नेता जी के चाल चलन को देख, जनता हुयी सर से पांव तक परेशान। काली करतूतों का देख नेता जी का, नीम हकीम खतरे में जान यहीं है पहचान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नेता जी के चाल चलन को देख, जनता हुयी सर से पांव तक परेशान। काली करतूतों का देख नेता जी का, नीम हकीम खतरे में जान यहीं है पहचान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नियती और नियती से चलता यह संसार, आकाश पाताल भूमण्डल है एक विचार। जीव जन्तु जगत विज्ञान आधार बनें भगवान, दया धर्म अधिकार से बदलता ये संसार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना के प्रकोप में सब अंधेरे नगरी हो गया, टका शेर बाजी का भाव भी तेज हो गया। दिन के उजाले में अंधेर नगरी का हुजूम दिखा, बादशाह योध्दा और याजा में भी डर समां […]
जो बादल गरजे सो बरसे नहीं, विष का प्याला पीकर तरसे नहीं। जीवन में बहुत कुछ आता जाता रहेगा, अनुभव को अपने ब्यर्थ समझे नहीं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अंधेर नगरी को उजाला करने आये हैं, दीप जलाकर अंधेरा मिटाने आये हैं। एक दीप जलाकर आओ मेरे साथ मित्र, अंधेर नगरी को स्वर्ग की नगरी बनाने आये हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
गरज गरज कर आंखें दिखलाते, बरसने की बस तुम बातें करते। प्यार मोहब्बत से समस्या हल करके, अपने सारे दुःख दर्द पीड़ा को कहते।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
डर भय तो एक बहाना है, उछल कूद करना इनका मकसद। कोरोना का जंजाल है आया, बचकर रहना कोरोना के जिद से।। महेश गुप्ता जौनपुरी
हौसला सुबह शाम बढ़ा रहे है, कोरोना को हम सब भगा रहे हैं। करके जागरूक लोगों को दोस्त, अपने पराये को जागरूकता सीखा रहे हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
शादी विवाह गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं, सत्य झूठ का इस संसार में कोई मेल नहीं। जीवन साथी सोच समझ कर चुनना साथी, यह जीवन बहुत अनमोल है दुबारा मिलेगा नहीं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
आप भले तो जग भला का, आलाप रटते सुबह और शाम। बड़ी बड़ी करके बातें ज्ञानचंद, बैठ कर ठेके पर पीते जाम।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहते पानी में हाथ मलने वाले बहुत हैं, सेखी बघार कर इठलाने वाले बहुत हैं। टांग बझाकर खिंचना फितरत है इनका, बच कर रहना संसार में दोमुंहे सांप बहुत हैं।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
इंसान में टसन की अग्नि बहुत है, बढ़ते कदम को रोकने की जहोजहत बहुत हैं। किसी का घर जले तो तापने वाले बहुत हैं, सुखी परिवार को देख कर जलने वाले बहुत हैं।। ✍महेश गुप्ता […]
जिसकी कामयाबी का चर्चा चारों ओर हो गया वह जाने क्यों अब खामोश हो गया जाने कैसा सितम ढाया होगा इस जिंदगी ने उस पर जो महफिलों का सितारा था वह सितारों में खो गया
