Author: Shyam Kunvar Bharti

  • श्रीराम भजन – प्रभु श्रीराम आएंगे|

    श्रीराम भजन – प्रभु श्रीराम आएंगे|
    जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|
    काट बनवास संग सीता आज भगवान आएंगे |

    किया बद्ध दैत्यो का मानव उद्धार किया |
    खाकर जूठा बैर सबरी संदेश संसार दिया |
    चढ़ बीमान पुष्पक मार्ग वो आसमान आएंगे |
    जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

    मनाओ सब दिवाली घर भी सजालो अपना |
    जगमग हर गाँव शहर द्वार लिपालो अपना |
    सजाओ फूलो से अयोध्या देव मेहमान आएंगे|
    जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

    मारकर रावण को लंका मे सीता को छुड़ाया है |
    किया अधर्म का नास राज विभीषण दिलाया है |
    आज सब मिलकर सियाराम गुणगान गाएँगे |
    जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

    करेंगे श्रीराम जब कृपा घर लक्ष्मी वास होगा |
    बढ़ेगी शुख शांति रिद्धी सिद्धि निवास होगा |
    गाओ श्रीराम का भजन बन धनवान जाएँगे |
    जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी सरस्वती वंदना – मईया दया कईदा |

    भोजपुरी सरस्वती वंदना – मईया दया कईदा |
    रात दिन मईया तोहरे नामवा के जापी ,
    हमपे दया कइदा |
    तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |
    रात न चयन पड़े दिन ना चयनवा |
    तोहरे के देखे खातिर तरसे नयनवा |
    अबोध बलकवा हमके गोदिया मे राखी |
    हमपे दया कइदा |
    तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |
    बिदद्या के देवी माई देलु सबके ज्ञान हो |
    बुद्धि लरकाई माई हम हई नादान हो |
    अज्ञानी अनाड़ी हमहु कही बात सांची |
    हमपे दया कइदा |
    तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |
    हंस के सवारी शारदा हथवा मे बिनवा |
    बल बुद्धि दे दा हमके फेरा हमरो दिनवा |
    लिखी लिखी गीतिया नाम तोहरो हम बाँची |
    हमपे दया कइदा |
    तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता- उजाला घर मे हो |

    कविता- उजाला घर मे हो |
    मन मे जले दीप उजाला हर घर मे हो |
    अंधेरा न कही जगमग हर शहर मे हो |
    चमके ललाट राष्ट्र रहे चमक तिरंगे की |
    सीमा बम धमाका कोई थोड़ा उधर मे हो |
    बच्चो के हाथ फुलझड़िया तन नए कपड़े |
    ऊंचे मकानो दिये रौनक थोड़ी इधर मे हो |
    जले दिये घर सबके मकान टूटा ही सही |
    खुशियो की चमक अब सबके नजर मे हो |
    कच्चा या पक्का घर रंगोली सजेगी सबके |
    मने दिवाली हिन्द लक्ष्मी हर बसर मे हो |
    आओ मिल जलाए दिये दिल भी मिलाये |
    सुख संपत्ति संपदा शांति हर गुजर मे हो|
    मिले रिद्धी सिद्धि नित्य लक्ष्मी वास रहे|
    दुख दुर्भिक्ष दूर असर भारती हर बहर मे हो |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी कविता- बचावल ना गइल |

    भोजपुरी कविता- बचावल ना गइल |
    होत रहे ज़ोर सरेआम अबला
    केहु मान बचावल ना गइल |
    ले लिहस कातिल जान
    केहु पानी आँख बहावल ना गइल |
    जात धरम देख करे राजनित,
    ई केवन नित चले लागल |
    मर्यादा हिन्दी मुस्लिम एक समान ,
    केहु ज्ञान बतावल ना गइल |
    मजहब पसंद के चाही ,
    छिंक आई त हो हल्ला मचावे लगिहे |
    आपन सरकार सजात गइल इज्जत ,
    केहु धरना लगावल ना गइल |
    मुजरिम गैर जात उनका मूह ना खुली |
    केवनों अबला जानो इज्जत चल जाय ,
    केहु हल्ला मचावल ना गइल |
    बेहू बेटी के इज्जत से का मतलब |
    भोट मिली की ना मिली जरूरी बा |
    अइसन मतलबी बेईमान नेता ,
    केहु लात से लतियावल ना गइल |
    जब जाई इज्जत आपन बहू बेटी के ,
    देखिहे लोग उनकर कुदल फांदल |
    समाज के कलंक कल्लू ,
    केहु बोटी बोटियावल ना गइल |
    औरत आबरु समान हिन्दू मुसलमान ,
    मान बेटी स्वाभिमान देश के बात पते की ,
    केहु साँच पतियावल ना गइल |
    बीच सड़क लूटा जाये इज्जत अबला ,
    देखत रहे तमासा ई कइसन सरकार |
    पकड़ के मुजरिम बेड़ि मे ,
    केहु जेल धकियावल ना गइल |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी गजल – जिनगी अब जहर भइल |

    भोजपुरी गजल – जिनगी अब जहर भइल |
    तोहसे प्यार भइल घाव अब कहर भइल |
    खा के धोखा आशिक एहर ना ओहर भइल|
    रूप के चाँदनी मे प्यार के आसरा खोजली |
    रूप मिलल ना चान इश्क बे डहर भइल |
    मासूम चेहरा मे दिल पत्थर कइसे होला |
    बेवफा के दगा जिनगी अब जहर भइल |
    प्यार कइल केवन कसूर बा बतावा केहु |
    टुटल दिल हमार प्यार अब बे कदर भइल|
    दिल तोड़ही के रहे सपना देखवलू काहे |
    ठुकरा दिहलु हमके तमासा शहर भइल |
    कीमत आशिक पत्थर दिल ना जाने कबों |
    ना जनलु जिनगी भारती कईसे गुजर भइल|

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी देवी पचरा गीत- खपरवा के धार |

    भोजपुरी देवी पचरा गीत- खपरवा के धार |
    काली मईया करबे ना हो पूजनवा तोहार |
    तोहके देइब हम खपरवा के धार |
    काली बा सुरतीया बाकी बाडु तू दयालु |
    रुपवा भयावह माई कमवा कृपालु |
    लेई ला पूजनवा ना हो करा मोर उद्धार |
    तोहके देइब हम खपरवा के धार |
    लाली लाली जीभिया लंबी काली केसिया |
    मथवा पर बिंदिया सोहे बड़ी बड़ी अँखिया |
    जग कल्यानी मईया खोला ना हो केवाड़ |
    तोहके देइब हम खपरवा के धार |
    रक्त बीज खुनवा माई खप्पर मे पियलु |
    भगतन के दुखवा माई पल मे हर लिहलु |
    देवी मईया करतू ना हो भारती विचार |
    तोहके देइब हम खपरवा के धार |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी देवी पचरा गीत- आपन तू पूजनवा |

