तीन मित्र थे अपने वफादारी के परम मिसाल। मरणासन्न होकर मैं तीनों से पूछा एक सवाल।। कौन चलोगे मेरे साथ किसको पास सदा मैं पाऊँगा? बहुत दिया मैं साथ नहीं अब तेरा साथ निभाऊँगा। बोला […]
तीन मित्र थे अपने वफादारी के परम मिसाल। मरणासन्न होकर मैं तीनों से पूछा एक सवाल।। कौन चलोगे मेरे साथ किसको पास सदा मैं पाऊँगा? बहुत दिया मैं साथ नहीं अब तेरा साथ निभाऊँगा। बोला […]
नजर मिला के मेरे हमराज़ वहाँ छोड़ा । देखने आते हैं दो गुलाब जहाँ तालकटोरा।। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, इश्क़ -ए-राहत के दवा लाया जब इन्दौर से। उतरने लगा तब इश्क़ -ए- जुनून मेरे सिर से।।
ये जो लोग मेरी मौत पर आज चर्चा फरमा रहे हैं ऊपर से अफ़सोस जदा हैं पर अन्दर से सिर्फ एक रस्म निभा रहे हैं मैं क्यों मरा कैसे मरा क्या रहा कारन मरने का […]
आज सोंचा जाकर उनसे थोड़ी गुफ्तगू कर लूँ तभी पीछे से उनकी भाभी आ गयीं हाय तौबा!
ना वास्ता किसी से रखते हैं लोग…… फिर जाने क्यूँ जिन्दगीं से खेलते हैं लोग….. हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं क्यूँ तैश में ही अक्सर रहते हैं लोग….. किसी की ज़िंदगी से […]
रात के अंधेरे में मुंह छुपा कर चलने वाले . एक न एक दिन तुम्हें उजाले में आना ही पड़ेगा। अपने किए करनी के हिसाब ए चतुर इन्सान, दुनिया के सामने तुझे रखना ही पड़ेगा […]
जब मै अपना नब्ज दिखाया “मीर ” को। उसने कहा इश्क़ -ए -बुखार है आपको।।
गलतफहमियों के बीज अविश्वास से पनपते हैं अधसुनी बातों को लोग पूरा सच समझते हैं बड़े तो हो चले हैं हम अपनी नजरों में प्रज्ञा ! ना जाने लोग क्यों मुझे अभी छोटा ही समझते […]
बेकद्रों की महफ़िल मे कद्रदान ढूंढ रहा हूँ अनजान लोगो मे अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ अंधेरा करने वालों से रौशनी की मांग कर रहा हूँ काली हुई रात मे रोशन जहान ढूढ रहा हूँ […]
आदाब मुफ़लिसों को क्यों मिली है जिंदगी बारहा ये सोचती है जिंदगी ज़िंदगी जैसे मिली ख़ैरात में ऐसे उनको देखती है जिंदगी इस जहाँ में बुज़दिलों के वास्ते बस क़ज़ा है, तीरगी है ज़िन्दगी ख़ुदकुशी […]
ग़ज़ल दौलत नहीं, ये अपना संसार माँगती हैं ये बेटियाँ तो हमसे, बस प्यार माँगती हैं दरबार में ख़ुदा के जब भी की हैं दुआएँ, माँ बाप की ही खुशियाँ हर बार माँगती हैं माँ […]
कानून के रक्षक भी अब भक्षक हो गए , करें भरोसा आखिर किस पर? खाकी वर्दी भी गुलाम बन हुक्म बजाती सफेदपोश की। काले कोट के जेब बड़े हो गए, करें भरोसा आखिर किस पर? […]
मानवता का वास है या फिर दानवता का त्रास है। दुनिया के हर बसर को देखा मतलबपरस्ती हीं अब खास है।।
चौसर खेलने वाले भी जग में पूजे जाते हैं राज़-काज,अनुज,पत्नी और प्रजा सर्वस्व दांव पर रखकर भी एक भी बाजी ना जीते सर्वस्व हार ही जाते हैं समय की विडम्बना देखो ऐसे लोग भी धर्मराज […]