इन कलाकारों की दुनिया में जाने कितने ही दुख होते हैं मुस्कान मुखौटा पहन लिया अब भीतर- भीतर रोते हैं
जब कमी हो जाती है अपनों से साथ निभाने में तब दुख के दलदल में डूबे तो मौत ही साथ निभाती है
ए खुदा तू ने जो उन्हें, खुबसुरती से बनाई। लूट गयी कई शायरों की, खुद की खुदाई।।
हम तो लूट गए ” फिराक ” इश्क़ के बाजार में। मरज़ीना जब जीना दुशवार किया कायनात में।।
कहीं दिल पे नश्तर , तो कहीं नश्तर पे दिल। ज़माना खराब है ग़ालिब जरा संभल के मिल।।
कुदरत के जहां में ए दोस्त, भ्रष्टाचारो के कमी नहीं। लोभ हवस में डूबा, किसी को किसी से वास्ता नहीं।। रिश्ते मे आयी खट्टास कैसे हो गए है आज के इंसान। पराए घर में आग […]
कोरोना बीमारी के लगातार बढने के बावजूद किसी भी तरह की कोई सावधानी लेने से लोग परहेज कर रहे हैंं यह ऐसा समय है जब सबको अपने और अपने परिवार का ख्याल रखना चाहिये और […]
ये तो साबित हो गया कि, तूने ख़ुदकुशी कि कोशिश की है। पर लगता है शायद किसी ने, तेरे क़त्ल की साज़िश की है। कामयाब तू हो गया और वो भी, जिसने इसकी ख़्वाहिश की […]
मत जलाओ अपनी जिंदगी ये दोस्त, प्यार मोहब्बत में पड़कर मेरे दोस्त। अपने हुनर को परख कुछ पेड़ रोप दो, छांव फल देकर शीतल तुम्हें करेगा दोस्त।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
महादानी कर्ण ने दान किया कवच और कुण्डल, बाधाओं से लड़कर हार कभी ना माने। सूर्य का उपासना करके अटल रहे वचन पर, दिव्य शक्ति देकर इन्द्र को महादानी कर्ण कहलाये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नौ की लकड़ी नब्बे खर्च हुआ इस लाकडाउन में, कोरोना के प्रहार से फिसल गये महामारी में। पेट के लिए भाग दौड़ लगाते जान पर बाजी लगा, टेट को भरकर रखने वाले कंगाल हुए महामारी […]
दो गज के फंदे से खुदको क्यों मार गए इस बेरहम दुनिया ने अब क्या किया जो खुद से ही हार गए चंद शब्द कहता हूँ RIP सुशांत सिंह राजपूत के लिए 🙏🙏
लोभी दुनियां में जी गई मैं, विष का प्याला पी गई मैं ना मीरा हूं ना नीलकंठ, फिर भी सब झेल गई मानों प्राणों पर खेल गई, हुई भावहीन,हुई उदासीन कंचन सी निखर गई, टूटे […]
सिक्के इकट्ठा करके कोई धनवान नहीं होता। एक हीरा हीं काफी है जहाने अमीरी के लिए।।
कुछआम ऐसे होते हैं जो खाए नहीं जाते। जब खास के साथ हो तो सताए नहीं जाते।।
गिरेबां अपनी जब भी झांकता मैं। हर बार पाता, कहाँ तू और कहाँ मैं। आईना मैं भी देखता हूँ, वाकिफ़ हूँ, और भी बेहतर हैं ‘देव’ तुझसे जहाँ में। देवेश साखरे ‘देव’
मौके और मिलेंगे घुमने के फिर बेहद। गर आज ना लाँघे अपने घरों की हद। शिकायत थी, परिवार के लिए वक्त नहीं, समय बिताने का अवसर मिला सुखद। देवेश साखरे ‘देव’
वो इंसान अपने हर काम में फंसता है जो दुसरो के दुःख पे हँसता है !