    भोजपुरी देवी पचरा गीत- आपन तू पूजनवा |
    लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
    शेरवा सवार होके देवी लेला तू असनवा |
    लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
    सोनवा के दीयना माई सोनवा के थरिया |
    गईया के घिउया माई दरसन देबू कहिया |
    होला जय जय कार तोहरो सगरो जमनवा |
    लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
    सोनवा के रथवा सोना कंगना माई हथवा |
    सोनवा कटार लाली बिंदिया माई मथवा |
    रोई चरनिया गिरे माई तोहरे भारती ललनवा |
    लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
    निमिया के डार माई झुलवा लगावेली |
    फुलवा से सजल मालिन पेगवा लगावेली |
    झूमी झूमी मालिन गावे पचरा माई के भजनवा |
    लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
    लाल सेनुरवा चमके दमके माई के सुरतिया |
    हहरत आवे देवी चहकत देवी के मुरतिया |
    पूजी पूजी तोहके लोगवा नाचे होइके मगनवा |
    लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी देवी गीत-चला माई के दुअरिया |

    भोजपुरी देवी गीत-चला माई के दुअरिया |
    मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
    लाल अड़हुलवा सेनूर चढ़ईहा ललकी चुनरिया |
    मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
    नव दिन नव रूप मे दुर्गा माई आवेली |
    शैलपुत्री ब्रम्हचारिणी चंद्रघंटा उ कहावेली |
    कुस्मांडा स्कंधमाई कार्तिकायिनी डलिहे नजरिया |
    मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
    सातवाँ रूप कालरात्रि आठवाँ महागौरी रूप हो |
    नौवा सिद्धिदात्री चढ़ावा दिया बाती धूप हो |
    सुनर हउवे रूपवा माई बना देवी के पुजरिया |
    मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
    छोड़ा पिया माया मोह लगावा नेह माई मे |
    नौ दिन बरत उपवास धियान लगावा माई मे |
    दरसन पूजन कइके बना मोर बाँके सवारिया |
    मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
    अबकी अस्टमी नवमी एके दिन आई हो |
    हवन आरती कइके नौ कन्या भोगा कराई हो |
    खुश होइहे दुर्गा माई करीहे सुफल उमरिया |
    मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • हिन्दी देवी गीत – भक्ति दान दे दो |

    हिन्दी देवी गीत – भक्ति दान दे दो |
    हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
    काली कपालिनी दैत्य दलिनी शक्ति दान दे दो |
    जगत जननी माँ अम्बे जगदम्बे तुम हो |
    दुख हरनी सुख करनी माँ अम्बे तुम हो |
    हे प्रकाशीनी आनंद करनी मुक्ति दान दे दो |
    हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
    माँ शारदा कालिका कमला तेरा ही रूप है |
    वैषणों बिंध्यवाशिनी काम रूप अद्द्भुत है |
    हे माँ छिन्नमस्तिका मुझे रक्षित दान दे दो |
    हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
    भय हारिणी कस्ट निवारिणी तुम ज्ञान दायिनी |
    भक्त भव तारिणी जग कल्याणी सिंह वाहिनी |
    चंड मुंड दामिनी मुझ संकट युक्ति दान दे दो |
    हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
    कर कमल शंख चक्र कटार धर तुम आओ |
    नैन विशाल काली केस कमर कर तुम आओ |
    चरण धुली मस्तक भारती अर्पित दान दे दो |
    हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता- प्रेम रस – दिल मे रहता हूँ |

    कविता- प्रेम रस – दिल मे रहता हूँ |
    दुनिया के दुखो से तुम्हें कही दूर लिए चलता हूँ |
    आओ प्रिये हर नजर के असर दूर किए चलता हूँ |
    चाँदनी रात है खुला आसमान ठंडी हवा बह रही |
    सितारो की महफिल मिल जाओ फिजाँ कह रही |
    हर तरफ शांती सकुन खुशबू रात रानी महकी है |
    बना लो सेज नर्म हरी घास जुलफ़े तेरी बहकी है |
    उतर आया चाँद गोद मेरी दावे से मै कहता हूँ |
    भूल जाओ गम सारे आओ आज दूरिया मिटा दो |
    समा लो मुझे जुल्फों के साये गोद सिर लिटा दो |
    डूब जाऊँ तेरी गहरी झील सी आंखो की गहराई |
    नजरो से उतर तूने दिल मे मेरी जगह है बनाई |
    हसीन वादियो तेरी गजल को दिल से पढ़ता हूँ |
    तेरे बदन की खुशबू को और भी महक जाने दो |
    सोये हमारे अरमानो को और भी बहक जाने दो |
    पूनम की चाँद हो तुम लरजते लबो फरियाद हो |
    हुश्न ए मल्लिका तुम आज हर बंधनो आजाद हो |
    नहीं कोई दोनों के बीच मै तेरे दिल मे रहता हूँ |
    एहसास तेरी गर्म साँसो का हो रहा है मुझे बहुत |
    मदहोसी का आलम अब छा रहा है तुझमे बहुत |
    पाक मोहब्बत हमारी जज़बातो को संभाले रखना |
    हो जाये गुनाह कोई दोनों खुद को संभाले रहना |
    मोहब्बत और मोहब्बत सिर्फ मै तुमसे करता हूँ |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी देवी गीत (धोबी गीत ) – होई माई के नजरिया |

    भोजपुरी देवी गीत (धोबी गीत ) – होई माई के नजरिया |
    मुंहवा काहे फुलवलु गोरी चला मेला के डहरिया |
    हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
    हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
    सड़िया ले अइली तोहके काजर टिकुली ले अइली |
    अलता पावडर संगवा तोहके चानी पायल ले अइली |
    ले अइली तोहके ना रानी चम चम चमके चदरिया |
    हम ले अइली तोहके ना |
    हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
    लागल लोक डाउन गोरी असो मेलवा ना लगिहे |
    दुर्गा पूजा होई बाकी झूला खेलवा ना होइहे |
    कहा घुमाइब तोहके ना गोरी मेला के बजरिया |
    कहा घुमाइब तोहके ना|
    हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
    मेलवा ना चला गोरी तोहके मूर्ति हम देखाइब |
    दुर्गा माई के चरनिया केरा नारियर चढ़ाइब |
    मन से पुजवा करिहा ना होई माई के नजरिया |
    मन से पुजवा करिहा ना |
    हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
    साल भर पर आइल गोरी माई दुर्गा के पुजनवा |
    नवरातन भूखा तू हु गावा देवी माई के भजनवा |
    मनसा पूरा होइहे ना भरी खाली तोर अंचरिया |
    मनसा पूरा होइहे ना |
    हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपूरी देवी गीत- देवी के चरण मे |

    भोजपूरी देवी गीत- देवी के चरण मे |
    चला पिया चली जा बाजार होखेला पूजा नवरातन मे |
    कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
    नौ दिन पिया तू उपवास बरत करिहा |
    नौ रूप माई के दरसन खूब करिहा |
    ओढ़ईहा चुनरी ओहार पिया माई के चरण मे |
    कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
    शेरवा सवार माई खूब लहरत अइहे |
    खुश होइहे देवी तोहके खूब वर दिहे |
    भगतन बदे लिहली दुर्गा अवतार चला माई के शरण मे |
    कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
    रोज रोज पिया चंडी पाठ करईहा |
    नवमी के दिन नौ कन्या खियईहा |
    होई जाई तोहरो उद्धार मगन रहा माई के भजन मे |
    कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
    पंडित जी बुलाई धूप हवन करईहा |
    माई के चरनिया गिरि मथवा झुकईहा |
    देवी दुर्गा होला जय जय कार सारा जग मण्डल मे |
    कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी देवी पचरा गीत- करा तू अंजोर |

