दिल फरेबी का आलम कुछ इस कदर छाया, दिल देकर भी दिलदार गद्दार नजर आया।
दिल फरेबी का आलम कुछ इस कदर छाया, दिल देकर भी दिलदार गद्दार नजर आया।
जीवन में एक वक्त ऐसा भी आता है जब रिश्ते भी टूट जाते हैं और फ़रिश्ते भी काम नहीं आते
इन तीखी नजरो से देखा ना करो दिल बहक जाएगा उम्र तो अठारह के पार है जवानी में फिसल जाएगा फिर न कहना ये तुमने क्या कर दिया दिल के बहक जाने में हूइ खता […]
चलो हम भी बनाए एक ताजमहल दिल के आगरा में। शाहजहाँ जैसे बनाउंगा एक महल दीवानो के कब्र में ।।
मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों […]
राह में रोडे़ है ए नारी तुझे चलना ही होगा। दुःख सहने वाली ए देवी तुझे जीना ही होगा।। माना कि, पुरूष के हाथों तू हमेशा छलती आई। फिर भी हर हाल में तुझे मुकाबला […]
विलख रही धरती आसमान भी रो रहा। देख के अनाचार को भगवान भी सो रहा।।
कोरोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]
करोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]
औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है…. औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें…. औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है… तपती […]
औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है तपती […]
कभी इन राहों पर भी आया करो… क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कोई तकलीफ नहीं है हमको उजालों से बस ज़िन्दगी के अँधेरे से डर लगता है रोज़ ही रूठना रहता था तुम्हारा भी बिछड़ने में गम ना होगा चलो अच्छा है तुम भी कहां रहे हो […]
नकाब चेहरे पर लिपटा है शोख लगता है…. ये उतर जाता तो बा-खुदा क्या आलम होता….
मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँ तरसे और बरसे इन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँ मेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर […]
क्यूँ मुझसे नज़रे चुराते हो क्यूँ अपना प्यार छुपाते हो नींद नहीं आती तो फिर क्यूँ मेरे ख्व़ाब सजाते हो
कहाँ खो गई तेरी इन्सानियत ओ इन्सान कहलाने वाले। गन्दी हो गई क्योंकर नीयत ओ इन्सान कहलाने वाले।। हर सुख सुविधा भोजन पानी सुलभ तुम्हारे घर में है। फिर काहे का झगड़ा भैया बोले आज […]
वो बैठते हैं आजकल मेरे रकीबों के साथ जिनके हाथों में रहता था मेरा हाँथ बुरा नहीं लगता है मुझे पर अच्छा भी नहीं प्रतीत होता है क्या करूँ दिल दिल ही दिल में रोता […]
उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए। जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।। वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था । […]
एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई जब न मंदिरों में घंटे बजे न मस्जिदों में चहल कदमी हुई बाँध रखा था हमने जिनको अपने सोच की चार दीवारों में अब समझा तो […]
तीन मित्र थे अपने वफादारी के परम मिसाल। मरणासन्न होकर मैं तीनों से पूछा एक सवाल।। कौन चलोगे मेरे साथ किसको पास सदा मैं पाऊँगा? बहुत दिया मैं साथ नहीं अब तेरा साथ निभाऊँगा। बोला […]
नजर मिला के मेरे हमराज़ वहाँ छोड़ा । देखने आते हैं दो गुलाब जहाँ तालकटोरा।। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, इश्क़ -ए-राहत के दवा लाया जब इन्दौर से। उतरने लगा तब इश्क़ -ए- जुनून मेरे सिर से।।
ये जो लोग मेरी मौत पर आज चर्चा फरमा रहे हैं ऊपर से अफ़सोस जदा हैं पर अन्दर से सिर्फ एक रस्म निभा रहे हैं मैं क्यों मरा कैसे मरा क्या रहा कारन मरने का […]
आज सोंचा जाकर उनसे थोड़ी गुफ्तगू कर लूँ तभी पीछे से उनकी भाभी आ गयीं हाय तौबा!