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है, अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला है गुलिस्तां महकता था कभी जिनकी किलकारियों से, खुश्बू बिखरती थी कभी बागीचे की फुलवारियों से […]
आसमां तो है सबका मगर मुझे हकीकत की जमी पर रहने का जुनून है
नाकाम मोहब्बत की निशानी ताज महल ज़रूरी है जो लोगो को ये बतलाये के मोहब्बत का कीमती होना नहीं बल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी है दे कर संगमरमर की कब्रगाह कोई दुनिया को ये […]
जिसे सर झुकाने की आदत नहीं है उसे हर बशर से मोहब्बत नहीं है दुःखा दिल किसी का ख़ुशी मैं मनाऊँ मेरे दिल की ऐसी तो फ़ितरत नहीं है वो अपने किए पर पशेमां बहुत […]
कागज का टुकड़ा बना पतंग उड़ना चाहे नील गगन में। हम पंछी का जीवन क्योंकर डाल रहे हो पिंजर बन्ध में।। पतंड उड़ाने के शौकीनों मुझको भी तो उड़ने दो। मेरे भी हैं कुछ अरमान […]
✋बुलाती है मगर जाने का नही ✋👋 सब कहते है, बुलाती मगर जाने का नही । दिल के मरीजों को ऐसे रूलाने का नही ॥ ये याद ये तड़प ये दर्द सब ले अपने साथ […]
उनकी बगिया की बहार देखती ही रह गई कली जो खिली थी धूप की तपन में मुरझा गई …… अंजुमन में कितने मशरूफ थे तेरी स्मृतियों के अवशेष बातें बहुत-सी हुईं रह गए बस वचन […]
बिछड़ने से जरा पहले तुम्हें कुछ याद है हमदम तुम आये थे मुझसे मिलने बिछड़ने के इरादे से
सिले हैं होंठ मेरे उसूलों के धागों से पर क्या करूँ मेरे उसूल ही मेरे जीने का बहाना हैं…..
हाँथ फैलाकर मैने कभी कुछ भी नहीं माँगा पर तुझे पाने की चाहत कयामत तक रहेगी
हाँथ फैलाकर खुदा से कुछ भी नहीं माँगा मैने आज तक मगर ए हमदम! तुझे पाने की चाहत कायनात तक रहेगी
हिन्दी गीत – साथ लड़ेंगे | हम साथ रहेंगे साथ लड़ेंगे | कोरोना से ना हम डरेंगे | साथ जिएंगे साथ मरेंगे | कोरोना से ना हम डरेंगे | छाया विश्व जगत मे अंधेरा | […]
प्रेम, जिसमें मैं ही मैं हो हम न हो डूब गए हो इतने के उबरने का साहस न हो वो प्रेम नहीं एक आदत है उसकी जो एक दिन छूट जाएगी फिर से जीने की […]
चमक रहा चांद पूनम का जगमग आज आंगन है। प्रफुल्लित हर कण वसुधा का सुहानी रात साजन है।। हृदय के कुंज में प्रीतम सजाया सेज फूलों का। नयन पथ से उतर आओ नहीं है आतंक […]
मन करता है… कि जी लूं कभी अपने हिस्से का जीवन कुछ न सोचूं न ही कुछ समझूँ। बन यायावर … देखूँ सब कुछ चहुँ दिशाओं मे कुछ न माँगू न ही कुछ जानूं। मन […]
लॉक डाउन २.० चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस, माननीय प्रधान मंत्री जी की स्पीच । देश के नाम संबोधन, पहुंचा हर जन तक । कई बड़ी और अहम बातें, क्या क्या कहा, हम हैं बताते […]
My introduction :- “अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे इकतालीस वर्षीय हैं व दिल्ली में रहते हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । वे इसी […]
पंछी हूँ उड़ना चाहता हूँ पिंजरे में कैद हूँ इक आज़ाद आसमां चाहता हूँ माना घर में सुरक्षित हूँ पर खुद का बनाया घरौंदा चाहता हूँ जो तुम चाहो वही बोलता हूँ खुद की भी […]