    भोजपुरी देवी पचरा गीत- करा तू अंजोर |
    अब नाही अइबु त कब माई अइबु ,
    बलकवा रोवे बड़ी ज़ोर |
    भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
    जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
    सुनीला पुकार तू हमरो ये काली माई |
    रहिया ना लउके केवनो ओर |
    एक वर दिहा दूसर वर दिहा ,
    तीसरे उद्धार करा माई मोर |
    भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
    जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
    चंड मुंड मरलु तू रक्तबीज मरलु ,
    महिषा सुर के कइलु संघार |
    दुखवा हमार कब टलबू ये काली माई |
    डगमग नईया बाड़े मोर |
    भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
    जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
    कालन के काल माई भगतन ढाल माई |
    काटी अनहरिया करा तू अंजोर |
    काली काली केसिया लाली लंबी जीभिया |
    लहरत आवा माई होला बड़ी शोर |
    भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
    जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
    छोडब ना चरनीया काली कलकत्ता वाली |
    लाल अड़हुलवा होलु तू वीभोर |
    लाल सेनुर केरा नारियर चढ़ाइब |
    लाली चूड़िया खनके बड़ी ज़ोर |
    भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
    जीनिगिया मे करा तू अंजोर |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी कविता- राजनीति होखे के चाही |

    भोजपुरी कविता- राजनीति होखे के चाही |
    केहु मरे चाहे जिये राजनीति होखे के चाही |
    केहु आबरू लूट जाये राजनीति होखे के चाही |

    औरत ना ई खिलौना हई जब चाहे खेल ला |
    जान ना जाए केहु मऊत के मुंह धकेल दा |
    इनकर इज्जत जाये राजनीति होखे के चाही |

    बेटी भईली का भइल कुल क मर्यादा बाड़ी |
    माई बाप क दुलार पूचकार उ जयादा बाड़ी |
    नाम नीलाम हो जाये राजनीति होखे के चाही |

    समाज आज कहा से कहा आ गईल भईया |
    देवी जस नारी दुशमन महा हो गईल दईया |
    दूरदसा नारी हो जाये राजनीति होखे के चाही |

    खिसकल जमीन आपन पाये के मौका मिलल |
    नाम मीडिया मे खूब चमकावे के चौका लगल |
    न्याय नारी उफर जाय राजनीति होखे के चाही |

    बलात्कार भइल की अत्याचार पहीले जान ला |
    भड़के ना कही दंगा जात पांत बात मान ला |
    देश संपत्ति लूटे चाहे टूटे राजनीति होखे के चाही |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता- शास्त्री गांधी से सीख लो |

    कविता- शास्त्री गांधी से सीख लो |
    लड़ा जाता कैसे जंगे आजादी गांधी से सीख लो |
    सत्य अहिंसा की कैसी आजादी गांधी से सीख लो |
    छोड़ धन दौलत रूप संत का बना लिया उसने |
    कैसे हो बुलंद हौसला सबका गांधी से सीख लो |
    साबरमती का संत कपड़ा सूत चरखा चलाया |
    राम रहीम एक है गाया कैसे गांधी से सीख लो |
    जाड़ा धूप गरमी सब पहन धोती सहता रहा |
    लड़ा कैसे अंग्रेज़ो एक संत गांधी से सीख लो |
    अवतरित हुये आज सादगी के प्रतीक शास्त्री |
    थर्राया दुशमनों घर घुस कैसे शास्त्री से सीख लो |
    हुई अचानक मौत शास्त्री देश बड़ा मर्माहत हुआ|
    खड़ा पंक्ति पुत्र फार्म भरा शास्त्री से सीख लो |
    रह प्रधान मंत्री शास्त्री ने पद न दुर्पयोग किया |
    गुजारा तंख्वाह पर कैसे सब शास्त्री से सीख लो |
    गांधी शास्त्री भारत के गौरव संत महापुरुष हुये |
    बढ़ाया कैसे भाल भारत गांधी शास्त्री से सीख लो |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी गजल- जब बसर होला |

    भोजपुरी गजल- जब बसर होला |
    केहु के नेह मे देह के ना खबर होला |
    प्रेम के रोग ह ई बड़ा जहर होला |
    केतनों समझावे केहु कबों ना मानेला |
    बहक जाला कदम अइसन ई डहर होला |
    प्यार तोहसे ना करी ई का कहलू तू |
    चाहे करा रुसवा तनको ना असर होला |
    दिहला काहे दिल तू बोला ये बिधाता |
    निकसे ना केहु दिल जब उ ठहर जाला |
    मिले प्यार मे धोखा ई का जरूरी बा |
    खा के ठोकर भी ना केहु सुधहर जाला |
    बनल दुशमन जमाना राह मोहब्बत मे |
    प्यार भइला के रूप ना उमर होला |
    प्यार ना करी त का करी दुनिया मे |
    बहे आँख से आँसू दिल केहु बसर होला |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • साई भजन – तुही तू है |

    साई भजन – तुही तू है |
    साई तेरी दुआ से दुनिया मे रोशनी है |
    गर कर दे तू करम यहा कुछ नहीं कमी है |
    तेरी रहमतों से कायम ये दुनिया जहा है |
    जिधर भी देखो हर तरफ नूर तेरा वहा है|
    साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
    गर तू न होता बाबा कुछ भी न होता |
    तेरे मुरीदों को क्या क्या न हस्र होता |
    साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
    डाल दे तू नजर जिधर उधर कमाल हो जाये |
    अन्धो को आंखे गूंगे की बोली धमाल हो जाये |
    साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
    कहा से तू आया सिर्डी मे धुनि रमाया |
    हर दुखियो के दुख तूने पल मे भगाया |
    साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
    होके मजबूर तेरी चौखट सिर झुकाने आया |
    दिल के दर्द साई बाबा को सुनाने आया |
    साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
    अब तेरे सिवा न कोई यहा सहारा मेरा |
    अंधेरी जिंदगी मेरी करो उजियारा मेरा |
    साई बाबा हर तरफ तुही तू है |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी ग़ज़ल -का कसूर बा

    भोजपुरी गजल – का कसूर बा |
    आँख से बहल आँसू तू पानी कहा सब मंजूर बा |
    बहल काहे ई पानी बतावा हमार का कसूर बा |
    कईल तोहसे प्यार का ई गुनाह हो गईल बोला |
    तोड़ दिहलु दिल हमार धंसल करेजा नासूर बा |
    सोचली सजाइब प्यार के दुनिया तोहरे संग हम |
    तोड़ के सपना चल दिहलु कईल दगा जरूर बा |
    गड़े ना कबों काँटा पाँव दिल बिछवली आपन |
    कुचल दिहलु मोर करेजा तोहरे इश्क के शुरुर बा |
    मरम दिल बुझतु करम करतू ना तू कबों अइसन |
    साँच आशिक हई छोडब ना साथ दिल मजबूर बा |
    तू हमार जान हमार परान सब कुछ तुही तू बाड़ू |
    तोहरे प्यार के हमरो ये जान सबसे गुरूर बा |
    अँखिया मे समा के दिल मे काहे उतर गइलू |
    कइसे करी हम प्यार हमरो कुछउ ना सहुर बा |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • मुक्तके – दौलत आखिरी |