ना वास्ता किसी से रखते हैं लोग…… फिर जाने क्यूँ जिन्दगीं से खेलते हैं लोग….. हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं क्यूँ तैश में ही अक्सर रहते हैं लोग….. किसी की ज़िंदगी से […]
रात के अंधेरे में मुंह छुपा कर चलने वाले . एक न एक दिन तुम्हें उजाले में आना ही पड़ेगा। अपने किए करनी के हिसाब ए चतुर इन्सान, दुनिया के सामने तुझे रखना ही पड़ेगा […]
जब मै अपना नब्ज दिखाया “मीर ” को। उसने कहा इश्क़ -ए -बुखार है आपको।।
गलतफहमियों के बीज अविश्वास से पनपते हैं अधसुनी बातों को लोग पूरा सच समझते हैं बड़े तो हो चले हैं हम अपनी नजरों में प्रज्ञा ! ना जाने लोग क्यों मुझे अभी छोटा ही समझते […]
बेकद्रों की महफ़िल मे कद्रदान ढूंढ रहा हूँ अनजान लोगो मे अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ अंधेरा करने वालों से रौशनी की मांग कर रहा हूँ काली हुई रात मे रोशन जहान ढूढ रहा हूँ […]
आदाब मुफ़लिसों को क्यों मिली है जिंदगी बारहा ये सोचती है जिंदगी ज़िंदगी जैसे मिली ख़ैरात में ऐसे उनको देखती है जिंदगी इस जहाँ में बुज़दिलों के वास्ते बस क़ज़ा है, तीरगी है ज़िन्दगी ख़ुदकुशी […]
ग़ज़ल दौलत नहीं, ये अपना संसार माँगती हैं ये बेटियाँ तो हमसे, बस प्यार माँगती हैं दरबार में ख़ुदा के जब भी की हैं दुआएँ, माँ बाप की ही खुशियाँ हर बार माँगती हैं माँ […]
कानून के रक्षक भी अब भक्षक हो गए , करें भरोसा आखिर किस पर? खाकी वर्दी भी गुलाम बन हुक्म बजाती सफेदपोश की। काले कोट के जेब बड़े हो गए, करें भरोसा आखिर किस पर? […]
मानवता का वास है या फिर दानवता का त्रास है। दुनिया के हर बसर को देखा मतलबपरस्ती हीं अब खास है।।
चौसर खेलने वाले भी जग में पूजे जाते हैं राज़-काज,अनुज,पत्नी और प्रजा सर्वस्व दांव पर रखकर भी एक भी बाजी ना जीते सर्वस्व हार ही जाते हैं समय की विडम्बना देखो ऐसे लोग भी धर्मराज […]
रिश्तों की डोर मे मजबूरियों का यह क्या सिला है, अपनों के बीच यह कैसा नफ़रत का फूल खिला है गुलिस्तां महकता था कभी जिनकी किलकारियों से, खुश्बू बिखरती थी कभी बागीचे की फुलवारियों से […]
आसमां तो है सबका मगर मुझे हकीकत की जमी पर रहने का जुनून है
नाकाम मोहब्बत की निशानी ताज महल ज़रूरी है जो लोगो को ये बतलाये के मोहब्बत का कीमती होना नहीं बल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी है दे कर संगमरमर की कब्रगाह कोई दुनिया को ये […]
जिसे सर झुकाने की आदत नहीं है उसे हर बशर से मोहब्बत नहीं है दुःखा दिल किसी का ख़ुशी मैं मनाऊँ मेरे दिल की ऐसी तो फ़ितरत नहीं है वो अपने किए पर पशेमां बहुत […]
कागज का टुकड़ा बना पतंग उड़ना चाहे नील गगन में। हम पंछी का जीवन क्योंकर डाल रहे हो पिंजर बन्ध में।। पतंड उड़ाने के शौकीनों मुझको भी तो उड़ने दो। मेरे भी हैं कुछ अरमान […]
✋बुलाती है मगर जाने का नही ✋👋 सब कहते है, बुलाती मगर जाने का नही । दिल के मरीजों को ऐसे रूलाने का नही ॥ ये याद ये तड़प ये दर्द सब ले अपने साथ […]
उनकी बगिया की बहार देखती ही रह गई कली जो खिली थी धूप की तपन में मुरझा गई …… अंजुमन में कितने मशरूफ थे तेरी स्मृतियों के अवशेष बातें बहुत-सी हुईं रह गए बस वचन […]
बिछड़ने से जरा पहले तुम्हें कुछ याद है हमदम तुम आये थे मुझसे मिलने बिछड़ने के इरादे से
सिले हैं होंठ मेरे उसूलों के धागों से पर क्या करूँ मेरे उसूल ही मेरे जीने का बहाना हैं…..
हाँथ फैलाकर मैने कभी कुछ भी नहीं माँगा पर तुझे पाने की चाहत कयामत तक रहेगी
हाँथ फैलाकर खुदा से कुछ भी नहीं माँगा मैने आज तक मगर ए हमदम! तुझे पाने की चाहत कायनात तक रहेगी
हिन्दी गीत – साथ लड़ेंगे | हम साथ रहेंगे साथ लड़ेंगे | कोरोना से ना हम डरेंगे | साथ जिएंगे साथ मरेंगे | कोरोना से ना हम डरेंगे | छाया विश्व जगत मे अंधेरा | […]
प्रेम, जिसमें मैं ही मैं हो हम न हो डूब गए हो इतने के उबरने का साहस न हो वो प्रेम नहीं एक आदत है उसकी जो एक दिन छूट जाएगी फिर से जीने की […]
चमक रहा चांद पूनम का जगमग आज आंगन है। प्रफुल्लित हर कण वसुधा का सुहानी रात साजन है।। हृदय के कुंज में प्रीतम सजाया सेज फूलों का। नयन पथ से उतर आओ नहीं है आतंक […]
मन करता है… कि जी लूं कभी अपने हिस्से का जीवन कुछ न सोचूं न ही कुछ समझूँ। बन यायावर … देखूँ सब कुछ चहुँ दिशाओं मे कुछ न माँगू न ही कुछ जानूं। मन […]
लॉक डाउन २.० चौदह अप्रैल दो हज़ार बीस, माननीय प्रधान मंत्री जी की स्पीच । देश के नाम संबोधन, पहुंचा हर जन तक । कई बड़ी और अहम बातें, क्या क्या कहा, हम हैं बताते […]
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