मुहब्बत के नश्तर मिटाने वाले, तुझे क्या पता है चाहत ए आलम। तू ने कभी मुहब्बत 💘की ही नहीं, तू क्या समझे मेरे दर्द ए आलम।।
फ़रेबी से पूछो फ़रेब के सुत्र। बहुत दिव्य है ए मूल मंत्र।।
कहते है इश्क़-ए-लत, बहुत बुरी बला है। फिर भी लोग,अपने को कहाँ सँभाला है।।
भूतकाल के डर को वर्तमान में ख़तम कर भविष्य आगे भड़ाना है तुझे कुछ कर दिखाना है तुझे कुछ कर दिखाना है दुनिया के जाल से निकलकर तुझे अपना मान बढ़ाना है तुझे कुछ कर […]
कविता – बरखा तुम आओ मिटे जलन तपन गर्मी बरस तुम जाओ | मनाए हम उत्सव तेरा बरखा तुम आओ | तप रहे खेत ताल नदी पोखर तुम कहा | फटी जमीन प्यासे सब पशु […]
अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रमिकों के नाम प्रस्तुत मेरी एक बाल गीत बाल गीत – मजदूरी ना कराना | लगा लॉक डाउन बाल मजदूरी ना कराना | भूखे बच्चो भोजन […]
बाहुबल से सबल रहे, फिर क्यों विफल रहे। केश पकड़ घसीटा गया, भरी सभा मुझे लुटा गया। दुःशासन का दुस्साहस तुम देखते रहे, दुर्योधन का अट्टहास कर्ण भेदते रहे। वरिष्ठ सभासद मूक दर्शक बने रहे, […]
ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है तेरे लिए किया क्या है तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए तेरे लिए मैंने सिया किया है ना रखा तुझे खुश ना रखा ऐशो आराम […]
किसी पत्थर की मूरत में, लगी सूरत खुदा की सी उसे पूजा उसे माना, उसे अपना खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमसे, आंखों से आंसू निकल पड़े, व्यर्थ गई सब साधना निरा पत्थर का […]
तुम्हारी जुल्फों की कैद मिले तो हर गुनाह कर जाऊं । कत्ल करूं कातिल बनूं फिर तेरे पहलू में आऊं। वीरेंद्र
कोई किसी के सुख में सुखी ना होये ना होये किसी के दुःख में दुखी बदल रहे नकाब बस कुछ मतलबी
धधक रहा है मुल्क, और कुछ आग मेरे सीने में। वफ़ादारी खून में नहीं तो फिर क्या रखा जीने में। वतन परस्ति से बढ़कर, और कोई इबादत नहीं, वतन परस्ति का सुकून, न काशी में […]
कविता- इंसान मे जानवर हाथी एक जानवर मगर इंसान की इंसानियत ढोता रहा | थके मांदे एक शेर के बच्चे को अपनी सुंढ मे ढोता रहा | इंसान कहने को आदमी मगर जानवर से बदतर […]
अबला थी जो नारी अब तक सबला बनके दिखलाएगी पुरुष के हाथों की कठपुतली अब दुनिया को चलाएगी । घुट घुट के यह मरती रही मुंह से कभी भी आह न की पुरुष ने अपनी […]
मीठे मीठे सपने संजोने दो होता है जो उसे होने दो कल का पता नहीं क्या होगा बाहों में और थोड़ा सोने दो ।……….. जागी है अखियां हम सो गए हैं यादों में उनके हम […]
जब मैं हुई उदास, तो तेरा मुस्कुराना याद आया जब हुई तुझसे दूर, तो तेरा पास आना याद आया तू नहीं आया, पर तेरी याद चली आई तेरी याद से मिलकर, मुझे मुस्कुराना याद आया […]
गजल- प्यास पानी हो गई | तुझसे बीछड़ दर्द इश्क अब कहानी हो गई | आँख से उमड़ा समंदर प्यास पानी हो गई | छलकता सागर आंखो से सैलाब की तरह | तेरी यादे मेरी […]
गजल- अवकात नही | चाहे जितना ज़ोर लगा ले दुशमन डर हमे कोई खास नहीं | डरा दे भारत कोई अफसोस मगर इतनी भी अवकात नही | लौकी का बतिया नहीं भारत जो अंगुली देख […]
कविता- इंसान मे जानवर हाथी एक जानवर मगर इंसान की इंसानियत ढोता रहा | थके मांदे एक शेर के बच्चे को अपनी सुंढ मे ढोता रहा | इंसान कहने को आदमी मगर जानवर से बदतर […]
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