    मुक्तके – दौलत आखिरी |
    पाँच गज कफन दो गज जमीन दौलत आखिरी |
    लाखो करोड़ो की चाह हंगामा बदौलत आखिरी |
    आना जाना खाली हाथ लड़ाई किस बात की है |
    सब कुछ रह जाएगा यहा नाम सोहरत आखीरी |
    और कुछ नहीं
    सत्य शिव और सुंदर वही और कुछ नहीं |
    छंटा घटा जटा समंदर वही और कुछ नहीं |
    बाग बागीचा फूल भवरे झरने नदी सुंदर |
    गगन मगन जल पवन वही और कुछ नहीं |
    कुछ किया क्या |
    परारब्ध भोग लिया फिर न हो कुछ किया क्या |
    छूटे जनम मरण जरण बंधन कुछ किया क्या |
    जप तप योग ध्यान नहीं कर्म नेक जरूरी है |
    तन मे काम क्रोध मद लोभ शमन किया क्या |
    राई राई हिसाब
    कर लो छुपकर बुराई देख लेगा वो प्रमेश्वर है |
    तीनों लोको का नियंता कर्त्ता धर्त्ता वो महेश्वर है |
    भले बुरे कर्मो का फल लेखा जोखा रखता है |
    पाई पाई राई राई होगा हिसाब वो पीठाधीश्वर है |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • गजभोजपुरी गीत- चुनरिया संभाला सजनी |ल

    भोजपुरी गीत- चुनरिया संभाला सजनी |
    बरसेला बदरा झीर झीर चुनरिया संभाला सजनी |
    चिकन भुईया जइहा ना गिर उमरिया संभाला सजनी|
    रही रही चमकेले बदरा मे बिजुरिया |
    भरी भरी नजरा मे तरसेले गुजरिया |
    लौटी सइया अइहे ना फिर गगरिया संभाला सजनी |
    दुअरा पर ठाड़ गोरी निहारे ली डहरिया |
    कब अइहे निर्मोही मोर बाँके सवरिया |
    बहावे गोरी अँखिया नीर नजरिया जुड़ाला सजनी |
    सगरो गगनवा छाईल कारी बदरिया |
    पिया घरे नाही गोरी जिनगी अनहरिया |
    बयार बरखा जिया अधीर सेजरिया संभाला सजनी |
    छाए घटा घनघोर हिया भय लागे बड़ी ज़ोर |
    गरजे बदरवा पिया बिन पड़पे जिया मोर |
    अईले साजन खियावा खीर पजरिया बुलाला सजनी |
    बरसेला बदरा झीर झीर चुनरिया संभाला सजनी |
    चिकन भुईया जइहा ना गिर उमरिया संभाला सजनी|

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • गजल

    हर तरफ तेरे नजारे नजर आ रहे है |
    तेरे इश्क के इशारे नजर आ रहे है |
    हुश्न ऐसा चाँद फीका हुआ जाता है |
    अंधेरों हुश्न करारे नजर आ रहे है |
    आंखो शराब का सागर लहराता है |
    हुश्न इश्क किनारे नजर आ रहे है |
    तब्बशुम लबो गुलाबी जिगर पार है |
    बिखरी जुलफ़े कारे नजर आ रहे है |
    देख जलवा ए हुश्न ईमान खतरे मे है |
    ईमान वाला हम बेचारे नजर आ रहे है|
    तुमसे पहले कोई याद न बेकरारी थी |
    शामों शहर तेरे सहारे नजर आ रहे है |
    वक्त ऐसा न गुजरा जब तेरी याद आई |
    दिल लूटा गम के मारे नजर आ रहे है |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • हिन्दी दिवस आज आया

    हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई |
    कविता- हिन्दी दिवस आज आया |
    हिन्दी दिवस आज आया ,सरे हिन्द परचम लहराया |
    हर भाषा की सरताज है हिन्दी सबने झण्डा फहराया |
    भोजपुरी गुजराती मराठी बंगाली पंजाबी बहने सगी है |
    तमिल मलयालम आसामी उडिया उर्दू सजने लगी है |
    मिलकर बहने भाषाओ हिन्दी को सर माथे है लगाया |
    आज नहीं हर दिन हिन्दी दिवस मिल हम मनाएंगे |
    तद्भव तत्सम देशज बीदेशज शब्दो हिन्दी सजाएँगे |
    भारत ही नही बिदेशों गैर हिंदीओ ने हिन्दी अपनाया |
    प्रेमियो की प्रेम है हिन्दी कवियों की भाव है हिन्दी |
    रसिको की जान है हिन्दी ,हिन्द की शान है हिन्दी |
    विविधता मे अखंड भारत को हिन्दी एक है बनाया |
    दिनकर निराला प्रेमचंद सहाय ने हिन्दी सवारा था |
    शुभद्रा की कविता हिन्दी अंग्रेज़ो कहर बरपाया था |
    देवकी नंदन खत्री की तिलस्म हिन्दी पढ़ना सिखाया |
    हिन्दी दिवस आज आया ,सरे हिन्द परचम लहराया |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता- ज्ञान दाता |

    शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई |
    कविता- ज्ञान दाता |
    ज्ञान दाता विज्ञान दाता तुम ही हो |
    हे गुरु प्रकाश दाता मुक्ति दाता तुम ही हो |
    जीवन मे अंधेरा बहुत था तुमसे पहले|
    था घना कोहरा तुम्हारी दृस्टी से पहले |
    मूल्य कुछ भी न था मेरा संसार मे |
    खा रही थी हिचकोले नाव मजधार मे |
    देवता मेरे माता पिता तुम ही हो |
    उससे पहले माँ मेरी गुरु बन गई |
    मेरे अवगुण दूर करने की ठन गई|
    गिरना उठना चलना बोलना सिखा |
    कौन क्या बताया बचपन गोद मे बिता |
    मुझ अज्ञानी चरण धूल दाता तुम ही हो |
    शिक्षक गर जहा मे न होते |
    हर तरफ मूढ़ अज्ञानी भटक रहे होते |
    गुरु की महिमा अद्द्भुत अनमोल है |
    गुरुबीन जीवन अधूरा सत्य बचन बोल है |
    समाज सुधारक राष्ट्र निर्माता तुम ही हो |
    हे गुरु प्रकाश दाता मुक्ति दाता तुम ही हो |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी बिरह गीत – करी केकेरा प सिंगार बलमु |

    भोजपुरी बिरह गीत – करी केकेरा प सिंगार बलमु |
    कईला काहे हमसे अइसन तू प्यार बलमु |
    छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
    तोहरे बिना लउके हमके सगरो अनहरिया |
    अंसुवे मे डूबल जाता हमरो उमरिया |
    कइला काहे हमसे तू नैना चार बलमु |
    छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
    तन औरी मन राजा तोहके सब सउपली|
    मन के मंदिरवा तोहे देवता नियन पुजली |
    दगाबाज बनला काहे मोर दिलदार बलमु |
    छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
    गाँव के बगइचवा संझवा रोज हमके बुलवला |
    प्यार वाली झूठ बतिया से हमके भरमवला |
    नेहिया सौतिनिया लगाई भइला तू गद्दार बलमु |
    छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
    हम नाही जनली कबों दगा हमसे करबा |
    भरी मंगीया सेनुरवा छाँव अँचरा मोर रहबा |
    छोड़ी परईला करी केकरा प सिंगार बलमु |
    छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी कविता – बाबू बालू खोट दिखाई |