जिसे हम भूल जाते हैं खुदा भी रूठ जाता है चैन उसको नहीं मिलता लोग भी मुँह चिढ़ाते हैं
मेरा प्रेम तुम्हारी स्मृतियों से अतृप्त है अभी कुछ और समेटना है मुझे सफ़र के लिए
ए काश !मेरा प्यार भी कोरोना जैसा होता हम उन्हें छू लेते और उन्हें भी हो जाता
दूर जाने का उन्हें एक और बहाना मिल गया है कोरोना वायरस अब मेरी मोहब्बत पर भारी हो चला है
ना तुम कुछ कहो ना हम कुछ सुनें बस खामोशियों को खमोशियों से बात करने दो
ये सन्नाटा चुभता है मेरे दिल को तुम्हारा बोलते रहना ही अच्छा लगता है
वो भी दिन थे _________ क्या पल छिन थे जब तुम मेरे हुआ _____________करते थे गीत गुनगुनाते थे प्रेम के लफ्ज़ हुआ करते थे ——‐————- रिमझिम बारिश की फुहार में भीगते थे बदन ——————— होंठो […]
कभी मायूस होती हूँ कभी बेचैन होती हूँ मगर तेरी मोहब्बत में डूबी दिन-रैन होती हूँ, कभी बातें कभी यादें कभी तन्हाई में तुझको भुलाकर सब ओ मेरी जान सिर्फ तुझमें ही खोती हूँ । […]
किसी को प्यार किसी को प्यार की निशानियां रुला गईं हम मजबूर थे हमें हमारी वफादारियां रुला गईं।
रह जाती हैं स्कूल की सहेलियाँ स्कूल तक, कॉलेज की सहेलियाँ कॉलेज तक और पड़ोस की सहेलियाँ मायके तक बहुत ही मुश्किल है सहेलियों का साथ रहना दादी नानी बनने तक
कुछ अल्फाज बचा रखे थे उनके लिए वह आए और बिना बोले चले गए। कुछ नजरें बचा रखी थी उनके लिए वह आए और बिना देखे चले गए। कुछ गीत सजा रखे थे उनके लिए […]
अपनी इस लड़ाई से चाहे खुद लड़ना पड़ जाए अपनी ही परछाई से जब बात प्रतिष्ठा की हो तो हर व्यक्ति का अपना ओहदा है यह बात है आत्म सम्मान की ना हार जीत का […]
मेरे बच्चे साथ निभाओगे गर गुस्सा हो जाऊं किसी बात पर आकर मुझे मनाओगे ? इन सिकुड़न वाले हाथों को क्या प्यार से तुम सहलाओगे? बूढ़ा हूं कुछ , सुनने की शक्ति भी क्षीण हुई […]
ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठी सबने कहा , क्या मिलेगा मुझे उस योगी के संग जिसका कोई आवास नहीं वो फिरता रहता है बंजारों सा जिसका कोई एक स्थान नहीं […]
कभी कभी सोचती हूँ अगर इस पल मेरी साँसें थम जाये और इश्वर मुझसे ये कहने आये मांगो जो माँगना हो कोई एक अधूरी इच्छा जो अभी इस पल पूरी हो जाये मैं सोच में […]
आज पिघली-पिघली है देखो पथ्थर की दीवार बन्धु,सखा,माँ-बाप सभी छूट रहे हैं विडम्बना देखो समय की कुछ बिछड़ रहे तो कुछ रिश्ते जुड़ रहे हैं जिस आँगन में खेली- कूदी वही छोड़ कर जाती है […]
गजल -जीत लेंगे कोरोना | जीत लेंगे कोरोना तेरा नाम मिटा देंगे | मुरझाए चेहरों पर मुस्कान खिला देंगे | पहले न जान पाये अब जान चुके तुझे | तू पहचान हमे तुझको पानी पीला […]
कविता -सुरक्षित वही है होता | कोरोना देखे ना जात जान सभी लेता | रहता ज़ो घर मे सुरक्षित वही है होता | पहने न मुख बाहर मास्क खतरा बहुत | बचके रहना सभी आदमी […]
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