेंगे भगवान मगर तू सच का रखना ध्यान, कि सच का मत करना अपमान। झूठी झूठी माया जोड़ी, हुआ बहुत धनवान। अंत समय में सब मिट्टी है, यह होता है भान। निंदा, द्वेष बुराई […]

जीवन संघर्षों का नाम बिना किए कुछ भी न मिला है, करना होगा काम। कर्मों का फल देता ही है, देने वाला राम। जिसको पाने में कठिनाई, उसका ऊँचा दाम। पूरब हो पश्चिम हो या […]

बोझ खींचे जा रहा था वह हाथ ठेले से, पेट भीतर तक खींच कर जोर लगा रहा था। आँतें एक दूसरे से चिपक कर सपाट होती जा रही थी। हड्डियां व पेशियाँ खिंचती चली जा […]

संतापों क्रम यह कब बदलेगा, मानव जाति पर आया संकट कब निपटेगा। हा हा कार, चीत्कार विभत्स करुण क्रंदन कब रुकेगा, ओ प्रकृति !! तेरा यह आक्रोश कब थमेगा। लाखों जीवन लील चुका यह विनाश […]

बाँधे कमर नई आशा से फिर दिल्ली पंहुचा था वो रोजी रोटी खोज रहा था, बच्चों को भी भेज रहा था। कई दिनों के बाद जिन्दगी ढर्रे में आने वाली थी, मगर वही फिर कोविड़ […]

जिंदगी का पल पल बीत जाता है, हम देखते रह जाते हैं, सुबह से शाम तक शाम से सुबह तक मिलन से विरह तक, बीते पलों की जिरह तक नहीं कर पाते हैं, कल से […]

गांव के खेत बंजर होते गये गांव के बुजुर्ग पेड़ रोते गये, पुराने घर आँगन टूटते रह गये। जो गया लौट कर आया नहीं। शहर का हो गया गांव फिर भाया नहीं। वह चबूतरा टूटता […]

जो कृत्य खुशी दे मन को वह कृत्य तुझे करना होगा नफरत विद्वेष भरी बातों से दूर तुझे रहना होगा। तन अलग कहे मन अलग कहे उलझन का मूल यहीं पर है, तन-मन दोनों की […]

मत कहना सूरज डूब रहा है नहीं डूबता है सूरज जलकर निरंतर रात औऱ दिन ज्योति उगलता है सूरज। धरती गतिशील घूमती है स्थिर नहीं रहती है इसलिए हर कोने में क्रम क्रम से उजाला […]

समाज में हो रहा गलत तेरे भीतर की आत्मा को झकझोरता नहीं क्या किसी निरीह की चीत्कार किसी भूखे की भूख प्यासे की प्यास जीवन में व्याप्त दर्द तेरे भीतर की आत्मा को झकझोरता नहीं […]

लगी है आग जंगल में न जाने कौन है ऐसा रगड़ माचिस की तीली को जला कर चल दिया घर को। इधर घर जल रहे लाखों विकल हैं भस्म हैं प्राणी उधर है मौज में […]

जिन्दगी की अंधेरी रातों में काम जुगनू से न चल पायेगा, कभी चमकता कभी बुझता सा ये नहीं राह दिखा पायेगा। दबा ले स्विच जगा ले बत्ती को ये बत्ती हो मन की ऊर्जा की, […]

भले ही सो रहा हूँ मैं थका-माँदा यहाँ फुटपाथ में मगर चलती सड़क है रुकती है बमुश्किल एकाध घंटा रात में। उसी में नींद लेता हूँ उसी में स्वप्न आते हैं, कभी जब राहगीरों के […]

छोड़ दे छोड़ दे उदासी को कोई फायदा नहीं है चिंता से गम में मत रह बढ़ा न दर्द ए दिल कोई फायदा नहीं है चिंता से। दुःख तो होता है कुछ भी खोने से […]

ईश्वर का पता कहाँ है मन ढूंढता रहा है, कोई कहे यहाँ है कोई कहे वहाँ है। मगर जब गौर से देखा मुझे ईश्वर दिखा उसमें कि था जब भूख से व्याकुल खिलाई रोटियाँ जिसने। […]

रोशनी कर दो ना जला दो बल्ब सारे, देखने हैं मुझे दिवस में चाँद तारे। अंधेरे से बहुत उकता गया हूँ, मन भरी पीड़ को लिखता गया हूँ। अब मुझे जूझना है, नया स्वर फूँकना […]

हर अवसर भुनाना होगा मौका मिलेगा तुझे भी एक दिन मुश्किल से उसे बस कस कर लपकना होगा। हो अगर कंटक युक्त झाड़ी तो बीच में फूल बनकर महक के साथ महकना होगा। उदासी फेंक […]

तब आप कितने सुन्दर थे पापा देख पुरानी फोटो, देखता रह गया मैं। फौजी वर्दी चमकता चेहरा, फौलादी बाजू, सीधे लंबे से, जाने कब की है यह फ़ोटो, मुझे याद है आपकी कर्मठता की ठंडी […]

धन है धन्य धन का राज है सबके दिलों में। बिना धन जिन्दगी का पथ कठिन। न हो धन पास जिसके दूरियां रखते हैं उससे, ठुंसा हो जेब में जिसके खूब धन, भले वह एक […]

उपवन में फूल खिले, महक आई सुबह सुबह की मारुत, उड़ा लाई। याद आया वह मुझे, नलिनी फूल, या नासिका से जुड़ी, यह है भूल। देख अनदेखा किया, जाते रहे ख्वाब में वो ख्वाब क्यों, […]

आँख में देखना कुछ नया भाव होगा, धड़कते दिल में कोई घाव होगा। वो पुराना हो या नया हो मगर रख हौसले से भरना होगा, मुकाबला समस्याओं से डटकर करना होगा। कुछ नए परिवर्तन को […]

रम तू जा माँ के चरणन में घर में माता भूखी सोये, फिरे क्यों मन्दिरन में। छोड़ दिखावा मूरख प्राणी, गर्व न कर निज तन में। बूढ़ा होगा जब तेरा तन, तब रोयेगा मन में। […]