    भोजपुरी कविता – बाबू बालू खोट दिखाई |
    सागर मे मोती मिलेला डूबी जे उहे पाई |
    मेहनत क फल मीठा जे करी उहे खाई |
    राजनीति किचर होला गोड़ डाल के देखा |
    किचर कमल खिले सब मोदी ना बन पाई |
    पीठ पीछे करे बुराई मुहवा खियावे मिठाई |
    मुहवा बतियाई बुराई मइल सब धुली जाई |
    नौ मन ना तेल होई न राधा नचिहे कबों |
    मिताई चीन पाक भारत बाल न बांका होई |
    का बरसा जब कृषि सुखानी बात सयानी |
    पढे के बेरिया इंटा पाथे साहेब ना बन पाई |
    आईला हरी भजन करे ओटन लगे कपास |
    कहे दारोगा चोरी रोकब गिनन लगे पाई |
    नाच ना आवे आँगन टेढा कड़वी बात कठोर |
    पूल पुलिया भवन गिरा बाबू बालू खोट दिखाई |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन |

    गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन |
    गौरी नंन्द्न शंकर सूत करे सब श्री गणेश वंदन |
    हाथी मस्तक मंगल दस्तक तेरा सत अभिनंदन |

    मूषक वाहन लड्डु भोग करते सदा भक्त निरोग |
    धूप दीप नैवैद्द सिंदूर अर्पण करो मस्तक चन्दन |

    मंगल कर्त्ता बिघ्न्हर्त्ता दुख दूर कर्त्ता हर ओर चर्चा |
    आओ गजानन लगाया स्वर्ण आसन हे दुख भंजन |

    शिव शंकर के प्यारे ललना बुद्धि का क्या कहना |
    दे दो बल बुद्धि सुख शांति चंद्र भाल भय भंजन |

    प्रथम होती श्री गणेश पूजा तुमसा न कोई देव दूजा|
    दानव संघारकर्त्ता दरिद्र तृप्ति कर्त्ता जय सुख नंदन|

    होगा जहा महाराज का आसान चले न बैरी डासन |
    गोर बदन मस्तक रोड़ी चन्दन कोटी कोटी है वंदन |

    शुभ लाभ देते दाता रिद्धी सिद्धि के हो स्वामी तुम |
    मंगल करो कोरोना मारी करो तुम भारत देव भंजन|

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • ओज कविता – बिरो की धरती भारत |

    ओज कविता – बिरो की धरती भारत |
    बिरो की धरती भारत बिरो से कभी खाली न होगी |
    राष्ट्र पर प्राण करेंगे न्योछावर जननी सवाली न होगी |
    भ्रमजाल मायाजाल लोभ लालच मे कभी आएंगे नहीं |
    डर भय मोह ममता वस रन छोड़ कभी भागेंगे नहीं |
    जलती रहेगी मसाल देश भक्ति कभी खाली न होगी |
    तन जाये तोपे मिसाइल बंदुके बीरो डरना आता नहीं |
    रण ललकारे हिन्द की सेना पीठ दिखाना आता नहीं |
    राम कि धरती दुशमन पर हो विजय दिवाली न होगी |
    कितना गिनाऊ विरो की गाथा रामायण लिख जाएगी |
    लक्ष्मी राणा चौहान नाम लिखने कलम घिस जाएगी |
    अर्जुन भीम भिस्म बिरो धरती कभी खाली न होगी |
    फड़कती है भुजाए दुशमन की सुनकर ललकार सदा |
    जवाने हिन्द है शेरे हिन्द करते शेरो की हुंकार सदा |
    लूटा देंगे जान जमी पर क्यो फिजा मतवाली न होगी |
    एक दो नहीं सभी लाल करे बलिदान जननी भारत की |
    बहने भाई नारिया सिंदूर करे कुर्बान हो रक्षा भारत की |
    रक्त रंजीत हो करे सिंगार क्यो धरती लाली न होगी |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी गजल- जान जिआन हो जाई |

    भोजपुरी गजल- जान जिआन हो जाई |
    दिल लगाके जनी ठुकरावा जान जिआन हो जाई |
    मनके बात भइबो ना कइल राती बिहान हो जाई |
    चार दिन के जिनगी के केवन जान बा ठिकाना |
    आँख मिला के मुंह मोड़बू दिल लहूलुहान हो जाई |
    न जाने केवना मोड़ पर धई लेई कोरोना के जाने |
    लहरत खेत के ना सिंचाई नुकसान किसान हो जाई |
    गगरी भरी त छलकबे करी रुकले ना रुकी कबों |
    मोहब्बत के जाम छलक दिल घाव नीसान हो जाई |
    कसूर अँखियन के सजा दिल के ना दिहल जाला |
    साँच आशिक दगाबाजी मे पीस के पिसान हो जाई |
    बिना तोहरे जियब कईसे पतीयाला साँच कहिला |
    सनम भारती जान संग बिधना के बिधान हो जाई |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता – रक्षा का वादा |

    कविता – रक्षा का वादा |
    राखी का धागा भाई का बहना को रक्षा का वादा |
    रहेगा अजर अमर प्यार भाई बहन का जियादा |
    फूलो कली नाजो से पली बहना सबका दुलार है |
    खुश रहे ताउम्र रंगो भरा हो जीवन न हो सादा |
    आया कोरोना राखी का त्योहार आया आऊ कैसे |
    भेजा संग राखी सेनेटाइजर मास्क का लिफाफा |
    प्यार और दुलार के अलावा तुझे और मै क्या दूँ |
    नजर न लगे खुशियो तेरी किसी इक्षा है खासा |
    आए हर बरस ये त्योहार राखी का संग तू आए |
    न तू मुझको भूले न मै यही हम दोनों रहे इरादा |
    तिलक चंदन लगा दे कलाई मेरी राखी तू सजा दे |
    आरती उतार तू मेरी और मै न रहे पास निरासा |
    मिठाई जैसी मीठी तेरी जिंदगी संग तेरा सुहागा |
    तू कहे न कहे तेरा दुख मै जान लूँगा सुन बहना |
    जब भी पड़े जरूरत मेरी भाई भारती पास आजा |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • हिन्दी गीत – रिमझिम बरसात |

    हिन्दी गीत – रिमझिम बरसात |
    रिमझिम बरसात आ गई |
    प्यारी तेरी याद आ गई |
    बुँदे तन को भिंगा गई |
    प्यारी तेरी याद रुला गई|
    छाए नभ मे बादल काले काले |
    याद मे तेरी दिल हुये छाले |
    घर आँगन हवा बलखा गई |
    प्यारी तेरी याद आ गई |
    भिंगी हवा बहे ठंडी ठंडी |
    आह निकले दिल मंदी मंदी |
    झोंका फुहार अरमा जगा गई |
    प्यारी तेरी याद आ गई |
    तुम होते तो संग भिंग लेते |
    तेरे आँचल की छाँव सर रख लेते |
    भिंगा मौसम तू कहा खो गई |
    प्यारी तेरी याद आ गई |
    मोहाब्बत की डाली दिल का झूला बनाते |
    इशक के झूले पर तुझको हम झूलाते |
    तेरी बांहों की रस्सी झूला गई |
    प्यारी तेरी याद आ गई |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी कजरी – दूर रहा नटरू |

