मुक्तक

पता

जलाकर रख दिए ख़त मगर यादों को अग्नि दगा दे गई, मुट्ठी में दबाकर रखी थी मगर खुशबू को हवा उड़ा ले गई, बेबाक यूँही नशे में गुज़र रही थी लडखड़ाती हुई ज़िन्दगी, आई एक रात फिरजो ख्वाबों में मुझे तुम्हारा पता दे गई।। राही अंजाना »

हौसले

हाथ की आड़ी टेड़ी लकीरें क्या खाख बताएगी तकदीरे उड़ जा होंसलों के आसमान में क्या बिगड़ लेंगी जर्ज़र समाज की जंजीरे 🌋🗽♨️✈️🚀⏳️ »

मुक्तक

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव महेश गुप्ता जौनपुरी »

मुक्तक

मेरे गलती पर साहब भौं भौं करके दौड़ लगाते, कानुनी नियम का पाठ पढ़ाकर पैसा जनता से खुब ऐंठते, ये कैसा कानून व्यवस्था है हमको भी बतलाओ यारों, नेता गिरी है या दादागिरी कोई तो जनता को बतलाओ, महेश गुप्ता जौनपुरी »

Rana prtap

Rana prtap

वह राणा अपना कहाँ गया , जो रण में हुंकारें भरता था। वह महा प्रतापी कहाँ गया, जिससे काल युद्ध में डरता था । जिसके चेतक को देख – देख , मृगराज दंडवत करता था। वह वीर प्रतापी कहाँ गया , जिसके भाले को देख देख , खड्ग निज तेज खण्डवत करता था। वह विकराल वज्र मय कहाँ गया , जिससे अकबर समरांगण में डरता था। »

खुद्दार

लोगो की नफरतो के आगे, खुद्दार कभी झुकता नहीं| अडचन चाहे कितनी भी आये, चलते चलते वो रुकता नहीं| महफिलों की रौनको से, फर्क उसे पड़ता नहीं| संघर्ष की मशाल लिए वो, भागता हुआ थकता नहीं| दिखावे के सुन्दर तालाब मे, कमल कभी खिलता नहीं| कीचड मे सना कमल का जीवन, स्वच्छ जल की चाह रखता नहीं| खुदार बनो, जीवन को कर्म की तरफ मोड़ दो मेहनत कर के कमा लो, भीख, भिखारी के लिए छोड़ दो | »

राजनीति

राजनीति

सह आंखो से देखे तो पड़ जाता है पाला कोई हाथों से छीनकर खा जाता निवाला क्या होगा यहां उन मासूम पंख परिंदो का आज कल बस्तियो में खूब होता है घोटाला »

मुक्तक

मुक्तक

छप्पन भोग लगा कर बेटा आज नदी के पास बैठा है पिण्ड बनाकर मेवे का ढोंग देखो रचा कर बैठा है जो मर गये एक निवाले के लिए घुट-घुट कर चार दिवारी में क्या क्या ना सुना बुढ़ापे में बाप ने बुढ़ापे की लाचारी में »

पानी

सुनो आज तुम्हे सुनाऊ पानी की कहानी कीमती है पानी कहती थी मेरी नानी | कभी अमृत जैसा मीठा था मेरे गांव का ये पानी अब विषैला होता जा रहा हर घट- घट का पानी | बचपन मे पानी पिया अब विष पीते पीते आ गई जवानी बुढ़ापा शायद ना आये जहरीला हो रहा अब देश का भी पानी | गली गली मे बर्बाद हो रहा नालियों मे बह गया स्वच्छ पानी आज बचाओ मेरे भाई कभी अंतिम समय ना गंगाजल मिले और ना मिले ये ~~~~~~पानी ~~~~~~~~~~~~ – ... »

मुक्तक

ख़्वाब टूटते हैं मग़र यादें रह जातीं हैं। चाहतों की दिल में फ़रियादें रह जातीं हैं। देख़तीं रहतीं हैं आँखें राहें मंज़िल की- वस्ल की भटकी हुई मुरादें रह जातीं हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय »

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