    भोजपुरी कजरी – दूर रहा नटरू |
    देशवा मे आइल रफाइल तेज तर्रार हो |
    सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
    जहा जहा भिड़वा हमसे चोट खुब खईबा |
    जमीनिया अकाशवा सगरो मार खइबा |
    डूबी जहजीया तोहरो मजधार हो |
    सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
    फईलाई के कोरोना होशियार मत बुझिहा |
    होई जब चढ़ाई बैरी कोना जनी लुकिहा |
    देशवा के लगे जवान घातक हथियार हो |
    सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
    जईसे सवनवा मे गरजे ले बिजुरिया |
    तकले से जरी जइबा हिन्द के नजरिया |
    झूलवा झुलाइब मिसाइल रफ्तार हो |
    सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
    अकसवा मे घेरे जईसे कारी बदरिया |
    घेरीहे जवनवा ना लौकी तोहके डहरिया |
    बनी भारत देशवा दुनिया के सरदार हो |
    सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता – कारगिल की चोटी से |

    कविता – कारगिल की चोटी से |
    घुस आया धोखे से दुश्मन
    पर बिरो ने मार भगाया था |
    दिया जवाब करारा उनको ,
    छट्ठी दूध याद कराया था |
    काँप उठे हृदय कायरो ,
    हिन्द जवानो की ललकारो से |
    थर थर थर्राए विरो के यलगारों से |
    चुन चुनकर मारा सबको
    मौत की नींद सुलाया था |
    लाख लगाया ज़ोर दुशमन ने |
    भारत पर ज़ोर चल न सका |
    चाहा धकेल पीछे कर दे विरो
    थक हारा पाँव भारत हिल न सका |
    विजय हुई जवानो ने झण्डा,
    कारगिल की चोटी से लहराया था |
    सत सत नमन वीर शहिदों ,
    नमन है तुम्हारी जननी को |
    सदा अमर रहेगा नाम तुम्हारा |
    जबतक आबाद रहेगा हिन्द हमारा |
    विश्व विजयी है हिन्द देश ,
    विरो ने दुशमन याद दिलाया था |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता- आरती उतारा हमने |

    कविता- आरती उतारा हमने |
    साल सैकड़ो श्रीराम तिरपाल मे आरती उतारा हमने |
    धूप गर्मी बरसात मे प्रभु भिंगी आंखो निहारा हमने |
    भगवान को भी जाना पड़ेगा कोर्ट के दर पता न था |
    तारीख पर तारीख साल दर साल राह गुजारा हमने |
    करोड़ो लाखो मंदिर है भगवान श्रीराम सारी दुनिया मे |
    श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या किया न कही गवारा हमने |
    आजादी है सबको बने सुंदर दरबार उसके भगवान का |
    लड़ना पड़ा साल सैकड़ो मंदिर को जीता दुबारा हमने |
    अयोध्या है काबा चर्च गिरिजा गुरुद्वारा हर हिन्दू का |
    श्रीराम सबके सबकी अयोध्या है सबको पुकारा हमने |
    बने भब्य मंदिर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम सब राम बने |
    स्थापित हो राम राज्य भारत राम नीति सवारा हमने |
    समाप्त हो रही घड़िया इंतजार फिर से दरबार सजेगा |
    फहरेगा झण्डा श्रीराम अयोध्या लिया कोर्ट सहारा हमने |
    श्रीराम लखन भरत शत्रुघ्न बिराजे संग सीता अयोध्या |
    राम लला आए मन्दिर अपने हर राह हिन्द बुहारा हमने |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी गजल- मन भईले बौराइल| |

    भोजपुरी गजल- मन भईले बौराइल| |
    काढ़ी करेजा हथेली थमाइ तबो ना उनके बुझाइल |
    प्यार मे उनका पागल भईली दिल भइल घाइल |
    हटेला ना अँखियाँ से रूपवा तोहार का करी हम |
    हंसला से मुहवा मोती झरे लेली जान मुसकाइल |
    तोहरा जोहत सांझ ढली गईली हो गईले अनहार |
    वादा कइके काहे ना अइलू हमरो मन मुरझाइल |
    लहरावेलु कन्हिया कारी केसिया बदरा लगले लजाये |
    चाल चलेलु हिरनी जस जंगल मन भईले बौराइल|
    याद मे तोहरी बरसे नयन बहरा सावन के फुहार |
    आके हमके गरवा लगा ल मनवा फुले ना समाइल |
    सुना सुना लागे जग बिना तोहरे हिया हहरत बा |
    जिनगी आई बहार गोरी जब आके अंगना सजाईल|

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • कविता- सदा बहार के जंगल

    कविता- सदा बहार के जंगल
    पैर रख कर सिर पर किसी के ,
    चढ़ जाओगे ऊंचाइयों पर जरूर
    गिरोगे जब जमीन पर ही मगर |
    सिर की जगह कंधा का
    सहारा लिया होता गिरते गर
    तुम कोई थाम लिया होता |
    देखो सदाबहार के वनो को |
    हर पेड़ लंबा होता है |
    आसमान की ऊंचाइयों को
    छु रहा होता है |
    मगर कोई किसी को दबाता नाही |
    खींचकर पैर जमीन गिराता नहीं |
    आगे निकलने की होड़ लगाते है |
    होड़ होड़ मे सारा जंगल
    सदाबहार बन जाता है |
    एक दूसरे को साथ लिए
    सबसे लंबा और ऊंचा हो जाता है |
    हम तो इंसान है पेड़ नहीं |
    एक दो पेड़ नहीं
    सारी दुनिया को संग लेकर
    ऊंचाइयों को छू लेंगे |
    एक दूसरे के कंधे से कंधे मिलाकर |
    बिना किसी को सताये
    बिना किसी को रुलाये |
    हमे सदा संग चलना है |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा |

    हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा |
    चम चम माथे चमके चन्दा बहे जटा बीच गंगा धारा |
    शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

    मृग की छाला पहन के भोला ध्यान लगाए |
    शमशान भस्म लगाके महाकाल कहलाए |
    भांग धतूरा खा के भोला,करते है सदा गुजारा |
    शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

    महल अटारी छोड़ के शिव कैलाश धुनि रमाए |
    भूत बैताल के संग मे ताता थइया नाच नचाए |
    तीनों लोक के स्वामी भोला ,कर दो उद्धार हमारा |
    शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

    जटा जुट के धारी बाबा तुम हो डमरू धारी |
    लटके गले भुजंगा कर शोभे त्रिशूल धारी |
    दुखियो के दुख सारे ,करते तुम न्यारा वारा |
    शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

    पार्वती संग बिराजे गणेश कार्तिक गोद मे साजे |
    बसहा नंदी शिव सवारी पूजे सब देव त्रिपुरारी |
    डगमग डोले नैया लगा दो ,शिव अब किनारा |
    शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी सावन शिव भजन 19 – दरबार रे ननदी |

    भोजपुरी सावन शिव भजन 19 – दरबार रे ननदी |
    जोहत रहली हम सावन के फुहार रे ननदी |
    चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
    अबले ना अइले सइया लोक डाउन लगी गईल |
    अबकी सवनवा देवघर मेला बंद हो गईल |
    कइसे होइहे सभकर बेड़ापार ये ननदी |
    चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
    भोला हउवे दानी उनकर आसरा बा लागल |
    बाबा दरसनवा खातिर मनवा भईले पागल |
    हहरेला हिया हमरो करी भोला के गुहार रे ननदी |
    चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
    सास ससुर संगे शिव के हम मनाइब |
    घरवा मे पूजा करब बेलपत्तवा हम चढ़ाइब |
    बोल बम बोली बोली करब हम मनुहार रे ननदी |
    चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
    महिमा होई बोला बाबा कोरोना भागी जाई |
    हमरे भारत देशवा सबकर भाग जागी जाई |
    बहरे से सइया करे भोला जय जय कार रे ननदी |
    चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • गजल- असर दिखाने के बाद |

    गजल- असर दिखाने के बाद |
    समझा क्या खोया पाया तुझसे बिछड़ जाने के बाद |
    लूट गया सब कुछ मेरा एक तेरे गुजर जाने के बाद |
    दिया जवाब मुक्कम्मल दुशमनों घुस आए सीमा पर |
    शेरे हिन्द है जवान सबक मिला कहर खाने के बाद |
    जिंदगी भी कोई चीज है बचाना जरूरी सबको बहुत |
    ढाता कहर कोरोना लोगो शहर अंदर आने के बाद |
    चला रहा बंदूक रख कंधे नेपाल पाक के चीन भारत |
    आयेगा जलजला तुझपर जमाने समर जाने के बाद |
    लाख समझाओ कोई संभलता नहीं बेफिक्र कोरोना से|
    बीमार आम और खास कोरोना असर दिखाने के बाद |
    कीमत उनकी जिंदगी की भेज रहा जिंहे सीमा पाक तू |
    कब समझेगा कीमत आदमी पूरा निपट जाने के बाद |
    सुन ले ललकार बाहुबली मोदी चीन अपनी छाती पर |
    दहाड़ा राजनाथ ने दुबारा लगा अकड़ ठिकाने के बाद |
    श्रीराम थे अयोध्या के नेपाल कभी प्रभु ठिकाना न था|
    क्यो सबको भरमा रहा मानेगा तू चपट खाने के बाद |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी निर्गुण भजन 3 – सुगनवा जइहे |

    भोजपुरी निर्गुण भजन 3 – सुगनवा जइहे |
    बितली उमरिया मोर कइली ना करमीया थोर |
    पपवा करमिया करे परेशान |
    सुगनवा जइहे लगवा जब भगवान |
    इ तनवा माटी हवे तनको ना विचार बाटे |
    जगवा से मुहवा मोड़ माया इ संसार बाटे |
    काहे पाछे पछतावा नाही मन भरमावा|
    मन निर्गुण ब्रम्ह लगाके होजा तू इंसान |
    सुगनवा जइहे लगवा जब भगवान |
    दया दान कइला नाही रास रंग रहला चाही |
    बात गुरु सुनला नाही मनमानी कइला चाही |
    केहु ना सतावा कबों मनवा अबहिन जवान |
    सस्ता सउदा पटाके बन जा तू धनवान |
    सुगनवा जइहे लगवा जब भगवान |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी निर्गुण भजन 1-धियान करे दा |

    भोजपुरी निर्गुण भजन 1-धियान करे दा |
    सोनवा के बदनवा रामा जनी करा जियनवा रामा |
    मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा |
    रमे रमाए दा ये मोरे रामा |
    ब्रमहवा मे मनवा लगाये दा |
    कोरी चदरिया बितल उमरिया |
    असही ना बीत जाएदा |
    बुद्धि बा नदनवा रामा बहके मोर मनवा रामा |
    तन के सुगना अबहीन रहे दा |
    मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा |
    संगे धियान करे दा |
    गुण अवगुण गिने दा ये मोरे रामा |
    बचल उमरिया तपाये दा |
    सही भइल ना करमवा रामा ,पूछिहे मोर सजनवा रामा |
    पाप पुनवा अबहीन गिने दा |
    मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा |
    संगे धियान करे दा |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी कविता (श्रिंगार रस )- चित चितवत |

    भोजपुरी कविता (श्रिंगार रस )- चित चितवत |
    चंचल रूप चित चितवत निखरत निरखत नैन हारे |
    बिजुरी सम चमकत दमकत हिय प्रिय चैन हमारे ||
    लपकत डोलत झुकत कटी कोमल डोलत कमल डार |
    पाँव रखत पायल छम छम छमकत बोलत हिय हाय ||
    चपल पलक झपकत गिरत उठत बिजुरी गिरि जाय |
    पडत नजर जिस ओर रखी हिय हाथ हाय चिल्लाय ||
    गजरा महकत कजरा दहकत रोम रोम पुलकत जाय |
    अधर धरत मुसकात मन मोहिनी कपोल हरसत हर्षाय ||
    कमर कटिली कारी केस जस नागिन बलखत लहरात |
    चाल चलत हिरनी वन कुलांचत उछलत देह भहरात ||
    राग अलापत कोकिल बोलत गोरी कंठ सुरीली बोलत |
    कांपत अधर रसीले धिरकत टप मिसरी मीठ घोलत ||
    पवन वेग जब आंचर लहरत अवलोकत जीय सिहरत |
    उड़त गिरत नभ डोलत कर कपाल धरी हिय अचरज ||
    नख सीख उतरत स्वर्ग परी सम पिय पिय खोजत |
    प्रेम रस घोलत जोहत कत तुम श्याम मुरली सोहत ||

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • गजल- उजाला हो जाये |

    गजल- उजाला हो जाये |
    कभी हमारे भी घर आइये अंधेरों मे उजाला हो जाये |
    आपके रूप की चाँदनी मे अंधेरों का मुंह काला हो जाये |
    फैला है हर तरफ कोरोना हम आए तो आए कैसे |
    कैसे निकलु बच के कही कोरोना निवाला हो जाये |
    सारे दावे सबके धरे के धरे रह गए वो बढ़ता ही गया |
    ऐसा न हो वो लड़ते रहे और उसका बोलबाला हो जाये |
    बड़ा गुमान था उसको अपनी चाल औ पैंतरा बाजी पर |
    बंद हो गये सारे एप औ धंधा उसका दिवाला हो जाये |
    कहता कुछ और करता कुछ और बड़ा चालाक है वो |
    कब्जा करता गैरो जमीन खुद देश निकाला हो जाये |
    चाल तेरी चलेगी नहीं घिर चुका तू अपने पड़ोसियो से |
    तू आजा अब हिन्द की पनाह भारत रखवाला हो जाये |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर)
    कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड मोब -9955509286

  • भोजपुरी सावन शिव भजन 10 – तोहरे इंतजार मे ना |

    भोजपुरी सावन शिव भजन 10 – तोहरे इंतजार मे ना |
    नईया पड़ गइली भोला मोर मजधार मे |
    बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
    शिव के पूजे नर नारी |
    गावे भजन दुनिया सारी |
    केहु गाँजा भांग चढ़ावे |
    केहु गंगा जलधार मे |
    बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
    तू बाड़ बाबा बैजनाथ |
    तू त हउवा औघडनाथ |
    केहु दुधवा भोग लगावे |
    केहु भिंगे बरखा बहार मे |
    बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
    बिन दरसन हम ना जाइब |
    बाब चरनिया सिरवा नवाइब |
    केहु बेल पत्तर फूल चढ़ावे |
    केहु मनावे मनुहार मे |
    बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /गीतकार / समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • भोजपुरी सावन शिव भजन 9 – गाँजा के चिलमिया |

    भोजपुरी सावन शिव भजन 9 – गाँजा के चिलमिया |
    बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |
    गंजवे ने रूसाइ दीया गौरा जी भवनिया |
    बाबा को भगतो का नसा |
    भगतों का बाबा का नसा |
    तो किसी को देवघर का नसा |
    भगत औरी भोला होखे सावन मे मगनिया |
    बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |
    किसी को विश्वनाथ का नसा |
    किसी को पशुपतिनाथ का नसा |
    तो किसी को हरिहर नाथ का नसा |
    डमरू बजाई नाचे बाब बनिके नचनिया |
    बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |
    किसी को गौरीनाथ का नसा |
    किसी को औघड़नाथ का नसा |
    तो किसी को जटाधारी का नसा|
    गावे लोगवा झूमी भोला बाबा के भजनिया |
    बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /गीतकार / समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया |

    हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया |
    भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
    मन मन रोती है गुस्सा करती है |
    भंगिया पिसती है गणेश जी की अम्मा |
    भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
    भंगिया मै पीऊँगा जल्दी डालो कमंडल मे |
    भंगिया ना पिलाऊँगी देखे देव भूमंडल मे |
    चलो देवघर बाबा धाम मे |
    भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
    बच्चे अभी छोटे है गणेश कार्तिक अच्छे है |
    बच्चो ना बिगाड़ो मन के अभी कच्चे है |
    लो पी लो ठंडी लस्सीया |
    भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
    डमरू डम डम बजाऊँगा बम बम नाचुंगा |
    झम झम सावन बरसेगा बाबा धाम रहूँगा |
    कावरियों बोलो बम बम |
    भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे |

    हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे |
    चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |
    सुल्तानगंज से जल लेकर चढ़ाये बम बम भगवान मे |
    अबकी कावर मे सब दूर दूर चलना है |
    मास्क मुंह मे लगाकर बोल बम कहना है |
    भगाकर रहेंगे बाबा भोला वाइरस को समशान मे |
    चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |
    चलो चलो गोरीया चलो जल्दी देवघर नगरिया |
    बोल बम रटते रटते बनो तुम कावरिया |
    बाब बैजु मार भगायेंगे चिनियों को हिंदुस्तान मे |
    चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |
    हर हर गंगा भोला पहने मृग के छाला बोलबम |
    धुआ उड़ाए गाँजा चिलम पिये भांग के प्याला बोलबम |
    जीवन सफल हो जाएगा बड़ी शक्ति है बाबा के वरदान मे |
    चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • योग गीत – करो निरोग काया |

    21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
    की हार्दिक बधाई
    योग गीत – करो निरोग काया |
    ये योग साधना की है अजीब माया |
    कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
    कपालभाती और प्राणायाम की क्या तारीफ करे |
    कर अनुलोम बियोम सांस अंदर बाहर करे |
    करे मजबूत दिल पेट रोग जड़ से है भगाया |
    कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
    करो सूर्य नमस्कार शुबह हर अंग खिलाये |
    करे सुंदर तनमन मानव मंद मुसकाए |
    लगे बदन जैसे खिली धूप है नहाया है |
    कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
    योग ही ऐसा साधन जब चाहो तब कर लो |
    नए पुराने रोगो जड़ से ही खतम कर लो |
    चलो कर ले सब योग रोग कर लो सफाया |
    कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
    देव ऋषि मुनि नित्य योग किया करते थे |
    बिन दवा उपचार के निरोग रहा करते थे |
    देख योग की महिमा सारे विश्व ने अपनाया |
    कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • कविता- हमारा अभिमान |

    कविता- हमारा अभिमान |
    नहीं बिकेगा देश मे चीन का सामान |
    रहेगा हमारा समान हमारा अभिमान |
    लेकर धन हमसे हमे आँख दिखाता |
    घुसकर जमाईं हमारी हमे धमकाता |
    बनेगा आत्मनिर्भर हमारा हिनूस्तान |
    दिया धोखा जवानो पर आघात किया|
    तोड़ वर्षो की संधि विश्वासघात किया|
    निहत्थे जवानो से किया घमासान |
    अपने पड़ोसी हर देश रिस्ता बिगाड़ा है |
    मौका पा गैरो जमी चीनी झण्डा गाड़ा है |
    धूल चटाएँगे चिनियों हिन्द के जवान |
    करो बहिस्कार सब चीनी सामानो का |
    फेर दो पानी सब दुश्मन अरमानो का |
    जाये न जाया जवानो का बलिदान |
    जल जमीन आकाश भारत पाँव पसारा |
    बीर जवानो बज रहा जग खूब नगाड़ा |
    नहीं भूलेगे धोखा तेरा चीन बेईमान |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • भोजपुरी कविता – तड़पत रही हम दिनरात |

    भोजपुरी कविता – तड़पत रही हम दिनरात |
    रिमझिम बरसत बा बरसात |
    तड़पत रही हम दिनरात |
    पिया बिना बुनीया ना सुहात |
    तड़पत रही हम दिनरात |
    गरजत बरसत अईले असढ़वा |
    लहकत दहकत हमरो जियवरवा |
    कही हम केकेरा से दिलवा के बात |
    तड़पत रही हम दिनरात |
    चमके बिजुरिया गगनवा मे |
    अगिया लगे हमरे तनवा मे |
    पिया परदेशी हाली घरवों ना आत |
    तड़पत रही हम दिनरात |
    झमझम अंगना बरसेला पानी |
    टपटप चुएला टूटल दलानी |
    निर्मोही बलम दरदियो ना बुझात |
    तड़पत रही हम दिनरात |
    मखमल के सेजिया मे कंटवा गड़ेला |
    बरिस बरिस के पोसल देहीया गलेला |
    भिंगल भुईया मोर पउया बिछलात |
    तड़पत रही हम दिनरात |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

  • कविता- जितना जरूरी है |

    कविता- जितना जरूरी है |
    हो रहा युद्ध कोरोना से हमारा जितना जरुरी है |
    इंसानियत के दुश्मन वाइरस का मिटना जरूरी है |
    सबका साथ सबका विश्वास अब जिताएगा हमे |
    नियम लॉक डाउन चलना कोरोना सिखाएगा हमे |
    लेगा सांस अंतिम कोरोना लास खींचना जरूरी है |
    कोरोना युद्ध खत्म भी न हुआ चीन सीमा चढ़ा |
    हमारी जमीन नाम अपने बही खाते करने लगा |
    दगाबाज दुशमन चीन छाती चढ़ पीटना जरूरी है |
    समझा भारत को बच्चा गच्चा खा रहा है चीन |
    औरो की तरह भारत को भी धमका रहा है चीन |
    धुर्त्त मक्कार दादागिरी जमीन घसीटना जरूरी है |
    शहीद हुये जवान हमारे जमीन जवान चीन गिरा |
    सत सत नमन शहीदो चोट दुगुनी खूब चीन दिया|
    चुरकर अंहकार छवि चीन दुनिया गिरना जरूरी है |
    सह पाकर नेपाल चीन की भूल भारी कर रहा है |
    रोटी बेटी का रिश्ता हमारा अब गद्दारी कर रहा है |
    नेपाल भारत अटूट रिश्ते का अब बचना जरूरी है |
    दुशमन पाक दाल अब गल नहीं रही चाल बिफल |
    आतंक आका के पीट रहे सब मोहरे है कर्म कुफ़ल |
    मारकर रोज इनके आतंकी पैरो मसलना जरूरी है |

    श्याम कुँवर भारती (राजभर )
    कवि/लेखक /समाजसेवी
    बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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